NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अध्यादेश के जरिये नहीं बनाया जा सकता राम मंदिर
सरकार ने विवादित जमीन को अयोध्या अधिग्रहण अधिनियम 1993 के जरिये अधिग्रहित किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस स्थिति को यथास्थिति (स्टेट्स को) बनाये रखने का आदेश दिया है, जिसे सरकार बदल नहीं सकती।
अजय कुमार
26 Nov 2018
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy: hindustan

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा कानून बनाकर राम मंदिर बनाने का हो-हल्ला मचाया जा रहा है। इस मांग को सैद्धांतिक तौर पर इस तरह खारिज किया जा सकता है कि धर्मनिरपेक्षता को अपने संविधान का मूल ढांचा मानने वाला भारतीय राज्य मंदिर बनाने से जुड़ा कोई कानून नहीं बना सकता, लेकिन सियासत और सियासत कर रहे लोग राम मंदिर बनाने के संबंध में फिर भी ऐसी बात किये जा रहे हैं। आरएसएस और संघ परिवार द्वारा कहा जा रहा है कि अध्यादेश लाकर तुरंत मंदिर बनाया जाए। लेकिन क्या ऐसा किया जा सकता है?

बाबरी मस्जिद के विध्वंस पर राम मंदिर बनाने के लिए अध्यादेश लाया जा सकता है? या इसके पीछे केवल सियासी शोर है जिसका मकसद केवल हिन्दू मुस्लिम ध्रुवीकरण करना है ताकि चुनावी के फायदे की जमीन तैयार की जा सके।

अध्यादेश लाकर कानून बनाने की मांग तब उठती है, जब मौजूदा हालात अधिक बिगड़ चुके हों और संसद का सत्र नहीं चल रहा हो। ऐसा अध्यादेश जारी करने का अधिकार राष्ट्रपति के पास होता है, जिसका इस्तेमाल राष्ट्रपति द्वारा मंत्रिमंडल के सलाह पर ही किया जाता है। लेकिन यहां इस स्थिति में भी अध्यादेश नहीं लाया जा सकता। क्योंकि सरकार ने विवादित जमीन को अयोध्या अधिग्रहण अधिनियम 1993 के जरिये अधिग्रहित कर लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस स्थिति को यथास्थिति (स्टेट्स को) बनाये रखने का आदेश दिया है, जिसे सरकार बदल नहीं सकती।

1993 में सरकार ने अयोध्या अधिग्रहण अधिनियम से अयोध्या विवाद के मुकदमे को ख़त्म कर सुप्रीम कोर्ट से बताने को कहा था कि मंदिर है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने मुकदमे को जिन्दा कर सरकार को कहा था कि आप न्यायिक प्राक्रिया में हस्तक्षेप कर उसे रोक नहीं सकते।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर, 2010 को तथ्यों के आधार पर अयोध्या विवादित जमीन के मालिकाना हक को तीन भागों में बांटा है। इसमें एक भाग रामलला, एक भाग निर्मोही अखाड़ा और तीसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया है।  

यह बंटवारा ऐसा है जिसके जरिये आस्था पूरी करने के लिए मन्दिर तो बनाया जा सकता है लेकिन वह पूरी ज़मीन पर नहीं बल्कि अपने हिस्से पर बनाया जा सकता है। और इससे शायद आरएसएस-बीजेपी की राजनीति पूरी तरह नहीं सधती।  

एक बात संसद में प्राइवेट मेम्बर बिल लाने की भी कही जा रही है। लेकिन अब तक का यह चलन रहा है कि प्राइवेट मेम्बर बिल का सरकार द्वारा हमेशा विरोध किया गया है। फिर भी अगर इस चलन को तोड़कर राम मंदिर बनाने का प्रस्ताव संसद में पारित हो जाता है तो, फिर भी इसके सामने सबसे बड़ी अड़चन वही है – अयोध्या अधिनियम के जरिए कुछ क्षेत्रों का अधिग्रहण-1993 से जुड़ा कानून।

अब स्थिति यह बनती है कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले कोई कानून हाईकोर्ट के फैसले को रद्द नहीं कर सकता। और सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ कर दिया है कि वह सिर्फ ज़मीन के मालिकाना हक पर सुनवाई करेगा। और इसके लिए भी जनवरी 2019 की तारीख तय की गयी है। अगर इसके बावजूद सरकार कोई बिल या अध्यादेश लाती है तो इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे संविधान का सबसे मूल सिद्धांत यह है कि संसद उन मामलों पर तब तक कोई कानून नहीं बना सकती जब तक न्यायालय में वे लंबित हो।

अयोध्या मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी मीडिया से बात करते हुए कहते हैं कि मोहन भागवत तो गैर सरकारी आदमी है। अगर सरकार को अध्यादेश लाना है या कानून बनाना है तो प्रधानमंत्री या कानून मंत्री को बोलना चाहिए। एनडीटीवी को दिए एक बयान में जफरयाब जिलानी कहते हैं कि भागवत जैसे लोग और भाजपा के सहयोगी बयानबाज़ी इसलिए करते हैं क्योंकि मीडिया इसपर डिबेट करता है और मुद्दा गरम होता है। समाज बंटता है और चुनावी फायदा उठाने की कोशिश की जाती है।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील राजीव धवन जो राम मंदिर विवाद से जुड़े ममलों में भी वकील रह चुके हैं, न्यूज़क्लिक के एक कार्यक्रम में कहते हैं ‘भारत में कट्टरता बढ़ने की वजह से अल्पसंख्यकों और कानून के नियमों के खिलाफ बहुसंख्यक नजरिया हावी हो रहा है। संविधान भले ही धर्मनिरपेक्ष हो लेकिन हमारा नागरिक समाज बहुत तेजी से सांप्रदायिक होता जा रहा है। धर्मनिरपेक्ष राज्य को राम मंदिर बनाने के लिए झुकाने की कोशिश करने का मतलब है कि आक्रामक हिन्दुत्वादी नजरिया हावी हो रहा है।’

आम आदमी कानून का जानकार नहीं है और सियासत में ज्यादातर बातें सियासी संदेश देने के लिए होती हैं। ऐसी बातों का यही मकसद है कि अपने कोर वोटर को संभाल कर रखा जाए और कुछ ऐसा करते रहा जाए जिससे हिन्दू मुस्लिम तनाव बना रहे, जिसका फायदा किसी न किसी तरह से वोटों के तौर पर भाजपा को मिलता रहे। आने वाले आम चुनाव तक यह सियासत जारी रहेगी।

Ram Mandir
Ayodhya Case
Supreme Court
AYODHYA ACQUISITION ACT-1993
PARLIAMAENT
BJP-RSS
Mohan Bhagwat

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

राम मंदिर के बाद, मथुरा-काशी पहुँचा राष्ट्रवादी सिलेबस 

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?


बाकी खबरें

  • एसकेएम की केंद्र को चेतावनी : 31 जनवरी तक वादें पूरे नहीं हुए तो 1 फरवरी से ‘मिशन उत्तर प्रदेश’
    मुकुंद झा
    एसकेएम की केंद्र को चेतावनी : 31 जनवरी तक वादें पूरे नहीं हुए तो 1 फरवरी से ‘मिशन उत्तर प्रदेश’
    16 Jan 2022
    संयुक्त किसान मोर्चा के फ़ैसले- 31 जनवरी को देशभर में किसान मनाएंगे "विश्वासघात दिवस"। लखीमपुर खीरी मामले में लगाया जाएगा पक्का मोर्चा। मज़दूर आंदोलन के साथ एकजुटता। 23-24 फरवरी की हड़ताल का समर्थन।
  • cm yogi dalit
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव और दलित: फिर पकाई और खाई जाने लगी सियासी खिचड़ी
    16 Jan 2022
    चुनाव आते ही दलित समुदाय राजनीतिक दलों के लिए अहम हो जाता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। उनके साथ बैठकर खाना खाने की राजनीति भी शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि दलित वोटर अपनी पसंद किसे बनाते हैं…
  • modi
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे : झुकती है सरकार, बस चुनाव आना चाहिए
    16 Jan 2022
    बीते एक-दो सप्ताह में हो सकता है आपसे कुछ ज़रूरी ख़बरें छूट गई हों जो आपको जाननी चाहिए और सिर्फ़ ख़बरें ही नहीं उनका आगा-पीछा भी मतलब ख़बर के भीतर की असल ख़बर। वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन आपको वही बता  …
  • Tribute to Kamal Khan
    असद रिज़वी
    कमाल ख़ान : हमीं सो गए दास्तां कहते कहते
    16 Jan 2022
    पत्रकार कमाल ख़ान का जाना पत्रकारिता के लिए एक बड़ा नुक़सान है। हालांकि वे जाते जाते भी अपनी आंखें दान कर गए हैं, ताकि कोई और उनकी तरह इस दुनिया को देख सके, समझ सके और हो सके तो सलीके से समझा सके।…
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    योगी गोरखपुर में, आजाद-अखिलेश अलगाव और चन्नी-सिद्धू का दुराव
    15 Jan 2022
    मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के अयोध्या से विधानसभा चुनाव लडने की बात पार्टी में पक्की हो गयी थी. लेकिन अब वह गोरखपुर से चुनाव लडेंगे. पार्टी ने राय पलट क्यों दी? दलित नेता चंद्रशेखर आजाद की पार्टी अब…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License