NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अध्ययन : 10 बड़े राज्यों में अनुपयोगी गोवंश के लिए हर साल चाहिए 54 हज़ार करोड़
एक अध्ययन के मुताबिक देश के गौ संख्या के लिहाज से 10 बड़े राज्यों में साढ़े तीन करोड़ अनुपयोगी गोवंश है, जिसके संरक्षण के लिए 54 हजार करोड़ रुपये सालाना से अधिक की जरूरत है, यह कई राज्यों की तमाम कल्याण योजनाओं से भी ज़्यादा है।
पीयूष शर्मा
02 Feb 2019
सांकेतिक तस्वीर
फोटो साभार

देश में गोवंश की संख्या के लिहाज से दस बड़े राज्यों में जिनमे गोवंश (गाय व बैल) पर पूर्णतया प्रतिबंध है, 2012 की पशुगणना के अनुसार इन राज्यों में देश का कुल 53 प्रतिशत गोवंश था। गोवंश की संख्या के लिए हमारे द्वारा किये गये अध्ययन में सामने आया है कि इन राज्यों में वर्तमान में 3 करोड़ 50 लाख के करीब अनुपयोगी गोवंश है, यह अनुपयोगी गोवंश इन राज्यों के कुल गोवंश का करीब 31 फ़ीसदी है। इन अनुपयोगी गोवंश पर राज्यों को करीब 54 हजार 8 सौ करोड़ रुपये से अधिक का खर्च करने की जरूरत है लेकिन इन सभी 10 राज्यों में 2018-19 वित्तीय वर्ष में  बजट में पशुधन विभाग के पास मात्र 8551 करोड़ रुपये है जो कि अनुमानित खर्च का मात्र 15.6 प्रतिशत है, पशुधन विभाग के इस बजट में सभी तरह के जानवरों, वेतन आदि पर होने वाला खर्चा शामिल हैं।

किसान के लिए अनुपयोगी गोवंश पालना एक बड़ा आर्थिक बोझ है जिसको वह वहन कर पाने में असमर्थ है जिसके कारण वह उसे खुला छोड़ दे रहा है जिसके कारण बड़े स्तर पर सभी जगह झुण्ड में गोवंश दिखाई दे रहे हैं और वह खड़ी फसलों को खराब कर रहे हैं और सड़कों पर दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। केंद्र व राज्य सरकार जिन्होंने अपने यहाँ गोकशी पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाया है उनसे यह समझ पाने में चूक हो गयी कि उनके इस कदम से किसानों को कितना नुकसान होगा। आज सड़कों पर साढ़े तीन करोड़ से अधिक गोवंश जो कि भूखा है वह खुले में घूम रहा है। अब यहाँ छुट्टा गाय और बैल किसानों और आम जनता का सरदर्द बन गए हैं।  

किसान पर पहले से ही बीज, खाद, पानी बिजली और दवाई के बढ़े हुए दामों का आर्थिक बोझ है और अब छुट्टा गोवंश से सुरक्षा के लिए किसानों को तार बाड़ व पहरेदारी के लिए अतिरिक्त खर्च करने को मजबूर होना पड़ रहा हैं। बड़े और संपन्न किसान तो छुट्टा गोवंश से सुरक्षा के उपाय कर ले रहे हैं परन्तु छोटे किसान जिनकी संख्या और खेती का क्षेत्रफल ज्यादा है वो अतिरिक्त आर्थिक बोझ को उठा पाने में असमर्थ हैं। जिसके कारण उनका उत्पादन कम हो रहा है और उनकी आय भी घट रही है। कुल मिलाकर निष्कर्ष यह निकलता है कि प्रतिबंध के इस निर्णय से खेती-किसानी पर बुरा असर पड़ रहा है, और इसके दुष्प्रभाव ग्रामीण-शहरी जनजीवन पर पड़ने शुरू हो गये हैं और अगर इस समस्या का जल्द ही कोई स्थायी समाधान न निकाला गया तो इसके और ज्यादा दुष्परिणाम सामने आयेंगे।  

cow1.jpg

(नोट: अनुपयोगी गोवंश की संख्या पिछली पशुगणना 2007 व 2012 में वृद्धि के अनुसार)

सारणी में दिए गये 10 राज्यों में हमने पिछली दो पशुगणना में रही वृद्धि दर के आधार पर हमने विश्लेषण कर अनुपयोगी गोवंश की संख्या का अनुमान लगाया है। अनुपयोगी गोवंश में बूढ़ी गायें जो दूध नहीं दे रही हैं, बछड़े, खेती के लिए अनुपयोगी बैल, बूढ़े बैल शामिल किये गये हैं।  इन राज्यों में सबसे अधिक अनुपयोगी गोवंश वाले राज्य छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखण्ड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान व उत्तर प्रदेश हैं। इन 10 राज्यों में मांस के लिए गोवंश की खरीद-फरोख्त करने पर आर्थिक जुर्माना व सजा का प्रावधान है।

बीजेपी की राजनीति हमेशा से जाति और मजहब के इर्द-गिर्द घूमती रही है और इसके लिए बीजेपी ने गाय को एक बड़ा हथियार बनाया हुआ है। बीजेपी अच्छे से जानती है कि गाय खुद तो वोट नहीं दे सकती है पर वोट दिला जरूर सकती है। गौ हत्या पर प्रतिबंध पहले से रहा है परन्तु केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सरकार के आने के बाद से गाय के नाम पर की गयी सियासत का खामियाजा आम जनता को कई तरह से भुगतना पड़ रहा है। इस दौरान गौ रक्षा के नाम पर गौरक्षकों की अतिसक्रियता ने साम्प्रदायिक माहौल तो बिगाड़ा ही है इसके साथ ही गौवंश-कृषि आधारित आर्थिक व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है।

केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान भोपाल के एक  अध्ययन के मुताबिक खेती का 90 फ़ीसदी काम मशीनों से हो रहा है और मानव और पशु श्रम 5-5 फ़ीसदी है। पिछले कुछ दशकों में खेती का बहुत बड़े स्तर पर मशीनीकरण हुआ है जिसके चलते कृषि कार्य में बैलों की उपयोगिता पूर्णतया खत्म हो गयी है और मजदूरों और बैलों की जगह ट्रक्टरों ने ले ली है। इसके साथ ही कम दूध देने और बाँझपन का शिकार होने से अनुपयोगी गोवंश की संख्या में बड़े स्तर पर वृद्धि हुई है। किसान या गौपालक जिसकी आय पहले से ही कम है ऐसे में इन अनुपयोगी गोवंश को रखने, भरण पोषण आदि में उनके पर खर्च करने में असमर्थ है। पहले गाय का दूध देना बंद कर देने और खेती में अनुपयोगी बैलो को बेच दिया करते थे और इसके बदले उनको नई गाय खरीदने के लिए एकमुश्त राशि मिल जाया करती थी परन्तु केंद्र सरकार ने मांस के लिए मवेशियों की बिक्री पर पूरी तरह से पांबदी लगा दी, अब इन अनुपयोगी गोवंश को कोई खरीदने वाला नहीं हैं जिसके चलते किसानों के पास अपने अनुपयोगी गोवंश को छुट्टा छोड़ने के आलावा दूसरा कोई विकल्प नही बचा हैं|

अनुपयोगी गोवंश पर आने वाली लागत

इन दस राज्यों के साढ़े तीन करोड़ से अधिक अनुपयोगी गोवंश के भरण-पोषण और देखरेख के लिए करीब 54 हजार 8 सौ करोड़ रुपयों से अधिक धनराशि की आवयश्कता होगी। इस राशि में गौशाला के निर्माण की लागत शामिल नहीं हैं।

गोवंश की कुल संख्या में से 10 बड़े राज्यों में 3.5 करोड़ अनुपयोगी गोवंश

15650 रुपये प्रति गोवंश पर अनुमानित वार्षिक खर्चा 

एकवर्ष (365 दिनों में) में 3.5 करोड़ गोवंश पर 54,808 करोड़ रुपये अनुमानित खर्च

10 राज्यों के 2018-19 के बजट अनुमान में सम्पूर्ण पशुधन विभाग का बजट आवंटन 8551 करोड़ रुपये।

एक गोवंश पर प्रतिवर्ष 15650 रुपयों का खर्चा आता है, जिसमें से चारे-दाने के लिए प्रतिदिन 30 रुपये के हिसाब से एक वर्ष का खर्चा करीब 11 हजार रुपये है तथा करीब 4700 रुपये प्रतिवर्ष दवाई, गोवंश की देखरेख के लिए मजदूर तथा बिजली इत्यादि का खर्चा है।   

cow2_0.jpg

नोट: चारे व दाने पर 30 रुपये प्रतिवर्ष प्रति गोवंश खर्चा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी शासनादेश के आधार पर तथा दवाई, मजदूरी तथा बिजली पर खर्चा उत्तर प्रदेश में पूर्व में संचालित कामधेनु योजना के आधार पर  

कुछ राज्यों सरकारों ने जैसे उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 रुपये प्रति पशु प्रतिदिन के हिसाब से तथा राजस्थान सरकार ने 32 रुपये प्रति पशु के हिसाब से अनुदान देने की बात कही है परन्तु यह राशि बहुत ही कम है क्योंकि एक गाय या बैल एक दिन में कम से कम 17-20 किलों चारा खायेगा और एक किलो चारे की कीमत कम से कम 5-7 रुपये प्रति किलो है। ऐसे यदि हम एक किलो चारे की कीमत 5 रुपये प्रति किलो मानें तो एक गाय एकदिन में लगभग 85 रुपये का चारा खाएगी। ऐसे में 30-32 रुपये बहुत कम हैं। ऐसे में सही से चारा न मिल पाने के कारण वो कुपोषण का शिकार होंगी।

अनुपयोगी गोवंश की बढ़ती समस्या न केवल किसानों और आम जनता के समस्या बल्कि खुद गायों के लिए भी एक काल की तरह है क्योंकि इस तरह से खुले में घुमने से वो कूड़े-कचरे में रहती हैं, पॉलिथीन खाती हैं जिससे वो बीमार पड़ेगी और उनके इलाज की कोई ऐसी व्यवस्था नहीं है जिसके कारण आए दिन मृत्यु का शिकार होंगी।

चारे की कमी एक बड़ी समस्या

देश में विभिन्न राज्यों में चारे की मांग और आपूर्ति में भारी अंतर है, इस सन्दर्भ में कृषि और कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री श्रीमती कृष्णा राज ने लोकसभा में एक सवाल का उत्तर देते हुए माना है कि अधिकांश राज्यों में चारे की कमी है। कुल कृषि योग्य भूमि का केवल 5 प्रतिशत ही चारे की खेती के लिए प्रयोग होता है। परन्तु उत्पादक और अनुपयोगी दोनों ही तरह के पशुओं को चारे की आवयश्कता है। भारतीय चारागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान झाँसी का मानना है कि और चारे की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है परन्तु चारा फसलों के लिए क्षेत्रफल में वृद्धि की सम्भावना कम है।

ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में अनुपयोगी गोवंश के लिए चारा कहां से मिलेगा यह एक चिंता की बात है क्योंकि चारे की कमी का समाधान नहीं निकाला गया तो किसान अपनी फसलों का बचाव नहीं कर पायेगा। बीते चार सालों में लावारिश गोवंश की संख्या इतनी ज्यादा बढ़ी है और उन्हें खाने के लिए भी चाहिए। ये छुट्टा गोवंश खेतों में फसलों की तरफ रुख कर रहे हैं जिसके कारण बड़ी संख्या में फसलें खराब हो रही हैं।

गोवंश की उचित देख-रेख के साथ आश्रय दे पाना गौशालाओं के भी बूते से बाहर है क्योकि उनके पास संसाधनों की कमी है और मिलने वाला सरकारी अनुदान कम है।

सरकार की तैयारी

केंद्र सरकार द्वारा गोवंश पर प्रतिबंध बिना सोचे समझे लगा दिया गया और न ही उससे उत्पन्न होने वाली समस्याओं की समीक्षा की जिसका परिणाम तमाम किसान और आम जनता भुगत रहे हैं। और जब चारों तरफ इतना हल्ला हो रहा है तो सरकार इसके लिए कुछ कदम उठा रही है जो कि समस्या के समाधान के लिए नाकाफी हैं।

2019 के अंतरिम बजट में वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय कामधेनु आयोग  बनाने तथा कामधेनु योजना पर 750 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की है, पर इतनी बड़ी संख्या में बेकार गायों के लिए किस प्रकार यह आयोग समाधान निकलेगा यह कहना अभी मुश्किल है।

गोवंश के लिए सरकार की गलत नीतियों और गोरक्षकों की सक्रियता का ही परिणाम है कि सभी जगह आवारा पशु दिखाई दे रहे है। इसलिए यह सबसे जरूरी है की कथित गौरक्षकों पर पांबदी लगाये जाने के साथ ही पशु क्रूरता निवारण अधिनियम-1960 मे भी बदलाव की जरूरत है। ताकि देश के पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक तथा किसान सुरक्षित रहें और सड़कों पर जानवरों की वजह से दुर्घटनाएं न हों।

इसे भी पढ़ें : योगी की गाय नीति : शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास से भी ज़्यादा अनुपयोगी गायों पर खर्च

cows
Cow Vigilante
cow slaughter ban
cow terrorism
farmer crises
farmers protest
Modi government
kamdhenu budget
cow budget

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

आख़िर फ़ायदे में चल रही कंपनियां भी क्यों बेचना चाहती है सरकार?

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

'KG से लेकर PG तक फ़्री पढ़ाई' : विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं की सभा में उठी मांग

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

कोविड मौतों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पर मोदी सरकार का रवैया चिंताजनक

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

ज्ञानवापी विवाद, मोदी सरकार के 8 साल और कांग्रेस का दामन छोड़ते नेता


बाकी खबरें

  • covid
    संदीपन तालुकदार
    जानिए ओमिक्रॉन BA.2 सब-वैरिएंट के बारे में
    24 Feb 2022
    IISER, पुणे के प्रख्यात प्रतिरक्षाविज्ञानी सत्यजित रथ से बातचीत में उन्होंने ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट BA.2 के ख़तरों पर प्रकाश डाला है।
  • Himachal Pradesh Anganwadi workers
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिमाचल प्रदेश: नियमित करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरीं आंगनबाड़ी कर्मी
    24 Feb 2022
    प्रदर्शन के दौरान यूनियन का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिला व उन्हें बारह सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा। मुख्यमंत्री ने आगामी बजट में कर्मियों की मांगों को पूर्ण करने का आश्वासन दिया। यूनियन…
  • Sulaikha Beevi
    अभिवाद
    केरल : वीज़िंजम में 320 मछुआरे परिवारों का पुनर्वास किया गया
    24 Feb 2022
    एलडीएफ़ सरकार ने मठीपुरम में मछुआरा समुदाय के लोगों के लिए 1,032 घर बनाने की योजना तैयार की है।
  • Chandigarh
    सोनिया यादव
    चंडीगढ़ के अभूतपूर्व बिजली संकट का जिम्मेदार कौन है?
    24 Feb 2022
    बिजली बोर्ड के निजीकरण का विरोध कर रहे बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान लगभग 36 से 42 घंटों तक शहर की बत्ती गुल रही। लोग अलग-अलग माध्यम से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन प्रशासन पूरी तरह से लाचार…
  • Russia targets Ukraine
    एपी
    रूस ने यूक्रेन के वायुसेना अड्डे, वायु रक्षा परिसम्पत्तियों, सैन्य आधारभूत ढांचे को बनाया निशाना, अमेरिका-नाटो को चेताया
    24 Feb 2022
    रूस के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि सेना ने घातक हथियारों का इस्तेमाल यूक्रेन के वायुसेना अड्डे, वायु रक्षा परिसम्पत्तियों एवं अन्य सैन्य आधारभूत ढांचे को निशाना बनाने के लिये किया है। उसने आगे दावा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License