NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
हौंडा के बाद नाराज़ मज़दूरों ने की बिनोला फ़ैक्ट्री में हड़ताल
विरोध स्थल पर भोजन और सोने के इंतज़ाम के साथ, ऑटो टेक के मज़दूर अब चौबीस घंटे परिसर के बाहर और अंदर प्रदर्शन कर रहे हैं।
रौनक छाबड़ा
11 Jan 2020
Translated by महेश कुमार
बिनोला फ़ैक्ट्री में हड़ताल
हड़ताली मज़दूरों की तस्वीर जो इतनी ठंडी के बाद भी शिवम ऑटो टेक के बिनोला प्लांट परिसर के बाहर और अंदर धरने पर हैं।

हौंडा कंपनी में प्रदर्शनकारी मज़दूरों से प्रेरणा लेते हुए, अब शिवम ऑटो टेक लिमिटेड(एसएटीएल) के मज़दूरों ने फ़ैक्ट्री परिसर पर क़ब्ज़ा कर लिया है। हरियाणा के बिनोला औद्योगिक क्षेत्र के मज़दूरों ने 7 जनवरी को अपनी माँगों के साथ ऑटो टेक में अनिश्चितकालीन धरने की शुरुआत कर दी है।

न्यूज़क्लिक को मिली जानकारी के मुताबिक़ प्रबंधन ने कथित तौर पर स्थायी श्रमिकों को कारख़ाने से बाहर कर "तालाबंदी" करने की कोशिश की लेकिन इसमें प्रबंधन असफल रहा क्योंकि संयंत्र के भीतर ही श्रमिकों ने विरोध शुरू कर दिया। कुल मज़दूरों में से वर्तमान में लगभग 150 मज़दूर कारख़ाने के भीतर प्रदर्शन कर रहे हैं, और क़रीब 250 अन्य स्थायी मज़दूर फ़ैक्ट्री के गेट के बाहर धरने पर बैठे हैं।

इसके परिणामस्वरूप, भारत में ट्रांसमिशन गियर्स और शाफ़्ट के सबसे बड़े निर्माता के बिनोला कारख़ाने में पिछले चार दिनों से उत्पादन को रोक दिया गया है।

लगभग 400 स्थायी मज़दूरों और 800 ठेका मज़दूरों को रोज़गार देने वाले इस कारख़ाने में टकराव तब शुरू हुआ जब कंपनी ने वेतन समझौते को लागू करने से मना कर दिया था। एसएटीएल एम्पलाइज़ यूनियन के अध्यक्ष राकेश बेरवा ने न्यूज़क्लिक को बताया, "प्रबंधन ने समझौते को लागू करने में देरी की और मज़दूरों की शिकायतों का निवारण नहीं किया बल्कि उल्टे उनके साथ बुरा व्यवहार किया है।"

राकेश ने न्यूज़क्लिक को बताया कि पिछले साल 14 सितंबर को ऑटो टेक के प्रबंधन ने एक त्रिपक्षीय बैठक में तीन साल के वेतन समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता लागू होने के लिए मई 2018 से लंबित पड़ा हुआ है।

हालांकि, चार महीने बाद भी, कर्मचारियों की मांग पूरी नहीं की गई। राकेश ने कहा, "आर्थिक संकट के नाम पर, प्रबंधन ने श्रमिकों के वेतन में वृद्धि करने से इनकार कर दिया है। पिछले साल तो दिवाली बोनस भी लगभग आधा ही दिया गया था।"

राकेश ने बताया कि जब कर्मचारी यूनियन के सदस्यों और यूनियन की एकता पर प्रबंधन ने हमला किया तो मज़दूरों का ग़ुस्सा बढ़ गया।

राकेश ने कहा कि बिनौला की फ़ैक्ट्री में 15 साल तक सेवा देने के बावजूद उनमें से कई मज़दूरों को ऑटो प्लांट में स्थानांतरित कर दिया गया जोकि कर्नाटक में है। उन्होंने कहा, “पिछले साल, बिनौला की फ़ैक्ट्री के गेट 18 मज़दूरों के लिए बंद कर दिए गए थे। तीन को निलंबित कर दिया गया था और यूनियन के अध्यक्ष और महासचिव सहित अन्य का तबादला कर दिया गया था।"

प्रबंधन के "ग़लत इरादे" से लिए गए फ़ैसले के विरोध में, राकेश अन्य 17 मज़दूरों के साथ गुरुग्राम के मिनी सचिवालय के बाहर एक महीने से प्रदर्शन कर रहे हैं, वे इस मामले में श्रम अधिकारियों के हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं।

कर्मचारियों के बीच तनाव को बढ़ते देख प्रबंधन ने कथित रूप से शिफ़्ट-बी के श्रमिकों को प्रवेश देने से इनकार कर दिया और बाद में 7 जनवरी को कारख़ाने की तालाबंदी करने का प्रयास किया। राकेश ने न्यूज़क्लिक को बताया, "अब कंपनी स्थायी कर्मचारियों के लिए फ़ैक्ट्री के गेट बंद करना चाहती है और असेंबली लाइन चालू रखना चाहती है।"

ऑटो टेक मज़दूरों द्वारा किया गया विरोध अब चौबीसों घंटे का विरोध बन गया है, यह कारख़ाने के बाहर और अंदर दोनों जगह जारी है। धरना स्थल पर ही भोजन और सोने की व्यवस्था की गई है। राकेश ने कहा, “यह हमारे लिए करो या मरो का सवाल है। हमारी मांगें पूरी होने से पहले हम प्रबंधन को फिर से उत्पादन शुरू करने नहीं देंगे।"

Image 2_0.jpg

शिवम ऑटो टेक के स्थायी कर्मचारियों की तस्वीर जो 7 जनवरी से हड़ताल पर हैं।

इसी तरह का विरोध पिछले साल नवंबर के महीने में होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (एचएमएसआई) के ठेके पर काम कर रहे मज़दूरों ने भी किया था। कर्मचारियों ने 14 दिनों के लिए एचएमएसआई के मानेसर कारख़ाना परिसर में "अवैध छंटनी" के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया था।

हरियाणा की औद्योगिक बेल्ट में सक्रिय एक श्रमिक मोर्चा ऑटोमोबाइल उद्योग संविदा कर्मचारी संघ (AICWU) के शाम मूर्ति इसे आर्थिक संकट से उपजे हालत के खिलाफ श्रमिक प्रतिरोध के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा, "श्रमिक उत्पादन नहीं रोकना चाहते हैं बल्कि वे उत्पादन गरिमा के साथ और बेहतर वेतन के भुगतान के साथ करना चाहते हैं।"

न्यूज़क्लिक ने ऑटो टेक के बिनोला प्लांट के भीतर ह्यूमन रिसोर्स हेड अंशुमान शर्मा से भी बात की। श्रमिक हड़ताल के पीछे आर्थिक संकट को कारण को ख़ारिज करते हुए, उन्होंने कहा कि मज़दूर उत्पादन के लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पा रहे हैं।

शर्मा ने कहा, "सितंबर में वेतन समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद, एक भी काम के दिन तय उत्पादन लक्ष्य को हासिल नहीं किया गया है। परिणामस्वरूप, कंपनी की वित्तीय स्थिति ख़राब हो गई है।"

यूनियन के सदस्यों को अन्य कारख़ानों में स्थानांतरित करने के सवाल पर, उन्होंने कहा, "मज़दूरों का काम की आवश्यकता के अनुसार स्थानांतरण करना मालिक का अधिकार है।"

शर्मा ने आगे कहा कि मज़दूरों की हड़ताल "ग़ैर-क़ानूनी" है और अगर गतिरोध हल नहीं होता है तो बिनोला संयंत्र को "बंद" किया जा सकता है।

Shivam Auto Tech
Workers
SALT Employees Union
Binola Industrial Area
Automobile Industry Contract Workers’ Union

Related Stories


बाकी खबरें

  • सोनिया यादव
    बलात्कार को लेकर राजनेताओं में संवेदनशीलता कब नज़र आएगी?
    13 Apr 2022
    अक्सर राजनेताओं के बयान कभी महिलाओं की बॉडी शेमिंग करते नज़र आते हैं तो कभी बलात्कार जैसे गंभीर अपराध को मामूली बताने या पीड़ित को प्रताड़ित करने की कोशिश। बार-बार राजनीति से महिला विरोधी बयान अब…
  • underprivileged
    भारत डोगरा
    कमज़ोर वर्गों के लिए बनाई गईं योजनाएं क्यों भारी कटौती की शिकार हो जाती हैं
    13 Apr 2022
    क्या कोविड-19 से उत्पन्न संकट ने सरकार के बजट को बुरी तरह से निचोड़ दिया है, या यह उसकी तरफ से समाज के सबसे कमज़ोर वर्गों के अधिकारों की सरासर उपेक्षा है? इनके कुछ आंकड़े खुद ही सब कुछ बयां करते हैं।
  • ramnovmi
    अजय सिंह
    मुस्लिम जेनोसाइड का ख़तरा और रामनवमी
    13 Apr 2022
    एक बात साफ़ हो चली है, वह यह कि भारत में मुसलमानों के क़त्लेआम या जनसंहार (जेनोसाइड) की आशंका व ख़तरा काल्पनिक नहीं, वास्तविक है। इस मंडराते ख़तरे को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।
  • srilanka
    पार्थ एस घोष
    श्रीलंका का संकट सभी दक्षिण एशियाई देशों के लिए चेतावनी
    13 Apr 2022
    निर्ल्लज तरीके के निजीकरण और सिंहली अति-राष्ट्रवाद पर अंकुश लगाने के लिए अधिकाधिक राजकीय हस्तक्षेप पर श्रीलंका में चल रही बहस, सभी दक्षिण एशियाई देशों के लिए चेतावनी है कि ऐसी गलतियां दोबारा न दोहराई…
  • रवि कौशल
    बैठक में नहीं पहुंचे अधिकारी, छात्र बोले- जेएनयू प्रशासन का रवैया पक्षपात भरा है
    13 Apr 2022
    जेएनयू छात्र संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि मंगलवार को वे उप कुलपति से उनके कार्यालय में नहीं मिल सके। यह लोग जेएनयू में हुई हिंसा की स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग कर रहे हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License