NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पाकिस्तान
अगर इजाज़त हो तो हम रोज़ी-रोटी के मुद्दे पर बात कर लें!
अगर भारत-पाक में गिरी लाशों को गिना जा चुका हो और उनके या हमारे नेताओं के चुनावों या पुरस्कारों का इंतज़ाम हो गया हो तो हम युद्ध या युद्धोन्माद की बात छोड़कर अपने बुनियादी मुद्दों और सवालों पर लौट सकते हैं।
मुकुल सरल
04 Mar 2019
सांकेतिक तस्वीर
फोटो साभार

भारत-पाकिस्तान के बीच भीषण तनाव का एक दौर बीत चुका है, हालांकि ये अभी ख़त्म नहीं हुआ है। हमारे विंग कमांडर अभिनंदन घर आ चुके हैं और हमारे नेता एक बार फिर चुनाव में जुट गए हैं। हालांकि बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान कभी भी एक पल के लिए भी चुनाव प्रचार रोका नहीं। इसके बीच सवाल उठता है कि इस सब का हासिल क्या रहा? और अब आगे क्या?

सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ सुरक्षा की बारीकियों पर बात करेंगे।

एयर स्ट्राइक में तीन सौ मरे या तीन ये सवाल भी हम नहीं पूछेंगे। 

हां, ये सवाल आज भी हमारे लिए बना हुआ है कि पुलवामा हमले का ज़िम्मेदार कौन है, आख़िर किस की लापरवाही या कमी की वजह से हमनें अपने 40 जवानों को खो दिया, जबकि 48 घंटे पहले खुफिया इनपुट मिल चुका था कि इस तरह का कोई हमला हो सकता है।

ये हम पूछेंगे कि वो कौन था जिसने सीआरपीएफ के इतने बड़े काफिले जिसमें दो से ढाई हज़ार जवान और 70-72 गाड़ियां थीं किसने एक साथ मूव करने का आदेश दिया था। हम ये भी पूछेंगे कि कई बार सिफारिश के बाद भी क्यों भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने ऐसे मौकों पर जवानों को एयरलिफ्ट करने की अनुमति नहीं दी।

सर्जिकल स्ट्राइक पार्ट-2 या बालाकोट में एयर स्ट्राइक में वाकई कोई आतंकी मारा गया भी है या नहीं, ये सवाल हम पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए छोड़ देते हैं, कि वे क्या पूछते हैं और क्या जवाब देते हैं। हालांकि अब बहुत से आम लोग भी इसको लेकर सवाल पूछ रहे हैं कि एयर स्ट्राइक का नतीजा क्या वाकई चार पेड़ और एक कौवा की मौत ही रही! अब तो एक केंद्रीय मंत्री एसएस अहलुवालिया ने ही कह दिया है कि मौत का आंकड़ा हमारे पास नहीं है। उनका कहना है कि संख्या को लेकर सरकार ने कभी कोई दावा नहीं किया। वायुसेना भी ऐसा ही कह रही है और विदेश मामलों की संसदीय समिति के सामने पेश हुए विदेश सचिव विजय गोखले ने भी ऐसा ही जवाब दिया। हालांकि ये सच है कि 26 फरवरी को बालाकोट पर हमले के बाद की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश सचिव ने कोई निश्चित संख्या तो नहीं बताई थी लेकिन एक लार्ज नंबर यानी हताहतों की बड़ी संख्या होने का जिक्र ज़रूर किया था। उन्होंने कहा कि “आज सुबह-सुबह, भारत ने बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े प्रशिक्षण शिविर पर प्रहार किया। इस ऑपरेशन में, बहुत बड़ी संख्या में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी, वरिष्ठ कमांडर, प्रशिक्षक और आतंकी हमलों के प्रशिक्षण के लिए आये हुए जिहादियों के समूहों को समाप्त कर दिया गया। बालाकोट की इस आंतकी प्रशिक्षण संस्था का नेतृत्व जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अज़हर के साले मौलाना यूसुफ अज़हर उर्फ उस्ताद गौरी कर रहे थे। विदेश सचिव का ये बयान विदेश मंत्रालय के मीडिया सेंटर पर भी उपलब्ध है।

इसके बाद “ऑफ द रिकार्ड” या “सूत्रों” के बहाने बड़ी संख्या में मौतों का दावा बाहर आया। सूत्र बताते हैं कि ये भी सरकारी सूत्रों और नेताओं की ओर से ही ‘लीक’ किया गया था। युद्धप्रेमी और सरकार परस्त कई चैनल पहले दिन और पहले घंटे से ही चीख रहे हैं कि बालाकोट में हुई एयर स्ट्राइक में 300 से लेकर 350 तक जैश के आतंकी मारे गए। कई उत्साही चैनलों ने ये संख्या 600 के पार कर दी थी। ख़ैर ये चैनल अपने दावों और ऐलानों पर अब खेद नहीं जताएंगे। वे तो जैश का सरगना मसूद अज़हर के मारे जाने को लेकर नई स्टोरी बुनने में व्यस्त है कि वो जिंदा या मारा गया। मारा गया तो बीमारी से मरा या भारत की एयर स्ट्राइक में। वगैहरा...वगैहरा। इसी तरह नेता भी खासतौर से सत्तारूढ़ दल के नेता आज भी संख्या को लेकर ऐसे ही बढ़ा-चढ़ाकर दावा कर रहे हैं।

मैं खुश हूं कि जंग के बादल फिलहाल छंट गए। लेकिन मोदी समर्थक ही निराश हैं। मुझसे कुछ मोदी समर्थकों ने ही कहा कि लग रहा है कि “खाया-पिया कुछ नहीं, गिलास तोड़ा बारा आना!” बदला-बदला चिल्लाने वाले ही कुछ ‘दोस्त’ अफसोस में हैं कि हमने ही पुलवामा में अपने 40 जवान खोए, हमने ही अपना एक मिग विमान खोया और हमारे ही विंग कमांडर अभिनंदन को पाकिस्तान ने पकड़ लिया और छोड़कर एहसान जता दिया। फिर हमारी कैसी जीत हुई? आख़िर इस हमले का उद्देश्य क्या था, मकसद क्या था।

तो मकसद तो मोटा-मोटा यही समझ में आता है कि दोनों देशों की जनता दुखी है और अपने-अपने यहां अच्छे दिन चाहती है। हमारे देश में साढ़े चार पहले बाकायदा इसका वायदा किया गया था लेकिन वो अच्छे दिन कभी आए नहीं। अब अच्छे दिन आए नहीं, काला धन वापस आया नहीं, 15 लाख एकाउंट में पहुंचे नहीं। रोज़गार है नहीं, बेरोज़गारी अपने रिकार्ड स्तर पर है। तो सरकार के सामने बड़ा संकट था।

पिछले कुछ समय से युवा, छात्र, किसान, मज़दूर लगातार सड़क पर उतर रहे थे। बीते साल में किसानों के कई बड़े आंदोलन हुए और अभी 29-30 नवंबर, 2018 को देशभर के किसानों ने दिल्ली में धावा बोला। इसी तरह औद्योगिक मज़दूरों ने 8-9 जनवरी, 2019 को दो दिन की बड़ी हड़ताल की। इसमें संगठित-असंगठित क्षेत्र के करीब 20 करोड़ मेहनतकश मज़दूर और कर्मचारी शामिल हुए। इस सबके अलावा स्कीम वर्कर आशा, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील वर्कर आदि लगातार आंदोलन कर रहे हैं।

युवा-छात्रों ने अभी बीती 7 फरवरी में “यंग इंडिया अधिकार मार्च” और उसके बाद छात्रों और शिक्षकों ने 17-18 फरवरी को संसद मार्च किया।

इसी सबके बीच पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने तीन बड़े राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में अपनी सत्ता गंवा दी।

मंदिर आंदोलन चला नहीं, पहले एससी-एसटी एक्ट में बदलाव तो अब उच्च शिक्षा संस्थानों में 13 प्वाइंट रोस्टर जैसे फैसलों ने दलित-पिछड़ों, अध्यापकों और बुद्धिजीवियों को सरकार के खिलाफ खड़ा कर दिया।

इस बीच रफ़ाल के मामले ने भी सरकार को खूब कठघरे में खड़ा किया। “चौकीदार ही चोर है” जैसा नारा जनता के बीच काफी दूर तक पहुंच गया तो फिर अब आख़िरी रास्ता क्या था?

राजनीति के जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान से एक सीमित युद्ध या युद्ध जैसा माहौल ही इस सरकार के लिए ज़रूरी था। वे तो काफी समय से इसी की आशंका जता रहे थे और अंत में वही हुआ।

कुछ जानकारों का तो यहां तक कहना है कि दोनों ही सरकारों यानी भारत और पाकिस्तान के बीच एक समझौते के तहत ये सब कारनामा हुआ है। वहां इमरान ख़ान अभी सरकार में आए हैं और यहां नरेंद्र मोदी जा रहे हैं दोनों को अपनी छवि मज़बूत करनी है तो दोनों के बीच युद्ध-युद्ध के खेल से बेहतर कौन सा खेल हो सकता है! हालांकि इस बारे में दावे के साथ कुछ भी नहीं कहा जा सकता। और ऐसे मामले में अपनी सरकार पर इस तरह शक करना ठीक नहीं लगता लेकिन देशहित में कुछ सवालों पर गहराई से सोचने की तो ज़रूरत है ही कि कहीं देश के नाम पर देश से तो ही नहीं खेला जा रहा।

कहने वाले कह रहे हैं कि ये तय था कि पुलवामा से उठे गुस्से को शांत करने के लिए कुछ तो करना पड़ेगा। पुलवामा हमले के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जिम कार्बेट पार्क में डिस्कवरी चैनल के लिए फिल्म की शूटिंग करने और एक चुनाव सभा को संबोधित करने की ख़बरें बाहर आने के बाद हुई शर्मिंदगी से तो ये बहुत ज़रूरी हो गया था कि कुछ “कड़ा जवाब” दिया जाए। इसलिए ये तय हुआ कि पहले भारत एयर स्ट्राइक कर सुनसान में बम-वम गिरा ले और फिर पाकिस्तान अपने बचाव में ऐसा ही कुछ जवाब दें। फेस सेविंग के लिए दुनिया में कई बार ऐसे खेल हुए हैं। इसके बाद दोनों देशों के मीडिया ने जिस तरह वार हिस्टीरिया पैदा किया उसने भी बड़ा डर और शक पैदा किया।

बीजेपी को जानने वाले, बीजेपी को चाहने वाले भी अब ये सवाल करने लगे हैं। विंग कमांडर के पाकिस्तान की गिरफ़्त में होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “मेरा बूथ-सबसे मज़बूत” कार्यक्रम करने से तो कई बड़े और कड़े बीजेपी समर्थक भी निराश हुए।

और अब जब बीजेपी समर्थकों के बीच ये ख़बरें पहुंच रही हैं कि आतंकवादियों या पाकिस्तान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है तो वे और निराश हैं। हालांकि इससे डर ये भी है कि फिर हताशा में कोई और ख़तरनाक़ कदम न उठा लिया जाए जिससे जंग की संभावना एक बार फिर बढ़ जाए, क्योंकि सीमाओं पर अभी भी गोलाबारी जारी है।

ख़ैर इससे आगे निकलें तो कूटनीति स्तर पर भी दुनिया में भारत की स्थिति कोई मज़बूत नहीं हुई है। अबूधाबी में हुए इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी के सम्मेलन में भारत को ज़रूर पाकिस्तान की कीमत पर बुलाया गया, हमारी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को अतिथि बनाया गया लेकिन उसके बाद में जारी किए गए सयुंक्त बयान से भारत का पक्ष मजबूत नहीं होता, बल्कि इसमें जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर कई नसीहते दी गई हैं। कांग्रेस भी इस पर सवाल उठा रही है। इतना ही नहीं अमेरिका तो हमारे मामलों में हस्तक्षेप कर ही रहा था, जैसा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बातों से भी जाहिर था, क्योंकि उन्होंने एयर स्ट्राइक से पहले ही कह दिया था कि भारत कुछ बड़ा करने वाला है और विंग कमांडर को छोड़े जाने के ऐलान से पहले ही घोषणा कर दी थी कि भारत-पाकिस्तान के बीच से कोई अच्छी ख़बर आने वाली है। इससे लग रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप को पहले ही इस सबकी खबर थी और उनकी ही इजाजत से ये सब हुआ है, लेकिन अब तो अमेरिका की शह पर सऊदी अरब जैसा छोटा देश भी भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्ता करने की बात कर रहा है। पता चला है कि सऊदी के क्राउन प्रिंस ने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों से बात की और अब सऊदी के विदेश राज्यमंत्री भारत-पाकिस्तान का दौरा करने की भी ख़बरे हैं। रूस और चीन भी इस सब मामलें में निगाह रखे हैं और लगातार सलाह दे रहे हैं।  

तो क्या हमने सिर्फ चुनाव के लिए इतनी बड़ी कीमत चुकाई है? ये सवाल अब गांव स्तर तक जा रहा है। बीजेपी के ही नेता बीएस येदियुरप्पा तो इन एयर स्ट्राइक और शहादतों से सीटों के नफा-नुकसान भी लगा चुके हैं। हालांकि इसके बाद उन्होंने अपने बयान पर सफाई भी दी।

अब जब चुनावी राजनीति तेज़ हो रही है और बाकायदा चुनाव घोषित होने वाले हैं तो क्या अब हमें यानी मीडिया को जनता के बुनियादी सवालों और सरोकारों पर नहीं लौट आना चाहिए। हमारी जनता को भी क्या अब एक बार फिर पूरी मज़बूती से अपने रोज़ी-रोटी के सवालों को नहीं उठाना चाहिए। पूछा ही जाना चाहिए कि कहां हैं हमारे हिस्से के अच्छे दिन? कहां है हमारा रोटी-रोज़गार? इसी में हमारा-आपका और हमारे देश का भला है।

(ये लेखक के निजी विचार हैं।)

India and Pakistan
Narendra modi
Imran Khan
air strike
balakot
pulwama attack
CRPF Jawan Killed
Jingoism
Donand Trump
Saudi Arab
SAY TO NO WAR

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 


बाकी खबरें

  • मालिनी सुब्रमण्यम
    छत्तीसगढ़ : युद्धग्रस्त यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों ने अपने दु:खद अनुभव को याद किया
    09 Mar 2022
    कई दिनों की शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलने के बाद, अंततः छात्र अपने घर लौटने कामयाब रहे।
  • EVM
    श्याम मीरा सिंह
    मतगणना से पहले अखिलेश यादव का बड़ा आरोप- 'बनारस में ट्रक में पकड़ीं गईं EVM, मुख्य सचिव जिलाधिकारियों को कर रहे फोन'
    08 Mar 2022
    पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनाव परिणामों में गड़बड़ी की आशंकाओं के बीच अपनी पार्टी और गठबंधन के कार्यकर्ताओं को चेताया है कि वे एक-एक विधानसभा पर नज़र रखें..
  • bharat ek mauj
    न्यूज़क्लिक टीम
    मालिक महान है बस चमचों से परेशान है
    08 Mar 2022
    भारत एक मौज के इस एपिसोड में संजय राजौरा आज बात कर रहे हैं Ukraine और Russia के बीच चल रहे युद्ध के बारे में, के जहाँ एक तरफ स्टूडेंट्स यूक्रेन में अपनी जान बचा रहे हैं तो दूसरी तरफ सरकार से सवाल…
  •  DBC
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: डीबीसी कर्मचारियों की हड़ताल 16वें दिन भी जारी, कहा- आश्वासन नहीं, निर्णय चाहिए
    08 Mar 2022
    DBC के कर्मचारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं।  ये कर्मचारी 21 फरवरी से लगातार हड़ताल पर हैं। इस दौरान निगम के मेयर और आला अधिकारियो ने इनकी मांग पूरी करने का आश्वासन भी दिया। परन्तु…
  • Italy
    पीपल्स डिस्पैच
    इटली : डॉक्टरों ने स्वास्थ्य व्यवस्था के निजीकरण के ख़िलाफ़ हड़ताल की
    08 Mar 2022
    इटली के प्रमुख डॉक्टरों ने 1-2 मार्च को 48 घंटे की हड़ताल की थी, जिसमें उन्होंने अपने अधिकारों की सुरक्षा की मांग की और स्वास्थ्य व्यवस्था के निजीकरण के ख़िलाफ़ चेतवनी भी दी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License