NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आज़ाद चंद्रशेखर अब क्या करेगा?
चंद्रशेखर के स्वागत में इतने लोग उमड़े थे और इस कदर नारेबाजी हो रही थी कि उस दौरान उनसे कोई बात हो पाना संभव नहीं था...बस एक ही नारा लगातार हवा में गूंज रहा था...जय भीम...जय भीम...
मुकुल सरल
14 Sep 2018
chandrshekhar
image courtesy: NDTV

चंद्रशेखर ‘आज़ाद’ हो गया।

आज़ाद चंद्रशेखर अब क्या करेगा?

इसी सवाल का जवाब जानने की सबको जिज्ञासा है और चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण ने इसे छिपाया भी नहीं। उनका साफ कहना है कि वे बीजेपी के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे और 2019 में जो भी उसे हराएगा वो उसका साथ देंगे।

यह जवाब उन्होंने सहारनपुर जेल से रिहा होने के तुरंत बाद भी दिया और जब आज शुक्रवार की दोपहर हमने उनसे फोन पर बात करने की कोशिश की तो उनके वकील ने उनकी तरफ से यही बात दोहराई।

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत जेल में बंद चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण को गुरुवार रात करीब 2 बजकर 55 मिनट पर सहारनपुर जेल से रिहा गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में उनके समर्थक उन्हें लेने जेल पहुंचे थे और रिहाई के बाद गर्मजोशी से उनका स्वागत किया गया। 

चंद्रशेखर के सहारनपुर में वकील हरपाल सिंह जीवन ने आज यानी शुक्रवार दोपहर जब फोन के जरिये उनसे हमारी बात करानी चाही तो जय भीम के नारे के अलावा कुछ भी सुनाई नहीं दिया। चंद्रशेखर के स्वागत में इतने लोग उमड़े थे और इस कदर नारेबाजी हो रही थी कि उस दौरान उनसे कोई बात हो पाना संभव नहीं था...बस एक ही नारा लगातार हवा में गूंज रहा था...जय भीम...जय भीम...

जाहिर है भीम आर्मी के इस युवा मुखिया चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण की करीब सवा साल बाद जेल से रिहाई ने उनके समर्थकों को जोश से भर दिया है।

सहारनपुर में पिछले साल हुई हिंसा के बाद उनके ऊपर गंभीर धाराओं में मामले दर्ज किए गए थे। दरअसल 5 मई, 2017 को सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में दलितों के घर जलाए जाने की घटनाएं हुईं थी। इसके विरोध में चार दिन बाद 9 मई को सहारनपुर में दलितों के प्रदर्शन हुए थे। उसी समय चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण और उनकी भीम आर्मी सुर्खियों में आई और पुलिस ने उनके खिलाफ कथित रूप से हिंसा भड़काने के आरोप में एफ़आईआर दर्ज कर ली।

इसके बाद पुलिस ने उन्हें फरार घोषित कर दिया, हालांकि इसी बीच चंद्रशेखर ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ी रैली की थी। इसके बाद उन्हें यूपी एसटीएफ ने 8 जून, 2017 को हिमाचल के डलहौजी से गिरफ़्तार कर लिया। तबसे वे सहारनपुर जेल में बंद थे।

पुलिस ने उनके ऊपर अपराध संख्या 152, 154, 156, 162, 163 के तहत लोगों को जातीय हिंसा के लिए भड़काने, आगजनी के लिए उकसाने,  सरकारी काम में बाधा डालने, अधिकारियों के ऊपर हमला करने और हत्या के प्रयास समेत कई संगीन धाराओं में बीस से ज़्यादा मामले दर्ज किए जिन्हें बाद में पांच मुकदमों में समाहित कर लिया गया। ये सभी मामले सहारनपुर देहात कोतवाली में दर्ज किए गए थे। एक छठा मुकदमा आईटी एक्ट के तहत उनके ऊपर अलग से दर्ज किया गया।

जब मामला हाईकोर्ट में पहुंचा तो हाईकोर्ट ने भी उनके खिलाफ इतनी बड़ी संख्या में मुकदमें दर्ज किए जाने की मंशा पर सवाल उठाया था। बाद में कुल 6 मामलों में चंद्रशेखर को 4 मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट और 2 मामलों में सहारनपुर कोर्ट से ज़मानत मिल गई, लेकिन सरकार नहीं चाहती थी कि चंद्रशेखर ‘आज़ाद’ हो इसलिए उनके ऊपर रासुका लगा दी गई।

31 अक्टूबर 2017 को हाईकोर्ट से चंद्रशेखर को सभी मामलों में राहत मिली। इससे पहले उनकी रिहाई होती उससे पहले 2 नंवबर की सुबह सात बजे उनके घर रासुका का नोटिस तामील करा दिया गया।

दरअसल भीम आर्मा और चंद्रशेखर का जिस तरह उभार हो रहा था और बीजेपी के सवर्ण वोट बैंक के खिलाफ वे जिस तरह चुनौती बन गए थे उससे यूपी की योगी सरकार घबरा गई।

दलितों के उत्थान और संघर्ष के लिए सामाजिक संस्था के तौर पर संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर 2015 में भीम आर्मी की स्थापना की गई थी। इसका पूरा नाम ‘भीम आर्मी भारत एकता मिशन’ है। सहारनपुर और आसपास का इलाका ही इसका कार्यक्षेत्र रहा। लेकिन शब्बीरपुर की घटना के विरोध में बुलाए गए सहारनपुर बंद से भीम आर्मी और चंद्रशेखर सुर्खियों में आए। इस दौरान उनकी मूंछों को ताव देती और ‘द ग्रेट चमार’ के बोर्ड के साथ वाली तस्वीरें हर जगह छा गईं। 

राजनातिक विश्लेषक मानते हैं कि भीम आर्मी और चंद्रशेखर के इसी उभार की वजह से योगी सरकार ने चंद्रशेखर को जेल में ही रखने की योजना बनाई।

आपको बता दें कि किसी व्यक्ति पर एक बार में केवल तीन महीने के लिए रासुका लगाया जा सकता है। किसी व्यक्ति पर रासुका यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून तभी लगाया जाता है जब शासन को ये लगे कि वो व्यक्ति देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करने या कानून-व्यवस्था लागू करने में बाधक है।

चंद्रशेखर के वकील हरपाल सिंह जीवन के मुताबिक रासुका को हर तीन महीने बाद अगले तीन महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है लेकिन इसकी अधिकतम अविधि एक साल है। यानी अनिश्चितकाल के लिए किसी को रासुका के तहत जेल में नहीं रखा जा सकता।

अब जो कहा जा रहा है कि चंद्रशेखर की रिहाई समय से पूर्व कर दी गई दरअसल वो समय के बाद ही है। तीन-तीन महीने करके उन्हें रासुका के तहत करीब 10 महीने और उससे पहले करीब 5 महीने जेल में रख लिया गया।

इस दौरान उनकी तबीयत भी बिगड़ी और उन्हें अस्पताल में भी भर्ती कराना पड़ा। इस दौरान उनकी बेहद कमज़ोर बीमार हाल में एक तस्वीर भी बाहर आई, जिसने उनके समर्थकों को गहरी चिंता और गुस्से से भर दिया। आरोप लगा कि चंद्रशेखर को जेल में प्रताड़ना दी जा रही है।

भीम आर्मी का लगातार कहना था कि चंद्रशेखर को लगातार जेल में रखकर सरकार संविधान विरोधी काम कर रही है। इसे लेकर अब सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका लगाई गई थी जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों को नोटिस जारी किया था ।

अब प्रेस को जारी बयान में सरकार का कहना है कि चंद्रशेखर की रिहाई उनकी मां के आवेदन पर की गई। लेकिन सच यही है कि अब योगी सरकार चंद्रशेखर को लंबे समय तक जेल में नहीं रख सकती थी। संभावना थी कि अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट सरकार को फटकार भी लगा सकता है। इसके अलावा हिंसा के  मामले में रासुका के तहत गिरफ्तार किए गए कथित उच्च जाति के तीन लोगों को जुलाई में ही रिहा किया जा चुका था।

दलित वर्ग की ओर से भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर के अलावा दो अन्य शिवकुमार और उनके भतीजे सोनू को भी रासुका के तहत गिरफ्तार किया गया था। उनकी भी एक साल की मियाद अब अक्टूबर में पूरी हो रही थी, इसलिए चंद्रशेखर के साथ उन्हें भी रिहा कर दिया गया।

इन सब रिहाइयों की वजह सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के अलावा नये राजनीतिक घटनाक्रम के तहत बनी स्थितियों को माना जा रहा है। दरअसल रुपये की गिरती कीमत और तेल के बढ़ते दामों के साथ राफेल, माल्या और एससी-एसटी एक्ट इत्यादि तमाम आर्थिक और राजनीतिक मोर्चों पर केंद्र सरकार फंस गई है। दलित भी उससे नाराज हैं और उसका अपना  वोटबैंक सवर्ण भी। इस समय उसे एक ऐसा बड़ा मुद्दा चाहिए जो लोगों का ध्यान इन सबसे थोड़ा हटा सके। इधर यूपी में गोरखपुर और कैराना के उपचुनाव में जिस तरह विपक्ष की एकता खासतौर पर सपा-बसपा का गठबंधन सामने आया और बीजेपी को भारी शिकस्त मिली उससे योगी सरकार की हालत खस्ता है। अब योगी जी की मंशा है कि किसी तरह सपा-बसपा की इस दोस्ती में दरार डाली जाए, विपक्षी एकता में सेंध लगाई जाए...और अगर ये प्रत्यक्ष या परोक्ष किसी भी रूप में चंद्रशेखर के जरिये संभव हो जाए तो क्या बुरा है। क्योंकि दलित राजनीति के हिसाब से मायावती, चंद्रशेखर को एक तरह से अपने लिए ख़तरा मानती रही हैं। शायद यही वजह रही कि उन्होंने न उनकी गिरफ्तारी के विरोध में कोई बयान दिया न उनकी रिहाई के लिए कुछ किया। पत्रकार और राजनीति के जानकार महेंद्र मिश्र भी कुछ इसी तरह की संभावना और आशंका जताते हैं। उनका भी मानना है कि जिस तरह शिवपाल समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के खिलाफ काम आए और आगे भी आएंगे शायद उसी तरह की कोई संभावना बीजेपी मायावती के खिलाफ चंद्रशेखर में भी देख रही है।   

अन्य जानकार भी ऐसी ही आशंका जताते हैं। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) की नेता सुभाषिनी अली जो इस सिलसिले में दो बार सहारनपुर भी जा चुकी हैं, का भी कहना है कि सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए ही इस समय चंद्रशेखर की रिहाई की है क्योंकि इस समय पूरे देश और उत्तर प्रदेश सभी जगह दलितों में भारी गुस्सा और बीजेपी का विरोध है। इससे बचने के लिए उसने ये दांव चला है। हालांकि सुभाषिनी का ये मानना है कि चंद्रशेखर राजनीतिक तौर पर काफी परिपक्व हैं और वे बीजेपी के दांव में आएंगे नहीं, रिहा होते ही उन्होंने इसके संकेत भी दे दिए।

सुभाषिनी का मानना है कि योगी सरकार ने चंद्रशेखर के साथ बहुत अन्याय किया है और उन्हें झूठा फंसाया जबकि वे शब्बीरपुर और सहारनपुर में हिंसा के समय मौजूद भी नहीं थे। इसके अलावा उनके साथ सहारनपुर और मेरठ में भी अन्य लोगों को रासुका के तहत बंद किया जाना साफ दर्शाता है कि बीजेपी सरकार का दलितों के प्रति क्या रवैया है।

कुल मिलाकर चंद्रशेखर की गिरफ्तारी और रिहाई दोनों में सरकार ने अपने स्तर पर पूरी राजनीति करने की कोशिश की है। वरना क्या वजह है जब एक ओर भीमा-कोरेगांव हिंसा के आरोप में अर्बन नक्सल के एक नए नामकरण के साथ पांच सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा रहा है वहीं दलित उभार के एक प्रतीक चंद्रशेखर आज़ाद को रिहा किया जा रहा है।

हालांकि बीजेपी अपनी मंशा में कामयाब होगी फिलहाल तो ऐसा नहीं दिखता क्योंकि चंद्रशेखर ने रिहा होने के तुरंत बाद सबसे पहला हमला बीजेपी पर ही किया है..उन्होंने खुले तौर पर बीजेपी के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है। उनका कहना है कि बीजेपी के सभी अत्याचारों का हिसाब लिया जाएगा और जो उसे हराएगा हम उसका साथ देंगे। इसके अलावा उन्होंने दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यकों की एकता की भी बात की और इनके ऊपर होने वाले किसी भी अत्याचार के खिलाफ लड़ने का ऐलान किया।

Chandrashekhar Azad
ravan
bheem army
NSA
भीम आर्मी

Related Stories

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

यूपी चुनाव: कई दिग्गजों को देखना पड़ा हार का मुंह, डिप्टी सीएम तक नहीं बचा सके अपनी सीट

क्या मोदी की निरंकुश शैली आगे भी काम करेगी? 

डॉ. कफ़ील को ‘भड़काऊ भाषण’ मामले में राहत: “योगी सरकार की मनमानी पूरी तरह उजागर”

अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के 2 साल : क्या है जम्मू और कश्मीर में मानवाधिकारों का हाल?

बढ़ते मामलों के बीच राजद्रोह क़ानून को संवैधानिक चुनौतियाँ

जनतंत्र के लिए ख़तरा है पेगासस

रासुका के तहत गिरफ़्तार मणिपुर के राजनीतिक कार्यकर्ता न्यायालय के आदेश के बाद रिहा

गोरखनाथ मंदिर प्रकरण: क्या लोगों को धोखे में रखकर ली गई ज़मीन अधिग्रहण की सहमति?

भारत में मानवाधिकार और प्रेस की आज़ादी को लेकर जारी रिपोर्ट्स चिंताजनक क्यों हैं?


बाकी खबरें

  • Uttarakhand
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड: NIOS से डीएलएड करने वाले छात्रों को प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए अनुमति नहीं
    23 Oct 2021
    उत्तराखंड सरकार द्वारा नवंबर 2020 में प्राथमिक शिक्षक के 2287 पदों पर भर्ती के लिए सूचना जारी की गई थी, इसमें राज्य सरकार द्वारा इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से होने वाले डीएलएड को मान्य किया गया…
  • Supreme Court
    न्यूजक्लिक रिपोर्ट
    खोरी पुनर्वास संकट: कोर्ट ने कहा- प्रोविजनल एलॉटमेंट के समय कोई पैसा नहीं लिया जाएगा, फ़ाइनल एलॉटमेंट पर तय होगी किस्त 
    23 Oct 2021
    मजदूर आवास संघर्ष समिति ने कहा कि अस्वीकृत आवेदन की प्रकिया में अपारदर्शिता है एवं प्रार्थी को अपील का मौका न देना सरासर अत्याचार एवं धोखा है।
  • inflation
    अजय कुमार
    सरकारी आंकड़ों में महंगाई हो गई कम, ग़रीब जनता को एहसास भी नहीं हुआ! 
    23 Oct 2021
    आख़िर क्या वजह है कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों में कमी आने के बाद भी आम आदमी इस पर भरोसा नहीं कर पाता।
  • 100 crore vaccines
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेक: क्या भारत सचमुच 100 करोड़ टीके लगाने वाला दुनिया का पहला देश है?
    23 Oct 2021
    भारत न तो पहला देश है जिसने 100 करोड़ डोज़ लगाई है और न ही भारत का टीकाकरण विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान है।
  • shareel
    द लीफलेट
    सीएए विरोधी भाषण: भीड़ उकसाने के ख़िलाफ़ ‘अपर्याप्त और आधे-अधूरे सुबूत’, फिर भी शरजील इमाम को ज़मानत से इनकार
    23 Oct 2021
    दिल्ली की एक अदालत ने दिसंबर 2019 में राष्ट्रीय राजधानी में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA)-राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर अपने कथित भड़काऊ भाषण के सिलसिले में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License