NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अकाल से वीरान होता बुंदेलखंड
सौजन्य: संघर्ष संवाद
10 Dec 2015

भारत के सबसे मध्य में स्थित बुंदेलखंड एक बार पुनः मौसम की मार से तबाह हो रहा है। पिछले 15 वर्षों में से तकरीबन 11 वर्ष सूखे, असामयिक वर्षा, ओलावृष्टि या पाला गिरने से ग्रसित रहे हैं। बुंदेलखंड पलायन के अंतहीन भंवर में फंस गया है। शासन व प्रशासन की उदासीनता स्थानीय नागरिकों के जीवन को और अधिक संकट में डाल रही है। पेश है सप्रेस से साभार भारत डोगरा का आलेख;

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल के बांदा जिले के नरैनी ब्लाक के गुढ़ेपल्हा गांव में कमलेष के परिवार के लिए दो वक्त की रोटी की व्यवस्था करना निरंतर कठिन होता जा रहा था। अनेक गांववासी पहले ही मजदूरी के लिए पलायन कर चुके थे। वह भी मजबूरी में यही राह अपनाना चाह रहा था पर उसका 2 वर्ष का बच्चा बीमार था, इस कारण झिझक रहा था। अंत में उसने फैसला किया (या लेना पड़ा) कि चाहे बच्चा बीमार हो, पर परिवार का पेट भरने के लिए मजदूरी की तलाष में तो जाना ही पड़ेगा।

कमलेश अपनी पत्नी और बच्चे के साथ बस में बैठ गया। कुछ दूर जाने पर बच्चे की तबियत बिगड़ने लगी। लाचार माता-पिता देखते रह गए और बच्चे ने दम तोड़ दिया। जिस हालत में माता-पिता बच्चे को वापस लेकर गांव आए और दाह संस्कार किया उसे बयान करने के लिए हमारे पास शब्द नहीं हैं।

इसी ब्लाक के कटहेलपुरवा गांव में तुलसीदास नामक वृद्ध को गांव में छोड़कर उसका बेटा रोजी-रोटी की तलाष में पंजाब चला गया। तुलसीदास की तबियत अचानक बिगड़ने लगी एवं घर में इलाज के लिए पैसा भी नहीं था। उसकी पत्नी घबरा कर कुछ पैसे लेने मायके गई लेकिन उसी रात तुलसीदास की मृत्यु हो गई। अकेले होने के कारण किसी को उसकी मृत्यु हो जाने के बारे में तुरंत पता भी नहीं चला। देर से पता चलने पर उसके बेटे को तुरंत फोन से खबर की गई पर इतनी दूर से आने में देर लगी। उसके लौटने से पहले ही गांववासियों ने किसी तरह आपस में चंदा कर दाहसंस्कार किया।

मजदूरी के लिए दिल्ली, पंजाब, हरियाणा आदि विभिन्न स्थानों पर रोजगार के लिए  बुंदेलखंड  से जाने वाले किसानों व खेत-मजदूरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। उसके साथ ही गरीबी व तंगहाली की स्थिति में हो रहे इस पलायन से अनेक त्रासद घटनाएं जुड़ती जा रही हैं। जगह-जगह मजदूर अनिष्चित स्थिति में -ईंट भट्टों में, निर्माण स्थलों पर, खेत-खलिहानों में रोजगार के लिए भटक रहे हैं। उनकी मजबूरी का लाभ उठाकर प्रायः उन्हें कम मजदूरी दी जाती है। कई बार छोटे बच्चे भी अपने माता-पिता के साथ मजदूरी के लिए पलायन कर जाते हैं क्योंकि गांव से उनका ध्यान रखने वाला कोई नहीं है। गांव में बचे परिवारों के वृद्ध सदस्य भूख-प्यास, गर्मी व सर्दी की मार को झेलते हुए बेहद दर्दनाक जीवन जीने को मजबूर हैं।

बुँदेलखंड के कई गांवों में हाल की स्थिति पता करने पर गांववासियों ने बताया कि पिछली रबी की पकी-पकाई फसल असामयिक अतिवृष्टि व ओलावृष्टि से बुरी तरह उजड़ गई। खरीफ की फसल सूखे से बुरी तरह प्रभावित हुई थी। अब रबी की फसल की जल संकट के कारण बुवाई बहुत ही कम हुई है। अन्नदाता कहे जाने वाले किसान के घर में अपने खेत का कोई खाद्य नहीं बचा है। दूसरी ओर बाजार से खरीदने के लिए आमदनी नहीं है। अतः या तो कर्ज लेना पड़ रहा है या पलायन कर परिवार का पेट भरना ही एकमात्र विकल्प बचता है। उधर पषुओं के लिए की चारे का गंभीर संकट है। यदि वर्षा न हुई तो दो-तीन महीने में पेयजल संकट भी मनुष्य और पषुओं दोनों के लिए विकट स्थिति उत्पन्न कर देगा।

ऐसी विकट स्थिति में भी रोजगार गारंटी या मनरेगा का कार्यक्रम ठप्प पड़ा है। अनेक मजदूरों को बहुत पहले की गई मजदूरी का भुगतान अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। आंगनवाड़ी जैसे पोषण कार्यक्रम में भी कमी  आई है। किसानों व अन्य गांववासियों को गंभीर संकट का सामना करने के लिए शासन एवं प्रशासन ने अपने हाल पर छोड़ दिया गया।

एक बच्चे ने बात करने पर बताया कि वह स्कूल न जाकर जंगल में बेर बीनने जाता है ताकि पेट भर सके। डरते डरते मैंने उससे पूछा कि अंतिम बार दूध कब पिया था तो उसने कहा कोई तीन वर्ष पहले। एक गोष्ठी में मैंने कुछ किसानों से बातचीत की इसके बाद सबने एक साथ भोजन किया। भोजन में दाल-चावल था। कुछ सहमते हुए मैंने अपने साथ बैठे हुए किसान से पूछा कि क्या गांव में भी भोजन में दाल खाते हो ? तो उसने कहा कि दाल तो अब सपना है। इस पर मैंने पूछा कि इससे पहले दाल कब खाई थी तो उसने बताया कि कोई दो महीने पहले। इसके बाद उसने कहा, “यदि मैं आज यहां न आता तो शायद और न मालूम कितने ही दिन तक दाल न चख पाता।”

कुछ गांवों में पूछा कि दाल-सब्जी रहने दो। दोनों वक्त पेट भरने को रोटी कितने परिवार खा पा रहे हैं ?  इस पर लोगों ने बताया कि दो-तिहाई से अधिक परिवारों को यह भी प्राप्त नहीं हो पा रहा है।

ऐसी परिस्थिति में यह बहुत जरूरी हो जाता है कि सूखा व आपदा प्रभावित क्षेत्रों के दुख-दर्द को दूर करने को मुख्य प्राथमिकता बनाया जाए व सरकार बड़े पैमाने पर मनरेगा व सूखा राहत से संबंधित अन्य कार्य शीघ्र आरंभ करे। साथ ही यह भी सुनिश्चित करे कि इसका क्रियान्वयन पूरी ईमानदारी से हो। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं व विद्याधाम समिति जैसी कुछ संस्थाओं ने इन गांवों में अनाज बैंक व भूसा बैंक स्थापित किया है जिनसे लोगों को थोड़ी बहुत राहत भी मिली है। नागरिक संगठनो इस तरह के प्रयासों को को और व्यापक स्तर पर बढ़ाना चाहिए।

बुंदेलखंड से जिन क्षेत्रों में पलायन हो रहा है, उन क्षेत्रों जैसे दिल्ली आदि में सर्दी का सामना करने के लिए आश्रय उपलब्ध करवाने की बेहतर तैयारियां करनी जरूरी है। ऐसी संस्थाओं के पते व फोन नं. पलायन वाले गांवों में पहले से उपलब्ध होने चाहिए जो इन्हें आश्रय प्राप्त करने में मदद दे सकती हैं।

सौजन्य: संघर्ष संवाद 

 

डिस्क्लेमर:- उपर्युक्त लेख में वक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं, और आवश्यक तौर पर न्यूज़क्लिक के विचारों को नहीं दर्शाते ।

बुंदेलखंड
उत्तर प्रदेश
भूमिअधिग्रहण
किसान आत्महत्या

Related Stories

उप्र बंधक संकट: सभी बच्चों को सुरक्षित बचाया गया, आरोपी और उसकी पत्नी की मौत

नागरिकता कानून: यूपी के मऊ अब तक 19 लोग गिरफ्तार, आरएएफ और पीएसी तैनात

यूपी-बिहार: 2019 की तैयारी, भाजपा और विपक्ष

सोनभद्र में चलता है जंगल का कानून

यूपीः मेरठ के मुस्लिमों ने योगी की पुलिस पर भेदभाव का लगाया आरोप, पलायन की धमकी दी

चीनी क्षेत्र के लिए केंद्र सरकार का पैकेज, केवल निजी मिलों को एक मीठा तोहफ़ा

मध्यप्रदेश 10-दिन का गाँव बंद : विरोध के पहले सप्ताह में तीन किसानों ने आत्महत्या की

चंद्रशेखर आज़ाद 'रावण’ जेल में बंद, भीम आर्मी द्वार लोगों को संगठित करने का प्रयास जारी

डॉक्टर कफील ने कहा ऑक्सीज़न की कमी ने बच्चों की मौतों में किया था इज़ाफा

भीम आर्मी नेता के भाई की हत्या के बाद सहारनपुर में तनाव


बाकी खबरें

  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    जम्मू-कश्मीर परिसीमन से नाराज़गी, प्रशांत की राजनीतिक आकांक्षा, चंदौली मे दमन
    07 May 2022
    हफ़्ते की बात के इस अंक में वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश बात कर रहे हैं जम्मू-कश्मीर के परिसीमन की। साथ ही वे नज़र डाल रहे हैं प्रशांत किशोर की राजनीतिक सियासत की।
  • रवि शंकर दुबे
    तीन राज्यों में उपचुनाव 31 मई को: उत्तराखंड में तय होगा मुख्यमंत्री धामी का भविष्य!
    07 May 2022
    चुनाव आयोग ने तीन राज्यों की तीन सीटों पर विधानसभा चुनावों की तारीख घोषित कर दी है, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण उत्तराखंड की चंपावत सीट को माना जा रहा है। क्योंकि यहां से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी…
  • पीपुल्स डिस्पैच
    पाकिस्तान में बलूच छात्रों पर बढ़ता उत्पीड़न, बार-बार जबरिया अपहरण के विरोध में हुआ प्रदर्शन
    07 May 2022
    राष्ट्रीय राजधानी इस्लामाबाद में पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) के परिसर से दिन दहाड़े एक बलूच छात्र बेबाग इमदाद को उठाए जाने के बाद कई छात्र समूहों ने इसके विरोध में प्रदर्शन किया।
  • राहुल कुमार गौरव
    पिता के यौन शोषण का शिकार हुई बिटिया, शुरुआत में पुलिस ने नहीं की कोई मदद, ख़ुद बनाना पड़ा वीडियो
    07 May 2022
    पीड़ित बेटी ने खुद अपने पिता की गंदी करतूत का वीडियो बनाया और फिर उसे लेकर थाने पहुंची। पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस ने गुरुवार को 50 वर्षीय आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन पीड़िता को अपने…
  • सुबोध वर्मा
    ओडिशा: अयोग्य शिक्षकों द्वारा प्रशिक्षित होंगे शिक्षक
    07 May 2022
    शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए उपलब्ध 8 कॉलेजों में 62 फैकल्टी हैं, जिनमें से सिर्फ 20 रेगुलेटरी बॉडी की योग्यता के मानदंडों को पूरा करते हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License