NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आख़िर कब तक? कितनी नेहा, कितनी संजलि…
वाकई सवाल महत्वपूर्ण है हम कब तक कभी ‪#‎JusticeForNirbhya, ‪#‎JusticeForAasifa, ‪#‎JusticeForSanjali #JusticeForNeha हैशटैग मुहिम चलाते रहेंगे।
मुकुल सरल
24 Dec 2018
सांकेतिक तस्वीर

कुछ भी नहीं बदला है। 2012 के बाद भी नहीं, “2014” के बाद भी नहीं। निर्भया कांड की छठी बरसी के दिन ही उत्तराखंड में छात्रा नेहा को ज़िंदा जला दिया गया और उसके दो दिन बाद ही उत्तर प्रदेश के आगरा में दलित छात्रा संजलि को दबंगों ने आग लगा दी। दोनों ही जगह “डबल इंजन” की सरकार है। यानी बीजेपी की सरकार। जिसके लिए प्रधानमंत्री दावा करते थे कि केंद्र के साथ अगर राज्यों में भी बीजेपी की सरकार होगी तो इन राज्यों की सूरत बदल जाएगी। लेकिन नहीं...सूरत बदली नहीं बल्कि और बिगड़ गई है। उत्तराखंड जैसे शांत इलाके में भी इतनी विभत्स घटना हुई।

गढ़वाल विश्वविद्यालय के पौड़ी कैम्पस में बीते 16 दिसंबर को बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा नेहा कॉलेज से प्रैक्टिकल देकर स्कूटी से गांव लौट रही थी। बताया जाता है कि तभी छात्रा का पीछा करते हुए टैक्सी चालक उसके साथ छेड़खानी करने लगा। इसका विरोध करने पर चालक ने छात्रा पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। गंभीर झुलसी हालत में नेहा को पहले पौड़ी, ऋषिकेश और फिर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बचाया न जा सका। रविवार को नेहा ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।

उत्तराखंड में भाकपा माले के नेता इंद्रेश मैखुरी इस घटना पर गहरा दु:ख और गुस्सा जताते हुए कहते हैं कि पहले-पहल इसे एकतरफा प्रेम का मामला बताया गया। लेकिन एक शादीशुदा आदमी का यह कैसा प्रेम है, जिसमें हत्या करने में भी हाथ नहीं कांपते?

ऐसी ही एक घटना कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के आगरा में हुई, जहां दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा संजलि को कुछ दरिंदों ने पेट्रोल छिड़क कर जला दिया और फिर उसने दम तोड़ दिया। वहाँ तो अपराधी भी अब तक गिरफ्तार नहीं किए जा सके हैं।

इसे भी पढ़ें : दलित छात्रा संजलि को इंसाफ के लिए भीम आर्मी आगे आई, भारत बंद की चेतावनी

sanjali case.jpg

आपको बता दें कि आगरा से 20 किलोमीटर दूर ललाउ गांव के पास 18 दिसंबर को बाइक सवार दो युवकों ने संजलि को रोक कर उसके ऊपर पेट्रोल छिड़कर उसे आग लगा दी। वह उस समय ललाउ गांव में घर जा रही थी। गंभीर हालत में पहले उसे आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया जहां से उसे दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल भेज दिया गया जहां 36 घंटों तक जिंदगी के लिए संघर्ष करने के बाद 19 दिसंबर की रात उसने दम तोड़ दिया।

संजलि दसवीं की छात्रा थी। बताया जाता है कि संजलि को आग लगाने के बाद एक दरिंदे ने उसकी मां को फोन करके ये भी कहा कि मैंने उसे आग लगा दी है, बचा सको तो बचा लो। इससे ही समझा जा सकता है कि दबंगों के हौसले किस कदर बुलंद हैं।

इंद्रेश मैखुरी सवाल करते हैं कि आखिर ये कौन लोग हैं, जिनके लिए किसी लड़की पर पेट्रोल छिड़कना और आग लगाना,इतना सरल है? क्या इनके हाथ नहीं कांपते होंगे? लड़कियां को तो हर वक्त बदनामी का डर घेरे रहता है। इन्हें बदनामी का डर नहीं लगता होगा, जेल जाने का भय भी नहीं होता होगा?

इसे भी पढ़ें : आगरा में बीटेक की छात्रा से गैंगरेप

अगर एक के बाद एक ऐसी घटनाएं देश के हर हिस्से में सुनाई दे रही हैं तो एक समाज के तौर पर सोचने की जरूरत है कि हालात ऐसे भयावह मोड़ तक कैसे पहुँच गए?

उनके मुताबिक एक के बाद एक घट रही ऐसी घटनाएं यह दर्शा रही है कि “फांसी दो,फांसी दो” चिल्लाने मात्र से यह हल होने वाला नहीं है। गंभीर रूप से चिंतन करने की जरूरत है कि ऐसी घटनाओं की जड़ें हैं कहाँ। समाज के ढांचे को देखिये। अगर हम घर-परिवार-समाज से लेकर विज्ञापनों और फिल्मों तक लड़कियों/महिलाओं को सिर्फ वस्तु ही समझते हैं तो किसी भी सिरफिरे को लगता है कि लड़की की हाँ-न का कोई अर्थ नहीं है। वह तो वस्तु है, जिस पर किसी भी शोहदे का स्वाभाविक अधिकार है। हमारे समाज में लड़की की इज़्ज़त किसी भी क्षण, किसी भी बात पर जा सकती है, पर बलात्कारी की इज़्ज़त नहीं जाती!

मैखुरी कहते हैं कि जलाने-घेर कर मारने की संस्कृति तो अपने चरम पर है ही, जो भी कमजोर है, उसे कोई भी घेर कर मार सकता है, जला सकता है। जब जलाना, मारना सामान्य होने लगेगा तो फिर किसी भी सिरफिरे को ऐसा हौसला क्यूँ नहीं होगा कि वह किसी लड़की को जला भी देगा तो उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा ?

निरंतर सामने आती ऐसी दरिंदगी को रोका नहीं गया तो ऐसा न हो कि एक समाज के तौर पर हम ऐसी घटनाओं के प्रति ही संवेदना शून्य न हो जाएं। लड़कियों को तो मारे जाने से बचाने की जरूरत है ही, मनुष्य और मनुष्यता को भी मरने से बचाने के लिए भी तत्काल पहल करने की जरूरत है।

48409555_1199323680223072_7577577269523120128_n.jpg

वाकई सवाल महत्वपूर्ण है हम कब तक कभी ‪#‎JusticeForNirbhya, ‪#‎JusticeForAasifa,  ‪#‎JusticeForSanjali  #JusticeForNeha हैशटैग मुहिम चलाते रहेंगे। मोमबत्तियां जलाते रहेंगे, जुलूस निकालते रहेंगे। आख़िर कब बदलेगी ये सूरत...आख़िर कब...?

इसे भी पढ़ें : महिलाओं के लिए वास्तव में ख़तरनाक होता जा रहा है उत्तर प्रदेश

बताया जा रहा है कि नेहा की मौत की ख़बर सुनकर उनकी मां को भी दिल का दौरा पड़ा है और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। उधर संजलि की मां ने मुआवज़े का प्रस्ताव ठुकराते हुए बेटी को इंसाफ के लिए अनशन शुरू कर दिया है।


बाकी खबरें

  • brooklyn
    एपी
    ब्रुकलिन में हुई गोलीबारी से जुड़ी वैन मिली : सूत्र
    13 Apr 2022
    गौरतलब है कि गैस मास्क पहने एक बंदूकधारी ने मंगलवार को ब्रुकलिन में एक सबवे ट्रेन में धुआं छोड़ने के बाद कम से कम 10 लोगों को गोली मार दी थी। पुलिस हमलावर और किराये की एक वैन की तलाश में शहर का चप्पा…
  • non veg
    अजय कुमार
    क्या सच में हिंदू धर्म के ख़िलाफ़ है मांसाहार?
    13 Apr 2022
    इतिहास कहता है कि इंसानों के भोजन की शुरुआत मांसाहार से हुई। किसी भी दौर का कोई भी ऐसा होमो सेपियंस नही है, जिसने बिना मांस के खुद को जीवित रखा हो। जब इंसानों ने अनाज, सब्जी और फलों को अपने खाने में…
  • चमन लाल
    'द इम्मोर्टल': भगत सिंह के जीवन और रूढ़ियों से परे उनके विचारों को सामने लाती कला
    13 Apr 2022
    कई कलाकृतियों में भगत सिंह को एक घिसे-पिटे रूप में पेश किया जाता रहा है। लेकिन, एक नयी पेंटिंग इस मशहूर क्रांतिकारी के कई दुर्लभ पहलुओं पर अनूठी रोशनी डालती है।
  • एम.के. भद्रकुमार
    रूस पर बाइडेन के युद्ध की एशियाई दोष रेखाएं
    13 Apr 2022
    यह दोष रेखाएं, कज़ाकिस्तान से म्यांमार तक, सोलोमन द्वीप से कुरील द्वीप समूह तक, उत्तर कोरिया से कंबोडिया तक, चीन से भारत, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान तक नज़र आ रही हैं।
  • ज़ाहिद खान
    बलराज साहनी: 'एक अपरिभाषित किस्म के कम्युनिस्ट'
    13 Apr 2022
    ‘‘अगर भारत में कोई ऐसा कलाकार हुआ है, जो ‘जन कलाकार’ का ख़िताब का हक़दार है, तो वह बलराज साहनी ही हैं। उन्होंने अपनी ज़िंदगी के बेहतरीन साल, भारतीय रंगमंच तथा सिनेमा को घनघोर व्यापारिकता के दमघोंटू…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License