NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिकी दृष्टिकोणः दुनिया को अधिक से अधिक हथियार बेचना
यमन में हर दस मिनट में एक बच्चा मर जाता है। सऊदी और अमीरात सरकारों की तरह लॉकहीड मार्टिन को इन मौतों के लिए कठघरा में होना चाहिए।
विजय प्रसाद
27 Jul 2018
Donald Trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आर्थिक राष्ट्रवाद को अपने राजनीतिक एजेंडे का केंद्र बिंदु बना दिया है। 'मेड इन अमेरिका' उनका एक मापदंड है। व्यापार युद्ध उनके शस्त्रागार का हिस्सा हैं। पिछले महीने व्हाइट के नज़दीक ट्रम्प ने अपने सलाहकारों से नए दृष्टिकोण को मज़बूत करने के लिए मुलाक़ात की। ये दृष्टिकोण है दुनिया भर में अधिक से अधिक हथियार बेचना।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्र स्थिर हो सकते हैं लेकिन हथियार उद्योग तेज़ी से बढ़ रहा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट(एसआईपीआरआई) के मुताबिक़ अमेरिकी हथियार निर्यात 2013 से 2017 तक 25% तक बढ़ गया। संयुक्त राज्य अमेरिका कुल हथियार निर्यात अब का एक तिहाई से अधिक है। एसआईपीआरआई डेटा के आधार पर विल गेरी द्वारा बनाए गए वीडियो में दिखाया गया कि साल 1975 से हथियार का व्यापार बढ़ गया है। उदाहरण के लिए जब एक समय इस महाद्वीप पर तानाशाही ने शासन किया था तब इन हथियारों की लैटिन अमेरिका में बिक्री के ट्रैक को देखना अपरिहार्य है। उस समय मानवाधिकारों की कोई चिंता नहीं थी। न ही भविष्य में कोई चिंता होगी।

ट्रम्प के आर्थिक सलाहकार पीटर नवारो ने हथियारों के क्षेत्र में विनियमन पर जितना संभव हो उतना ज़ोर दिया है। नवारो की देखरेख में नई नीति अमेरिकी सरकार को अन्य देशों को हथियार व्यापार की मंज़ूरी देने, मानव अधिकारों की चिंताओं को ख़ारिज करने और हथियार विकास के बोझ को निजी निगमों से अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय को आंशिक रूप से हस्तानांतरित करने की अनुमति देगा।

मानवाधिकार समूहों के दबाव में ओबामा प्रशासन ने 2014 के पारंपरिक हथियार स्थानांतरण नीति वक्तव्य में एक महत्वपूर्ण अंश जोड़ा था। इस अंश में कहा गया कि अमेरिका उन देशों को हथियार नहीं बेचेगा जो 'नागरिक वस्तुओं या नागरिकों के ख़िलाफ़ हमले' करते हैं। ट्रम्प प्रशासन ने अप्रैल के अपने नीति वक्तव्य में इस अंश में केवल एक शब्द जोड़ा। वे शब्द थे 'जानबूझकर'। यदि नागरिकों पर हमलों को ग़ैर-इरादतन माना लिया जाता है तो हथियारों की बिक्री उचित है। नागरिकों की हत्या का जानबूझकर फैसला कौन करेगा स्पष्ट नहीं किया गया है।

लीबिया पर नाटो के 2011 के युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र द्वारा उस देश में नागरिकों की मौत के बारे में सवाल उठाया गया था। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग इन मौतों की जांच करने के लिए तैयार था। इसने नाटो से जांच में सहयोग करने को कहा था। नाटो के वकील पीटर ओल्सन ने जवाब में लिखा था कि नाटो कोई सहयोग नहीं करेगा। इसके बजाय ओल्सन ने फरवरी 2012 में लिखा था, नाटो को उम्मीद थी कि 'लीबिया में नाटो कार्रवाई की चर्चा शामिल करने का चयन आयोग ने उक्त कार्यक्रम में किया है, इसकी रिपोर्ट स्पष्ट रूप से बताती है कि नाटो ने जानबूझकर नागरिकों को निशाना नहीं बनाया और लीबिया में युद्ध अपराध (वार क्राइम) नहीं किया।' इसका मतलब है कि नाटो को खुद ब खुद युद्ध अपराधों की संभावना से परे देखा जाएगा। यदि यह नाटो द्वारा तैयार किया गया मानक है तो जानबूझकर युद्ध अपराधों के बारे में किसी भी निर्णय के लिए यह कैसे संभव है? ट्रम्प प्रशासन द्वारा जोड़ा गया एक शब्द मानव अधिकारों और हथियारों की बिक्री के बारे में पहले से ही मौजूद हस्यास्पद नीति का मज़ाक उड़ाता है।

इस नई नीति के लाभार्थी हथियारों के बड़े निर्माता होंगे: बोइंग, लॉकहीड मार्टिन, रेथियॉन, जनरल डाइनेमिक्स कॉर्पोरेशन, यूनाइटेड टेक्नोलॉजीज और नॉर्थ्रोप ग्रूमैन। ये छह कंपनियां इस दुनिया में आठ सबसे बड़े हथियारों के डीलरों में से हैं (दो कंपनियां जो अमेरिकी कंपनियां नहीं हैं वह ब्रिटिश हथियार डीलर बीएई सिस्टम और यूरोपीय हथियार डीलर एयरबस हैं)। ये निजी कंपनियां दुनिया के 167 देशों को हथियार बेचती हैं।

इसका केंद्र यमन है जहां सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात इस ग़रीब देश के ख़िलाफ़ निर्मम युद्ध कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में कहा है कि यमन दुनिया का सबसे बुरा मानवीय संकट बन गया है। इस देश की आबादी का तीन चौथाई यानी लगभग 22 मिलियन लोग भूख और बीमारी के बीच ख़तरनाक स्थिति में जी रहे हैं। इस आबादी का आधा यानी 11 मिलियन से अधिक बच्चे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि यमन के लगभग सभी बच्चों पर सऊदी और संयुक्त अरब अमीरात के बमवर्षक युद्ध से प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

मार्च में अमेरिकी सरकार ने सऊदी अरब के साथ 1 बिलियन डॉलर के हथियार सौदे को मंजूरी दी थी। यमन युद्ध के चलते सऊदी अरब को हथियारों की बिक्री रोकने के लिए अमेरिकी सीनेट में एक प्रस्ताव को सांसदों द्वारा नज़रअंदाज़ कर दिया गया। लेकिन यह बिक्री पिछले आधे दशक में सऊदी अरब को बेचने के मुक़ाबले कम थी। इस अवधि में इस देश को हथियारों की बिक्री 225% तक बढ़ी। पिछले मई में जब ट्रम्प सऊदी अरब में थे तो अमेरिकी कंपनियों ने हथियारों की बिक्री के लिए 110 बिलियन डॉलर के सौदे का क़रार किया। सऊदी अरब अमेरिकी हथियारों का सबसे बड़ा ख़रीदार है।

कुल हथियारों की बिक्री का आधा मध्य पूर्व को जाता है। यह कथित तौर पर समझने योग्य है कि कट्टरपंथ की बजाय हथियारों की बिक्री मध्य पूर्व में संघर्ष को बढ़ावा देती है।

यूएस नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने एक बयान में कहा है कि ट्रम्प प्रशासन का इरादा यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक बाजार में अमेरिकी बाज़ार के पास हर प्रकार का लाभ है। इसका मतलब है कि ट्रम्प प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि अमेरिकी हथियारों के निर्माताओं की एकाधिकार स्थिति बनाए रखा जाए और यह पूरी धरती पर संघर्ष को जारी रखने के लिए उसमें घी डालता रहेगा। साल 2015 में नोआम चॉम्स्की ने कहा था कि संयुक्त राज्य अमेरिका 'दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी' है। यही वह चीज है जो उसके मन में था। अमेरिकी हथियार कंपनियों द्वारा बम बनाया जाता है, व्हाइट हाउस द्वारा प्रचारित किया जाता है, जो यमन जैसे स्थानों पर नागरिकों को मारता है।

यमन में हर दस मिनट में एक बच्चा मर जाता है। सऊदी और अमीरात सरकारों की तरह लॉकहीड मार्टिन को उन मौतों के लिए कठघरा होना चाहिए।

USA Weapon Industry
Donald Trump
Saudi Arabia
USA Lockheed Martin
NATO

Related Stories

बाइडेन ने यूक्रेन पर अपने नैरेटिव में किया बदलाव

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत

खाड़ी में पुरानी रणनीतियों की ओर लौट रहा बाइडन प्रशासन

फ़िनलैंड-स्वीडन का नेटो भर्ती का सपना हुआ फेल, फ़िलिस्तीनी पत्रकार शीरीन की शहादत के मायने

यूक्रेन में संघर्ष के चलते यूरोप में राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 

सऊदी अरब के साथ अमेरिका की ज़ोर-ज़बरदस्ती की कूटनीति

नाटो देशों ने यूक्रेन को और हथियारों की आपूर्ति के लिए कसी कमर

रूस ने पश्चिम के आर्थिक प्रतिबंधों का दिया करारा जवाब 

मारियुपोल की जंग आख़िरी पड़ाव पर


बाकी खबरें

  • ganguli and kohli
    लेस्ली ज़ेवियर
    कोहली बनाम गांगुली: दक्षिण अफ्रीका के जोख़िम भरे दौरे के पहले बीसीसीआई के लिए अनुकूल भटकाव
    19 Dec 2021
    दक्षिण अफ्रीका जाने के ठीक पहले सौरव गांगुली बनाम विराट कोहली की टसल हमारी टीवी पर तैर रही है। यह टसल जितनी वास्तविक है, यह इस तथ्य पर पर्दा डालने के लिए भी मुफ़ीद है कि भारतीय टीम ऐसे देश का दौरा कर…
  • modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू
    19 Dec 2021
    सरकार जी उतनी गंभीरता, उतना दिमाग सरकार चलाने में नहीं लगाते हैं जितना पूजा-पाठ करने में लगाते हैं। यह पूजा-पाठ चुनाव से पहले तो और भी अधिक बढ़ जाता है। बिल्कुल ठीक उसी तरह, जिस तरह से किसी ऐसे छात्र…
  • teni
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे : जयपुर में मौका चूके राहुल, टेनी को कब तक बचाएगी भाजपा और अन्य ख़बरें
    19 Dec 2021
    सवाल है कि अजय मिश्र को कैसे बचाया जाएगा? क्या एसआईटी की रिपोर्ट के बाद भी उनका इस्तीफा नहीं होगा और उन पर मुकदमा नहीं चलेगा?
  • amit shah
    अजय कुमार
    अमित शाह का एक और जुमला: पिछले 7 सालों में नहीं हुआ कोई भ्रष्टाचार!
    19 Dec 2021
    यह भ्रष्टाचार ही भारत के नसों में इतनी गहराई से समा चुका है जिसकी वजह से देश का गृह मंत्री मीडिया के सामने खुल्लम-खुल्ला कह सकता है कि पिछले 7 सालों में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ।
  • A Critique of Capitalism’s Obscene Wealth
    रिचर्ड डी. वोल्फ़
    पूंजीवाद की अश्लील-अमीरी : एक आलोचना
    19 Dec 2021
    पूंजीवादी दुनिया में लगभग हर जगह ग़ैर-अमीर ही सबसे ज़्यादा कर चुकाते हैं और अश्लील-अमीरों की कर चोरी के कारण सार्वजनिक सेवाओं में होने वाली कटौतियों की मार बर्दाश्त करते रहते हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License