NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
AMU को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जा सकता है या नहीं ? सुप्रीम कोर्ट में सात जजों की संविधान पीठ करेगी तय
मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन जजों पीठ ने शैक्षणिक संस्थानों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने के मापदंडों को परिभाषित करने के लिए मामले को बड़ी पीठ के पास भेज दिया
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
14 Feb 2019
amu
image courtesy- india today

सुप्रीम कोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ( AMU) को अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने के मामले को सात जजों की संविधान पीठ को रैफर कर दिया। अब सात जजों की पीठ को तय करना है कि संसद के कानून से किसी संस्थान को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जा सकता है या नहीं।

मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन जजों पीठ ने शैक्षणिक संस्थानों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने के मापदंडों को परिभाषित करने के लिए मामले को बड़ी पीठ के पास भेज दिया। दरअसल तत्कालीन यूपीए की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2006 के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी जिसमें कहा गया था कि AMU अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है।

विवि प्रशासन ने भी इस मुद्दे पर उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ एक अलग याचिका दायर की थी। इससे पहले केंद्र की NDA सरकार ने 2016 में शीर्ष अदालत से कहा था कि वह पूर्ववर्ती यूपीए सरकार द्वारा दायर अपील को वापस ले रही है। सरकार ने कहा कि अजीज बाशा मामले में 1967 में पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ ने कहा था कि AMU एक "केंद्रीय विश्वविद्यालय" है और ये अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है।

1967 के फैसले के बाद AMU (संशोधन) अधिनियम, 1981 लागू किया गया। हलफनामे में 1967 में अजीज बाशा केस में संविधान पीठ के जजमेंट को आधार बनाया जिसने कहा था कि AMU को केंद्र सरकार ने बनाया था ना कि मुस्लिमों ने। केंद्र ने यह भी स्टैंड लिया है कि AMU या संसदीय अधिनियम या राज्य अधिनियम द्वारा गठित किसी भी संस्था को अल्पसंख्यक का दर्जा देना संविधान के अनुच्छेद 15 के विपरीत होगा, जो धर्म के आधार पर राज्य द्वारा भेदभाव को रोकता है।

 केंद्र ने यूपीए सरकार के वक्त HRD मंत्रालय के उन पत्रों को भी वापस ले लेने की बात की जिनमें फैक्लटी आफ मेडिसिन में मुस्लिमों को 50 फीसदी आरक्षण दिया गया था। केंद्र ने 1967 के सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के खिलाफ 1981 में संसद में संशोधन बिल पास करते हुए AMU को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया।उसे भी केंद्र सरकार ने गलत ठहराया। हलफनामे में कहा गया कि इस तरह कोर्ट के जजमेंट को निष्प्रभावी करने के लिए संशोधन करना संवैधानिक ढांचे के खिलाफ है। वहीं AMU ने हलफनामा वापस लेने का विरोध करते हुए कहा कि ये स्पष्ट है कि सरकार बदलने से उसका रुख नहीं बदल सकता। जनवरी 2006 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अधिनियम के उस प्रावधान को रद्द कर दिया था जिसके द्वारा विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया था।

 

( इस खबर के इनपुट लाइव लॉ से लिए गए हैं )    

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Aligarh Muslim university
Muslim
minority
supreme court decision on amu
minority educational institution

Related Stories

अलीगढ़ : कॉलेज में नमाज़ पढ़ने वाले शिक्षक को 1 महीने की छुट्टी पर भेजा, प्रिंसिपल ने कहा, "ऐसी गतिविधि बर्दाश्त नहीं"

विशेष: कौन लौटाएगा अब्दुल सुब्हान के आठ साल, कौन लौटाएगा वो पहली सी ज़िंदगी

जहांगीरपुरी: दोनों समुदायों ने निकाली तिरंगा यात्रा, दिया शांति और सौहार्द का संदेश!

जब जहांगीरपुरी में बुलडोज़र के सामने खड़ी हो गईं बृंदा करात...

मुसलमानों के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा पर अखिलेश व मायावती क्यों चुप हैं?

मेरे मुसलमान होने की पीड़ा...!

भारत को अपने पहले मुस्लिम न्यायविद को क्यों याद करना चाहिए 

ओवैसी की AIMIM, मुसलमानों के लिए राजनीतिक विकल्प या मुसीबत? 

हिटलर से प्रेरित है 'कश्मीर फाइल्स’ की सरकारी मार्केटिंग, प्रधानमंत्री से लेकर कार्यकर्ता तक

सद्भाव बनाए रखना मुसलमानों की जिम्मेदारी: असम CM


बाकी खबरें

  • Hijab Verdict
    न्यूज़क्लिक टीम
    मुसलमानों को अलग थलग करता है Hijab Verdict
    17 Mar 2022
  • fb
    न्यूज़क्लिक टीम
    बीजेपी के चुनावी अभियान में नियमों को अनदेखा कर जमकर हुआ फेसबुक का इस्तेमाल
    17 Mar 2022
    गैर लाभकारी मीडिया संगठन टीआरसी के कुमार संभव, श्रीगिरीश जलिहाल और एड.वॉच की नयनतारा रंगनाथन ने यह जांच की है कि फेसबुक ने अपने प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल होने दिया। मामला यह है किसी भी राजनीतिक…
  • Russia-Ukraine war
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या है रूस-यूक्रेन जंग की असली वजह?
    17 Mar 2022
    रूस का आक्रमण यूक्रेन पर जारी है, मगर हमें इस जंग की एक व्यापक तस्वीर देखने की ज़रूरत है। न्यूज़क्लिक के इस वीडियो में हमने आपको बताया है कि रूस और यूक्रेन का क्या इतिहास रहा है, नाटो और अमेरिका का…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    झारखंड में चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीज़ों का बढ़ता बोझ : रिपोर्ट
    17 Mar 2022
    कैग की ओर से विधानसभा में पेश हुई रिपोर्ट में राज्य के जिला अस्पतालों में जरूरत के मुकाबले स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी का खुलासा हुआ है।
  • अनिल जैन
    हिटलर से प्रेरित है 'कश्मीर फाइल्स’ की सरकारी मार्केटिंग, प्रधानमंत्री से लेकर कार्यकर्ता तक
    17 Mar 2022
    एक वह समय था जब भारत के प्रधानमंत्री अपने समय के फिल्मकारों को 'हकीकत’, 'प्यासा’, 'नया दौर’ जैसी फिल्में बनाने के लिए प्रोत्साहित किया करते थे और आज वह समय आ गया है जब मौजूदा प्रधानमंत्री एक खास वर्ग…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License