NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अनुच्छेद 370 पर जम्मू कश्मीर पीपुल्स कांफ्रेस की याचिका पर विचार के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार
जम्मू कश्मीर पीपुल्स कांफ्रेन्स ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को रद्द करने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के केन्द्र को निर्णय को चुनौती दी है और राज्य पुनर्गठन कानून तथा राष्ट्रपति के आदेश को ‘असंवैधानिक और शून्य’ घोषित करने का अनुरोध किया है।
भाषा
16 Sep 2019
SC

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाए जाने के फैसले और राज्य में लगे राष्ट्रपति शासन के खिलाफ ‘जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्‍फ्रेंस’ (जेकेपीसी) की याचिका पर सुनवाई के लिए सोमवार को तैयार हो गया।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस. ए. बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की एक पीठ ने जेकेपीसी की याचिका को अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाए जाने के फैसले और राज्य में लगे राष्ट्रपति शासन के खिलाफ पहले से ही लंबित याचिकाओं के साथ संलग्न कर दिया। इन सभी याचिकाओं को पहले ही पांच सदस्यीय संविधान पीठ को सौंपा जा चुका है।

हालांकि, पीठ ने इस मामले में दूसरी नई याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि वह अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं की संख्या बढ़ाने के पक्ष में नहीं है।  पीठ ने कहा कि इस मामले में जो भी बहस करना चाहते हैं, वे पक्षकार बनने के लिए आवेदन दायर कर सकते हैं।

पीठ ने इस मामले में दायर अनेक याचिकाओं का जिक्र करते हुए कहा, ‘हम विधायी कार्रवाई की वैधता की जांच कर रहे हैं।’ पीठ ने कहा कि इन सभी याचिकाओं पर संविधान पीठ अक्टूबर के पहले सप्ताह में सुनवाई करेगी।

जम्मू कश्मीर पीपुल्स कांफ्रेन्स के वकील ने जब अपनी याचिका पर विचार करने का अनुरोध किया तो पीठ ने कहा, ‘आपको इस न्यायालय में पहले आना चाहिए था।’

जम्मू कश्मीर पीपुल्स कांफ्रेन्स ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने संबंधी अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को रद्द करने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के केन्द्र को निर्णय को चुनौती दी है और राज्य पुनर्गठन कानून तथा राष्ट्रपति के आदेश को ‘असंवैधानिक और शून्य’ घोषित करने का अनुरोध किया है।

इस पार्टी ने कहा है कि राज्य जून 2018 से संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन के अंतर्गत है और राज्यपाल राज्य सरकार के रोजमर्रा के निर्णय लेते हैं जो राष्ट्रपति के प्रतिनिधि हैं।

राज्य के संवैधानिक दर्जे में किये गये बदलावों को नेशनल कांफ्रेन्स के बाद शीर्ष अदालत में चुनौती देने वाला जम्मू कश्मीर पीपुल्स कांफ्रेन्स दूसरी राजनीतिक दल है।  नेशनल कांफ्रेन्स के दो सांसदों मोहम्मद अकबर लोन और सेवानिवृत्त न्यायाधीश हसनैन मसूदी ने केन्द्र के निर्णय के खिलाफ याचिका दायर कर रखी है। अकबर लोन राज्य विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष हैं जबकि हसनैन मसूदी जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश हैं।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में मसूदी ने ही 2015 में अपने फैसले में व्यवस्था दी थी कि अनुच्छेद 370 संविधान का स्थाई अंग है।  जम्मू कश्मीर पीपुल्स कांफ्रेन्स ने अपनी याचिका में कहा है कि राज्य के राज्यपाल ने समूचे राष्ट्र को अंधेरे में रखा और देश को इसकी जानकारी ही नहीं दी गयी कि राज्य के हितों के खिलाफ इस तरह की कठोर कार्रवाई की जा रही है।
 
राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने नौ अगस्त को जम्मू और कश्मीर के बंटवारे और दो केन्द्र शासित प्रदेश-जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख- का 31 अक्टूबर तक सृजन करने संबंधी विधेयक को अपनी संस्तुति प्रदान की थी। देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की 31 अक्टूबर को जयंती होती है। सरदार पटेल ने देश को आजादी मिलने के बाद करीब 565 राजवाड़ों का भारत संघ में विलय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

Supreme Court
Article 370
Jammu and Kashmir
Jammu Kashmir People's Conference
President Ram Nath Kovind
sardar vallabh bhai patel

Related Stories

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?


बाकी खबरें

  • JK
    अनीस ज़रगर
    कश्मीरः जेल में बंद पत्रकारों की रिहाई के लिए मीडिया अधिकार समूहों ने एलजी को लिखी चिट्ठी 
    16 Feb 2022
    मीडिया निकायों ने फहद की पत्रकारिता कार्य के विरुद्ध शुरू की गई सभी पुलिसिया जांच को वापस लेने का भी आह्वान किया। 
  • modi ravidas mandir
    राज वाल्मीकि
    रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात
    16 Feb 2022
    कई जगह दलितों का वोट प्राप्त करने के लिए भाजपा के नेता भी आज रैदास मंदिर में नमन कर रहे हैं। इसे देखकर एक अम्बेडकरवादी होने के नाते मैं असहज हुआ।
  • Greta Acosta Reyes
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    वामपंथ के पास संस्कृति है, लेकिन दुनिया अभी भी बैंकों की है
    16 Feb 2022
    'जब हमारे समय की महान सांस्कृतिक बहसों की बात आती है, इतिहास की सुई लगभग पूरी तरह से वामपंथ की ओर झुक जाती है।लेकिन आर्थिक व्यवस्था के मामले में दुनिया बैंकों की है'।
  • UNEMPLOYMENT
    प्रभात पटनायक
    क्यों पूंजीवादी सरकारें बेरोज़गारी की कम और मुद्रास्फीति की ज़्यादा चिंता करती हैं?
    16 Feb 2022
    सचाई यह है कि पूंजीवादी सरकारों को बेरोजगारी के मुकाबले में मुद्रास्फीति की ही ज्यादा चिंता होना, समकालीन पूंजीवाद में वित्तीय पूंजी के वर्चस्व को ही प्रतिबिंबित करता है।
  • punjab
    न्यूज़क्लिक टीम
    अमृतसर: व्यापार ठप, नौकरियाँ ख़त्म पर चुनावों में ग़ायब मुद्दा
    16 Feb 2022
    भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार ख़त्म होने के बाद अमृतसर, तरन तारन और गुरदासपुर के हज़ारों लोग बेरोज़गार हो गए. इस व्यापार ने हज़ारों ट्रक ड्राइवरों, कुलियों, ढाबों को आबाद किया लेकिन अब सभी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License