NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
घटना-दुर्घटना
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
आंबेडकर विश्वविद्यालय : अचानक हटाए जाने की वजह से सफाई कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन।
इसे लेकर सोमवार को आंबेडकर विश्विद्यालय के कश्मीरी गेट परिसर में इन कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों को अपने इस आंदोलन में छात्रों का भी भारी समर्थन मिला। कर्मचारियों ने एक स्वर में कहा कि जब तक उन्हें वापस काम पर नहीं रखा जाएगा, तब तक वो इसी तरह प्रदर्शन करते रहेंगे क्योंकि उनके पास कोई और चारा नहीं है। ये उनके जीवन-मरण का सवाल है।
मुकुंद झा
03 Jun 2019
Safai Karmchari

31 मई को  दिल्ली के अंबेडकर विश्विद्यायलय के प्रशासन ने सफाई कर्मचारियों को 15 मिनट का नोटिस दिया और इस नोटिस के आधार पर  2 घंटे के भीतर उन्हें कैंपस छोड़ने के लिए कहा। कर्मचारियों ने बताया कि जब वे बाहर नहीं गए, तब उन्हें जबरदस्ती परिसर से धक्का देकर बाहर करने की कोशिश की गयी। कर्मचारियों का कहना था कि पिछले साल सितंबर के महीने से ही यह सब  शुरू हो गया था, जब श्रमिकों ने हाथों से  सीवर की सफाई करने से इनकार किया था । तब से उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है और अब उनका अनुबंध समाप्त हो गया. यह कहकर उन्हें नौकरी से निकला जा रहा है।

इसे लेकर सोमवार को आंबेडकर विश्विद्यायलय के कश्मीरी गेट परिसर में इन कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया।  कर्मचारियों को अपने इस आंदोलन में छात्रों का भी भारी समर्थन मिला। कर्मचारियों ने एक स्वर में कहा कि जब तक उन्हें वापस काम पर नहीं रखा जाएगा, तब तक वो इसी तरह प्रदर्शन करते रहेंगे क्योंकि उनके पास कोई और चारा नहीं है। ये उनके जीवन-मरण का सवाल है। 
shakuntala.jpg शकुंतला 

इनके बीच मौजूद कर्मचारी शकुंतला ने बताया कि वो अकेली हैं और पूरा घर अकेले ही चलाती हैं, उनका एक जवान लडका है जो नशे का आदी है, इसके अलावा उनकी एक 20 वर्षीय लड़की है, जो कि मानसिक तौर से बीमार है और वो किराये के मकान में रहती है।  ऐसे में उन्हें इसी नौकरी का सहारा था।  अचानक ऐसे निकाले जाने से उनके सामने रोज़ी- रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करे? वो पूछती हैं कि  इतनी जल्दी मुझे नौकरी कौन देगा? अगर ये नौकरी चली गई तो न उनके पास रहने के लिए घर रहेगा न खाने के लिए रोटी। इसी को लेकर वो परेशान है  और बार-बार प्रशासन से गुहार लगा रही थी कि उन्हें वापस काम पर रख लिया जाए। 

ऐसे ही एक अन्य महिला कर्मचारी मीरा जो लगभग 5 साल से इसी जगह पर काम कर रही थी , दो दिन पहले ही उन्हें हटा दिया गया। मीरा बताती हैं कि पिछले सालों में उन लोगों के साथ कई तरह के भेदभाव और शोषण भी हुए, उसके बाबजूद भी वो काम करती रही। उन्होंने बताया कि  यहां काम करने पर मज़दूरों को मुलभुत अधिकार  भी नहीं दिए जाते थे, न उन्हें ईएसआई और न ही पीएफ दिया जाता था। यहाँ तक एक बार वो काम के दौरन चोटिल हो गई थी, तब उन्हें किसी प्रकार का उपचार नहीं दिया गया। इस दौरन जब वो छुट्टी पर थी तब भी उनके सैलेरी काट ली गई थी। सभी कर्मचारियों को ऐसे यातनाएं सहनी पड़ी हैं।  

क्या है पूरा मामला ?

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि जिस संगठन के साथ उनका  कॉन्ट्रेक्ट था  वह अब ख़त्म  हो गया है। ये कर्मचारी उस संगठन की जिम्मेदारी थे।  परन्तु कर्मचारियों का कहना है ये बहाना है ,पिछले साल जब हमने हाथ से सीवर साफ करने से मना  किया और अपने अधिकार को लेकर बोलने लगे तभी से हम इनके आँखों में खटक रहे थे। यही हमरी नौकरी जाने का कारण भी बना है। नहीं तो ऐसे ही करीब 70 सुरक्षा गार्ड थे उनकी कम्पनी बदली लेकिन सभी पुराने लोग वापस काम पर रहे केवल उनकी वर्दी बदली। लेकिन हमारे साथ यह नाइंसाफी क्यों ?

यह कोई पहला मामला नहीं है जब कर्मचारियों के साथ ऐसा हुआ है, इस तरह की समस्या से दिल्ली विश्विधायलय के कर्मचारी भी पिछले एक महीने से जूझ रहे हैं। वहां भी सैकड़ों  कर्मचारी यही तर्क देकर बाहर कर दिया गया कि उनकी कम्पनी का कॉन्ट्रेक्ट खत्म हो गया है। दोनों मामलों में  एक बात समान  है की दोनों में कर्मचारी उपलब्ध करवाने वाला संगठन सुलभ इंटरनेशल है।  इनको लेकर एक कर्मचारियों की शिकायत थी कि इन्हें ना ईएसआई और न पीएफ मिलता  था। इसी कारण विश्विधायलय ने सुलभ का कॉन्ट्रेकट खत्म किया लेकिन इसके वजह से कर्मचारियों के लिए संकट खड़ा हो गया है।

ambedkar university
safai karmachari andolan
safai karmachari
CONTRACT SAFAIKARAMCHARIS
Delhi
kashmere gate
delhi govt

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

दिल्ली : फ़िलिस्तीनी पत्रकार शिरीन की हत्या के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया पीस एंड सॉलिडेरिटी ऑर्गेनाइज़ेशन का प्रदर्शन

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

महानगरों में बढ़ती ईंधन की क़ीमतों के ख़िलाफ़ ऑटो और कैब चालक दूसरे दिन भी हड़ताल पर

दिल्ली: बर्ख़ास्त किए गए आंगनवाड़ी कर्मियों की बहाली के लिए सीटू की यूनियन ने किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर


बाकी खबरें

  • ghazipur
    भाषा
    गाजीपुर अग्निकांडः राय ने ईडीएमसी पर 50 लाख का जुर्माना लगाने का निर्देश दिया
    30 Mar 2022
    दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने दो दिन पहले गाजीपुर लैंडफिल साइट (कूड़ा एकत्र करने वाले स्थान) पर भीषण आगजनी के लिये बुधवार को डीपीसीसी को ईडीएमसी पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाने और घटना के…
  • paper leak
    भाषा
    उत्तर प्रदेश: इंटर अंग्रेजी का प्रश्न पत्र लीक, परीक्षा निरस्त, जिला विद्यालय निरीक्षक निलंबित
    30 Mar 2022
    सूत्रों के अनुसार सोशल मीडिया पर परीक्षा का प्रश्न पत्र और हल किया गया पत्र वायरल हो गया था और बाजार में 500 रुपए में हल किया गया पत्र बिकने की सूचना मिली थी।
  • potato
    मोहम्मद इमरान खान
    बिहार: कोल्ड स्टोरेज के अभाव में कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर आलू किसान
    30 Mar 2022
    पटनाः बिहार के कटिहार जिले के किसान राजेंद्र मंडल, नौशाद अली, मनोज सिंह, अब्दुल रहमान और संजय यादव इस बार आलू की बम्पर पैदावार होने के बावजूद परेशान हैं और चिंतित हैं। जि
  • east west
    शारिब अहमद खान
    रूस और यूक्रेन युद्ध: पश्चिमी और गैर पश्चिमी देशों के बीच “सभ्य-असभ्य” की बहस
    30 Mar 2022
    “किसी भी अत्याचार की शुरुआत अमानवीयकरण जैसे शब्दों के इस्तेमाल से शुरू होती है। पश्चिमी देशों द्वारा जिन मध्य-पूर्वी देशों के तानाशाहों को सुधारवादी कहा गया, उन्होंने लाखों लोगों की ज़िंदगियाँ बरबाद…
  • Parliament
    सत्यम श्रीवास्तव
    17वीं लोकसभा की दो सालों की उपलब्धियां: एक भ्रामक दस्तावेज़
    30 Mar 2022
    हमें यह भी महसूस होता है कि संसदीय लोकतंत्र के चुनिंदा आंकड़ों के बेहतर होने के बावजूद समग्रता में लोकतंत्र कमजोर हो सकता है। यह हमें संसदीय या निर्वाचन पर आधारित लोकतंत्र और सांवैधानिक लोकतंत्र के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License