NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंध्र प्रदेश : विरोध प्रदर्शन से पहले चंद्रबाबू और उनके बेटे नजरबंद
आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक डी गौतम सवांग ने मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से एक वक्तव्य जारी कर कहा कि नायडू की गतिविधियों के कारण गुंटूर जिले के पालनाडु क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा था और कानून-व्यवस्था बिगड़ रही थी इसलिए उन्हें एहतियातन हिरासत में लिया गया।
भाषा
11 Sep 2019
Chandrababu Naidu
Image Credit : Instant Khabar

अमरावती (आंध्र प्रदेश) : तेलुगू देशम पार्टी के प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को ‘चलो अटमाकुरू’ के आह्वान के तहत गुंटूर जिले के पालनाडु क्षेत्र जाने के लिए उंडावल्ली स्थित अपने घर से निकलने का असफल प्रयास किया। यह विरोध प्रदर्शन कुछ ग्रामीणों को गांव से निकालने के विरोध में किया जाना था। उनके बेटे लोकेश को भी नजरबंद किया गया है।
आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक डी गौतम सवांग ने मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से एक वक्तव्य जारी कर कहा कि नायडू की गतिविधियों के कारण गुंटूर जिले के पालनाडु क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा था और कानून-व्यवस्था बिगड़ रही थी इसलिए उन्हें एहतियातन हिरासत में लिया गया।
बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों ने नायडू के आवास के मुख्य द्वार को रस्सियों से बांध दिया, इसके अलावा अन्य द्वारों को भी बंद कर दिया गया जिससे कि नायडू घर से बाहर नहीं आ सकें। इस दौरान वहां कई डीएसपी भी मौजूद थे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आवास परिसर के भीतर संवाददाताओं से बातचीत में पुलिस की कार्रवाई को बहुत ही खराब और ‘‘इतिहास में अभूतपूर्व’’ बताया।
उन्होंने कहा,‘‘ हालात भयावह हैं। हमारी पार्टी के कई नेताओं, सांसदों, विधायकों को अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिया गया। कई अन्य को नजरबंद कर दिया गया है।’’
नायडू ने कहा कि यह सब शासक (मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी) की घटिया मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वह कोशिश नहीं छोड़ेंगे और जब भी पुलिस इजाजत देगी वह अटमाकुरू जाएंगे।
विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि वाईएसआर कांग्रेस और पुलिस ने अनुसूचित जाति के 120 परिवारों को उनके गांव से निकाल दिया है और उन लोगों ने तेदेपा के शिविर में शरण ले रखी है।
उन्होंने कहा, ‘‘ मैं उन्हें उनके गांव में वापस लाना चाहता हूं और यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि वहां सभी लोग मिलजुल कर रहें।’’
नायडू ने कहा, ‘‘मैं देखता हूं कि वे मुझे कितने समय तक नजरबंद रखेंगे। मैं डरने वाला नहीं हूं। मैं पीड़ितों के लिये खड़ा होऊंगा और उनके अधिकारों के लिये लड़ूंगा।’’
तेदेपा प्रमुख के दावों पर पलटवार करते हुए, राज्य के पशुपालन मंत्री मोपीदेवी वेंकट रमना ने कहा कि नायडू "पेड कलाकारों" को पीड़ित के रूप में पेश करके "गंदी राजनीति" में लिप्त हैं।
उन्होंने कहा, "पांच साल से पालनाडु क्षेत्र के लोगों को तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष कोडेला शिवप्रसाद राव और गुरजला विधायक वाई श्रीनिवास राव के हाथों दमन का सामना करना पड़ा। तब नायडू ने क्या किया? जगन मोहन रेड्डी के मुख्यमंत्री बनने के बाद पालनाडु अब शांत है।”
दिन की शुरुआत पुलिस के तेदेपा अध्यक्ष के कृष्णा नदी तट पर स्थित आवास को घेर लेने से हुई।
नायडू और उनके बेटे लोकेश दोनों को बाहर आने की अनुमति नहीं थी, जिसके बाद बाद में पुलिस अधिकारियों के साथ बहस हुई।
विजयवाड़ा सांसद के श्रीनिवास (नानी) और राज्यसभा सदस्य के रवीन्द्र कुमार को पुलिस ने प्रकाशम बैराज पर हिरासत में ले लिया, जब उन्होंने नायडू के घर की ओर बढ़ने की कोशिश की।
तेलुगु देशम के उपनेता के अत्चानायडू दोपहिया वाहन पर सवार होकर नायडू के निवास क्षेत्र में पहुंचने में कामयाब रहे, लेकिन उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया और बाद में हिरासत में ले लिया गया।
 विजयवाड़ा शहर में, पुलिस ने पांच सितारा होटल के कमरे में प्रवेश किया, जहां पूर्व मंत्री भूमा अखिला प्रिया रह रही थीं, और उन्हें हिरासत में ले लिया।
कई अन्य नेताओं को या तो घर में नजरबंद कर दिया गया या पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया।
सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस के कुछ नेताओं को भी गुंटूर में हिरासत में लिया गया। उक्त नेताओं ने भी तेदेपा के जवाब में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था।
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता नायडू ने कहा, ‘‘ वाईएसआरसी के लोगों और पुलिस ने जिन ग्रामीणों को गांव से बाहर निकाल दिया था मैंने उन लोगों को वापस वहां ले जाने की योजना बनाई थी। यह कोई आंदोलन नहीं है बल्कि हम तो यह बताना चाहते हैं कि हम राजनीतिक पक्षपात के शिकार लोगों के साथ हैं।’’
वाईएसआरसी ने आरोप लगाया कि तेदेपा लोगों को पैसे देकर यह सब करवाना चाहती है। पार्टी ने खुद भी ‘चलो अटमाकुरू’ का आह्वान किया था लेकिन पुलिस ने दोनों ही पक्षों को इसकी इजाजत नहीं दी और भारतीय दंड संहिता की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लगा दी।
किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अटमाकुरू और पालनाडु क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

TDP
Chandrababu Naidu
Andhra pradesh

बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 22,270 नए मामले, 325 मरीज़ों की मौत
    19 Feb 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.59 फ़ीसदी यानी 2 लाख 53 हज़ार 739 हो गयी है।
  •  Punjab Elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाब चुनाव: जनता का जनादेश मिलेगा किसे?
    18 Feb 2022
    पंजाब के चुनाव २० फ़रवरी को होने वाले हैं और देखने में ऐसा लगता है कि यह लड़ाई सीधी-सीधी आप और कांग्रेस के बीच में है। आखिर किसका है पलड़ा भारी? क्या हैं जनता के मुद्दे? देखिये पॉइंट ऑफ़ व्यू के इस…
  • punjab election
    न्यूज़क्लिक टीम
    चुनाव चक्र: पंजाब में बदलाव की आहट, कितनी सुनी—कितनी अनसुनी!
    18 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में दो चरणों का चुनाव संपन्न हो चुका है और 20 फरवरी को तीसरे चरण का मतदान है, इसी के साथ इसी दिन पंजाब के भी चुनाव होने जा रहे हैं। पांच राज्यों में हो रहे चुनाव में उत्तर प्रदेश के बाद…
  • deep
    सीरत चब्बा
    भारत: किसान आंदोलन पंजाब के राजनीतिक भविष्य को क्या दिशा दे सकता है? 
    18 Feb 2022
    जैसा कि इस सप्ताह पंजाब में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, किसान यूनियनों से जुड़े नए राजनीतिक दल किसानों के विरोध अभियान से पैदा हुए संवेग को जारी रखना चाहते हैं।
  • election
    रवि शंकर दुबे
    पंजाब विधानसभा चुनाव:  महिलाओं का वोट चाहिए, लेकिन पार्टी में भागीदारी नहीं!
    18 Feb 2022
    पंजाब विधानसभा चुनावों में कड़ी टक्कर है, सभी राजनीतिक दल महिलाओं के लिए बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन महिलाओं की राजनीति में भागीदारी की बात करें तो वो न के बराबर है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License