NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से भी ‘धोखा’! 25 को संसद मार्च
आंगनवाड़ी कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार आश्वासन के बाद भी सरकार ने न केवल उनकी मांगों को नज़रअंदाज किया है, बल्कि एकीकृत बाल विकास योजना (ICDS) को भी समाप्त करने की कोशिश कर रही है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
23 Feb 2019
Anganwadi Workers

मोदी सरकार के आखिरी बजट के बाद एक बार फिर हजारों की संख्या में आंगनवाड़ी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ आंगनवाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर्स (AIFAWH) के नेतृत्व में 25 फरवरी को संसद मार्च करने का फैसला किया है। 

आंगनवाड़ी कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार आश्वासन के बाद भी सरकार ने न केवल उनकी मांगों को नज़रअंदाज किया है, बल्कि एकीकृत बाल विकास योजना  (ICDS) को भी समाप्त करने की कोशिश कर रही है। यह योजना श्रमिकों के बच्चों के अधिकारों के लिए पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए हमारे पिछले 28 वर्षों का संघर्ष का नतीजा है। इसी क्रम में हम बीजेपी सरकार के खिलाफ चार्जशीट दायर  करने के लिए दिल्ली आ रहे हैं, जो आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों के पारिश्रमिक में वृद्धि और आईसीडीएस को मजबूत बनाने के लिए सत्ता में आई थी, लेकिन उसने लाखो कर्मचारियों को धोखा दिया।

आंगनवाड़ियों में बेहतर बुनियादी ढांचे, सेवाओं की मांग को लेकर, 45वीं ILC सिफारिशों को लागू करने  और ICDS में सीधे नकद हस्तांतरण के कदम के खिलाफ़  देश भर से लगभग 40 लाख हस्ताक्षर के साथ हजारों की संख्या आंगनवाड़ी कार्यकर्ता दिल्ली में  25 फरवरी को  विरोध प्रदर्शन करने आ रहे हैं और अपनी मांगों को  सरकार से  अवगत कराएंगे।

मोदी सरकार पर धोखा देने का आरोप लगते हुए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि 1 फरवरी 2019 को अंतरिम वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा रखे गए अंतरिम बजट में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों के पारिश्रमिक में जो 50% बढ़ोतरी की बात कही गई वो एकदम झूठ है, कोई वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने जो उल्लेख किया, वह आंगनवाड़ी श्रमिकों के लिए 1500 रुपये बढ़ाने की घोषणा थी, मिनी वर्कर्स के लिए 1250 और सहायकों के लिए 750 रुपये का वादा सरकार ने 11 सितंबर 2018 को सीटू,एआईकेएस और AIFAWH द्वारा मजदूर किसान रैली के दौरान किया था लेकिन दिया नहीं, लेकिन, यहां भी मोदी सरकार ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों को धोखा दिया था। 

सरकार ने केवल श्रमिकों और सहायकों को ही नही बल्कि लाभार्थियों को भी धोखा दिया है। भारत सरकार ने सितंबर 2017 में घोषणा की कि वह पूरक पोषण के लिए आवंटन बढ़ाने जा रही है और तीन साल के लिए अतिरिक्त 12,000 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है, यानी पोषण के लिए प्रति वर्ष अतिरिक्त 40,000 करोड़ रुपये। लेकिन न तो पिछले साल का बजट और न ही इस साल के बजट में यह आवंटन शामिल है। कई राज्यों में कई महीनों से पोषण की आपूर्ति नहीं हो रही है।

लेकिन फिर ICDS के लिए 27,584.37 करोड़ का आंकड़ा क्या है जिसका वित्त मंत्री ने बजट भाषण में उल्लेख किया है?

यह कर्मचारियों के साथ-साथ जनता को भी गुमराह करने का एक और प्रयास है। 2016-17 में, भारत सरकार ने अपनी योजना में विभिन्न स्तर पर लड़कियों को शामिल किया था। इनमें किशोर लड़कियों के लिए योजना, बाल संरक्षण योजना, राष्ट्रीय क्रेच योजना,मातृत्व लाभ योजना और पोषण इत्यादि अभियान मिलाकर "अम्ब्रेला ICDS" के तहत रखा गया। यह 27,584.37 करोड़ सभी छह योजनाओं के लिए आवंटन है। आंगनवाड़ी सेवाओं के लिए आवंटन केवल 19,834.37 करोड़ रुपये है।

“पोषण मिशन” जो भारत जैसे देश में कुपोषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है उसे भी खत्म करने का आरोप लगाते हुए AIFAWH का कहना है कि सरकार लाभर्थियो कि जगह पर मोटी धनराशि प्रशासनिक कामों में लगा रही है। दूसरी ओर,प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए, पिछले वर्ष के 2400 करोड़ के बजट आवंटन को घटाकर 1200 करोड़ कर दिया गया है।

आईसीडीएस को समाप्त करने की साजिश 

AIFAWH की कोषाध्यक्ष अंजू ने बतया कि मोदी सरकार पहली सरकार है जिसने अपने पहले बजट में ICDS के लिए आवंटन में भारी कटौती की थी। इसने योजना आयोग को बंद कर दिया था और केंद्र प्रायोजित योजनाओं को बंद करने का प्रस्ताव दिया था। अब यह योजना के खर्च का केवल 60% हिस्सा बाकी राज्यों द्वारा खर्च किया जा रहा है। 

यह सरकार आईसीडीएस के निजीकरण की कोशिश कर रही है। इसने कॉरपोरेट वेदांता के साथ एक समझौता किया है, जहां पर आंगनवाड़ियों का आधा समय क्षेत्र की महिलाओं के कौशल विकास पर खर्च किया जाएगा।

अब, मंत्रालय नीति अयोग के निर्देशानुसार लाभार्थियों के लिए पोषण के स्थान पर प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण के साथ आगे बढ़ रहा है। पायलट प्रोजेक्ट यूपी और राजस्थान में प्रस्तावित किया गया है। यदि इसे लागू किया जाता है तो यह आईसीडीएस समाप्त हो जाएगा ।

सरकारी कर्मचारी का दर्जा और सामजिक सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन 

AIFAWH और सीटू के नेतृत्व वाली हमारी आंगनवाड़ी यूनियनों के लगातार संघर्ष के कारण कई राज्यों में पारिश्रमिक और कुछ अन्य लाभों में वृद्धि हुई है। लेकिन सरकार को सरकारी कर्मचारियों के रूप में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों की मान्यता के बुनियादी सवाल पर एक स्टैंड लेना होगा। हमारे लिए पेंशन या ग्रेच्युटी का कोई प्रावधान नहीं है। सरकारों को योजना श्रमिकों के लिए मान्यता, न्यूनतम मजदूरी और पेंशन पर 45वें और 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को स्वीकार करना होगा।

नियमितीकरण, न्यूनतम मजदूरी और पेंशन की मांगों के अलावा, गैर-आईसीडीएस के अतिरिक्त काम पर प्रतिबंध लगाने, मिनी श्रमिकों के पूर्ण भुगतान और मिनी केंद्रों को पूर्ण केंद्रों में अपग्रेड करने, पदोन्नति में आयु सीमा हटाने, बंद करने और विलय के मुद्दों के बारे में कई अन्य मांगें शिक्षा के अधिकार में पूर्व स्कूली शिक्षा और नोडल एजेंसियों के रूप में आंगनवाड़ियों को बनाने,आंगनवाड़ियों को पूर्णकालिक आंगनवाड़ी बनाने सहित- कई मांगे इन कर्मचारीयों कि  काफी समय से हमारी मांग रही है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों के संघर्ष ने पहले भी सरकारों को अपने आंदोलन के आगे झुकाया। इन कार्यकर्ताओ का कहना है कि हमारे मुद्दों पर लगतार सरकारों का ढुलमुल रवैया रहा है लेकिन इस बार हमें अपने देश के राष्ट्रीय एजेंडे में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों के अधिकारों और हमारे देश के बच्चों के अधिकारों के पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा के अधिकारों का मुद्दा को मुख्य मुद्दा बनाना है।

 

 

workers protest
Anganwadi Workers
scheme workers
ICDS
AIFAWH

Related Stories

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान

लंबे संघर्ष के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायक को मिला ग्रेच्युटी का हक़, यूनियन ने बताया ऐतिहासिक निर्णय

दिल्ली: बर्ख़ास्त किए गए आंगनवाड़ी कर्मियों की बहाली के लिए सीटू की यूनियन ने किया प्रदर्शन

क्यों है 28-29 मार्च को पूरे देश में हड़ताल?

28-29 मार्च को आम हड़ताल क्यों करने जा रहा है पूरा भारत ?

दिल्ली: संसद सत्र के बीच स्कीम वर्कर्स का प्रदर्शन, नियमितीकरण और बजट आवंटन में वृद्धि की मांग

क्यों आंदोलन की राह पर हैं स्कीम वर्कर्स?

हरियाणा: हड़ताली आंगनवाड़ी कार्यकार्ताओं के आंदोलन में अब किसान और छात्र भी जुड़ेंगे 


बाकी खबरें

  • BJP
    अनिल जैन
    खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं
    01 May 2022
    राजस्थान में वसुंधरा खेमा उनके चेहरे पर अगला चुनाव लड़ने का दबाव बना रहा है, तो प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया से लेकर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत इसके खिलाफ है। ऐसी ही खींचतान महाराष्ट्र में भी…
  • ipta
    रवि शंकर दुबे
    समाज में सौहार्द की नई अलख जगा रही है इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा
    01 May 2022
    देश में फैली नफ़रत और धार्मिक उन्माद के ख़िलाफ़ भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) मोहब्बत बांटने निकला है। देशभर के गावों और शहरों में घूम कर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन किए जा रहे हैं।
  • प्रेम कुमार
    प्रधानमंत्री जी! पहले 4 करोड़ अंडरट्रायल कैदियों को न्याय जरूरी है! 
    01 May 2022
    4 करोड़ मामले ट्रायल कोर्ट में लंबित हैं तो न्याय व्यवस्था की पोल खुल जाती है। हाईकोर्ट में 40 लाख दीवानी मामले और 16 लाख आपराधिक मामले जुड़कर 56 लाख हो जाते हैं जो लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट की…
  • आज का कार्टून
    दिन-तारीख़ कई, लेकिन सबसे ख़ास एक मई
    01 May 2022
    कार्टूनिस्ट इरफ़ान की नज़र में एक मई का मतलब।
  • राज वाल्मीकि
    ज़रूरी है दलित आदिवासी मज़दूरों के हालात पर भी ग़ौर करना
    01 May 2022
    “मालिक हम से दस से बारह घंटे काम लेता है। मशीन पर खड़े होकर काम करना पड़ता है। मेरे घुटनों में दर्द रहने लगा है। आठ घंटे की मजदूरी के आठ-नौ हजार रुपये तनखा देता है। चार घंटे ओवर टाइम करनी पड़ती है तब…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License