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आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से भी ‘धोखा’! 25 को संसद मार्च
आंगनवाड़ी कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार आश्वासन के बाद भी सरकार ने न केवल उनकी मांगों को नज़रअंदाज किया है, बल्कि एकीकृत बाल विकास योजना (ICDS) को भी समाप्त करने की कोशिश कर रही है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
23 Feb 2019
Anganwadi Workers

मोदी सरकार के आखिरी बजट के बाद एक बार फिर हजारों की संख्या में आंगनवाड़ी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ आंगनवाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर्स (AIFAWH) के नेतृत्व में 25 फरवरी को संसद मार्च करने का फैसला किया है। 

आंगनवाड़ी कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार आश्वासन के बाद भी सरकार ने न केवल उनकी मांगों को नज़रअंदाज किया है, बल्कि एकीकृत बाल विकास योजना  (ICDS) को भी समाप्त करने की कोशिश कर रही है। यह योजना श्रमिकों के बच्चों के अधिकारों के लिए पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए हमारे पिछले 28 वर्षों का संघर्ष का नतीजा है। इसी क्रम में हम बीजेपी सरकार के खिलाफ चार्जशीट दायर  करने के लिए दिल्ली आ रहे हैं, जो आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों के पारिश्रमिक में वृद्धि और आईसीडीएस को मजबूत बनाने के लिए सत्ता में आई थी, लेकिन उसने लाखो कर्मचारियों को धोखा दिया।

आंगनवाड़ियों में बेहतर बुनियादी ढांचे, सेवाओं की मांग को लेकर, 45वीं ILC सिफारिशों को लागू करने  और ICDS में सीधे नकद हस्तांतरण के कदम के खिलाफ़  देश भर से लगभग 40 लाख हस्ताक्षर के साथ हजारों की संख्या आंगनवाड़ी कार्यकर्ता दिल्ली में  25 फरवरी को  विरोध प्रदर्शन करने आ रहे हैं और अपनी मांगों को  सरकार से  अवगत कराएंगे।

मोदी सरकार पर धोखा देने का आरोप लगते हुए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि 1 फरवरी 2019 को अंतरिम वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा रखे गए अंतरिम बजट में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों के पारिश्रमिक में जो 50% बढ़ोतरी की बात कही गई वो एकदम झूठ है, कोई वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने जो उल्लेख किया, वह आंगनवाड़ी श्रमिकों के लिए 1500 रुपये बढ़ाने की घोषणा थी, मिनी वर्कर्स के लिए 1250 और सहायकों के लिए 750 रुपये का वादा सरकार ने 11 सितंबर 2018 को सीटू,एआईकेएस और AIFAWH द्वारा मजदूर किसान रैली के दौरान किया था लेकिन दिया नहीं, लेकिन, यहां भी मोदी सरकार ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों को धोखा दिया था। 

सरकार ने केवल श्रमिकों और सहायकों को ही नही बल्कि लाभार्थियों को भी धोखा दिया है। भारत सरकार ने सितंबर 2017 में घोषणा की कि वह पूरक पोषण के लिए आवंटन बढ़ाने जा रही है और तीन साल के लिए अतिरिक्त 12,000 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है, यानी पोषण के लिए प्रति वर्ष अतिरिक्त 40,000 करोड़ रुपये। लेकिन न तो पिछले साल का बजट और न ही इस साल के बजट में यह आवंटन शामिल है। कई राज्यों में कई महीनों से पोषण की आपूर्ति नहीं हो रही है।

लेकिन फिर ICDS के लिए 27,584.37 करोड़ का आंकड़ा क्या है जिसका वित्त मंत्री ने बजट भाषण में उल्लेख किया है?

यह कर्मचारियों के साथ-साथ जनता को भी गुमराह करने का एक और प्रयास है। 2016-17 में, भारत सरकार ने अपनी योजना में विभिन्न स्तर पर लड़कियों को शामिल किया था। इनमें किशोर लड़कियों के लिए योजना, बाल संरक्षण योजना, राष्ट्रीय क्रेच योजना,मातृत्व लाभ योजना और पोषण इत्यादि अभियान मिलाकर "अम्ब्रेला ICDS" के तहत रखा गया। यह 27,584.37 करोड़ सभी छह योजनाओं के लिए आवंटन है। आंगनवाड़ी सेवाओं के लिए आवंटन केवल 19,834.37 करोड़ रुपये है।

“पोषण मिशन” जो भारत जैसे देश में कुपोषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है उसे भी खत्म करने का आरोप लगाते हुए AIFAWH का कहना है कि सरकार लाभर्थियो कि जगह पर मोटी धनराशि प्रशासनिक कामों में लगा रही है। दूसरी ओर,प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए, पिछले वर्ष के 2400 करोड़ के बजट आवंटन को घटाकर 1200 करोड़ कर दिया गया है।

आईसीडीएस को समाप्त करने की साजिश 

AIFAWH की कोषाध्यक्ष अंजू ने बतया कि मोदी सरकार पहली सरकार है जिसने अपने पहले बजट में ICDS के लिए आवंटन में भारी कटौती की थी। इसने योजना आयोग को बंद कर दिया था और केंद्र प्रायोजित योजनाओं को बंद करने का प्रस्ताव दिया था। अब यह योजना के खर्च का केवल 60% हिस्सा बाकी राज्यों द्वारा खर्च किया जा रहा है। 

यह सरकार आईसीडीएस के निजीकरण की कोशिश कर रही है। इसने कॉरपोरेट वेदांता के साथ एक समझौता किया है, जहां पर आंगनवाड़ियों का आधा समय क्षेत्र की महिलाओं के कौशल विकास पर खर्च किया जाएगा।

अब, मंत्रालय नीति अयोग के निर्देशानुसार लाभार्थियों के लिए पोषण के स्थान पर प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण के साथ आगे बढ़ रहा है। पायलट प्रोजेक्ट यूपी और राजस्थान में प्रस्तावित किया गया है। यदि इसे लागू किया जाता है तो यह आईसीडीएस समाप्त हो जाएगा ।

सरकारी कर्मचारी का दर्जा और सामजिक सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन 

AIFAWH और सीटू के नेतृत्व वाली हमारी आंगनवाड़ी यूनियनों के लगातार संघर्ष के कारण कई राज्यों में पारिश्रमिक और कुछ अन्य लाभों में वृद्धि हुई है। लेकिन सरकार को सरकारी कर्मचारियों के रूप में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों की मान्यता के बुनियादी सवाल पर एक स्टैंड लेना होगा। हमारे लिए पेंशन या ग्रेच्युटी का कोई प्रावधान नहीं है। सरकारों को योजना श्रमिकों के लिए मान्यता, न्यूनतम मजदूरी और पेंशन पर 45वें और 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को स्वीकार करना होगा।

नियमितीकरण, न्यूनतम मजदूरी और पेंशन की मांगों के अलावा, गैर-आईसीडीएस के अतिरिक्त काम पर प्रतिबंध लगाने, मिनी श्रमिकों के पूर्ण भुगतान और मिनी केंद्रों को पूर्ण केंद्रों में अपग्रेड करने, पदोन्नति में आयु सीमा हटाने, बंद करने और विलय के मुद्दों के बारे में कई अन्य मांगें शिक्षा के अधिकार में पूर्व स्कूली शिक्षा और नोडल एजेंसियों के रूप में आंगनवाड़ियों को बनाने,आंगनवाड़ियों को पूर्णकालिक आंगनवाड़ी बनाने सहित- कई मांगे इन कर्मचारीयों कि  काफी समय से हमारी मांग रही है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों के संघर्ष ने पहले भी सरकारों को अपने आंदोलन के आगे झुकाया। इन कार्यकर्ताओ का कहना है कि हमारे मुद्दों पर लगतार सरकारों का ढुलमुल रवैया रहा है लेकिन इस बार हमें अपने देश के राष्ट्रीय एजेंडे में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों के अधिकारों और हमारे देश के बच्चों के अधिकारों के पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा के अधिकारों का मुद्दा को मुख्य मुद्दा बनाना है।

 

 

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