NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतर धार्मिक विवाह पर योगी आदित्यनाथ का दोहरा रवैया?
यूपी आश्रय गृह में 4 मुस्लिम लड़कियों का हिंदू लड़कों से हुए विवाह पर कुछ सवाल उठाए गए है कि जब आमतौर पर युगल जोड़े खुद अपना जीवन साथी चुनते हैं, तो उन्हें मुख्यमंत्री क्यों 'लव जिहाद' के रूप में प्रचारित करते हैं।
अब्दुल अलीम जाफ़री
23 Oct 2018
Translated by महेश कुमार
inter religious marriages in UP
सांकेतिक फोटोI Image Courtesy: Livecities

भारत जैसे विविधता से भरे देश में अनाथ लोगों का अंतर-धार्मिक विवाह करवाने की पहल एक स्वागत योग्य कदम है। लेकिन, भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में अनाथ महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के पुरुषों की एक बड़े पैमाने पर शादी करने और हिंदू पुरुषों से  चार मुस्लिम लड़कियों की शादी करने की हालिया 'उदार' पहल से सवाल खड़ा होता है कि यही सरकार आमतौर पर विभिन्न धर्मों के युगल के बीच की गई शादी को 'लव-जिहाद' के रूप में प्रचारित क्यों करती हैं।

याद रहे कि पिछले साल केरल में हदिया के मामले का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा था कि 'लव जिहाद एक खतरनाक चीज है'। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने हाल ही में इस मामले को 'यह प्यार है न कि लव जिहाद' घोषित कर दिया है। आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद कुछ आलोचकों ने घर से अपहरण की गई विवाहित लड़कियों के उदाहरण को पेश करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में उन लड़कियों की इच्छाओं के खिलाफ उन्हे 'घर वापसी' के माध्यम से वापसी के लिए मजबूर किया गया।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार की जन विवाह योजना के तहत महानगर कल्याण मंडप में जिला प्रशासन द्वारा आयोजित एक जन विवाह में हिन्दू रीति रिवाजों के अनुसार हिंदू लड़कों के लिए चार मुस्लिम अनाथ लड़कियों के विवाह की सूचना दीI जिसके बाद कई मुस्लिम संगठन और गैर सरकारी संगठनों ने इस पर सवाल किया कि क्या आश्रय घर मुस्लिम दूल्हे नहीं मिले। क्या शादी से पहले आपसी सहमति थी या नही का मुद्दा भी उठाया और साथ ही लड़कियों को हिंदू धर्म में परिवर्तित करने के सरकार के  'गुप्त' प्रयास पर भी आरोप लगाया है। इनके साथ ही, 27 हिंदू लड़कियों ने हिंदू लड़कों के साथ शादी की है।

पिछले मंगलवार को विशेष विवाह अधिनियम के तहत उपरोक्त जोड़ों का विवाह हुआ और अगले दिन पवित्र अग्नि के सात फेरे हिंदू रीति रिवाजों के अनुसार लिए गए। विशेष विवाह अधिनियम के तहत जोड़ों के विवाह होने के बाद हिंदू रीति रिवाजों को करने की आवश्यकता क्यों पड़ी, इस बारे में प्रश्न उठाए गए हैं। यह ऐसा कार्य था जिसे जोड़ों की पसंद के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए था। सभी लड़कियां मोतिनगर के सरकारी आश्रय ग्रह में तब से हैं जब से वे छह से दस साल की थीं।

न्यूज़क्लिक के साथ बात करते हुए, नरेश पारस, जो 11 साल से बाल संरक्षण के मुद्दों पर काम कर रहे हैं और आगरा में स्थित हैं, ने कहा, "अब तक मेरे करियर में मैंने जो शोध किया है वह यह है कि हमारे देश में आश्रय घरों में बच्चों के धर्म के अनुसार विकसित करने की कोइ कवायद नहीं है। ऐसी स्थिति न केवल हिंदू धर्म के आश्रय घरों की है बल्कि ईसाई लोगों के लिए भी यह सच है। आश्रय ग्रह लड़कियों को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता नहीं देते हैं और जब वे बड़े होते हैं, तो उन्हें आश्रय ग्रह के पदाधिकारियों द्वारा वहां शादी  करने के लिए मजबूर किया जाता है जहां वे चाहते हैं।"

10 साल पुरानी की एक घटना को याद करते हुए, पारस ने कहा: "जुलाई 1999 को, मेरि आगरा में सड़क पर एक लड़की से मुलाकात हुयी जो 14 साल की थी। आगरा के एसडीएम ने लड़की को एकऐसे  महिला सुरक्षा घर में भेजा जहां लड़कियों को सेक्स रैकेट या अन्य अपराध से बचाकर लाया जाता है। 14 वर्षीय मुन्नी को भी उसी आश्रय घर में रखा गया था। जब, जांच के बाद, उसने पुष्टि की कि वह जयपुर से थी और उसके पिता का नाम अहमद खान था, तो प्रशासन ने उसे बलपूर्वक कानपुर के एक आश्रय ग्रह में भेजा जहां वह बाद में उसकी एक हिंदू लड़के से शादी कर दी गयी। "

पारस ने कहा कि जब स्थानीय मुसलमानों ने इस कदम का विरोध किया, तो प्रशासन ने बहाना दिया कि उन्हें उनके लिए उपयुक्त मुस्लिम लड़का नहीं मिला। इस घटना के बाद से अब 10 साल हो गए है, लेकिन स्थिति वैसी ही है। आश्रय घरों में धर्म का चयन करने की आजादी नही है।

"मैंने आगरा में मदर टेरेसा के मिशनरी ऑफ चैरिटी का दौरा किया है जहां अनाथ बच्चों को केवल ईसाई धर्म के बारे में सीख दी जाती हैं, और आर्य समाज द्वारा संचालित एक और आश्रय ग्रह - श्री मध्य नंदनाथ आश्रम है - जहां हिंदू हो या मुस्लिम सबको यज्ञ करने हिदायत दी जाती हैं। “अनाथों के पास अपने धर्म को चुनने का हक़ नहीं है” उन्होंने कहा, उन्होने यह भी जोड़ा कि "यदि आयोजकों ने लड़कियों से सहमति ली है, तो दो धर्मों के बीच विवाह एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन अगर उन्हें सूचित नहीं किया गया है, तो यह धर्म परिवर्तन है।"

दिल्ली लीगल सर्विसेज अथॉरिटी की वकील छाया खोसला ने न्यूज़क्लिक को बताया, कि "एक लड़की, जो बच्चों के आश्रय ग्रह में रहती है, को अपने जीवन के संबन्ध में पसंद करने का अधिकार है ... किशोर न्याय कानून के अनुसार भी राय बच्चे के हित को ध्यान में रखते हुए उसकी पसंद का होना अनिवार्य है। "

खोसला ने आगे कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, यह प्रशासन की विफलता है कि उन्हें उन लड़कियों के लिए समुदाय में एक उपयुक्त लड़का नहीं मिला जिनकी यहां पर चर्चा है।

Inter religious marriages
Uttar pradesh
Yogi govt
love jihad

Related Stories

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही मस्जिद ईदगाह प्रकरण में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

उपचुनाव:  6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में 23 जून को मतदान

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?

उत्तर प्रदेश विधानसभा में भारी बवाल


बाकी खबरें

  • कश्मीर: आर्टिकल 370 हटने के दो साल बाद व्यापार और पर्यटन ठप
    न्यूज़क्लिक टीम
    कश्मीर: आर्टिकल 370 हटने के दो साल बाद व्यापार और पर्यटन ठप
    07 Aug 2021
    जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 और 35A को निरस्त किये जाने के दो साल बाद भी ज़िंदगी पटरी पर नहीं आयी है। व्यापार और पर्यटन Covid-19 और उसकी वजह से लगे lockdown…
  • 2018 की बाढ़ के बाद दोबारा बनाया गया, केरल का FHC राज्य के लचीले सरकारी स्वास्थ्य तंत्र का प्रतिनिधित्व करता है
    अज़हर मोइदीन
    2018 की बाढ़ के बाद दोबारा बनाया गया, केरल का FHC राज्य के लचीले सरकारी स्वास्थ्य तंत्र का प्रतिनिधित्व करता है
    07 Aug 2021
    मलप्पुरम के वझक्कड में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 2018 की बाढ़ में पूरी तरह बर्बाद हो गया था। इसे अब दोबारा बना लिया गया है। यह अपनी तरह का देश का सबसे बड़ा केंद्र है। केरल के सार्वजनिक स्वास्थ्य…
  • संसद
    अनिल जैन
    संसद को अपने रसोईघर की तरह इस्तेमाल कर रही है मोदी सरकार!
    07 Aug 2021
    हक़ीक़त यह है कि संसद का यह सत्र उसी तरह चल रहा है जिस तरह सरकार चलाना चाहती है। कथित हंगामे के बीच सरकार का अपने जन विरोधी एजेंडा पर अमल धड़ल्ले से जारी है।
  • 9 अगस्त को “मोदी गद्दी छोड़ो, कॉरपोरेट भारत छोड़ो” और 15 अगस्त को ‘किसान मज़दूर आज़ादी संग्राम दिवस’
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    9 अगस्त को “मोदी गद्दी छोड़ो, कॉरपोरेट भारत छोड़ो” और 15 अगस्त को ‘किसान मज़दूर आज़ादी संग्राम दिवस’
    07 Aug 2021
    जंतर-मंतर पर चल रही ‘किसान संसद’ में शुक्रवार को मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया जिस पर सोमवार को भी बहस होगी।
  • कोलकाता में मनाई गई कम्युनिस्ट नेता मुज़फ़्फ़र अहमद की 133वीं जयंती
    संदीप चक्रवर्ती
    कोलकाता में मनाई गई कम्युनिस्ट नेता मुज़फ़्फ़र अहमद की 133वीं जयंती
    07 Aug 2021
    माकपा नेताओं ने बंगाल में प्रगतिशील परंपराओं को मजबूत करने के लिए 'काका बाबू' द्वारा किए गए प्रमुख कार्यों को याद किया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License