NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आप की बातों पर कैसे यक़ीन करें महामहिम! 
संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्ति जब अपनी बात पर कायम नहीं रहते या उनकी कही बात बदल जाती है तो आम जनता में उनके प्रति एक अविश्वास पैदा होता है। यही बात राज्यपाल सत्यपाल मलिक को लेकर है। 
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
16 Aug 2019
satyapal malik
Image Courtesy: NDTV

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि अनुच्छेद-370 के तहत मिले विशेष दर्जे को खत्म करने के बाद राज्य के लोगों की पहचान न तो दांव पर है और न ही इसमें छेड़छाड़ हुई है। 

उन्होंने यह बात 73वें स्वतंत्रता दिवस पर श्रीनगर में आयोजित समारोह में ध्वजारोहण के बाद कही। लेकिन दिक्कत ये है कि राज्यपाल सत्यपाल मलिक जिस तरह अपने बयान और पार्टी बदलते रहे हैं उससे यह सवाल एक बार फिर खड़ा होता है कि इतने संवेदनशील मसले पर उनकी बातों पर कैसे यक़ीन किया जाए। 

अपने संबोधन में मलिक ने केंद्र के ओर से किए गए बदलाव को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे विकास के नए रास्ते खुलेंगे और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के विभिन्न समुदायों को अपनी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

क्यों खड़े होते हैं सवाल

संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्ति जब अपनी बात पर कायम नहीं रहते या उनकी कही बात बदल जाती है तो आम जनता में उनके प्रति एक अविश्वास पैदा होता है। यही बात राज्यपाल सत्यपाल मलिक को लेकर है।

आपको याद होगा कि अभी 3 अगस्त को राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने नेशनल कॉन्फ़्रेंस के प्रतिनिधिमंडल से मिलने के बाद बयान जारी किया था कि उन्हें किसी संवैधानिक प्रावधान में बदलाव की ख़बर नहीं है।

राजभवन द्वारा जारी बयान में कहा गया कि अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त तैनाती केवल सुरक्षा कारणों से की जा रही है।

बताया जाता है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रतिनिधिमंडल से राज्यपाल ने कहा, 'सुरक्षा एजेंसियों को यह विश्वसनीय जानकारी थी कि अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमला हो सकता है। पाकिस्तान की ओर से नियंत्रण रेखा पर भारी गोलीबारी हुई है जिसका सेना ने प्रभावी रूप से जवाब दिया है।'

अनुच्छेद 370 और 35 ए को रद्द किए जाने या राज्य को तीन हिस्सों में बांटने जैसा कदम उठाने की कोई योजना नहीं है। 

लेकिन हुआ क्या? हुआ ये कि दो दिन बाद 5 अगस्त को देश के गृहमंत्री राज्यसभा में अनुच्छेद 370 हटाने और जम्मू-कश्मीर का दो हिस्सों में बंटवारा कर उन्हें केंद्र शासित प्रदेश बनाने का प्रस्ताव रख देते हैं। इसी दिन ये राज्यसभा में पास हो जाता है और अगले दिन 6 अगस्त को लोकसभा में यही प्रक्रिया दोहराई जाती है। 

नेताओं से लेकर आम आदमी तक जम्मू-कश्मीर में सेना और अद्धसैनिक बलों की अतिरिक्त तैनाती को लेकर आशंकित था और समझ रहा था कि कुछ बड़ा होने जा रहा है, लेकिन राज्यपाल सत्यपाल मलिक लगातार लोगों और नेताओं को आश्वासन दे रहे थे कि ऐसा कुछ भी नहीं है। 

सत्यपाल मलिक : एक परिचय

यूपी के रहने वाले सत्यपाल मलिक 23 अगस्त 2018 से जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल हैं। मलिक इससे पहले बिहार के राज्यपाल थे। राज्यपाल बनने से पहले वह भाजपा के उपाध्यक्ष भी रहे।

मलिक की राजनीति की शुरुआत

सत्तर के दशक में चौधरी चरण सिंह की बीकेडी के साथ हुई। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद वह कांग्रेस में आ गए। इसके बाद वे जनता दल में पहुंचे और 1989 में अलीगढ़ लोकसभा चुनाव लड़कर सांसद बने। 

1990 में वह केंद्र सरकार में पर्यटन एवं संसदीय कार्य मंत्री बने। फिर वे समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए और 1996 में अलीगढ़ से चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। इसके बाद उन्होंने 2004 में बीजेपी का दामन थाम लिया। 2017 में उन्हें बिहार का राज्यपाल बनाया गया और वहीं से 2018 में उन्हें जम्मू-कश्मीर भेज दिया गया। 

नवंबर, 2018 में राज्यपाल मलिक ने राज्य विधानसभा को भंग कर दिया। इसे लेकर सवाल उठे तो मलिक ने सफाई दी कि उन्हें राज्य में खरीद फरोख्त और विधायकों की धमकाने की शिकायते मिल रही थी। 

उन्होंने कहा, 'गर्वनर बना हूं तब से कहता आ रहा हूं कि राज्य में किसी ऐसी सरकार का पक्ष नहीं लूंगा जिसमें बड़े पैमाने पर खरीद फरोख्त हुई है।' 

उस समय उन्होंने यहां तक अपनी सफाई में कहा, 'अगर दिल्ली की तरफ देखता तो राज्य में सज्जाद लोन की सरकार बनानी पड़ती। मैं इतिहास में एक बेईमान आदमी के तौर पर जाना जाता। इसलिए मैंने उस मामले को ही खत्म कर दिया है।'

लेकिन मामला ख़त्म नहीं हुआ है, नौ महीने बाद दरअसल नये सिरे से शुरू हुआ है और अब कहां तक जाएगा, कहा नहीं जा सकता।

 

Jammu and Kashmir
Governor Satya pal malik
Article 370
Article 35(A)
Indian independence day
Indian constitution
Indian army
BJP
Modi government

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल


बाकी खबरें

  • Banaras
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव : बनारस में कौन हैं मोदी को चुनौती देने वाले महंत?
    28 Feb 2022
    बनारस के संकटमोचन मंदिर के महंत पंडित विश्वम्भर नाथ मिश्र बीएचयू IIT के सीनियर प्रोफेसर और गंगा निर्मलीकरण के सबसे पुराने योद्धा हैं। प्रो. मिश्र उस मंदिर के महंत हैं जिसकी स्थापना खुद तुलसीदास ने…
  • Abhisar sharma
    न्यूज़क्लिक टीम
    दबंग राजा भैया के खिलाफ FIR ! सपा कार्यकर्ताओं के तेवर सख्त !
    28 Feb 2022
    न्यूज़चक्र के आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार Abhisar Sharma Ukraine में फसे '15,000 भारतीय मेडिकल छात्रों को वापस लाने की सियासत में जुटे प्रधानमंत्री' के विषय पर चर्चा कर रहे है। उसके साथ ही वह…
  • रवि शंकर दुबे
    यूपी वोटिंग पैटर्न: ग्रामीण इलाकों में ज़्यादा और शहरों में कम वोटिंग के क्या हैं मायने?
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में अब तक के वोटिंग प्रतिशत ने राजनीतिक विश्लेषकों को उलझा कर रख दिया है, शहरों में कम तो ग्रामीण इलाकों में अधिक वोटिंग ने पेच फंसा दिया है, जबकि पिछले दो चुनावों का वोटिंग ट्रेंड एक…
  • banaras
    सतीश भारतीय
    यूपी चुनाव: कैसा है बनारस का माहौल?
    28 Feb 2022
    बनारस का रुझान कमल खिलाने की तरफ है या साइकिल की रफ्तार तेज करने की तरफ?
  • एस एन साहू 
    उत्तरप्रदेश में चुनाव पूरब की ओर बढ़ने के साथ भाजपा की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं 
    28 Feb 2022
    क्या भाजपा को देर से इस बात का अहसास हो रहा है कि उसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कहीं अधिक पिछड़े वर्ग के समर्थन की जरूरत है, जिन्होंने अपनी जातिगत पहचान का दांव खेला था?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License