NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आप शिक्षित हैं? कुशल हैं? माफ़ कीजिए आपके लिए रोज़गार नहीं है!
लीक हुई एनएसएसओ की रिपोर्ट से पता चलता है कि शिक्षित पुरुषों में बेरोज़गारी दर लगभग तीन गुनी हो गई है जबकि महिलाओं में यह दोगुनी हो गई है। इतना ही नहीं कुशल प्रशिक्षित लोगों में यह दोगुनी हो गई है।
सुबोध वर्मा
19 Feb 2019
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy : Scroll.in

भारत में वर्ष 2017-18 में रोज़गार की स्थिति को लेकर लीक हुई एनएसएसओ की रिपोर्ट में शिक्षित लोगों के बेरोज़गारी के बारे में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इससे यह भी पता चलता है कि जोर-शोर से प्रचार किए गए कौशल भारत जैसे कार्यक्रम लोगों को कौशल प्रदान करने और नौकरी पाने में मदद करने के मामले में बुरी तरह से विफल रहे हैं।

यह याद किया जा सकता है कि मोदी सरकार ने रोज़गार और बेरोज़गारी की स्थिति के बारे में पुख्ता आंकड़ों का सर्वेक्षण करने और सामने लाने के लिए साल 2017 में एक विशेष और नया सर्वेक्षण शुरू किया था। सांख्यिकी तथा कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) को ये सर्वेक्षण करने का प्रभार सौंपा गया था जिसे पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) क़रार दिया गया था।

ये सर्वे जून 2017 से जून 2018 के दौरान किया गया था और इसकी रिपोर्ट को दिसंबर 2018 में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग द्वारा अंतिम रूप दिया गया था और मंज़ूरी दी गई थी। हालांकि यह अभी भी जारी नहीं किया गया है और वहीं इस आयोग के दो सदस्यों ने इस्तीफ़ा भी दे दिया है। दैनिक अख़बार बिजनेस स्टैंडर्ड ने इस रिपोर्ट की एक प्रति हासिल की और इसे प्रकाशित भी किया।

अपने खुलासे के नए अंश में पीएलएफएस के हवाले से कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला बेरोज़गारी वर्ष 2011-12 में 9.7% से बढ़कर वर्ष 2017-18 में 17.3% हो गई। बेरोज़गारी के मामले में अंतिम एनएसएसओ सर्वे वर्ष 2011-12 में किया गया था। वहीं शहरी क्षेत्रों में महिला बेरोज़गारी इसी अवधि में 10.3% से 19.8% तक पहुंच गई जो लगभग दोगुनी के बराबर है।

table no job.jpg

पुरुषों में बेरोज़गारी दर वर्ष 2011-12 और वर्ष 2017-18 के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में 3.6% से 10.5% पहुंच गई जबकि शहरी क्षेत्रों में 4% से 9.2%तक हो गई। शिक्षित लोगों को ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसने शिक्षा के माध्यमिक चरण को पूरा किया है यानी 10वीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त किया है।

इसकी तुलना इस सर्वे द्वारा बताई गई 6.1% की समग्र बेरोज़गारी दर से की जा सकती है। स्पष्ट रूप से शिक्षित व्यक्तियों को मौजूदा स्थिति में नौकरी ढूंढना काफी ज़्यादा कठिन लगता है। यह ऐसा समय है जब शिक्षा के लिए नामांकन में आम तौर पर वृद्धि हुई है।

लीक हुई रिपोर्ट द्वारा सामने आई जानकारी में एक और चिंता का विषय यह है कि उन लोगों में बेरोज़गारी दर में लगातार वृद्धि हुई है जिन लोगों ने किसी भी तरह का कौशल पाठ्यक्रम (व्यावसायिक या तकनीकी) प्राप्त कर लिया है। उन्होंने नवउदारवादी प्रवत्ति वाले लोगों द्वारा प्रचारित भ्रमात्मक सिद्धांत की क़ीमत चुकाई है- और मोदी सरकार द्वारा बिना सोचे समझे स्वीकार कर लिया गया है- कि आप सभी को कौशल की आवश्यकता है और आपकी इच्छा के अनुसार नौकरी उपलब्ध होगी।

table no job2.jpg

1,200 करोड़ रुपये की फंडिंग वाले स्किल इंडिया कार्यक्रम स्पष्ट रूप से बेमेल है यदि शुद्ध परिणाम यह है कि प्रशिक्षित व्यक्तियों में बेरोज़गारी वर्ष 2011-12 में 5.9% से बढ़कर वर्ष 2017-18 में 12.4% तक पहुंच गई है।

वास्तव में लीक हुई रिपोर्ट से पता चलता है कि औपचारिक व्यावसायिक या तकनीकी प्रशिक्षण पाने वाले व्यक्तियों की हिस्सेदारी इस अवधि में पहले के मात्र 2.2% से घटकर पूरी आबादी का 2% रह गई है। यह इस ओर इशारा करता है कि सरकार के कौशल कार्यक्रम के तहत लघु अवधि वाले पाठ्यक्रम (28 मार्च 2018 को राज्यसभा में किए गए प्रश्न संख्या 3811 के अनुसार) लगभग 41 लाख लोगों को "कौशल प्रशिक्षण" प्रदान किए गए जो लुप्त है और अकुशल व्यक्तियों की बढ़ती संख्या से दब गए हैं। इस दृष्टि से यह आश्चर्य की बात नहीं है कि यदि कुशल व्यक्तियों को नौकरी नहीं मिल रही है तो प्रशिक्षण पाठ्यक्रम क्यों किए जाए?

सच्चाई यह है कि जब तक सरकार द्वारा सार्वजनिक निवेश और ख़र्च में वृद्धि के ज़रिए रोज़गार सृजन के लिए सशक्त पहल नहीं की जाती है तब तक नौकरियों की स्थिति में पर कुछ भी परिवर्तन होने वाला नहीं है। यह न केवल सरकारी क्षेत्रों (60 लाख अनुमानित) में रिक्त पदों को भरने में बल्कि कृषि तथा औद्योगिक विस्तार में भी अपरिहार्य होगा। यह कृषि और औद्योगिक श्रमिकों दोनों की मज़दूरी बढ़ाने और किसानों को बेहतर क़ीमत देने में मदद करेगा ताकि आम लोगों को ख़रीदने की शक्ति मिल सके। यह बदले में अधिक वस्तुओं और सेवाओं की मांग को बढ़ावा देगा और इस तरह रोज़गार पैदा करेगा।

unemployment
Employment
no jobs
nsso
Leaked NSSO Report
Skill India
Educated Unemployed
PLFS

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

ज्ञानव्यापी- क़ुतुब में उलझा भारत कब राह पर आएगा ?

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

महंगाई की मार मजदूरी कर पेट भरने वालों पर सबसे ज्यादा 

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी


बाकी खबरें

  • make in india
    बी. सिवरामन
    मोदी का मेक-इन-इंडिया बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा श्रमिकों के शोषण का दूसरा नाम
    07 Jan 2022
    बहुराष्ट्रीय कंपनियों के गिग कार्यकर्ता नई पीढ़ी के श्रमिक कहे जा सकते  हैं, लेकिन वे सीधे संघर्ष में उतरने के मामले में ऑटो व अन्य उच्च तकनीक वाले एमएनसी श्रमिकों से अब टक्कर लेने लगे हैं। 
  • municipal elections
    फर्राह साकिब
    बिहारः नगर निकाय चुनावों में अब राजनीतिक पार्टियां भी होंगी शामिल!
    07 Jan 2022
    ये नई व्यवस्था प्रक्रिया के लगभग अंतिम चरण में है। बिहार सरकार इस प्रस्ताव को विधि विभाग से मंज़ूरी मिलने के पश्चात राज्य मंत्रिपरिषद में लाने की तैयारी में है। सरकार की कैबिनेट की स्वीकृति के बाद इस…
  • Tigray
    एम. के. भद्रकुमार
    नवउपनिवेशवाद को हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका की याद सता रही है 
    07 Jan 2022
    हिंद महासागर को स्वेज नहर से जोड़ने वाले रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण लाल सागर पर अपने नियंत्रण को स्थापित करने की अमेरिकी रणनीति की पृष्ठभूमि में चीन के विदेश मंत्री वांग यी की अफ्रीकी यात्रा काफी…
  • Supreme Court
    अजय कुमार
    EWS कोटे की ₹8 लाख की सीमा पर सुप्रीम कोर्ट को किस तरह के तर्कों का सामना करना पड़ा?
    07 Jan 2022
    आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग को आरक्षण देने के लिए ₹8 लाख की सीमा केवल इस साल की परीक्षा के लिए लागू होगी। मार्च 2022 के तीसरे हफ्ते में आर्थिक तौर पर कमजोर सीमा के लिए निर्धारित क्राइटेरिया की वैधता पर…
  • bulli bai aap
    सना सुल्तान
    विचार: शाहीन बाग़ से डरकर रचा गया सुल्लीडील... बुल्लीडील
    07 Jan 2022
    "इन साज़िशों से मुस्लिम औरतें ख़ासतौर से हम जैसी नौजवान लड़कियां ख़ौफ़ज़दा नहीं हुईं हैं, बल्कि हमारी आवाज़ और बुलंद हुई है।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License