NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
अपना भाषण, अपना धन्यवाद ज्ञापन!
पहले खुद भाषण लिखो, उसे राष्ट्रपति जी से पढ़वाओ और फिर उसका धन्यवाद करो। यही प्रथा है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
30 Jun 2019
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
फोटो : साभार

राष्ट्रपति महोदय के दोनों सदनों में अभिभाषण पर मोदी जी का धन्यवाद भाषण सुना। पहले तो राष्ट्रपति जी ने मोदी सरकार द्वारा लिखा गया भाषण ही पढ़ा और फिर मोदी जी ने और उनके मंत्रियों, सासंदों द्वारा उसका धन्यवाद किया गया। पहले खुद भाषण लिखो, उसे राष्ट्रपति जी से पढ़वाओ और फिर उसका धन्यवाद करो। यही प्रथा है। आप धन्यवाद किसका कर रहे होते हैं, समझ नहीं आता। अपना, क्योंकि वह भाषण आपने ही लिखा होता है, या राष्ट्रपति महोदय का, क्योंकि उन्होंने उसे पढ़ा होता है या फिर दोनों का। पर प्रथा है, निभानी ही पड़ती है। प्रथा कांग्रेस ने शुरू की, लेकिन फायदे वाली प्रथा है, प्रोपेगैंडा मिलता है इसीलिए भाजपा भी निभा रही है। अगर (यह प्रथा) लाभप्रद (देश के लिए नहीं, मोदी जी के लिए) न होती तो नेहरू और कांग्रेस की भत्सर्ना कर कब की बंद कर दी गई होती।

tirchi najar after change new_20.png

अब मोदी जी ने स्वीकारा कि देश (की जनता) ने उन्हें (भाजपा) को बहुत अधिक दिया है। इतना अधिक जितने कि उन्होंने उम्मीद भी नहीं की थी। वैसे यह जो अधिक मिला, ईवीएम ने दिलवाया, यह भी नहीं कह सकते। क्योंकि ईवीएम अब भाजपा को जिता कर भगवान तुल्य हो गई है जिस पर आप प्रश्न नहीं उठा सकते। पहले सभी ईवीएम पर प्रश्न उठाते रहे हैं, यहां तक कि भाजपा भी। पर हां, अगर भाजपा हार जाती तो बात अलग थी। पर सिर्फ वोट ही नहीं, देश ने और भी बहुत कुछ दिया है जिसकी वजह से भाजपा दिल्ली में ही आलीशान मुख्यालय नहीं, प्रदेशों के मुख्यालयों और जिलों में भी बड़े बड़े ऑफिस बनवा सकी।

मोदी जी ने धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए यह भी कहा कि भ्रष्टाचार को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। मोदी जी भ्रष्टाचार को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करते हैं, यह हम पिछले कार्यकाल से ही जानते हैं। बताया जाता है कि व्यापमं घोटाले में मोदी जी ने शिवराज सिंह चौहान से त्यागपत्र मांग ही लिया था। चावल घोटाले में तो रमन सिंह को बर्खास्त करने ही वाले थे कि चुनाव में कांग्रेस की सरकार आ गई। बताया तो यह भी जाता है कि रफ़ाल घोटाले में भी मोदी जी, सीबीआई चीफ को बुलाकर स्वयं ही जांच करने का हुक्म देने ही वाले थे कि सीबीआई में नम्बर एक और नम्बर दो में खटपट शुरू हो गई। मोदी जी की वहां भी भ्रष्टाचार से लडाई की योजना धरी की धरी रह गई। पर फिर भी भ्रष्टाचार से लडाई चालू रहेगी। यह बात अलग है कि भ्रष्टाचार से लडने के लिए जो एक संस्था, लोकायुक्त की नियुक्ति गुजरात में मोदी जी के मुख्यमंत्री रहते हुए नहीं हो पायी और अब केंद्र में भी लोकपाल करीब पांच साल बाद ही नियुक्त हुआ है वह भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद। वैसे यह बात ठीक भी है, प्रधानमंत्री जी ही सारे काम सम्हाल लें। लोकपाल का भी और विदेश मंत्री का भी।

अब मोदी जी हमेशा चुनावी मोड में रहते हैं। कभी कभी चुनाव के समय वे गैर चुनावी मूड में आ जाते हैं जैसे कि इस बार वे अक्षय कुमार से साक्षात्कार के समय आये थे। अन्यथा मोदी जी, चाहे देश में हों या विदेश में, संसद में हों या रैली में, चुनावी भाषण ही देते हैं। भाषण चुनावी हो या गैर चुनावी, और वे कांग्रेस की बुराई न करें, ऐसा हो नहीं सकता। इस बार उन्होंने कांग्रेस की ऊंचाई की बात की और मज़ाक उड़ाया कि आप इतने ऊंचे उठ चुके हैं कि आपको वहां से कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। थोड़ी देर बाद ही देश को इतना ऊंचा उठाने की बात की कि आसमान की ऊंचाई भी कम पड़ जाये। मुझे उम्मीद है कि मोदी जी देश को इतना ऊपर भी नहीं उठाऐंगे कि अम्बानी और अडानी भी दिखाई देने बंद हो जायें।

बातें तो बहुत कही गयीं। पर सबसे बड़ी बात यह स्वीकार किया कि पिछले सत्तर साल में कुछ नहीं किया गया। जब मोदी जी आज भी पिछले सत्तर साल की बात करते हैं तो वे 1949 से 2019 तक की बात कर रहे होते हैं। जाहिर है देश की स्वतंत्रता और संविधान लिखने के बाद मोदी जी के हिसाब से कोई काम नहीं हुआ है। पिछले पांच साल में तो कुछ भी नहीं।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Narendra modi
Modi Govt

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे

चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू

कटाक्ष: इंडिया वालो शर्म करो, मोदी जी का सम्मान करो!


बाकी खबरें

  • election
    राज वाल्मीकि
    चुनाव 2022: ‘हमारा वोट सबको चाहिए उन्हें भी जो हमसे भेदभाव करते हैं’
    10 Feb 2022
    ‘हमारा वोट मांगने तो हर पार्टी के लोग हमारे पास आते हैं। कथित उच्च जाति के लिए हम दलित और अछूत होते हैं। हम से छूआछूत और भेदभाव करते हैं। पर चुनाव के समय वे यह भूल जाते हैं। क्योंकि हमारे वोट की तो…
  • up elections
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    गुंडागीरी और लोकतंत्रः समाज को कैसे गुंडे चाहिए
    10 Feb 2022
    अगर अपराधी अपनी जाति का है तो वह साधु संत है और अगर दूसरी जाति और धर्म का है तो वह गुंडा है, माफिया है!!
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: यूपी चुनाव और गोदी मीडिया के सवाल
    10 Feb 2022
    गोदी मीडिया शायद पूरी तरह ज़मीन से कट चुका है, तभी तो महंगाई, बेरोज़गारी और खेती-किसानी के संकट के दौर में भी वह यूपी के मतदाता से हिजाब पर सवाल पूछता है।
  • jammu and kashmir
    अनीस ज़रगर
    राइट्स ग्रुप्स ने की पत्रकार फ़हाद शाह की रिहाई और मीडिया पर हमलों को बंद करने की मांग
    10 Feb 2022
    पत्रकार फ़हाद शाह की गिरफ़्तारी को कई लोग कश्मीर में मीडिया पर हमले के रूप में देख रहे हैं, जहां पुलिस अधिकारियों ने हाल के वर्षों में कई मीडिया कर्मियों पर मुकदमा दर्ज कर और उन्हें परेशान किया गया है।
  • ग्राउंड रिपोर्ट
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    ग्राउंड रिपोर्टः जाट-मुस्लिम गठजोड़ बना चुंबक, बिगड़ रहा भाजपा का खेल, मुखर हुईं मुस्लिम आवाज़ें
    10 Feb 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने बागपत के ढिकौली गांव में सपा-रालोद गठबंधन के मुस्लिम उम्मीदवार के पक्ष में बनते माहौल और हापुड़, मुरादाबाद व अलीगढ़ में मुस्लिम आवाजों की राजनीतिक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License