NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
घटना-दुर्घटना
सोशल मीडिया
भारत
अपराध/बलात्कार के बाद वीडियो वायरल : ये कहां आ गए हम...!
आख़िर समाज किस मानसिकता का गुलाम होता जा रहा है जहां अपराध करने वाला खुद वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया में डंके की चोट पर वायरल भी कर देता है।
सरोजिनी बिष्ट
31 May 2019
Video

अजीब सा ट्रेंड चल पड़ा है जहां अपराध और अपराधियों की खबर पुलिस को बाद में मिलती है,  पहले सोशल मीडिया के जरिये देश में फैल जाती है। वीडियो बनता रहता है अपराध होता रहता है और फिर उसी वीडियो को अपराधी बड़ी शान से सोशल मीडिया में वायरल कर देते हैं। वायरल वीडियों के इस दौर में महिला उत्पीड़न की भयावह सच्चाई भी सामने आ रही है। कभी किसी प्रेमी युगल को खंभे से बांधकर पीटने का वीडियो वायरल हो रहा है तो कभी सरेआम बदमाशों द्वारा किसी महिला से छेड़छाड़ व बलात्कार करने का वीडियो सामने आ रहे हैं।  और ऐसा देश के किसी एक हिस्से में घटित नहीं हो रहा झारखंड, बंगाल ,उत्तर प्रदेश,मध्य प्रदेश, राजस्थान,  बिहार हर तरफ से वायरल वीडियो सामने आ रहे हैं।  

ऐसे वीडियो बेशक अपराधियों तक पहुँचने में पुलिस के मददगार तो साबित हो रहे हैं लेकिन सवाल इससे कहीं ज़्यादा बड़ा है कि आख़िर समाज किस मानसिकता का गुलाम होता जा रहा है जहां अपराध करने वाला खुद वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया में डंके की चोट पर वायरल भी कर देता है। 

पिछले दिनों बिहार के मुंगेर के खरगौन गाँव में प्रेमी युगल को खंभे से बांधकर ग्रामीणों द्वारा पीटने का वीडियो सामने आया तो वहीं बेगूसराय में भी बदमाशों द्वारा प्रेमी जोड़े को पीटे जाने और युवती के साथ दुष्कर्म की कोशिश का वीडियो वायरल हुआ और हाल फिलहाल घटी राजस्थान की घटना सभी के मस्तिष्क में कैद है जहाँ नवदम्पति के साथ दबंगों  ने न सिर्फ मार पिटाई की बल्कि पति के सामने ही पत्नी का रेप किया यहाँ तक कि पति को भी सबके सामने पत्नी से शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाला। उफ्फ कितना भयावह रहा होगा वह सब।

अब थोड़ा और पीछे चलते हैं बात बुलन्दशहर व उन्नाव की घटना की जो ऐसी वायरल वीडियों के वीभत्स चेहरों में से हैं। पिछले साल  बुलन्दशहर में एक पति ने गाँव वालों के ही सामने अपनी पत्नी को पेड़ पर बांधकर बेल्ट से तब तक पीटा जब तक कि व बेहोश नहीं हो गई।  पति को शक था कि उसकी पत्नी का किसी अन्य पुरुष के साथ सम्बन्ध है इसी के कुछ समय बाद फिर एक दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आता है जहाँ कुछ ग्रामीण युवक एक महिला को जंगल के अंदर खींचते हुए ले जा रहे हैं और उसका बलात्कार करने की बात कह रहे हैं महिला बार बार उनसे छोड़ देने की गुहार लगा रही है पर एक युवक वीडियो बनाता जा रहा है व रेप की बात कह रहा है। 

ये घटनाएँ अपने आप में न तो पहली है न अंतिम पिछले कुछ सालों में ऐसी घटनाएँ एक के बाद एक सामने आई हैं जहाँ बेखौफ़ होकर लोग अपराध भी कर रहे हैं और स्वयं वीडियो बनाकर खुद ही वायरल भी कर रहे हैं। पर ऐसी घटनाओं का विश्लेषण करे तो एक तथ्य जो समान रूप से सामने आता है कि इस तरह के हेट क्राईम्स के वीडियो ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों, निम्न या निम्न मध्यवर्गीय समाज से ज्यादा आ रहे हैं। अपराध जितने गंभीर है, सवाल उतने ही जरूरी कि आख़िर क्या कारण है कि गाँव का नौजवान ऐसे अपराध का हिस्सेदार बनता जा रहा है जहाँ स्वयं उसका भी जीवन दांव पर लगा हो। वीडियो बनाकर वायरल करने की प्रवृत्ति का नशा इस कदर सिर चढ़कर बोल रहा है कि न तो उन्हें समाज की परवाह है न कानून का खौफ़, न बदनामी का डर।  

पर सवाल तो या भी है न कि आख़िर किस समाज का डर हो उस समाज का जो अपने सामने एक महिला को भरी सभा में पिटते हुए देखकर भी चुप है या उस कानून का जिसके पोषक लोग खुद हेट क्राइम में शामिल हैं। फरीदाबाद के आदर्श नगर थाने का मामला भी ऐसे ही हेट क्राइम के वायरल वीडियो को आगे बढ़ाने की कड़ी में शामिल है जहाँ थाना परिसर में एक अकेली महिला को कुछ पुलिस वाले घेर कर बेल्ट से पीट रहे हैं।

इस ओर हमको गंभीरता से तो सोचना ही होगा कि आख़िर ऐसी प्रवृत्ति के पोषक कौन लोग हैं।  ऐसे वायरल वीडियो न केवल महिला उत्पीड़न की प्रधानता को दिखाते हैं बल्कि इस ओर भी इशारा करते हैं कि अपने पौरुष वर्चस्व की मानसिकता से लबरेज एक तबका खुद को दूसरे जेंडर के मुकाबले कितना श्रेष्ठ समझने लगा है कि रेप जैसी घटनाओं का भी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया की मार्फत लाखों लोगों तक पहुँचा दे रहा है। समय कठिन है और चुनौतियां ज्यादा पर कहते हैं न कि बगैर लड़े कुछ भी हासिल करना नामुमकिन है तो नामुमकिन को मुमकिन बनाने के लिए लड़ना तो लाज़िम है।

इसे भी पढ़ें : दुराचार कर सोशल मीडिया पर वायरल किया वीडियो : मुकदमा दर्ज

Social Media
online media
rape case
crimes against women
sexual crimes
Hate Crime
crime
opinion
viral video
police

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

बिहार: 8 साल की मासूम के साथ बलात्कार और हत्या, फिर उठे ‘सुशासन’ पर सवाल

यूपी: अयोध्या में चरमराई क़ानून व्यवस्था, कहीं मासूम से बलात्कार तो कहीं युवक की पीट-पीट कर हत्या

मध्य प्रदेश : मर्दों के झुंड ने खुलेआम आदिवासी लड़कियों के साथ की बदतमीज़ी, क़ानून व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर कांड से लेकर गायघाट शेल्टर होम तक दिखती सिस्टम की 'लापरवाही'

यूपी: बुलंदशहर मामले में फिर पुलिस पर उठे सवाल, मामला दबाने का लगा आरोप!

दिल्ली गैंगरेप: निर्भया कांड के 9 साल बाद भी नहीं बदली राजधानी में महिला सुरक्षा की तस्वीर


बाकी खबरें

  • शशि शेखर
    कांग्रेस का कार्ड, अखिलेश की तस्वीर, लेकिन लाभार्थी सिर्फ़ भाजपा के साथ?
    23 Mar 2022
    मोदी सरकार ने जिस राशन को गरीबों के लिए फ्री किया है, वह राशन पहले से लगभग न के बराबर मूल्य पर गरीबों को मिल रहा था। तो क्या वजह रही कि लाभार्थी समूह सिर्फ़ भाजपा के साथ गया।
  • bhagat singh
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    हमें ये शौक़ है देखें सितम की इंतिहा क्या है
    23 Mar 2022
    आज शहीद दिवस है। आज़ादी के मतवाले भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान का दिन। आज ही के दिन 23 मार्च 1931 को इन तीनों क्रांतिकारियों को अंग्रेज़ सरकार ने फांसी दी थी। इन क्रांतिकारियोें को याद करते…
  • नीलांजन मुखोपाध्याय
    सद्भाव बनाम ध्रुवीकरण : नेहरू और मोदी के चुनाव अभियान का फ़र्क़
    23 Mar 2022
    देश के पहले प्रधानमंत्री ने सांप्रदायिक भावनाओं को शांत करने का काम किया था जबकि मौजूदा प्रधानमंत्री धार्मिक नफ़रत को भड़का रहे हैं।
  • Mathura
    मौहम्मद अली, शिवानी
    मथुरा: गौ-रक्षा के नाम पर फिर हमले हुए तेज़, पुलिस पर भी पीड़ितों को ही परेशान करने का आरोप, कई परिवारों ने छोड़े घर
    23 Mar 2022
    मथुरा के जैंत क्षेत्र में कुछ हिंदुत्ववादियों ने एक टैंपो चालक को गोवंश का मांस ले जाने के शक में बेरहमी से पीटा। इसके अलावा मनोहरपुरा सेल्टर हाउस इलाके में आए दिन काफ़ी लोग बड़ी तादाद में इकट्ठा…
  • toffee
    भाषा
    उत्तर प्रदेश: विषाक्त टॉफी खाने से चार बच्चों की मौत
    23 Mar 2022
    ग्रामीणों के मुताबिक टॉफी के रैपर पर बैठने वाली मक्खियों की भी मौत हो गई। एक टॉफी सुरक्षित रखी गई है। पांडेय ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License