NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अपनी पार्टी, माकपा ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से नई मीडिया नीति को वापस लेने की मांग की
माकपा नेता तारिगामी ने कहा कि नई मीडिया नीति अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने का प्रयास है। पूर्व मंत्री मीर ने केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन से जम्मू-कश्मीर में प्रिंट, ऑनलाइन और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संगठनों के प्रतिनिधियों के परामर्श से नई मीडिया नीति की समीक्षा करने का आग्रह किया।
भाषा
06 Jul 2020
cpim

श्रीनगर, छह जुलाई (भाषा) अपनी पार्टी के नेता गुलाम हसन मीर और माकपा नेता एम वाई तारिगामी ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर प्रशासन से नई मीडिया नीति को तुरंत वापस लेने की मांग की।

पूर्व मंत्री मीर ने केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन से जम्मू-कश्मीर में प्रिंट, ऑनलाइन और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संगठनों के प्रतिनिधियों के परामर्श से नई मीडिया नीति की समीक्षा करने का आग्रह किया।

मीर ने एक बयान में कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर में मीडिया से संबंधित नई नीति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देने वाले मौलिक संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखे बिना तैयार किया गया है।’’ उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश में मीडिया उद्योग की दशा पर चिंता व्यक्त की, जो मौजूदा परिस्थितियों में अस्तित्व के लिए जूझ रहा है।

मीर ने कहा, ‘‘इन आर्थिक स्थितियों में प्रिंट, ऑनलाइन और इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म सहित मीडिया उद्योग की सहायता करने के बजाय, सरकार ने चौथे स्तंभ को दबाना शुरू कर दिया है।’’

इस बीच, माकपा नेता और पूर्व विधायक एम वाई तारिगामी ने भी मीडिया नीति को वापस लेने की मांग की।

तारिगामी ने कहा कि नई मीडिया नीति अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने का प्रयास है।

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘नई मीडिया नीति ने इस क्षेत्र में काम कर रहे पत्रकारों के बीच अशांति फैला दी है क्योंकि इसका मकसद जम्मू-कश्मीर में उनकी आवाज को दबाना है।’’

पत्रकारिता बिरादरी को इस मुद्दे पर अपने पूर्ण समर्थन को लेकर आश्वस्त करते हुए, तारिगामी ने सरकार से तुरंत नई मीडिया नीति को वापस लेने का आग्रह किया है।

Jammu and Kashmir
CPIM
withdraw new media policy
Media Policy

Related Stories

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

त्रिपुरा: सीपीआई(एम) उपचुनाव की तैयारियों में लगी, भाजपा को विश्वास सीएम बदलने से नहीं होगा नुकसान

कश्मीरी पंडितों के लिए पीएम जॉब पैकेज में कोई सुरक्षित आवास, पदोन्नति नहीं 

यासीन मलिक को उम्रक़ैद : कश्मीरियों का अलगाव और बढ़ेगा

आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को उम्रक़ैद

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?


बाकी खबरें

  • ghazipur
    भाषा
    गाजीपुर अग्निकांडः राय ने ईडीएमसी पर 50 लाख का जुर्माना लगाने का निर्देश दिया
    30 Mar 2022
    दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने दो दिन पहले गाजीपुर लैंडफिल साइट (कूड़ा एकत्र करने वाले स्थान) पर भीषण आगजनी के लिये बुधवार को डीपीसीसी को ईडीएमसी पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाने और घटना के…
  • paper leak
    भाषा
    उत्तर प्रदेश: इंटर अंग्रेजी का प्रश्न पत्र लीक, परीक्षा निरस्त, जिला विद्यालय निरीक्षक निलंबित
    30 Mar 2022
    सूत्रों के अनुसार सोशल मीडिया पर परीक्षा का प्रश्न पत्र और हल किया गया पत्र वायरल हो गया था और बाजार में 500 रुपए में हल किया गया पत्र बिकने की सूचना मिली थी।
  • potato
    मोहम्मद इमरान खान
    बिहार: कोल्ड स्टोरेज के अभाव में कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर आलू किसान
    30 Mar 2022
    पटनाः बिहार के कटिहार जिले के किसान राजेंद्र मंडल, नौशाद अली, मनोज सिंह, अब्दुल रहमान और संजय यादव इस बार आलू की बम्पर पैदावार होने के बावजूद परेशान हैं और चिंतित हैं। जि
  • east west
    शारिब अहमद खान
    रूस और यूक्रेन युद्ध: पश्चिमी और गैर पश्चिमी देशों के बीच “सभ्य-असभ्य” की बहस
    30 Mar 2022
    “किसी भी अत्याचार की शुरुआत अमानवीयकरण जैसे शब्दों के इस्तेमाल से शुरू होती है। पश्चिमी देशों द्वारा जिन मध्य-पूर्वी देशों के तानाशाहों को सुधारवादी कहा गया, उन्होंने लाखों लोगों की ज़िंदगियाँ बरबाद…
  • Parliament
    सत्यम श्रीवास्तव
    17वीं लोकसभा की दो सालों की उपलब्धियां: एक भ्रामक दस्तावेज़
    30 Mar 2022
    हमें यह भी महसूस होता है कि संसदीय लोकतंत्र के चुनिंदा आंकड़ों के बेहतर होने के बावजूद समग्रता में लोकतंत्र कमजोर हो सकता है। यह हमें संसदीय या निर्वाचन पर आधारित लोकतंत्र और सांवैधानिक लोकतंत्र के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License