NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अर्जेंटीना संकट पर छोटे किसान: ज़मीन का अंदाज़ा लगाया जा सकता है, बाज़ार का नहीं
उस वक़्त अर्जेंटीना गोमांस का प्रमुख उत्पादक और निर्यातक भी था।
विजय प्रसाद
08 Sep 2018
अर्जेंटीना के किसान

तीस साल पहले मेरे अर्थशास्त्र की पाठ्य पुस्तक में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार वाले भाग में अर्जेंटीना के बारे में उल्लेख था। लेखक ने कहा यह बेहतर होगा कि अर्जेंटीना गोमांस के उत्पादन और निर्यात पर ध्यान केंद्रित करे, जबकि जर्मनी को इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए अपने संसाधनों का इस्तेमाल करना चाहिए। तुलनात्मक लाभ सिद्धांत का यह सार था- अपनी अर्थव्यवस्था को विविधता देने की बजाय आप जिस चीज़ में अच्छे हैं, उसी पर ध्यान केन्द्रित करेंI यह अशिष्ट लगा। इसने कच्चे माल का उत्पादन करना अर्जेंटीना के लिए निषिद्ध कर दिया, जबकि जर्मनी तकनीकी विकास के साथ आगे बढ़ गया।

उस वक़्त अर्जेंटीना गोमांस का प्रमुख उत्पादक और निर्यातक भी था। हम होज़े हर्नान्डेज़ के महाकाव्य मार्टिन फिएरो के बारे में नहीं जानते थे, जो कि पाम्पाज़ के गाउचो (आरेंटीना के मैदानी इलाके पम्पास के चरवाहे को गाउचो कहा जाता है) के बारे में है, लेकिन हम जॉर्ज लुइस बोर्जेस की छोटी कहानियों से क्रूर कंपैड्रिटोस (हुडलम्स) और कुचिलेरस (चाकूओं वाले लड़ाके) के बारे में जानते थे। यहाँ चरवाहे मिले-जुले होते थे, जो अर्जेंटीना के मैदानी इलाके में अपने घोड़ों पर घूमते थे और बाज़ार जाने के लिए अपने मवेशियों को इकट्ठा करते थे।

अब ये घुड़सवार अर्जेंटीना की अर्थव्यवस्था को परिभाषित नहीं करते। सोयाबीन किसान को देश के भाग्य के नायक के रूप में चित्रित करना ज़्यादा सटीक होगा। इसकी बड़ी वजह चीनी बाज़ार का विकास है, जहाँ बढ़ते जीवन स्तर ने लोगों की खान-पान सम्बन्धी आदतों को बदल दिया है, यहाँ अब माँस की खपत बढ़ गयी है। सोयाबीन चीन के सूअरों को खिलाने के लिए जाता है। यह उल्लेखनीय है कि 1960 से 2013 तक विश्व सोयाबीन कृषि क्षेत्र 20 मिलियन हेक्टेयर से बढ़कर 120 मिलियन हेक्टेयर हो गया। अर्जेंटीना चीनी बाज़ार के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में से एक बन गया। चार समस्याएं अर्जेंटीना के सोयाबीन व्यापार को संकट में डालती हैं:

1. सोयाबीन की क़ीमत में कमी आई है, अर्जेंटीना अधिक मात्रा में बेच रहा है फिर भी इसके किसानों को इसके विक्रय पर कम लाभ मिलता है। साल 2012 में सोयाबीन 17.5 अमेरिकी डॉलर/बुशेल में बेचा गया, लेकिन अब यह 8.4 अमेरिकी डॉलर/बुशेल पर बिकता है।

2. चीन सोयाबीन तेल की बजाय अधिक कच्चे सोयाबीन खरीदता है, जिसका मतलब है कि यह अपने उद्योगों के लिए सोयाबीन उत्पादन के मूल्य-वर्धित हिस्सों को अपने पास रखता है।

3. अर्जेंटीना की दक्षिण-पंथी सरकार ने सोयाबीन निर्यात पर करों में कटौती की, जिसने उसके सार्वजनिक राजस्व को नुकसान पहुँचाया। अब मुद्रा संकट के चलते सरकार इन करों को फिर से लागू करने जा रही है।

4. अकाल ने अर्जेंटीना की सोयाबीन फसल को नुकसान पहुंचाया, जिसकी भरपाई के लिए इन उद्योग ने संयुक्त राज्य अमेरिका में किसानों से 120,000 टन खरीदा। अर्जेंटीना के सोयाबीन क्षेत्र को पर्यावरणीय समस्याओं का सामना करना जारी रहेगा। सोयाबीन मिट्टी को निथार देता है।

Argentina's Farmers.jpg

हमें कौन याद करता है?

सोयाबीन उत्पादन अर्जेंटीना की कृषि योग्य भूमि के लगभग आधे हिस्से में होता है। अब पशु नहीं है जो पम्पास से होकर गुजरे; अब सोयाबीन के फूल ही है जो हवा में झुके हुए हैं।

वाइल्डो मुझे खेतों में घुमाते हैं

वाइल्डो इजागुइरे कृषि के बारे में बात करना पसंद करते हैं। वह केवल एक हेक्टेयर भूमि पर कृषि करते हैं, जिसे उन्होंने एक रियल एस्टेट कंपनी से पट्टे पर लेते हैं। इस भूमि पर वाइल्डो को रचनात्मक होने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यह भूमि ला प्लाटा शहर के पास है, जिसका बाज़ार वाइल्डो जैसे बोलिवियाई प्रवासी किसानों द्वारा उगाए गए ताज़े फसल पर जीवित है। लकड़ी और प्लास्टिक कनवास से बने ग्रीनहाउस में किसान टमाटर और मिर्च, चार्ड और सलाद पत्ता उगते हैं। घर के बने उर्वरक के बैरल खेत की किनारों को रेखांकित करते हैं। इनमें से कुछ क्षेत्रों में कार्बनिक विधि में काम किया जाता है, लेकिन अन्य - जैसे कि टमाटर उगाने वाले - को रसायनों का इस्तेमाल करना पड़ता है। वाइल्डो का फार्म बिल्कुल साफ है। वह उस पर कड़ी मेहनत करते हैं। जब मैं इसका जिक्र करता हूं तो वह गर्व से मुस्कुराते हैं।

Argentina's Farmers 1.jpg

ग्रीनहाउस में वाइल्डो

वाइल्डो जैसे छोटे किसानों को अस्तित्व में रहना मुश्किल होता है। उनकी लागत का आधा हिस्सा किराए में चला जाता है, जबकि एक तिहाई बिजली पर ख़र्च होता है। एंटोनियो गार्सिया के साथ-साथ एल्सा और मैबेल यानाजे जैसे किसान भी सुझाव देते हैं- कि किराया उनके लिए एक मृत बोझ जैसा है। भूमि की लागत बहुत ज़्यादा है और भूमि पर उनका कार्यकाल अनिश्चित है। यह किसानों को खेत में पूंजीगत सुधार करने से रोकता है या यहाँ तक कि अपने मेहनत को अधिक उत्पादक बनाने के लिए उपकरण (जैसे कि ट्रैक्टर) ख़रीदने से भी रोकता है। न तो ये किसान खेतों के मालिक होते हैं और न ही वे बाजार के रास्तों को नियंत्रित करते हैं। ब्रोकर उनके उत्पाद को सबसे कम क़ीमत पर ख़रीदते हैं और फिर उन्हें सीधे प्रोसेस करने या सुपरमार्केट में बेचेने के लिए ले जाते हैं। कृषि की तुलना में पैसा कहीं और कमाया जाता है।

वाइल्डो और उनके आस-पास के किसान बहिष्कृत श्रमिकों के आंदोलन (मूवमेंट ऑफ द एक्सक्लूडेड वर्कर्स-एमटीई) से जुड़े हैं जो कि लोकप्रिय अर्थव्यवस्था में श्रमिकों के संघ(कनफेडरेशन ऑफ वर्कर्स इन द पोपुलर इकॉनोमी-सीटीईपी) का हिस्सा है। 'लोकप्रिय अर्थव्यवस्था' (ला इकॉनोमिया पोपुलर) की अवधारणा अनौपचारिक क्षेत्र के भीतर की गतिविधियों को संदर्भित करती है जो इस क्षेत्र के श्रमिकों को लाभ पहुंचाने के लिए तैयार की गई हैं, न कि संचय की श्रृंखला जो उनका अधिकतम लाभ लेती है। इस साल फरवरी महीने में सीटीईपी और एमटीई के 40,000 श्रमिकों ने खाद्य आपातकाल की घोषणा की मांग करते हुए अपने प्रांतीय सरकार के मुख्यालय तक मार्च किया। ये वे लोग हैं जो भूमि के लिए काम करते हैं और जो शहर को साफ रखने के लिए काम करते हैं, लेकिन उनके पास बहुत कम भोजन है। भूखमरी उनका पीछा करती है। यह भूख ही है जो अर्थव्यवस्था को मंद करती है और गरिमा की कमी इन श्रमिकों को सीटीईपी और एमटीई जैसे समूहों की ओर ले जाती हैं।

Argentina's Farmers 2.jpg

सीटीईपी प्रदर्शन

सीटीईपी कार्यालय (ब्यूनस आयर्स) में मैंने सीईटीपी के एक नेता जुआन ग्रैबोइस से मिला। अर्जेंटीनियाई वाम के अधिकांश नेता युवा हैं - जुआन की उम्र केवल 35 वर्ष है। इसे याद रखना होगा कि जुंटा सैनिकों ने अर्जेंटीना पर 1976 से 1983 तक वाम नेतृत्व के सभी नेताओं को मार डाला था। जुआन ग्रैबोइस जैसे युवा पुरुष और महिलाएं 2001-02 में आए। यह ऐसा समय था जब उनका देश आईएमएफ नीति निर्माण के संकट की घड़ी में शाब्दिक रूप से लगभग भंग हो गया था। सभी दिशाओं में अर्जेंटीना में उबाल आ गया, आम लोगों ने सड़कों पर जाम लगा दिया और बर्तन बजाने लगे - ये लोग पिक्टेरियो थे। जुआन ग्रैबोइस और मिलाग्रो साला (अब जेल में हैं) के साथ-साथ राजनीतिक दल पैट्रिया ग्रांडे के मैनुएल बरटोल्डी और ईटाई हगमैन जैसे युवा लोग इसी अवधि में सामने आए। उन्होंने बेरोज़गार श्रमिकों के आंदोलन और बहिष्कृत श्रमिकों के आंदोलन, छात्र समूहों और नारीवादी समूहों, स्वदेशियों और निराश लोगों के लिए मंच को इकट्ठा किया। ये युवा लोग आज वास्तविक वाम अर्जेंटीना के तीव्र पुनर्विकास की रीढ़ है।

हम अर्जेंटीना की आर्थिक परेशानियों के बारे में बात करते हैं क्योंकि इसकी मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले गिर रही है। उनके पास सामाजिक मज़दूरी को लेकर दिलचस्प विचार हैं जो एक नई अर्जेंटीनियाई परियोजना तैयार करने की जरूरत है - जिसमें से एक जैसा कि वह कहते हैं, 'समाज के किसी भी सदस्य को वंचित नहीं होना है और हर व्यक्ति जीने का रास्ता ढूंढ सकता है। यदि ऐसा कोई नया आधार नहीं बनाया गया है, तो वह महसूस करता है, अर्जेंटीना - दुनिया के अन्य हिस्सों की तरह - स्थायी अराजकता में चला जाएगा। ये संकट सैन्य बल के ज़रिए संभाला नहीं जा सकता है। क्षितिज पर कोई नई तानाशाही नहीं है। मुसीबत को समाप्त करने के लिए पुलिस अधिक आंसू गैस नहीं छोड़ सकती है।

Argentina's Farmers 3.jpg

एक तरफ पुलिस, दूसरी तरफ श्रमिक

सीटीईपी और एमटीई के लोग गंभीर हैं। ग्रामीण इलाकों में मैंने एमटीई द्वारा स्थापित एक प्रसंस्करण शेड का दौरा किया। यहाँ, ये संगठन उत्पादन का भंडारण करता है और किसानों को बेहतर सौदा कराने की प्रक्रिया करता है। एमटीई से जुड़े मारिया यूजेनिया अंबार्ट मुझे एमटीई की काम करने की सीमा के बारे में बताता है। कुछ साल पहले एमटीई ने बैरियोस डी पाई (अर्जेंटीना के पड़ोस में स्थित एक उग्रवादी समूह) के साथ भूखमरी के संकट को ध्यान में रख कर सड़कों पर सामुदायिक रसोई बनाया।

वाइल्डो छोटे किसानों के दार्शनिक हैं। वह कहते हैं, 'भूमि' की 'भविष्यवाणी' की जा सकती है। वह जानते है कि कब टमाटर की फसल लगानी है और कब उसे तोड़ना है। वह कहते हैं कि जो भविष्यवाणी योग्य नहीं है, वह है बाज़ार। वाइल्डो ऐसी दुनिया में जीना चाहते हैं जहाँ उन्हें पूंजी की शक्ति से परिभाषित नहीं किया जाता हो। यही वह दुनिया है जिसे वह बनाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं।

Argentina
farmers
capitalism
soybean

Related Stories

क्यों USA द्वारा क्यूबा पर लगाए हुए प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं अमेरिकी नौजवान

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

हिसारः फसल के नुक़सान के मुआवज़े को लेकर किसानों का धरना

किसानों, स्थानीय लोगों ने डीएमके पर कावेरी डेल्टा में अवैध रेत खनन की अनदेखी करने का लगाया आरोप

वित्त मंत्री जी आप बिल्कुल गलत हैं! महंगाई की मार ग़रीबों पर पड़ती है, अमीरों पर नहीं

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

समाजवाद और पूंजीवाद के बीच का अंतर

आख़िर किसानों की जायज़ मांगों के आगे झुकी शिवराज सरकार

MSP पर लड़ने के सिवा किसानों के पास रास्ता ही क्या है?

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी


बाकी खबरें

  • govt employee
    अनिल जैन
    निजीकरण की आंच में झुलस रहे सरकारी कर्मचारियों के लिए भी सबक़ है यह किसान आंदोलन
    28 Nov 2021
    किसानों की यह जीत रेलवे, दूरसंचार, बैंक, बीमा आदि तमाम सार्वजनिक और संगठित क्षेत्र के उन कामगार संगठनों के लिए एक शानदार नज़ीर और सबक़ है, जो प्रतिरोध की भाषा तो खूब बोलते हैं लेकिन कॉरपोरेट से लड़ने…
  • poverty
    अजय कुमार
    ग़रीबी के आंकड़ों में उत्तर भारतीय राज्यों का हाल बेहाल, केरल बना मॉडल प्रदेश
    28 Nov 2021
    मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स के मुताबिक केरल के अलावा भारत का और कोई दूसरा राज्य नहीं है, जहां की बहुआयामी गरीबी 1% से कम हो। 
  • kisan andolan
    शंभूनाथ शुक्ल
    हड़ताल-आंदोलन की धार कुंद नहीं पड़ी
    28 Nov 2021
    एक ज़माने में मज़दूर-किसान यदि धरने पर बैठ जाते थे तो सत्ता झुकती थी। पर पिछले चार दशकों से लोग यह सब भूल चुके थे।
  • Hafte Ki Baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    संवैधानिक मानववाद या कारपोरेट-हिन्दुत्ववाद और यूपी में 'अपराध-राज'!
    27 Nov 2021
    संविधान दिवस के मौके पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोपों-प्रत्यारोपो की खूब बौछार हुई. क्या सच है-संविधानवाद और परिवारवाद का? क्या भारत की सरकारें सचमुच संविधान के विचार और संदेश के हिसाब से…
  • crypto
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या Crypto पर अंकुश ज़रूरी है?
    27 Nov 2021
    मोदी सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर अंकुश लगा रही हैI लेकिन आखिर यह क्रिप्टोकरेंसी है क्या? क्या यह देश में मुद्रा की जगह ले सकती है?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License