NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आरक्षण नीति का विनाश,वर्गीकृत स्वायत्तता के विरोध में डीयू शिक्षकों का परीक्षा पत्र मूल्यांकन बहिष्कार
वर्गीकृत स्वायत्तता निजीकरण की दिशा में एक और धक्का है, जबकि शिक्षकों की नियुक्ति के लिए नए यूजीसी दिशा निर्देश एससी, एसटी और ओबीसी शिक्षकों के लिए सीटों की संख्या में काफी कमी आएगी ।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
10 May 2018
Translated by मुकुंद झा
DUTA

9 मई को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के शिक्षकों ने परीक्षा पत्रों के मूल्यांकन का बहिष्कार शुरू किया - शैक्षणिक संस्थानों के लिए वर्गीकृत स्वायत्तता योजना और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए दिशानिर्देशों के विरोध में जो शिक्षकों की नियुक्ति में आरक्षण नीति को बर्बाद (कमज़ोर)करती हैं ।

दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (डीयूटीए) के तहत संयुक्त, शिक्षकों का कहना है कि कॉलेजों को वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करने के लिए केंद्र के इस कदम से केवल उच्च शिक्षा संस्थानों का निजीकरण होगा।

दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र में योगेश कुमार त्यागी ने शिक्षकों से कहा कि "स्व-वित्त पोषण योजनाओं और ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की ओर बढ़ने वाले स्वायत्त कॉलेजों और वर्गीकृत स्वायत्तता की योजना, उच्च शिक्षा के लिए दूरगामी परिणाम होगें , विशेष रूप से हमारे जैसे देश में इसके उद्देश्यों और आशय ही बदल जाएगी । "

शिक्षकों ने कहा कि डीयू विभिन्न विभागों में शिक्षकों की नियुक्ति करने में विफल रहा है जिससे डीयू गंभीर समस्या की ओर अग्रसर हो रहा है।

पत्र में कहा गया है कि "पिछले साल, कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया इतनी सुस्त थी कि केवल एक कॉलेज ने साक्षात्कार आयोजित किया था, वह भी एक विभाग के लिए। कॉलेजों ने 1,700 से अधिक पोस्ट के लिए विज्ञापन दिया | यह सत्य है की ,डर है कि इन विज्ञापनों को भी समाप्त करने की अनुमति दी जाएगी |

यूजीसी द्वारा जारी किए गए नए शिक्षकों के नियुक्ति दिशानिर्देशों के रोलबैक पर जोर देते हुए, शिक्षकों ने मांग की कि डीयू 2006 में जारी पुराने दिशानिर्देशों के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आयोग से विशेष अनुमति मांगे।

नए दिशानिर्देशों का जिक्र है कि केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों को एससी, एसटी और ओबीसी शिक्षकों की भर्ती के लिए पूरे शैक्षणिक संस्थान की बजाय एक इकाई के रूप में विभागों की तरह व्यवहार करना चाहिए। यह उपाय अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा जातियों के सदस्यों के लिए संकाय(फैकल्टी) सीटों की संख्या को काफी कम करेगा।

एक विशेष छुट्टी याचिका में, केंद्र ने कहा था कि अकेले बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में एससी, एसटी और ओबीसी के लिए संकाय(फैकल्टी) सीट क्रमशः 50 प्रतिशत, 80 प्रतिशत और 30 प्रतिशत कम हो जाएगी।

अपने पत्र में, डीयूटीए ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने महिलाओं के लिए एक सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के लिए भी कोई कदम नहीं उठाए हैं।

पत्र कहता है की "दत्ता ने यौन उत्पीड़न के मामलों से निपटने में अनियमितताओं के बारे में आपको लिखा था। हम आपको अपील करते हैं कि 17 अप्रैल 2018 के डीयूटीए प्रतिनिधित्व में सूचीबद्ध मामलों को तत्काल देखें। यह केवल शिकायतों के खिलाफ पूछताछ के लिए निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित करके है कि विश्वविद्यालय यौन उत्पीड़न के संबंध में एक कठोर संदेश दिया जा सकता है " ।

दो छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें अपने शिक्षकों द्वारा यौन उत्पीड़ित किया जाता है इसके बाद विश्वविद्यालय ने कई विरोध प्रदर्शन का गवाह बना था । एक अन्य छात्र ने और रसायन विभाग के एक शिक्षक ने भी मार्च में एक शिक्षक के खिलाफ हूबहू आरोप लगाए थे।

बहिष्कार छात्रों के लिए परीक्षा परिणामों में देरी होने की संभावना है, लेकिन शिक्षकों ने कहा कि उन्हें इस कदम को लेने के लिए मजबूर किया गया है क्योंकि विश्वविद्यालय ने उनकी मांगों पर ध्यान देने से इनकार कर दिया है।


बाकी खबरें

  • aaj ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    धर्म के नाम पर काशी-मथुरा का शुद्ध सियासी-प्रपंच और कानून का कोण
    19 May 2022
    ज्ञानवापी विवाद के बाद मथुरा को भी गरमाने की कोशिश शुरू हो गयी है. क्या यह धर्म भावना है? क्या यह धार्मिक मांग है या शुद्ध राजनीतिक अभियान है? सन् 1991 के धर्मस्थल विशेष प्रोविजन कानून के रहते क्या…
  • hemant soren
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: भाजपा काल में हुए भवन निर्माण घोटालों की ‘न्यायिक जांच’ कराएगी हेमंत सोरेन सरकार
    18 May 2022
    एक ओर, राज्यपाल द्वारा हेमंत सोरेन सरकार के कई अहम फैसलों पर मुहर नहीं लगाई गई है, वहीं दूसरी ओर, हेमंत सोरेन सरकार ने पिछली भाजपा सरकार में हुए कथित भ्रष्टाचार-घोटाला मामलों की न्यायिक जांच के आदेश…
  • सोनिया यादव
    असम में बाढ़ का कहर जारी, नियति बनती आपदा की क्या है वजह?
    18 May 2022
    असम में हर साल बाढ़ के कारण भारी तबाही होती है। प्रशासन बाढ़ की रोकथाम के लिए मौजूद सरकारी योजनाओं को समय पर लागू तक नहीं कर पाता, जिससे आम जन को ख़ासी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ता है।
  • mundka
    न्यूज़क्लिक टीम
    मुंडका अग्निकांड : क्या मज़दूरों की जान की कोई क़ीमत नहीं?
    18 May 2022
    मुंडका, अनाज मंडी, करोल बाग़ और दिल्ली के तमाम इलाकों में बनी ग़ैरकानूनी फ़ैक्टरियों में काम कर रहे मज़दूर एक दिन अचानक लगी आग का शिकार हो जाते हैं और उनकी जान चली जाती है। न्यूज़क्लिक के इस वीडियो में…
  • inflation
    न्यूज़क्लिक टीम
    जब 'ज्ञानवापी' पर हो चर्चा, तब महंगाई की किसको परवाह?
    18 May 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में अभिसार शर्मा सवाल उठा रहे हैं कि क्या सरकार के पास महंगाई रोकने का कोई ज़रिया नहीं है जो देश को धार्मिक बटवारे की तरफ धकेला जा रहा है?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License