NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आरटीआई कार्यकर्ताओं की क़त्लगाह बनता जा रहा है बिहार
पिछले आठ वर्षों में बिहार में 15 आरटीआई कार्यकर्ता मारे गए हैं। इनमें पांच की तो इसी साल हत्या हुई है। भोला साह की हत्या ने एक बार फिर नीतीश कुमार के ‘सुशासन’ पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुकुंद झा
27 Dec 2018
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy: News Vision India

बिहार में लगातार कनून व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं, पिछले कुछ समय में बिहार में महिलाओं के साथ अत्याचार और शोषण तेज़ी से बढ़ा है। अभी हाल ही में व्यावसायियों की हत्या और एक बैंक अधिकारी कि हत्या ने मीडिया का भी ध्यान आकर्षित किया और इसने बिहार सहित पूरे देश को झकझोर दिया था।

लेकिन बिहार आरटीआई कार्यकर्ताओ के लिए अधिक ख़तरनाक होता जा रहा है। वैसे तो पूरे देश में ही आरटीआई कार्यकर्ताओ के लिए जान का खतरा है परन्तु बिहार में सुशासन बाबू यानी नीतीश कुमार का शासनकाल आरटीआई कार्यकर्ताओ के लिए मौत का काल बनता जा रहा है; सबसे खास बात है की जब से नीतीश कुमार ने राजद के साथ कानून व्यवस्था के सवाल पर  गठबंधन तोड़कर  भाजपा के साथ मिलाकर  सरकार बनाई है उसके बाद से राज्य में कानून व्यवस्था और खराब हुई है।

सोमवार को बिहार के बांका जिले के एक आरटीआई कार्यकर्ता भोला साह कि हत्या कर दी गई। भोला साह 40 वर्ष के थे और  उन्होंने अपनी पंचायत में भ्रष्टाचार के कई खुलासे किये थे।

पुलिस का कहना है कि साह ने कई योजनाओं के तहत धन के कथित दुरुपयोग के बारे में जानकारी मांगी थी। स्थानीय अख़बारों के मुताबिक भोला साह के मृत पाए जाने के बाद, उनके भाई विनोद साह ने स्थानीय मुखिया के पति विनोद तांती और छह अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

उन्होंने  आरोप लगाया कि तांती, जो अपनी पत्नी की ओर से स्थानीय पंचायत का काम देखते हैं, उसने कागजों पर कुछ योजनाओं को पूरा दिखाया  दिया था, परन्तु वास्तविकता में वो पूरे नहीं हुए थे। विनोद का कहना है  "इसको लेकर  विनोद तांती सरकारी कार्रवाई से डरा हुआ था इसलिए उसने मेरे भाई को निशाना बनाया।" |

उनके परिवार का कहना है कि रविवार को कुछ लोग एक एसयूवी गाड़ी से आये और कहा कि भोला साह को पुलिस थाने में बुला रहे हैं जिसके बाद जब वो देर रात तक घर नहीं लौटे तब परिवार के लोगों ने थाने में जाकर पूछा कि उन्होंने भोला को बुलाया था लेकिन थाना प्रभारी ने साफ इंकार किया, इसके बाद उनका शव एक बांध के किनारे कई चोट के निशान के साथ मिला। 

ये कोई पहला मामला नहीं है जब बिहार में किसी आरटीआई कर्यकर्ता की हत्या हुई हो, इससे पूर्व में भी कई कार्यकर्ता की हत्या हुई हैं।

पिछले आठ सालों में बिहार में कुल मिलाकर 15 आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है, वहीं केवल इस वर्ष 2018 में ही पांच आरटीआई कार्यकर्ताओ की हत्या हो चुकी है। बिहार में काम करने वाले आरटीआई कार्यकर्ताओ कहना है कि शिकायतकर्ता को किसी भी प्रकार की सुरक्षा नहीं दी जाती है।

इस एक वर्ष  के भीतर ही चार अन्य आरटीआई कर्यकर्ताओं की हत्या हुई है ये कार्यकर्ता हैं- जमुई जिले के वाल्मीकि यादव, सहरसा के राहुल झा, वैशाली के जयंत कुमार और पूर्वी चंपारण के राजेंद्र सिंह।

• जमुई के वाल्मीकि यादव

38 वर्षीय वाल्मीकि यादव और उनके एक साथी 35 वर्षीय धर्मेंद्र यादव उर्फ करू यादव को राज्य राजधानी पटना के 166 किलोमीटर दक्षिणपूर्व जमुई जिले के सिकंदारा पुलिस स्टेशन की सीमा में बिछवे मोड़ के पास हमला किया गया था जिसमे उनकी मौत हो गई थी। वाल्मीकि ने सार्वजनिक कल्याण योजनाओं और जिले में विकास कार्यों में कई गिरोहों और वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा किया था। उन्होंने आंगनवाड़ी सेविका के चयन में पंचायत प्रमुख समेत कुछ ग्रामीणों के मिलीभगत को भी उजागर किया था।

• वैशाली के जयंत कुमार

गोरौल अस्पताल गेट के सामने फायरिंग कर आरटीआई कार्यकर्ता जयंत उर्फ हफिया की हत्या की गई। उससे कई राज दब गए। उनकी हत्या के कुछ दिन बाद ही उनके द्वारा दाखिल आरटीआई के मामले में राज्य सूचना आयोग का फैसला भी जल्द आने वाला था। उस फैसले के पहले उसकी हत्या कई बातों की ओर इशारा करती है। अक्सर जयंत वहां के थानाध्यक्ष, बीडीओ आदि के खिलाफ आरटीआई लगाते रहते थे।

• पूर्वी चंपारण के राजेंद्र सिंह

राजेंद्र सिंह ने एलआईसी कार्यालय के कामकाज, शिक्षकों की नियुक्ति में अनियमितताओं और पुलिस भर्ती के साथ-साथ इंदिरा आवास योजना के तहत धन का दुरुपयोग और कई अनियमितता का  खुलासा किया था। पुलिस के मुताबिक,  मोतीलाहारी में अदालत में अपने वकीलों से मिलने के बाद 60 वर्षीय राजेंद्र सिंह जब मोटरसाइकिल पर घर लौट रहे थे तो बाइकर हमलावरों ने पर उनपर हमला किया और उन्हें तीन गोलियाँ मारी जिससे उनकी मौत हो गई।

• सहारसा के राहुल झा

इस तरह की अन्य घटना में बिहार के ही सहरसा में एक और आरटीआई कार्यकर्ता राहुल की हत्या कर दी गई थी। इसके पीछे भी वही कारण था की उसने ने भी सरकारी योजनाओ में नेताओं और अफसरों की मिलीभगत के जरिये हो रही लूट को उजागर किया था |

इसे भी पढ़े : क्या यही है बिहार का सुशासन ?

बिहार के एक आरटीआई कार्यकर्ता ने कहा "केवल 2011 में लखीसराय के एक मामले में, स्थानीय अदालत ने चार लोगों को मौत की सजा सुनाई है। बाकी मामले अभी भी जाँच के दौर से ही गुजर रहे  हैं। बिहार के आरटीआई कार्यकर्ता लंबे समय से सरकार से आरटीआई कार्यकर्ताओं के हत्या मामले में तेजी से जाँच करने  की मांग कर रहे हैं।”

राज्य सरकार को अपने नागरिकों को सूचना का अधिकार देने के साथ उनकी सुरक्षा की के लिए भी प्रबंध करना चाहिए। बिहार सरकार ने  वर्ष 2010 में  इसके लिए वादा भी किया था। सरकार ने राज्य के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक की अगुवाई में एक सेल का गठन किया था। इस सेल को जिम्मेदारी दी गई थी कि वह आरटीआई कार्यकर्ताओं के उत्पीडऩ से संबंधित शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करे, लेकिन यह सेल निष्क्रिय ही रहा है,  सबसे मजेदार बात तो यह है कि आरटीआई कार्यकर्ताओं ने जब इस सेल में अपनी शिकायत दर्ज कराई तो उसमें कई शिकायत को उन्हीं पदाधिकारियों के पास जांच के नाम पर भेज दिया गया, जिनके खिलाफ आरटीआई कार्यकर्ताओं ने शिकायत दर्ज कराई थी।

RTI activists
RTI Activist Murdered
Bihar
Nitish Kumar
rti activist killed in bihar

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’

बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी


बाकी खबरें

  • Minor raped in Delhi
    राज वाल्मीकि
    शर्मनाक: दिल्ली में दोहराया गया हाथरस, सन्नाटा क्यों?
    04 Aug 2021
    इस मामले में दलित संगठनों के प्रतिरोध के बाद पंडित राधेश्याम और उसके तीन साथियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उन पर पहले पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया था। बाद में दिल्ली महिला आयोग और…
  • अजय गुदावर्ती
    2024 में बीजेपी को हराने के लिए उसके पाले में खेलने के बजाए विपक्ष को रणनीति बनानी होगी
    04 Aug 2021
    विपक्षी एकता के बारे में चल रही नए सिरे की बातचीत के बीच, ग़ैर-भाजपा दलों को आवश्यक सामाजिक और आर्थिक मांगों को पूरा करने के वादों के साथ उसे सांस्कृतिक प्रतीकवाद से जोड़ना होगा।
  • sex trafficking bill
    सुमेधा पाल
    तस्करी विरोधी मसौदा विधेयक के अस्पष्ट प्रावधानों से पीड़ितों व अन्य गतिविधियों के अपराधीकरण को मिलेगा बढ़ावा
    04 Aug 2021
    कार्यकर्ताओं और यूनियनों को इस बात का डर है कि कुछ प्रावधान का दुरुपयोग हो सकता है और उन्होंने तस्करी और सेक्स वर्क के मुद्दे को मिला देने को लेकर भी इस प्रस्तावित विधेयक की आलोचना की है।
  • NITISH -MODI
    उमेश कुमार राय
    राजनीति: जातिगत जनगणना व पेगासस पर नीतीश कुमार के बयान का मतलब
    04 Aug 2021
    साल 2024 में होने वाले आम चुनाव के मद्देनजर विपक्षी पार्टियों की गोलबंदी के प्रयासों के बीच जदयू की तरफ से ऐसे बयान आने लगे हैं, जिससे भाजपा मुश्किल में दिख रही है।
  • CORONA
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 42,625 नए मामले, 562 मरीज़ों की मौत
    04 Aug 2021
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 42,625 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 1.29 फ़ीसदी यानी 4 लाख 10 हज़ार 353 हो गयी है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License