NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
आर्थिक मंदी : नोट कीजिए, किस सेक्टर में कितना नुकसान
ऑटो इंडस्ट्री, कपड़ा इंडस्ट्री समेत तमाम सेक्टरों में मंदी छाई है। कहा जा सकता है कि मंदी, मांग में आयी  कमी के कारण ही हुई है और मांग में कमी आम लोगों के पास पैसे की कमी के कारण और पैसे में कमी सरकार  की गलत नीतियों के कारण आयी है। 
पुलकित कुमार शर्मा
26 Aug 2019
economy crises

लम्बे समय से नरेंद्र मोदी सरकार की गलत नीतियों के चलते आज देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ रहा है। आज देश भर में आर्थिक मंदी का संकट छाया हुआ है। देश की सभी छोटी-बड़ी कंपनियों को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। सभी उत्पाद की मांग में भारी गिरावट आयी है। प्राइवेट से लेकर सरकारी कम्पनियाँ तक बड़े आर्थिक संकट से जूझ  रही हैं। 
 
आर्थिक मंदी से प्रभावित क्षेत्र   

ऑटो इंडस्ट्री 

आर्थिक मंदी ने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को पिछले एक साल से बुरी तरह जकड़ा हुआ है। टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी और महिंद्रा जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर में भारी लगभग 55% की गिरावट आयी है।  साथ ही तीन माह के अंदर 2 लाख नौकरिया भी चली गयी हैं ।

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2019 में यात्री वाहनों की बिक्री जुलाई 2019 में 30.9% गिरकर 2,00,790 इकाई पर आ गई।  

दिसंबर 2000 के बाद से यह सबसे ज़्यादा गिरावट है। उस समय करीब 35.22 प्रतिशत की गिरावट आई थी। मौजूदा मंदी में SIAM ने कहा कि कॉमर्शियल वाहनों की बिक्री 25.7% गिरकर 56,866 इकाई रही। मोटरसाइकिल और स्कूटर की बिक्री 16.8% घटकर लगभग 1.51 मिलियन यूनिट हो गई, जबकि यात्री कार की बिक्री 36% गिरकर 122,956 यूनिट रह गई  है।

ऑटोमेटिव कॉम्पोनेन्ट मनुफेक्चर्स एसोसिएशन (ACMA) ने बुधवार को सरकार को चेताया है अगर ऑटोमोबाइल उद्योग में लंबे समय तक मंदी जारी रही तो लगभग 10 लाख लोगों की नौकरियां जा सकती हैं, इसलिए  ACMA ने की है कि मांग को प्रोत्साहित करने के लिए जीएसटी को कम करने जैसे कदम तत्काल उठाए जाने चाहिए। 

कपड़ा उद्योग 

हाल ही में कपड़ा मिलों के संगठनों ने विज्ञापन दिया है जिसमें उन्होंने नौकरियाँ खत्म होने के बाद फ़ैक्ट्री से बाहर आते लोगों का स्केच बनाया है और इसके नीचे बारीक़ आकार में लिखा है कि देश की एक-तिहाई धागा मिलें बंद हो चुकी हैं, और जो चल रही हैं उनकी स्थिति ऐसी भी नहीं है कि वे किसानों का कपास ख़रीद सकें। इसके अलावा अनुमान है कि आने वाली कपास की फ़सल का कोई ख़रीदार भी न मिले। अनुमान है कि 80,000 करोड़ रुपये का कपास उगने जा रहे है, जिसकी ख़रीदारी न होने पर इसका असर किसानों पर भी पड़ेगा। 

कपड़ा उद्योग देश में करीब 10 करोड़ से ज्यादा लोगो को रोज़गार देता है। अभी पिछले दिनों टेक्सटाइल एसोसिएशन के अनिल जैन ने बताया कि टेक्सटाइल सेक्टर में 25 से 50 लाख के बीच नौकरियाँ गई हैं। धागों की फ़ैक्ट्रियों में एक और दो दिन की बंदी होने लगी है, धागों का निर्यात 33 फीसदी कम हो गया है।

फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री  

जहां खाने-पीने के सामान फ़ास्ट मूविंग कंजूमर गुड्स (FMCG) की मांग तेजी से बढ़ रहे थी, वहीं अप्रैल-जून तिमाही में वोल्यूम ग्रोथ में गिरावट होने लगी हैं। ज्यादातर मांग में कमी ग्रामीण क्षेत्रों में आयी है। ग्रामीण क्षेत्रों में मांग की कमी धन की कम उपलब्धता के कारण हो रही है। 

भारत में बिस्किट बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी पारले जी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के हजारों कर्मचारियों की नौकरी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। मंदी के चलते कंपनी करीब 10000 कर्मचारियों की हटा सकती है। कंपनी के एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि ग्रामीण इलाकों में पारले जी बिस्किट की डिमांड घटी है जिसके कारण उत्पादन में भी कमी आई है।

एफएमसीजी की प्रमुख कंपनी हिंदुस्तान लीवर की अप्रैल-जून तिमाही में मात्र 5.5 प्रतिशत की वृद्धि आयी हैं, जबकि पिछले साल यह 12 प्रतिशत थी। डाबर में पिछले साल 21 प्रतिशत वृद्धि के मुकाबले 6 प्रतिशत की ही वृद्धि आयी है। ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज़ ने पिछले साल के समान समय में 12 प्रतिशत के मुकाबले 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। 

साथ ही उपभोक्ता सामान से अलग एशियन पेंट्स में पिछले साल अप्रैल-जून की तिमाही की वोल्यूम ग्रोथ 12 फीसदी से घटकर 9 फीसदी रह गयी  है ।

रियल स्टेट 

नेशनल रियल स्टेट डेवलपमेंट काउंसिल  के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ को बताया कि अर्थव्यवस्था खासकर रियल सेक्टर को बढ़ावा देने की जरूरत है, जिससे लंबे समय में जीडीपी को बढ़ाने और रोजगार पैदा करने में मदद मिलेगी।

नेशनल रियल स्टेट डेवलपमेंट काउंसिल ने  चेतावनी के लहजे में कहा कि रियल स्टेट में तीन लाख नौकरियाँ गई हैं और अगर साल के अंत तक सुधार  नहीं किए गया तो 50 लाख नौकरियाँ खत्म हो सकती है।

देश में अधूरे और रुके प्रोजेक्ट्स की बढ़ती संख्या के कारण शहर वीरान बनना जारी हैं। एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के आंकड़ों के अनुसार, देश के रियल एस्टेट की सच्चाई की भयावहता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि देश के शीर्ष सात शहरों में 220 प्रोजेक्ट्स के लगभग 1.74 लाख घरों का निर्माण रुका पड़ा है।

एनारॉक की रिपोर्ट के अनुसार, "साल 2013 या इससे भी पहले लॉन्च हुए इन प्रोजेक्ट्स पर कोई निर्माण कार्य नहीं हो रहा है। जिन घरों का निर्माण रुका हुआ है उनकी कुल कीमत लगभग 1,774 अरब की है। इनमें से ज्यादातर प्रोजेक्ट्स या तो पैसों की कमी या कानूनी मामलों के कारण रुके हैं।" 

लगभग 1.15 लाख घर कुल अधूरे घरों का लगभग 66 प्रतिशत,  खरीदारों को पहले ही बेचे जा चुके हैं, जिसके कारण वे मजबूरन  मंझधार में अटके हैं। अब वे या तो संबंधित डेवलपर या कानून के रहमो करम पर हैं। इन बेचे गए घरों की कुल कीमत लगभग 1.11 लाख करोड़ रुपये है।

आर्थिक मंदी का असर चमड़ा उद्योग  व आभूषण की ख़रीददारी पर भी पड़ा जिसके कारण इन उद्योगों को भी बहुत बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है।

कहा जा सकता है कि आर्थिक मंदी मांग में आयी  कमी के कारण ही हुई है और मांग में कमी आम लोगों के पास पैसे की कमी के कारण और पैसे में कमी सरकार  की गलत नीतियों के कारण आयी है। क्योंकि सरकार लगातार सार्वजनिक क्षेत्र में खर्च को कम करती रही है और नए रोज़गार का सृजन नहीं हुआ है। 

सरकार लगातार सार्वजनिक क्षेत्रों  में निजीकरण को बढ़ावा देती रही है। लोगों को जिन सुविधाओं में खासकर शिक्षा, स्वास्थ्य में सरकार से रियायत मिलनी चाहिए थी,  जिन क्षेत्रों में बजट ख़ासकर मनरेगा में अधिक बजट होना चाहिए था,  लोगों को उचित रोज़गार और न्यूनतम वेतन सुनश्चित होना चाहिए था, जिससे उनकी क्रय क्षमता बढ़ती, लेकिन इसके बजाय लोगों को आमदनी से अधिक खर्च करना पड़ा है जिसके कारण उनकी ख़रीदारी की क्षमता बहुत कम हुई है।  

economic crises
indian economy
Auto industry
Textile industry
Modi government
modi sarkar scheme
Society of Indian Automobile Manufacturers
Real State
Finance minister Nirmala Sitharaman

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

आख़िर फ़ायदे में चल रही कंपनियां भी क्यों बेचना चाहती है सरकार?

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

'KG से लेकर PG तक फ़्री पढ़ाई' : विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं की सभा में उठी मांग

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?


बाकी खबरें

  • Modi yogi
    अजय कुमार
    आर्थिक मोर्चे पर फ़ेल भाजपा को बार-बार क्यों मिल रहे हैं वोट? 
    14 Mar 2022
    आख़िर किस तरह के झूठ का जाल भाजपा 24 घंटे लोगों के बीच फेंकने काम करती है? जिससे आर्थिक रूप से कमजोर होते जा रहे राज्यों में भी उसकी सरकार बार बार आ रही है। 
  • रवि शंकर दुबे
    पांचों राज्य में मुंह के बल गिरी कांग्रेस अब कैसे उठेगी?
    14 Mar 2022
    मैदान से लेकर पहाड़ तक करारी शिकस्त झेलने के बाद कांग्रेस पार्टी में लगातार मंथन चल रहा है, ऐसे में देखना होगा कि बुरी तरह से लड़खड़ा चुकी कांग्रेस गुजरात, हिमाचल और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए…
  • अजय गुदावर्ती
    गुजरात और हिंदुत्व की राजनीतिक अर्थव्यवस्था
    14 Mar 2022
    एक नई किताब औद्योगिक गुजरात में सांप्रदायिकता की राजनीतिक अर्थव्यवस्था की परख करती है। इससे मिली अंतर्दृष्टि से यह समझने में मदद मिलती है कि हिंदुत्व गुजरात की अपेक्षा अविकसित उत्तर प्रदेश में कैसे…
  • abhisar sharma
    न्यूज़क्लिक टीम
    कानून का उल्लंघन कर फेसबुक ने चुनावी प्रचार में भाजपा की मदद की?
    14 Mar 2022
    न्यूज़चक्र के इस एपिसोड में आज वरिष्ठ पत्रकार बात कर रहे हैं एक न्यूज़ एजेंसी के द्वारा की गयी पड़ताल से ये सामने आया है की Facebook ने हमेशा चुनाव के दौरान BJP के पक्ष में ही प्रचार किया है। देखें…
  • misbehaved with tribal girls
    सोनिया यादव
    मध्य प्रदेश : मर्दों के झुंड ने खुलेआम आदिवासी लड़कियों के साथ की बदतमीज़ी, क़ानून व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
    14 Mar 2022
    मध्य प्रदेश बाल अपराध और आदिवासियों के साथ होने वाले अत्याचार के मामले में नंबर एक पर है। वहीं महिला अपराधों के आंकड़ों को देखें तो यहां हर रोज़ 6 महिलाओं के साथ बलात्कार हो रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License