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आर्थिक मोर्चे पर बढ़ी चुनौती : जीडीपी वृद्धि दर पांच साल में सबसे कम
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार कृषि एवं विनिर्माण क्षेत्र में कमजोर प्रदर्शन के चलते वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर धीमी पड़कर पांच साल के न्यूनतम स्तर 5.8 प्रतिशत पर पहुंच गयी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
01 Jun 2019
सांकेतिक तस्वीर

दिल्ली : शपथ लेने के बाद नरेन्द्र मोदी सरकार के लिये शुक्रवार का पहला दिन आर्थिक मोर्चे पर बुरी खबर लेकर आया। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के अनुसार कृषि एवं विनिर्माण क्षेत्र में कमजोर प्रदर्शन के चलते वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर धीमी पड़कर पांच साल के न्यूनतम स्तर 5.8 प्रतिशत पर पहुंच गयी।

जीडीपी वृद्धि की यह दर 2014-15 के बाद सबसे धीमी है। इससे पहले वित्त वर्ष 2013-14 में जीडीपी वृद्धि की गति 6.4 फीसदी रही थी।

इसी के साथ भारत दुनिया का सबसे तेज आर्थिक विकास दर वाला देश नहीं रहा। अब इसकी जगह चीन ने ले ली है।

वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की संवृद्धि दर पिछले साल की समान अवधि से घटकर 5.8 फीसदी रह गई है। वहीं, चौथी तिमाही में चीन की आर्थिक विकास दर छह फीसदी से अधिक रही है। 

क्रमिक आधार, भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर दिसंबर 2018 में समाप्त हुई तिमाही में 6.6 फीसदी रही।

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2019 को समाप्त हुई तिमाही में भारत की जीडीपी संवृद्धि दर 5.8 फीसदी रही जो पूर्व वर्ष की समान अवधि के 8.1 फीसदी से कम है। 

वित्त वर्ष 2018-19 में देश की जीडीपी संवृद्धि दर 6.8 फीसदी रही, जबकि जोकि जीडीपी विकास दर का पिछले पांच साल का सबसे निचला स्तर है। वित्त वर्ष 2017-18 में आर्थिक विकास दर 7.2 फीसदी थी।

आंकड़ों के अनुसार, देश की आर्थिक विकास दर घटने का मुख्य कारण कृषि और खनन क्षेत्र की संवृद्धि दर में कमी है।

कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन क्षेत्र की संवृद्धि दरन वित्त वर्ष 2018-19 में 2.9 फीसदी रही जबकि पिछले साल यह पांच फीसदी थी। 

आलोच्य वित्त वर्ष में खनन व उत्खनन क्षेत्र की संवृद्धि दर 1.3 फीसदी रही जबकि उससे पिछले साल यह 5.1 फीसदी थी। 

वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही में देश की आर्थिक विकास दर आठ फीसदी थी, जबकि दूसरी तिमाही में सात फीसदी और तीसरी में 6.6 फीसदी रही जो चौथी तिमाही में घटकर 5.8 फीसदी रह गई। 

वहीं, वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में देश की आर्थिक विकास दर छह फीसदी थी जो दूसरी तिमाही में 6.8 फीसदी, तीसरी में 7.7 फीसदी और चौथी तिमाही में 8.1 फीसदी हो गई।

जीडीपी के संदर्भ में सकल स्थिर पूंजी निर्माण चालू और स्थिर मूल्य पर 2018-19 में क्रमश: 29.3 प्रतिशत और 32.3 प्रतिशत रहा। इससे पूर्व वित्त वर्ष में यह क्रमश: 28.6 प्रतिशत तथा 31.4 प्रतिशत था।

सीएसओ के आंकड़े के अनुसार देश की प्रति व्यक्ति आय मार्च 2019 को समाप्त वित्त वर्ष में 10 प्रतिशत बढ़कर 10,534 रुपये महीना (1,26,406 रुपये सालाना) पहुंच जाने का अनुमान है। इससे पूर्व वित्त वर्ष में यह 9,580 रुपये महीना (1,14,958 रुपये सालाना) था।

इस बीच सरकार ने किसान सम्मान निधि योजना का दायरा बढ़ाते हुए सभी किसानों को 6,000 रुपये सालाना देने की घोषणा की है। साथ ही किसानों और खुदरा कारोबारियों एवं दुकानदारों के लिये पेंशन योजना की घोषणा की।

जीडीपी आंकड़े पर टिप्पणी करते हुए आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि मार्च 2019 को समाप्त वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट एनबीएफसी क्षेत्र में दबाव जैसे अस्थायी कारकों की वजह से आई है। उन्होंने यह भी कहा कि चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में आर्थिक गतिविधियां धीमी रह सकती है लेकिन उसके बाद इसमें तेजी आएगी।

(समाचार एजेंसी भाषा और आईएएनएस के इनपुट के साथ)

इसे भी पढ़ें : चुनाव बाद सरकार ने माना- बेरोज़दारी दर 45 साल के ऊंचे स्तर पर

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