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राजनीति
आसिफा रेप और हत्या मामलाः किस तरह योजना बनाई गई और उसे अंजाम दिया गया
न्यूज़क्लिक ने अलग-अलग दृष्टिकोणों से घटना की जांच की।

तारिक़ अनवर
17 Mar 2018
आसिफा रेप और हत्या मामलाः किस तरह योजना बनाई गई और उसे अंजाम दिया गया

नई दिल्ली/ जम्मूः जम्मू-कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा ने दावा किया है कि उसने बकेरवाल समुदाय की आठ वर्षीय लड़की असिफा बानो के अपहरण, रेप और हत्या के मामले को लगभग सुलझा लिया है। ज्ञात हो कि आसिफा जम्मू के कथूआ ज़िले के हिरानगर तहसील के रसाना गांव की रहने वाली थी।

 

अपराध शाखा के एक उच्च अधिकारी ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि "हमने क़रीब 95 प्रतिशत इस मामले को सुलझा लिया है। हमने इस दिल दहलाने वाली घटना के मास्टरमाइंड की पहचान कर ली है और जल्द ही उसे हिरासत में ले लिया जाएगा।”

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जांचकर्ताओं ने कथुआ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आवेदन दिया है। इस आवेदन में आरोपी शुभम संगरा उर्फ छूबू को पुलिस हिरासत में देने की मांग की गई है। जम्मू के सरकारी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर के बोर्ड द्वारा "वयस्क" घोषित किए जाने के बाद आरोपी शुभम को हिरासत में देने की मांग की गई।

 

5 मार्च को पुलिस को सौंपे अपनी रिपोर्ट में डॉक्टरों के बोर्ड ने तर्क दिया कि"शारीरिक, दंत चिकित्सा तथा रेडियोलॉजिकल परीक्षण के आधार पर उपर्युक्त व्यक्ति (जो कि संगरा है) की अनुमानित उम्र उन्नीस वर्ष से अधिक है।"

उच्च न्यायालय ने अपराध शाखा की विशेष जांच दल को 10 दिनों के भीतर सांगरा की उम्र का पता लगाने के लिए क़दम उठाने के निर्देश देने के बाद बोर्ड का गठन 28 फरवरी को किया गया था।

 

जांच से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, "अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद नए तथ्यों के सामने आने के बाद उसकी (सांग्रा) की पूछताछ आवश्यक हो गई है।"

 

सांगरा पहला आरोपी है जिसे जांच शुरू होने के तुरंत बाद इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। हिरासत में पूछताछ के बाद उसने राज़ खोला जिसके आधार पर स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) दीपक खजुरिया उर्फ दीपा और परवेश कुमार उर्फ मन्नु की गिरफ्तारी 26 फरवरी को हुई।

 

खजुरिया और कुमार ने कथित रूप से पूछताछ के दौरान क़बूल किया था कि वे मृत असिफा से रेप करने का प्रयास कर रहे थे। ज्ञात हो कि 10 जनवरी को आसिफा का अपहरण इस वक़्त कर लिया गया था जब वह अपने घोड़ों की चराने के लिए गई थी। उसे अलग-अलग जगहों पर एक सप्ताह तक क़ैद में रखा गया और उसकी हत्या करने से पहले उससे रेप किया गया।

 

इन दोनों अभियुक्तों खजुरिया और कुमार ने भी कथित तौर पर सांगरा की मदद की थी जब उसने पीड़िता को "टॉफी की तरह कोई चीज़ खाने के लिए मजबूर किया था"। श्रोतों के अनुसार "इसके खाने के बाद वह बेहोश हो गई और उसके बाद उससे संगरा ने रेप किया। इसके बाद इन तीनों अभियुक्तों ने उसे देवस्थान ले गया जो कि रसाना गांव में जंगल में स्थित है। उसे 14 जनवरी तक क़ैद में रखा गया।"

 

वे गवाह जिनके बयानों को धारा 164-ए सीआरपीसी के तहत दर्ज किया गया उन्होंने भी कथित तौर पर इस अपराध में कुमार और अन्य अभियुक्तों के शामिल होने की पुष्टि की है।

 

17 जनवरी को पास के एक जंगल में आसिफा का शव पाए जाने के बाद हिरानगर पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच की गई। यह कहा गया कि मृत लड़की के कपड़े पर "मिट्टी और खून" के धब्बे पाए गए थे। हालांकि श्रीनगर स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री (एफएसएल) की 1 फरवरी और 1 9 फरवरी की रिपोर्ट में मृतक के कपड़े पर ख़ून और किसी प्रकार की मिट्टी के लगे होने से इनकार कर दिया गया।

 

श्रोतों के अनुसार "एफएसएल रिपोर्टों के आधार पर हिरानगर पुलिस स्टेशन के कुछ पुलिस अधिकारियों से पूछताछ की गई। उन्होंने बताया कि 17 जनवरी को देखा गया था कि एक हेड कांस्टेबल देर रात कुछ कपड़े धो रहा था। ज्ञात हो कि इसी दिन आसिफा का शव मिला था। अभियुक्त दीपक खजुरिया ने यह भी स्वीकार किया कि इस हेड कांस्टेबल ने मृतका के कपड़े धोया था। पहली नज़र में ऐसा लगता है कि हेड कांस्टेबल ने अपराधियों को कानूनी दंड से बचाने का इरादे था। जानबूझकर परीक्षण के लिए एफएसएल भेजे जाने से पहले सबूतों के मिटाने के लिए कपड़ों को धोया गया।"

इस हेड कांस्टेबल को 7 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। श्रोतों ने आगे बताया कि "प्रारंभिक जांच से जुड़े अन्य अधिकारियों की साक्ष्य मिटाने में भूमिका की जांच की जा रही है।" 

मामले के "तथ्य और परिस्थितियों से परिचित" इन गवाहों का स्पष्ट शब्दों में कहना है कि "इस अपराध को अंजाम देने की योजना सांजी राम के दिमाग़ में आई” थी जो एक पूर्व राजस्व अधिकारी है और रसाना गांव से बकेरवाल समुदाय को उखाड़ फेंकने को आतुर था।"

 

जांचकर्ताओं ने कहा कि "अपने नापाक इरादे को अंजाम देने के लिए उसने (सांजी राम) आसिफा के अपहरण और हत्या के लिए दीपक खजुरीया (एसपीओ) और शुभम सांगरा के साथ मिलकर इसआपराधिक साजिश को रचा। आरोपी सुरिंदर कुमार (एक अन्य एसपीओ) और आरोपी परवेश कुमार को इस घिनौने काम को अंजाम देने के लिए बाद में साजिश का हिस्सा बनाया गया। कहने की ज़रूरत नहीं कि अब तक गिरफ्तार अभियुक्तों ने पूरे घटना क्रम में सांजी राम के शामिल होने को उजागर किया जिसके परिणामस्वरूप आठ साल की नाबालिग लड़की का अपहरण, रेप और उसकी हत्या की घटना को अंजाम दिया गया।"

 

उधर अभियोजन पक्ष ने सांजी राम की हिरासत में पूछताछ की मांग की है। ये अभी तक फरार है। रसाना में उसके घर न्यूज़़क्लिक की टीम गई लेकिन वह मौजूद नहीं था। उसके परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि अपराध शाखा जांच में "पक्षपात" कर रही है।

 

राम की बेटी ने कहा कि "न ही मेरे पिता और न ही मेरे चचेरे भाई (शुभम सांगरा) की इस घटना में कोई भूमिका है। अासिफाा के साथ जो कुछ हुआ वह दिल दहलाने वाला था और अपराधियों कोगिरफ्तार किया जाना चाहिए। लेकिन हमें लगता है कि पुलिस हिंदू समुदाय के बेगुनाह लोगों और कृषकों को फंसा रही है। इसलिए हम इस मामले में सीबीआई जांच की मांग करते हैं।"

 

एक सामाजिक कार्यकर्ता तालिब हुसैन जो कि पेशे से वकील भी हैं और इस मामले में पीड़िता के परिवार के वकील की मदद कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगया कि "यह सांजी रामही है जिसने एक गुप्त बैठक की थी और बकेरवाल समुदाय को संदेश देने के लिए आसिफा की पहचानकर की कि 'अगर हम एक छोटी लड़की के साथ इस तरह का घिनौना कामकर सकते हैं, तो तुम्हारे और तुम्हारी व्यस्क लड़कियों के साथ' क्या होगा।"

 

दक्षिण-पंथी संगठन हिंदू एकता मंच ने हाल ही में सांगरा और दो एसपीओ की गिरफ्तारी के बाद पीड़ितों के समर्थन में एक रैली निकाली थी। इस संगठन को घटना के ठीक बाद "बीजेपी के राजनीतिक संरक्षण वालेदोषियों की बचाने के उद्देश्य से" बनाया गया था। ज्ञात हो कि राज्य में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की अगुवाई वाली सरकार में सहयोगी पार्टी है।

 

मंच से जुड़े वकील अंकुर शर्मा ने न्यूज़़क्लिक को बताया कि वे भी न्याय चाहते हैं लेकिन जांच के नाम पर किसी बेगुनाह को "परेशान करने और फंसाने" की अनुमति नहीं दी जाएगी।उन्होंने कहा कि "अपराध शाखा बिल्कुल अव्यावहारिक तरीक़े से जांच कर रही है। वे ताक़त का इस्तेमाल कर लोगों को अपराध में फंसा रही है। यह उनके कश्मीर आधारित राजनीतिक आकाओं के निर्देश पर किया जा रहा है जो अलगाववादी हैं। इसलिए हम एक स्वतंत्र केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा उचित जांच की मांग करते हैं।"

उन्होंने आगे कहा कि "यह अब बिल्कुल स्पष्ट हो गया है कि राज्य की मुख्यमंत्री ने जम्मू प्रांत में जनसांख्यिकीय परिवर्तन के कट्टरपंथी, सांप्रदायिक और इस्लामो-फासीवादी मुहिम को पहल करने के लिए चुना है और जो राज्य में हिंदू-सिख/डोगरा भावनाओं को खुले तौर पर चोट पहुंचाने में मददगार है।"

 

शर्मा के आरोपों का जवाब देते हुए तालिब ने कहा कि जांच जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय की निगरानी में की जा रही है। उन्होंने कहा कि "अदालत अब तक जांच से संतुष्ट है तो फिर हिंदू एकता मंच क्यों शोर मचा रही है? अपराध शाखा को इसकी जांच पूरी करने दें। अदालत पर विश्वास रखिए।"

 

अब तक छह अभियुक्त जिसमें दो एसपीओ, एक हेड कॉन्स्टेबल और एक इंस्पेक्टर सहित चार पुलिसकर्मियों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है।

 

आसिफा
हिन्दू एकता मंच
जम्मू कश्मीर
बीजेपी-पीडीपी

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