NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
असम में ओला-उबर ड्राइवर यूनियन का विरोध-प्रदर्शन
यूनियन ने ओला-उबर के मौजूदा वाहन संख्या में वृद्धि को रोकने की मांग की है और इस एप-आधारित ऑपरेटर के कमीशन को भी 26 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक कम करने की मांग की है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
10 May 2018
ओला
Image Courtesy:The Northeast Today

सोमवार से 72 घंटे की हड़ताल पर रहे ऑल असम कैब ऑपरेटर यूनियन (एएसीओयू) ने बुधवार को परिवहन आयुक्त को अपनी शिकायतों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। यूनियन ने बार-बार अपील के बावजूद श्रमिकों की मांगों को पूरा करने में विफल होने के लिए ओला और उबर सेवाओं के प्रबंधन के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था।

 

यूनियन ने अंतरराष्ट्रीय श्रम कानूनों के अनुसार प्रतिदिन आठ घंटे की सेवा के लिए प्रत्येक कैब मालिक-चालक के लिए न्यूनतम वेतन और आठ घंटे से अधिक होने पर प्रोत्साहन और अतिरिक्त बोनस बढाने की मांग की।

 

यूनियन ने ओला-उबर वाहनों की मौजूदा संख्या में वृद्धि को रोकने की मांग की और इस ऐप-आधारित ऑपरेटरों के कमीशन में 26 फीसद से 10 फीसद तक कम करने की मांग की। यूनियन चाहता है कि ओला-उबर कैब चालकों के सभी निलंबित खातों को फिर से शुरू करे और कैब के लिए कल्याणकारी योजना लागू करे।

 

इस बीच एक उबर प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि चालक भागीदार एक लाभप्रद उद्यमी अनुभव हासिल कर रहे हैं।

 

प्रवक्ता ने कहा, "गुवाहाटी में एक छोटे से समूह द्वारा की जाने वाली हिंसा और बर्बरता के चलते हमारे यात्रियों और चालक समुदाय को हुए व्यवधान को लेकर हमें खेद है। हमें उम्मीद है कि ज़िला अदालत द्वारा जारी किए गए आदेश से क़ानून प्रवर्तन प्राधिकरणों को यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि उबर ड्राइवर बिना डर या उत्पीड़न के अपना काम करते रहेंगे।”

 

हालांकि ऑल इंडिया रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन (एआईआरटीडब्ल्यूएफ) ने इस हड़ताल को अपना समर्थन दिया है। इससे पहले इस साल फरवरी में बीजेपी की अगुआई वाली राज्य सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए एआईआरटीडब्ल्यूएफ ओला-उबर ड्राइवरों के समर्थन में आया था।

 

एआईआरटीडब्ल्यूएफ की असम राज्य समिति के कार्यकारी अध्यक्ष हरेश्वर दास ने कहा, "ओला, उबर और ई-रिक्शा जैसी नई पेश की गई सेवाओं के लागू करने के साथ इस सिस्टम का एलान किया जाना चाहिए। इसके अलावा, कांग्रेस सरकार के दौरान उबर-ओला के किसी भी प्रकार की देरी के लिए जुर्माना राशि 5 रुपए प्रति दिन थी। लेकिन बीजेपी सरकार ने अचानक 50 रुपये प्रति दिन बढ़ा दिया।”

 

हाल ही में, ओला और उबर के ड्राइवरों ने दिल्ली और मुंबई समेत विभिन्न शहरों में हड़ताल किया था। लोगों को सामाजिक-आर्थिक विकास का पेशकश करते हुए भारत में ओला और उबर की सेवाओं को क्रमशः 2011 और 2013 में पेश किया गया था। बेहतर जिंदगी और मज़दूरी की उम्मीद करते हुए बड़ी संख्या में लोगों ने विशेष रूप से निम्न-मध्यम वर्ग के लोगो ने इन सेवाओं में निवेश किया था। इसमें तेज़ी के कारण वे शुरुआती चरण में अच्छी कमाई करने में कामयाब रहे। इसके बाद लोगों ने इन सेवाओं में अपनी कम वेतन वाली नौकरियों को छोड़कर निवेश किया। यहां तक कि कुछ ने इसके लिए अपनी संपत्ति भी बेच दी।

 

कभी इन कंपनियों के पास पर्याप्त कार्यबल, कैब मालिक-ड्राइवर थे तो प्रोत्साहनों को कम कर दिया गया था।

 

सर्वोदय ड्राइवर्स एसोसिएशन ऑफ दिल्ली के अध्यक्ष कमल जीत गिल ने कहा था, "शुरुआत में उन्होंने लगभग 15 प्रतिशत कमीशन लगाया, जबकि ड्राइवर एक निश्चित दूरी को कवर करने या यात्रा की एक निश्चित संख्या को पूरा करने के लिए प्रोत्साहन और अन्य योजनाओं से 15-6 रुपए प्रति किलोमीटर कमा रहे थे। अब हम प्रति किलोमीटर 6 रुपए ही कमाते हैं जबकि कमीशन 25 फीसदी और 30 फीसदी के बीच है, वहीं प्रोत्साहनों को फिर से कम कर दिया गया है।

 

उन्होंने कहा, "तो ऐसे ज़्यादा कमीशन का भुगतान करने, सीएनजी के लिए भुगतान करने, और फिर कार ऋण के लिए किस्तों का भुगतान करने के बाद हमें मुश्किल से ही कुछ बच पाता है। अधिकांश ड्राइवर 500 रुपए अधिक एक दिन में नहीं बचा पाते हैं। कई ड्राइवर अपनी किस्तों का भुगतान करने में असमर्थ रहे हैं। वे अपने परिवारों का भरण-पोषण करते हुए अपने ऋण का भुगतान कैसे करेंगे? कई जिंदगी बर्बाद हो गई हैं।"

 

Ola and Uber Drivers
AACOU
Assam
ओला-उबर हड़ताल

Related Stories

असम में बाढ़ का कहर जारी, नियति बनती आपदा की क्या है वजह?

असम : विरोध के बीच हवाई अड्डे के निर्माण के लिए 3 मिलियन चाय के पौधे उखाड़ने का काम शुरू

ज़मानत मिलने के बाद विधायक जिग्नेश मेवानी एक अन्य मामले में फिर गिरफ़्तार

असम की अदालत ने जिग्नेश मेवाणी को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजा

सद्भाव बनाए रखना मुसलमानों की जिम्मेदारी: असम CM

असम: बलात्कार आरोपी पद्म पुरस्कार विजेता की प्रतिष्ठा किसी के सम्मान से ऊपर नहीं

उल्फा के वार्ता समर्थक गुट ने शांति वार्ता को लेकर केन्द्र सरकार की ‘‘ईमानदारी’’ पर उठाया सवाल

दिल्ली : ओला-ऊबर के किराए और पेनिक बटन-की के खिलाफ टैक्सी ड्राइवरों की भूख हड़ताल

गुवाहाटी HC ने असम में बेदखली का सामना कर रहे 244 परिवारों को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की

असम: नागांव ज़िले में स्वास्थ्य ढांचा उपलब्ध होने के बावजूद कोविड मरीज़ों को स्थानांतरित किया गया


बाकी खबरें

  • अनिल सिन्हा
    उत्तर प्रदेशः हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं जनमत के अपहरण को!
    12 Mar 2022
    हालात के समग्र विश्लेषण की जगह सरलीकरण का सहारा लेकर हम उत्तर प्रदेश में 2024 के पूर्वाभ्यास को नहीं समझ सकते हैं।
  • uttarakhand
    एम.ओबैद
    उत्तराखंडः 5 सीटें ऐसी जिन पर 1 हज़ार से कम वोटों से हुई हार-जीत
    12 Mar 2022
    प्रदेश की पांच ऐसी सीटें हैं जहां एक हज़ार से कम वोटों के अंतर से प्रत्याशियों की जीत-हार का फ़ैसला हुआ। आइए जानते हैं कि कौन सी हैं ये सीटें—
  • ITI
    सौरव कुमार
    बेंगलुरु: बर्ख़ास्तगी के विरोध में ITI कर्मचारियों का धरना जारी, 100 दिन पार 
    12 Mar 2022
    एक फैक्ट-फाइंडिंग पैनल के मुतबिक, पहली कोविड-19 लहर के बाद ही आईटीआई ने ठेके पर कार्यरत श्रमिकों को ‘कुशल’ से ‘अकुशल’ की श्रेणी में पदावनत कर दिया था।
  • Caste in UP elections
    अजय कुमार
    CSDS पोस्ट पोल सर्वे: भाजपा का जातिगत गठबंधन समाजवादी पार्टी से ज़्यादा कामयाब
    12 Mar 2022
    सीएसडीएस के उत्तर प्रदेश के सर्वे के मुताबिक भाजपा और भाजपा के सहयोगी दलों ने यादव और मुस्लिमों को छोड़कर प्रदेश की तकरीबन हर जाति से अच्छा खासा वोट हासिल किया है।
  • app based wokers
    संदीप चक्रवर्ती
    पश्चिम बंगाल: डिलीवरी बॉयज का शोषण करती ऐप कंपनियां, सरकारी हस्तक्षेप की ज़रूरत 
    12 Mar 2022
    "हम चाहते हैं कि हमारे वास्तविक नियोक्ता, फ्लिपकार्ट या ई-कार्ट हमें नियुक्ति पत्र दें और हर महीने के लिए हमारा एक निश्चित भुगतान तय किया जाए। सरकार ने जैसा ओला और उबर के मामले में हस्तक्षेप किया,…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License