NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
असम: “शरणार्थियों” का मिथक
मुस्लिम आबादी में वृद्धि आप्रवासियों के कारण नहीं है बल्कि उच्च जन्म दर की वजह से है, जो गरीबी और निरक्षरता की वजह से होता हैI
सुबोध वर्मा
02 Aug 2018
Translated by महेश कुमार
Assam NRC

2011 की जनगणना में असम की मुस्लिम जनसंख्या राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 34 प्रतिशत दर्ज की गई थी। 2001 में यह लगभग 31 प्रतिशत और 1991 में 28 प्रतिशत से अधिक थी। यह कोई ज्यादा वृद्धि नहीं है। फिर भी मुस्लिम आबादी बढ़ने के बारे में कपटपूर्ण राजनीतिक प्रचार ने देश और अन्य जगहों पर लोगों के दिमाग को बदल दिया है। जब बांग्लादेश से तथाकथित अवैध आप्रवासन के साथ-साथ, राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनसीआर) के अंतिम मसौदे के बारे मैं 31 जुलाई को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने इस मुद्दे को उछाल दिया। मसौदे से 40 लाख से अधिक लोगों को बाहर कर दिया गया यह दर्शाता है कि वे भारत के नागरिक नहीं हैं।

विभिन्न परिवारों को विभाजित करने के बारे में कई रिपोर्टें प्रकाशित हुई हैं – परिवार के कुछ सदस्य एनआरसी सूची में हैं, अन्य नहीं। ये सर्वेक्षण और रिकॉर्डिंग सिस्टम की विभिन्न विफलताओं को इंगित करते हैं जो उम्मीदवारों की जानकारी तक सही तरीके से नही पहुँच पाये। लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के एनआरसी अभ्यास के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को शाह द्वारा जोड़ना एक अन्य एजेंडा का खुलासा कर्त है। उनका कहना है कि बांग्लादेश से अवैध आप्रवासी – खासकर मुस्लिम आप्रवासी - राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं और इसलिए उन्हें भारत से निर्वासित किया जाना चाहिए। अवैध आप्रवासियों से राष्ट्रीय सुरक्षा तक की यह बुनी हुइ कथा असम में मुस्लिम आबादी को विस्फोट करने और पूरे देश के लिए बीजेपी / आरएसएस समर्थकों के लिए एक बड़ी कथा का हिस्सा है।

हालांकि, असम के बारे में तथ्यों से पता चलता है कि अवैध आप्रवासियों द्वारा राज्य में बढ़ोतरी काफी हद तक मिथक है, खासकर पिछले दो दशकों में। विभिन्न धार्मिक समुदायों की जनसंख्या वृद्धि दर (जैसा कि विभिन्न सेंसस में दर्ज किया गया है) से पता चलता है कि असम की मुस्लिम आबादी में वृद्धि कहीं भी असाधारण नहीं है।

Assam NRC1.png

1991 से 2011 तक 20 वर्षों के दौरान, इस अवधि में असम की मुस्लिम आबादी में 68 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि हिंदुओं में 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई। असम में मुस्लिम विकास वास्तव में मुस्लिम आबादी के पूरे देश की औसत वृद्धि दर से थोड़ा कम है, जो 70 प्रतिशत है!

Assam NRC2.png

ध्यान दें कि, कई राज्य जहाँ आम तौर पर गरीबी की वजह से राज्य से  बाहर काम के लिये गंभीर रूप से जाते हैं जैसे बिहार और यूपी, और यहां तक कि राजस्थान और मध्य प्रदेश इसके उदहारण हैं इन राज्यों में मुसलमानों की उच्च वृद्धि दर है। इसलिए, मुसलमान इन राज्यों में प्रवास इसलिये नहीं कर रहे हैं कि उनकी उच्च जनसंख्या वृद्धि का कारण बन रहे हैं। असम में मुस्लिम आबादी राज्य में आप्रवासन के कारण बढ़ती प्रतीत नहीं होती है।.

तो, हिंदुओं की तुलना में मुस्लिम जनसंख्या तेजी से क्यों बढ़ रही है? उत्तर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छी तरह से सुलझाया गया, यह इस समुदाय की सामाजिक और आर्थिक स्थितियों में निहित है। प्रजनन दर, जो प्रति महिला पैदा होने वाले बच्चों की संख्या है, उन समुदायों में अधिक है जो गरीब, कम शिक्षित और अधिक वंचित हैं।

आयु-विशिष्ट प्रजनन दर (एएसएफआर) के अध्ययन के मुताबिक मुस्लिमों की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) हिंदुओं की तुलना में असम में अधिक है। मुस्लिमों के लिए टीएफआर हिंदुओं के लिए 2.59 की तुलना में 4.36 है। इसका मतलब है कि हर 1000 महिलाओं के लिए, मुस्लिम महिलाओं से 1.7 गुना अधिक बच्चे पैदा होते हैं। यह मुसलमानों के बीच आबादी की उच्च वृद्धि दर बताता है। वही तर्क उन अन्य राज्यों पर लागू होता है जहां मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि अधिक है, जैसे कि बिहार, यूपी, राजस्थान इत्यादि।

तथ्य यह काफी बेहतर है कि आर्थिक परिस्थितियों और शिक्षा, विशेष रूप से महिलाओं की शिक्षा, केरल के उदाहरण को देखते हुए जनसंख्या वृद्धि दर को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण कारक हैं। बहुत ऊंची साक्षरता  दरों और शिक्षा के औसत वर्षों और उच्च प्रति व्यक्ति आय के साथ, 1991 से 2011 के बीच मुस्लिम विकास दर 31 प्रतिशत तक केरल में कम हो गई है। असम जैसे गरीब राज्यों में यह इसका आधा हिस्सा है।

अंत में, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि मुस्लिमों की उच्च जनसंख्या वृद्धि दर के बावजूद, हिंदुत्व समर्थित  समूहों द्वारा प्रचारित एक अन्य पसंदीदा मिथक जिसमें मुस्लिमों की संख्याओं हिंदुओं से आगे निकलने की कोई संभावना नहीं है। आबादी के आकार में बहुत बड़ा है और वास्तविक में दुनिया में कभी नहीं होगा। किसी भी मामले में, मुस्लिम समेत भारत के सभी समुदाय एक कमजोर प्रजनन दर का प्रदर्शन कर रहे हैं। दूसरे शब्दों में, जनसंख्या वृद्धि सभी के बीच धीमी हो रही है। असम में भी।

संक्षेप में, असम में शाह और अन्य लोगों द्वारा किए गए बड़े पैमाने के प्रचार कि असम अवैध आप्रवासी समस्या का सामना कर रहा यह सच से दूर् की बात है। इसके बजाय, यह उन नीतियों का गंभीर परिणाम है जिसने लोगों के बड़े वर्गों को सभी समुदायों को लेकिन विशेष रूप से मुस्लिम को, गरीबी और निरक्षरता में रखा है। यह सब और कुछ नही बल्कि राजनीतिक तौर पर झूठा इलज़ाम है।

NRC
NRC Assam
NRC Process
Muslim population
population census

Related Stories

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

शाहीन बाग़ की पुकार : तेरी नफ़रत, मेरा प्यार

यूपी का रण, दूसरा चरण: मुस्लिम बाहुल्य इस क्षेत्र में किसका जनाधार?

देश बड़े छात्र-युवा उभार और राष्ट्रीय आंदोलन की ओर बढ़ रहा है

अदालत ने फिर उठाए दिल्ली पुलिस की 2020 दंगों की जांच पर सवाल, लापरवाही के दोषी पुलिसकर्मी के वेतन में कटौती के आदेश

जनसंख्या के बढ़ते दबाव के लिए कोई भी धर्म कितना ज़िम्मेदार है?

सरकार के खिलाफ शिकायत करने पर 'बाहर' नहीं कर सकते: गुजरात HC ने CAA-NRC प्रदर्शनकारी का बचाव किया

नर्क का दूसरा नाम...

असम डिटेंशन कैंप में रह रहे विदेशी नागरिकों के 22 बच्चे!

राष्ट्रव्यापी NRC पर अभी कोई फैसला नहीं: गृह मंत्रालय ने संसद को बताया


बाकी खबरें

  • सत्यम् तिवारी
    वाद-विवाद; विनोद कुमार शुक्ल : "मुझे अब तक मालूम नहीं हुआ था, कि मैं ठगा जा रहा हूँ"
    16 Mar 2022
    लेखक-प्रकाशक की अनबन, किताबों में प्रूफ़ की ग़लतियाँ, प्रकाशकों की मनमानी; ये बातें हिंदी साहित्य के लिए नई नहीं हैं। मगर पिछले 10 दिनों में जो घटनाएं सामने आई हैं
  • pramod samvant
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेकः प्रमोद सावंत के बयान की पड़ताल,क्या कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार कांग्रेस ने किये?
    16 Mar 2022
    भाजपा के नेता महत्वपूर्ण तथ्यों को इधर-उधर कर दे रहे हैं। इंटरनेट पर इस समय इस बारे में काफी ग़लत प्रचार मौजूद है। एक तथ्य को लेकर काफी विवाद है कि उस समय यानी 1990 केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी।…
  • election result
    नीलू व्यास
    विधानसभा चुनाव परिणाम: लोकतंत्र को गूंगा-बहरा बनाने की प्रक्रिया
    16 Mar 2022
    जब कोई मतदाता सरकार से प्राप्त होने लाभों के लिए खुद को ‘ऋणी’ महसूस करता है और बेरोजगारी, स्वास्थ्य कुप्रबंधन इत्यादि को लेकर जवाबदेही की मांग करने में विफल रहता है, तो इसे कहीं से भी लोकतंत्र के लिए…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    फ़ेसबुक पर 23 अज्ञात विज्ञापनदाताओं ने बीजेपी को प्रोत्साहित करने के लिए जमा किये 5 करोड़ रुपये
    16 Mar 2022
    किसी भी राजनीतिक पार्टी को प्रश्रय ना देने और उससे जुड़ी पोस्ट को खुद से प्रोत्सान न देने के अपने नियम का फ़ेसबुक ने धड़ल्ले से उल्लंघन किया है। फ़ेसबुक ने कुछ अज्ञात और अप्रत्यक्ष ढंग
  • Delimitation
    अनीस ज़रगर
    जम्मू-कश्मीर: परिसीमन आयोग ने प्रस्तावों को तैयार किया, 21 मार्च तक ऐतराज़ दर्ज करने का समय
    16 Mar 2022
    आयोग लोगों के साथ बैठकें करने के लिए ​28​​ और ​29​​ मार्च को केंद्र शासित प्रदेश का दौरा करेगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License