NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
समाज
भारत
राजनीति
आशंकाएं, अफवाहें और अलर्ट : यहां से किधर जाएगा कश्मीर?
राज्यपाल सत्यपाल मलिक कह रहे हैं कि नागरिकों को डरना नहीं चाहिए लेकिन जिस तरह के सरकारी आदेश दिए जा रहे हैं, उससे डरना लाजिमी है।
अजय कुमार
03 Aug 2019
Army in kashmir
प्रतिकात्मक तस्वीर

सबसे पहले अख़बारों में ख़बर छपी कि गृह मंत्रालय ने कश्मीर घाटी में 28 हजार और सुरक्षा बलों की तैनाती का आदेश दिया है। इस ख़बर से  होने वाली शोरगुल के बाद शुक्रवार को सरकारी सूत्रों से न्यूज़ एजेंसी में खबर छपी कि केंद्रीय बलों की 100 कंपनियों (10,000 जवानों) को एक हफ्ते पहले यहां तैनात करने का आदेश दिया गया था और वे अपने-अपने गंतव्यों पर पहुंचने की प्रक्रिया में हैं। साथ में मीडिया में यह भी खबर आने लगी कि कई दरगाहों, मस्जिदों और कुछ अदालतों से भी सुरक्षा हटाई गई है। यहां तैनात जवानों का अपने जिलों की पुलिस लाइन में रिपोर्ट करने को कहा गया है।

अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में तैनात कुछ जवान भी दूसरी जगह भेजे जा रहे हैं। राज्य में अमरनाथ यात्रा 4 अगस्त तक स्थगित कर दी  गयी है। लेकिन आज, 3 अगस्त की ख़बर है कि सैलानियों और तीर्थयात्रियों को वापस लौट जाने का निर्देश दिया गया है। क्योंकि सूत्रों का कहना है कि भारतीयसेना को पाकिस्तानी आर्मी और आतंकवादियों की तरफ से कश्मीर और अमरनाथ यात्रा पर हमले की आशंका है। अमरनाथ यात्रा 15 अगस्त तक चलने वाली थी। 

इन सारी स्थितियों को अगर एक साथ मिलाकर पढ़ा जाए तो कोई भी सामान्य व्यक्ति इस बात की आशंका करेगा कि कश्मीर के बदतर हालात में कोई बहुत गंभीर घटना तैर रही है। जो कब घटित हो जाए पता नहीं। राज्यपाल सत्यपाल मलिक कह रहे हैं कि नागरिकों को डरना नहीं चाहिए लेकिन जिस तरह के सरकारी आदेश दिए जा रहे हैं, उससे डरना लाजिमी है। पिछले दो दशकों में यह पहली बार हो रहा है कि सुरक्षा कारणों की वजह से अमरनाथ यात्रा को अपने निर्धारित समय से पहले खत्म किये जाने का आदेश दिया गया हो। साल 2017 में आतंकी हमले के बाद भी अमरनाथ यात्रा को रद्द नहीं किया गया था।  

अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए पहले से ही 32 हजार सेना के जवान तैनात थे। इसके अलावा सेना और राज्य की पुलिस के अलावा पहले से ही वहाँ केंद्रीय बलों के 50 हजार जवान तैनात हैं। कश्मीर दुनिया के उन कुछ इलाकों में से एक हैं, जहाँ सबसे अधिक जवान तैनात रहते है। जम्मू कश्मीर के पीडीपी की तरफ से राज्यसभा सांसद मीर मोहम्मद फयाज ने एक बार संसदीय बहस में कहा था कि जब भी कश्मीर में 25 हजार से अधिक सैनिकों की तैनाती होती है लोग बहुत अधिक डर जाते हैं। यानी सुरक्षा की लिहाज से इस स्थिति की गंभीरता है तो साथ में वहां की स्थानीय जनता को हो रही परेशानियों के लिहाज से भी इस स्थिति की गंभीरता है।

कश्मीर में बेचैनी 

न्यूज़क्लिक के लिए कश्मीर से रिपोर्ट करने वालीं पत्रकार सागरिका किस्सू कहती हैं कि यहां के लोग रोज़ की ज़रूरतों का सामान इकट्ठा कर रहे हैं। दवाएं, तेल साबुन, राशन आदि का स्टॉक किया जा रहा है। पेट्रोल पंपों पर लम्बी लाइन लग रही हैं। यहां पर काम करने वाले बिहारी मजदूर घरों को लौट रहे हैं। 

कश्मीर में सरकार द्वारा भय का मौजूदा माहौल क्यों पैदा किया जा रहा है? इसके लिए भले सेना कहे कि सरहद पार आतंकी मंसूबों से बचाव करने के लिए यह सब किया जा रहा है। और यह बात बिल्कुल सही भी हो। लेकिन फिर भी दूसरी सारी आशंकाओं से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता जो सरकार के इस कदम के लिए जिम्मेदारी हो सकती हैं। कश्मीर की उस पृष्ठभूमि से नज़र नहीं फेरा जा सकता, जिस पर नियंत्रण पाने के लिए ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं। 

राज्यपाल ने आश्वस्त किया 

कश्मीर के गवर्नर सत्यपाल मलिक का यह बयान है कि सरकार अनुच्छेद 35ए और 370 के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करेगी। सैनिकों की बढ़ोतरी केवल सुरक्षा कारणों से जुडी हुई है। यानी यह सरकार का आधिकारिक बयान है कि वह कश्मीर के मौजूदा संवैधानिक स्थिति के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करेगी। लेकिन व्यवहारिक तौर पर भाजपा का अनुच्छेद 370 और 35ए पर यह कभी भी रुख नहीं रहा है। सरकार में आने से पहले भी भाजपा इसें ख़त्म करने की मांग करती आयी और सरकार ने आने के बाद तो पिछले कुछ दिनों में कश्मीर के इन अनुच्छेदों पर खुलकर बहस हुई है। इस अनुच्छेद को हटाने लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई जनहित याचिकाएं भी दायर की जा चुकी हैं। इसलिए इसे हटाने को लेकर भी अफवाह बहुत तेज है। 

केंद्र को चेताया

शुक्रवार को जम्मू कश्मीर की सभी पार्टियों ने जम्मू कश्मीर को दिए गए स्पेशल स्टेटस में छेड़छाड़ को लेकर हो रही सुगबुगाहट के खिलाफ केंद्र को चेताया। और साथ में स्पष्टीकरण भी माँगा कि आखिरकार जम्मू कश्मीर को लेकर संसद में इस तरह की बेचैनी क्यों है? इस लिहाज से जम्मू  कश्मीर के कुछ नेताओं के ट्वीट गौर करने लायक है।

पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती का ट्वीट कहता है "आप एकमात्र मुस्लिम बाहुल्य वाले राज्य का प्यार हासिल करने में विफल रहे जिसने आपके धार्मिक आधार पर विभाजन को खारिज कर दिया और धर्मनिरपेक्ष भारत को चुना। लेकिन आखिरकार सब खत्म हो गया और भारत ने जनता पर टेरीटरी (अधिकार) चुन लिया है। मुफ्ती साहब (मुफ्ती मोहम्मद सईद) हमेशा कहा करते थे कि कश्मीरियों को जो भी मिलेगा, वह उनके ही देश भारत से होगा। लेकिन आज वही देश, अपनी ‘विशिष्ट पहचान’ को बनाए रखने के लिए जो कुछ भी बचा था, उसे लूटने की तैयारी करता दिख रहा है।”

नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने उनकी पार्टी को आश्वासन दिया है कि संविधान के अनुच्छेद 370 और 35 ए को रद्द किए जाने पर या राज्य को तीन हिस्सों में बांटने जैसी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। हालांकि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इन मुद्दों पर केंद्र से सोमवार को संसद में आश्वासन चाहते हैं। सरकार के सैलानियों और तीर्थयात्रियों के राज्य से बाहर चले जाने के आदेश पर सवाल उठाते हुए ट्वीट किया कि गुलमर्ग के होटल से लोगों को बाहर निकाला जा रहा है। पहलगाम और गुलमर्ग जाने वाली सड़कों सेना की तैनाती है। सेना बसों की छानबीन कर रही है। अगर यात्रा को खतरा है तो यह जवानों की तैनाती गुलमर्ग में क्यों हो रही है? 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हुर्रियत कांफ्रेंस (एम) के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने कहा, “राज्य की जनसांख्यिकी और इसके मुस्लिम बहुमत चरित्र को बदलने के लिए अनुच्छेद 35A को हटाने की आशंकाएं व्याप्त हैं। पिछले तीन वर्षों से इसके खिलाफ इसे चुनौती देने के लिए भारतीय सर्वोच्च न्यायालय में विभिन्न जनहित याचिकाएँ दायर की गई थीं। ऐसे उपायों से वास्तविकता नहीं बदलेगी कि कश्मीर मुद्दा एक मुद्दा है और इसे हल किया जाना चाहिए। पूरी दुनिया भारत और पाकिस्तान को इसे हल करने के लिए कह रहा है और मध्यस्थता की पेशकश भी कर रहा है। यदि भारत और पाकिस्तान का नेतृत्व वास्तव में अपने लोगों के लिए चिंतित है, तो वे राज्य-कौशल दिखाएंगे और बात करने के लिए सहमत होंगे। अंतत: यह केवल भारत पाकिस्तान और कश्मीरियों का ही स्थायी समाधान हो सकता है।"

इन सारे लोगों के बयानों का पढ़ना इसलिए भी जरूरी हो जाता है क्योंकि ये उन पार्टियों और संगठनों से जुड़े लोग हैं जो कश्मीरी समाज और राजनीति में अहमियत रखते हैं। 

इसके अलावा कांग्रेस और माकपा ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जाहिर की है। 

संसद में बयान दें प्रधानमंत्री : कांग्रेस

जम्मू-कश्मीर के मामले में कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि सरकार को कोई जोखिम उठाने से बचना चाहिए और राज्य को मिली संवैधानिक गारंटी बरकरार रखना चाहिए।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने यह भी कहा कि संसद सत्र चल रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस स्थिति के बारे में देश को बताना चाहिए।

आजाद ने कहा, "पिछले 30 वर्षों में दर्जनों घटनाएं हुई हैं और सभी सरकारों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। लेकिन कभी किसी सरकार ने अमरनाथ यात्रा को नहीं रोका और पर्यटकों को जम्मू-कश्मीर छोड़ने के लिए नहीं कहा।''

सरकार स्थिति स्पष्ट करे : माकपा

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने जम्मू कश्मीर में हालात को चिंताजनक बताते हुये सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

माकपा पोलित ब्यूरो ने शनिवार को बयान जारी कर कहा कि जम्मू कश्मीर में लगभग 35 हजार अतिरिक्त जवान तैनात किये जाने के केन्द्र सरकार के फैसले के मंतव्य पर सवाल उठ रहे हैं।

माकपा ने कहा कि यद्यपि संसद का सत्र चल रहा है इसके बावजूद केन्द्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से जुड़े अपने फैसलों के बारे में न तो कोई वक्तव्य दिया है ना ही राज्य के राजनीतिक दलों को विश्वास में लिया। इन परिस्थितियों के मद्देनजर जम्मू कश्मीर के लोगों में यह धारणा बन रही है कि केन्द्र सरकार, राज्य की संवैधानिक स्थिति के बारे में कोई बड़ी कार्रवाई करने जा रही है। पार्टी पोलित ब्यूरो ने सरकार से जम्मू कश्मीर में की जा रही कार्रवाई के बारे में विस्तृत स्पष्टीकरण देने की मांग की। साथ ही केन्द्र सरकार से मामले की संवेदनशीलता का हवाला देते हुये ऐसी कोई कार्रवाई करने से बचने की भी अपील की है जिसके संभावित गंभीर परिणामों का सामना करना पड़े।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अनुच्छेद 35 A और 370 का हटाया जाना भी भाजपा के लिए ही काम करेगा। ऐसी स्थिति में विरोध की वजह से राज्य की क्षेत्रीय राजनीति के हिस्सेदार भाग नहीं लेंगे। और पंचायती चुनावों की तरह ही विधानसभा चुनाव का भी बहिष्कार कर देंगे। इस तरह से विधानसभा चुनाव में भी जमकर पैसा बहाया जाएगा। और जीत भाजपा की होगी। इससे छद्म तरीके से चुनाव होते रहना भी दिखता रहेगा।

इसके अलावा अंदरूनी सूत्रों के हवाले से ये भी ख़बर है कि इस साल स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी लाल किले से देश के अवाम को एक चौंकाने वाली खबर दे सकते हैं। ये खबर क्या हो सकती है? सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार जम्मू को एक स्वतंत्र राज्य घोषित करके कश्मीर और लद्दाख को यूनियन टेरीटरी (केंद्र शासित) घोषित कर सकती है। इसीलिए घाटी में इतने सैन्य और अर्द्धसैन्य टुकड़ियाँ जमा की जा रही हैं।

क्या इन बातों को सही माना जाये? हालांकि सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा या जानकारी जारी नहीं हुई है। लेकिन भाजपा का रवैया कहता है कि ऐसा हो भी सकता है। जब नोटबंदी अचानक की जा सकती है। बद से बदतर होते कश्मीर के हालत में भी रोजाना अनुच्छेद 35 A और 370 को हटाने की बात की जा सकती है। कश्मीर की स्थानीय पुलिस और राजनीति पर भरोसा न करके कश्मीर को पूरी तरह अलग थलग किया जा सकता है। उसे पूरी तरह से केंद्र से नियंत्रित करने की कोशिश की जा सकती है तो यह भी हो सकता है कि भाजपा की राजनीति हावी हो जाए और कश्मीर के बंटवारे की घोषणा कर दिया जाए।

सरकार का हक है कि वह सुरक्षा कारणों की वजह से कुछ न बताये। लेकिन सैनिकों की तैनाती के अलावा वायुसेना व थल सेना को हाई एलर्ट पर रखना, सभी रास्तों को केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों के हवाले सौंपना,अमरनाथ यात्रियों और पर्यटकों को जम्मू कश्मीर से जल्द लौटने के लिए एडवाइजरी जारी करना, स्कूलों की छुट्टिया बढ़ाना इस आशंका को और पुख्ता करता है कि मामला सुरक्षा कारणों से लेकर और भी बहुत कुछ हो सकता है।

बस यह जगह कश्मीर है और कश्मीर के संदर्भ में यह समझने की जरूरत है कि कश्मीर की ज़मीन ही नहीं कश्मीर के लोग भी हमारे हैं।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

amarnath yatra
Jammu and Kashmir
Terrorism
Indian army
Narendra modi
inernal security
omar abdullah
Kashmir Politics
Article 370
Article 35A

Related Stories

बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून

सद्भाव बनाम ध्रुवीकरण : नेहरू और मोदी के चुनाव अभियान का फ़र्क़

एक व्यापक बहुपक्षी और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता

हम भारत के लोगों की असली चुनौती आज़ादी के आंदोलन के सपने को बचाने की है

हम भारत के लोग : इंडिया@75 और देश का बदलता माहौल

हम भारत के लोग : हम कहां-से-कहां पहुंच गये हैं

संविधान पर संकट: भारतीयकरण या ब्राह्मणीकरण

झंझावातों के बीच भारतीय गणतंत्र की यात्रा: एक विहंगम दृष्टि

आज़ादी के अमृत महोत्सव वर्ष में हमारा गणतंत्र एक चौराहे पर खड़ा है

हम भारत के लोग: झूठी आज़ादी का गणतंत्र!


बाकी खबरें

  • institutional_casteism
    सबरंग इंडिया
    क्या आप संस्थागत जातिवाद की भयावहता लगातार सुन सकते हैं?
    30 Sep 2021
    रिपोर्ट अपर्याप्त निवारण तंत्र को देखती है और हाशिए के समुदायों के लोगों के बारे में बात करती है, जिन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में इस तरह के भेदभाव का खुले तौर पर या गुप्त रूप से सामना किया है और यह उन…
  • Kerala: Muslim woman made a painting of Lord Krishna, got a special place in the temple
    भाषा
    केरल: मुस्लिम महिला ने भगवान कृष्ण की बनाई पेंटिंग, मिला मंदिर में  खास स्‍थान
    30 Sep 2021
    पथानमथिट्टा जिले के पांडलम के करीब स्थित उलानादु श्री कृष्णा स्वामी मंदिर ने कृष्ण के बालरूप की पेंटिंग के लिए जसना से औपचारिक तौर पर अनुरोध किया और रविवार को उन्हें आमंत्रित कर उनसे पेंटिंग ली जसना…
  • dhalpur
    सबरंग इंडिया
    ढालपुर से तस्वीरें: बेदखल परिवारों के संघर्षों को दर्शाता फोटो फीचर
    30 Sep 2021
    हमारी टीम आपके लिए उन लोगों की दिल दहला देने वाली तस्वीरें लेकर आई है, जो अपने जीवन को संगठित रखने के लिए संघर्ष करते हैं। प्रशासन ने उन स्थानों को समतल कर दिया जहां उनके मामूली घर कभी खड़े थे, अब एक…
  • covid
    अमिताभ रॉय चौधरी
    वैक्सीन को मान्यता देने में हो रही उलझन से वैश्विक हवाई यात्रा पर पड़ रहा असर
    30 Sep 2021
    अब जब वैश्विक स्तर पर कोविड-19 की स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आती लग रही है, तब अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन को धीरे-धीरे खोला जा रहा है। खासकर उन देशों में हवाई बाज़ार तेजी से खुल रहा है, जहां बड़े
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 23,529 नए मामले, 311 मरीज़ों की मौत
    30 Sep 2021
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 37 लाख 39 हज़ार 980 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License