NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आश्रय गृहों में होने वाला घिनौना कृत्य, बिना राजनीतिक शरण के संभव नहीं
पटना, देवरिया व मुज़फ्फरपुर के आश्रय गृह में हुए खुलासे के बाद पता चला है कि इन तमाम आश्रय गृहों के मालिकों के राजनीतिक ताल्लुकात रहे हैं।
शारिब अहमद खान
14 Aug 2018
rape cases in shelter homes

बिहार की राजधानी पटना में रविवार को ‘आसरा शेल्टर होम’  में दो यूवतियों की मौत से संबंधित एक मामला सामने आया। युवतियों की मौत होने के बाद आनन फानन में दाह संस्कार की कोशिश की वजह से यह मामला पुलिस के संज्ञान में आया। मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस ने आसरा शेल्टर होम की कोषाध्यक्ष मनीषा दयाल, सचिव चिरंतन समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

पटना के आसरा शेल्टर होम में युवतियों की मौत होने के 48 घंटे के बाद अस्पताल ले जाया गया था और बिना पुलिस को सूचित किये हुए ही उन शवों का दाह संस्कार करने की कोशिश की गई थी और जिसमें एक का दाह संस्कार करने में शेल्टर होम वाले सफल भी हो गए थेI लेकिन जब पुलिस को सूचना मिली तब उसने दूसरी युवती का पोस्टमार्टम करवाया।

दरअसल, मुज़फ्फरपुर आश्रय गृह के खुलासे के बाद से देश के कई सारे आश्रय गृह का घिनौना कृत्य सब के सामने आ रहा है। जितने भी आश्रय गृहों के घिनौने कृत्य का पर्दाफाश हुआ है सबको चलाने वाले कोई-न-कोई रसूखदार ही थे और उन सब का राजनीतिक ताल्लुक था।

आश्रय गृह में महिलाओं, नाबालिग बच्चियों, बच्चों पर यह घिनौना कृत्य चलता ही रहता, अगर टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस (TISS) की टीम ने बिहार के शेल्टर होम का निरिक्षण कर रिपोर्ट न बनाई होती। सरकार इस मामले में कितनी संलिप्त है कि इस बात का अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि TISS की रिपोर्ट अप्रैल माह में आने के बावजूद वह हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। रिपोर्ट आने के तक़रीबन तीन महीने बाद सरकार ने इस मामले पर कार्यवाही करने की सोची और वह भी स्थानीय मीडिया में ख़बर आने के बाद।

आश्रय गृह में होने वाले कृत्यों को सुनकर ही लोगों की रूह काँप उठती है, तो ज़रा सोचकर देखिये कि जिनके साथ यह घिनौना कृत्य होता होगा उनके उपर क्या बीतती होगी। अभी तक जितने भी आश्रय गृह के मामला सामने आया है, तमाम रिपोर्टों से यही जाहिर होता है कि इन सारे आश्रय गृह में महिलाओं व बच्चियों को जानवर से भी ज़्यादा बुरी स्थिति में रखा जाता था, उन्हें मारा पीटा जाता था, बात नहीं मानने पर तरह तरह की यातनाएँ दी जाती थी, यहाँ तक कि उन्हें मौत के घाट भी उतार दिया जाता था। हैरान और सुनकर लोगों के आँसू निकल जाने वाले कृत्य का यह घिनौनापन रूप, जिसे सुनकर रूह की भी रूह काँप जाती है।

चाहे वह मुज़फ्फरपुर का आश्रय गृह कांड हो, पटना का शेल्टर होम कांड हो, उत्तर प्रदेश के देवरिया में स्थित शेल्टर होम कांड होः इन सब को चलाने वाले लोगों का राजनीतिक रिशता-नाता रहा है। अगर हम मुज़फ्फरपुर के आश्रय गृह कांड की बात करें तो इसे चलाने वाले का नाम बृजेश ठाकुर था और इसका संबध सत्ता और विपक्ष दोनों पार्टियों के लगभग तमाम बड़े-छोटे नेताओं से था। वहीं जब इसे पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किया गया तो बृजेश ठाकुर किस तरह से हँसता हुआ पुलिस हिरासत में जा रहा थाI इस बात से बहुत कुछ अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

अब अगर हम वर्तमान में पटना आश्रय गृह में हुई घटना की बात करें तो देखेंगें कि इसे चलाने वाली महिला का भी राज्य की तमाम पार्टीयों के नेताओं के साथ घर जैसा रिश्ता है। उनके फेसबुक प्रोफाईल को देखने पर पता चलता है कि सत्ता में आसीन मंत्रियों और पूर्व सरकार में मंत्री रह चुके नेताओं तमाम लोगों के साथ उनकी फोटो है।

देवरिया आश्रय गृह को देखा जाए तो यह और भी भयावह लगता है, क्योंकि जिस आश्रय गृह को एक साल पहले बंद कर दिया गया थाI वहाँ किसके कहने पर लड़कियों को रखने की इजाज़त मिली। कहा जा रहा है कि इस आश्रय गृह के मालिक का भी सत्ता में आसीन लोगों यानी कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से सम्बंध है।

बिहार सरकार से बच्चियों और महिलाओं की सुरक्षा का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री से उनकी सरकार में मंत्री, मंजु वर्मा और आरोपी बृजेश ठाकुर के सम्बंध पर विपक्ष और मीडिया सवाल करता रहा, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जवाब देने और कार्यवाही करने की बजाए बृजेश ठाकुर को जेल में पाँच सितारा सुविधा प्रदान करने में मश्गूल रहे।

देश में हो रहे इस घिनौने कृत्य को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और उसके बाद जो बातें अदालत के न्यायाधीशों ने कहीं उसे इस समाज को सोचने पर मज़बूर कर दिया है। वैसे यह बात तो किसी से छिपी नहीं है कि अभी भी हमारे देश में महिलाओं के प्रति होने वाली घटनाओं में दिन-प्रतिदिन बढ़ोतरी ही हो रही है। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार देश में प्रतिवर्ष 38,000 से भी अधिक महिलाओं व बच्चियों के साथ बलात्कार जैसा घिनौना कृत्य होता है। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से पूछा है कि 2004 के बाद से राज्य के आश्रय गृह का आधिकारिक निरीक्षण क्यों नहीं हुआ और जब निरीक्षण नहीं हुआ तो इन्हें वित्तीय मदद क्यों दी गई। आपको बता दें कि आश्रय गृह के निरीक्षण की ज़िम्मेदारी ज़िला अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी व महिला बाल क्लयाण अधिकारी की होती है।

वैसे ज्ञात हो कि देश में आश्रय गृह में इस तरह की घटना कोई नई नहीं है। इससे पहले भी 2012 में हरियाणा के रोहतक व करनाल में युवतियों के साथ इसी तरह की घटना सामने आई थी। अपने आप को देश का सभ्य नागरिक कहलाने वाले लोगों ने महाराष्ट्र के आश्रय गृह में बच्चियों को नहीं छोड़ा, उनके साथ होने वाली यह घटना 2013 में प्रकाश में आई थी। इसके बाद 2015 में देहरादून के नारी निकेतन में भी कुछ इस तरह की घटना सामने आई थी, जहाँ दरिंदो ने मूक बधिर बच्चियों तक को नहीं छोड़ा था।

पटना, देवरिया व मुज़फ्फरपुर के आश्रय गृह में हुए खुलासे के बाद पता चला है कि इन तमाम आश्रय गृह के मालिकों के राजनीतिक ताल्लुकात रहे हैं। रसुखदारों को बिना राजनीतिक शरण के यह घिनौना कृत्य संभव ही नहीं है!

आश्रय गृह
Bihar Shelter Home Rape case
rapes in shelter home

Related Stories

कैसे सुरक्षित रहेंगी बेटियां? : आगरा अनाथालय सील, जांच जारी

मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम पीड़िता से गैंगरेप : कौन है गुनाहगार? कुछ लोग या सरकार!

देहरादून आश्रय बलात्कार मामले में नौ दोषी करार

ओडिशा : आश्रयगृह में एचआईवी संक्रमित लड़कियों के यौन शोषण की जांच शुरू

मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम मामला : सुप्रीम कोर्ट ने जांच पूरी करने के लिये सीबीआई को दिए तीन महीने

पटना में लड़की की ख़रीद-फ़रोख़्त : महिला संगठनों का नीतीश सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम

मुजफ्फरपुर बालिका आश्रय गृह यौन शोषण मामले में नरकंकाल बरामद

बिहार : वाम दलों ने नितीश सरकार के खिलाफ राज्यभर में बनाई मानव श्रृंखला

बिहार: एक और आश्रयगृह पर उठे गंभीर सवाल

मध्यप्रदेश: एक और आश्रयगृह बना बलात्कार गृह!


बाकी खबरें

  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश चुनाव: क्या हैं जनता के असली मुद्दे?
    27 Feb 2022
    न्यूज़क्लिक ने उत्तर प्रदेश बनारस विधानसभा में मीलों का सफ़र तय किया, यह जानने की कोशिश थी की आखिर जनता क्या चाहती है? क्या जनता इस बार भी धर्म को सबसे ऊपर रखते हुए अपना मुख्यमंत्री चुनेगी या…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश चुनाव 2022: व्यापारियों का भाजपा पर फूटा गुस्सा
    27 Feb 2022
    अयोध्या में हनुमानगढ़ी के पास स्थित दुकानों पर ख़तरा मंडरा रहा है और वहां के व्यापारी भाजपा से काफी नाराज़ हैं। आखिर ऐसा क्यों है? आइये देखते हैं यह ग्राउंड रिपोर्ट
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश चुनाव 2022: क्या समाजवादी के पक्ष में है जनता ?
    27 Feb 2022
    इस ख़ास बातचीत में परंजॉय गुहा ठाकुरता और विजय शंकर सिंह बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश चुनावों की। विजय शंकर सिंह का मानना है कि इन चुनावों में समाजवादी पार्टी का पलड़ा भारी है।
  • UP
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    अब बस दो क़दम और...: यूपी में 5वें चरण का मतदान संपन्न, चित्रकूट-अयोध्या आगे, प्रतापगढ़-प्रयागराज रहे सबसे पीछे
    27 Feb 2022
    यूपी में आज पांचवें चरण का मतदान संपन्न हो गया। अब बस दो कदम यानी दो चरण और बचे हैं। उत्तर प्रदेश में कुल सात चरणों में चुनाव हो रहे हैं। आज पांचवें चरण में 12 ज़िलों की 61 विधानसभा सीटों पर शाम पांच…
  • यूक्रेन ने रूस के साथ बेलारूस में वार्ता से किया इनकार, रुसी सेना खारकीव में घुसी
    एपी/भाषा
    यूक्रेन ने रूस के साथ बेलारूस में वार्ता से किया इनकार, रुसी सेना खारकीव में घुसी
    27 Feb 2022
    यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा है कि उनका देश रूस के साथ शांति वार्ता करने के लिए तैयार है लेकिन बेलारूस में नहीं।इसी के साथ यूक्रेन के प्राधिकारियों ने कहा कि रूसी सेना देश के दूसरे सबसे बड़े शहर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License