NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अयोध्या मामले को संवैधानिक पीठ के पास भेजने की मांग वाली याचिका खारिज
सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को 2-1 के बहुमत से रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले को बड़ी संवैधानिक पीठ के पास भेजे जाने की याचिका खारिज कर दी और निर्णय लिया कि गठित होने वाली नई तीन सदस्यीय पीठ 29 अक्टूबर से मामले की सुनवाई करेगी।
आईएएनएस
27 Sep 2018
supreme court Ayodhya Verdict

नई दिल्ली| सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को 2-1 के बहुमत से रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले को बड़ी संवैधानिक पीठ के पास भेजे जाने की याचिका खारिज कर दी और निर्णय लिया कि गठित होने वाली नई तीन सदस्यीय पीठ 29 अक्टूबर से मामले की सुनवाई करेगी। न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने खुद व प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की ओर से फैसले को पढ़ते हुए कहा, "मामले को संवैधानिक पीठ के पास भेजे जाने का कोई मामला नहीं बनता।"

पीठ ने अपना फैसला कुछ मुस्लिमों की याचिका पर सुनाया है। इन्होंने न्यायालय से आग्रह किया था कि इलाहबाद उच्च न्यायालय द्वारा 2010 विवादित भूमि को तीन हिस्से में बांटने वाले फैसले को एक संवैधानिक पीठ के पास भेजा जाए, क्योंकि इसमें सर्वोच्च न्यायालय के पांच न्यायाधीशों की पीठ द्वारा 1994 में दिए गए फैसले पर पुनर्विचार किया गया था, जिसमें न्यायालय ने इस्लाम में नमाज के लिए मस्जिद को जरूरी भाग नहीं बताने का फैसला दिया था।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि 2010 में टाइटल सूट पर निर्णय लेने के दौरान, इलाहबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने 1994 में पांच न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिए गए फैसले का संदर्भ दिया था।

लेकिन, एक भिन्न फैसले में न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर ने कहा कि 1994 में इस्माइल फारूकी मामले में दोबारा विचार किए जाने और मामले को सात सदस्यीय बड़ी पीठ के पास भेजे जाने की जरूरत है।

मामले में गुरुवार को न्यायाधीशों के बहुमत के फैसले में कहा गया कि नई गठित की जाने वाली पीठ 29 अक्टूबर से हिंदू व मुस्लिम हितधारकों की ओर से पेश याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इन याचिकाओं के माध्यम से 2010 के फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें विवादास्पद स्थल को तीन भागों राम लला, निर्मोही अखाड़ा और मुस्लिम पक्षकार के बीच बांटने का फैसला सुनाया गया था।

न्यायमूर्ति भूषण ने कहा, "इस्माइल फारूकी मामले में मस्जिद धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं है वाला अवलोकन मस्जिद के अधिग्रहण के संबंध में था और यह मामले के तथ्य के आधार पर था। इस्माइल फारूकी मामले में अवलोकन को केवल अवलोकन की तरह लेना चाहिए और न कि मामले के निर्णायक वजह की तरह।"

बहुमत के फैसले से उलट अल्पमत फैसले में न्यायमूर्ति नजीर ने कहा कि बिना समग्र जांच के ही इस्माइल फारूकी मामले में 'सवालिया अवलोकन' सामने आए और यह मुख्य अयोध्या मामले के फैसले में व्याप्त हो गया है।

उन्होंने कहा कि संवैधानिक पीठ को यह निश्चित ही निर्णय करना चाहिए कि एक धर्म की आवश्यकताओं के लिए क्या जरूरी होता है और फिर इसके बाद अयोध्या भूमि विवाद को सुना जाना चाहिए।

न्यायाधीश नजीर ने यह भी कहा कि इस्लाम में नमाज अदा करने के लिए मस्जिद जरूरी भाग है या नहीं, इसपर धार्मिक विश्वासों के साथ और जरूरी विस्तृत सोच विचार के साथ निर्णय किया जाना चाहिए।

उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि 1994 में इस्माइल फारूकी फैसले से उठे सवालों को सात न्यायाधीशों की पीठ के पास भेजे जाने की जरूरत है।

babri masjid
Ayodhya Case
Supreme Court

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • yogi bulldozer
    सत्यम श्रीवास्तव
    यूपी चुनाव: भाजपा को अब 'बाबा के बुलडोज़र' का ही सहारा!
    26 Feb 2022
    “इस मशीन का ज़िक्र जिस तरह से उत्तर प्रदेश के चुनावी अभियानों में हो रहा है उसे देखकर लगता है कि भारतीय जनता पार्टी की तरफ से इसे स्टार प्रचारक के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।”
  • Nagaland
    अजय सिंह
    नगालैंडः “…हमें चाहिए आज़ादी”
    26 Feb 2022
    आफ़्सपा और कोरोना टीकाकरण को नगालैंड के लिए बाध्यकारी बना दिया गया है, जिसके ख़िलाफ़ लोगों में गहरा आक्रोश है।
  • women in politics
    नाइश हसन
    पैसे के दम पर चल रही चुनावी राजनीति में महिलाओं की भागीदारी नामुमकिन
    26 Feb 2022
    चुनावी राजनीति में झोंका जा रहा अकूत पैसा हर तरह की वंचना से पीड़ित समुदायों के प्रतिनिधित्व को कम कर देता है। महिलाओं का प्रतिनिधित्व नामुमकिन बन जाता है।
  • Volodymyr Zelensky
    एम. के. भद्रकुमार
    रंग बदलती रूस-यूक्रेन की हाइब्रिड जंग
    26 Feb 2022
    दिलचस्प पहलू यह है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने ख़ुद भी फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से सीधे पुतिन को संदेश देने का अनुरोध किया है।
  • UNI
    रवि कौशल
    UNI कर्मचारियों का प्रदर्शन: “लंबित वेतन का भुगतान कर आप कई 'कुमारों' को बचा सकते हैं”
    26 Feb 2022
    यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया ने अपने फोटोग्राफर टी कुमार को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान कई पत्रकार संगठनों के कर्मचारी भी मौजूद थे। कुमार ने चेन्नई में अपने दफ्तर में ही वर्षों से वेतन न मिलने से तंग आकर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License