NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अज़ान पर कोहराम: छात्रों की वीसी से इस्तीफ़े की मांग, मस्जिद के लाउडस्पीकर की आवाज़ हुई आधी
3 मार्च को इलाहाबाद विश्वविद्यालय की वीसी-संगीता श्रीवास्तव ने मस्जिद से लाउडस्पीकर के ज़रिये मुसलमानों को नमाज़ के लिए किये जाने वाले आह्वान पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए ज़िले के अफ़सरों को लिखा कि इससे उसकी नींद में खलल पड़ती है।
अब्दुल अलीम जाफ़री
19 Mar 2021
अज़ान पर कोहराम
Image Courtesy: Business Standard

लखनऊ: इलाहाबाद विश्वविद्यालय (AU) की कुलपति-संगीता श्रीवास्तव ने प्रयागराज में अपने इलाक़े की एक मस्जिद से सुबह की अज़ान (सूर्योदय से पहले की जाने वाली प्रार्थना के लिए बुलावा) के चलते पड़ने वाली “खलल” को लेकर शिकायत की थी, इसके ख़िलाफ़ बड़ी संख्या में छात्र नेताओं ने बुधवार को उसके कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया।

श्रीवास्तव ने 3 मार्च को ज़िले के अफ़सरों को मस्जिद से लाउडस्पीकर के ज़रिये पढ़े जाने वाली नमाज़ पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए लिखा था कि इससे उनकी नींद में खलल पड़ती है।

श्रीवास्तव का इस्तीफ़ा मांगने के अलावा, छात्रों ने यह मांग भी की भारत के राष्ट्रपति द्वारा उनके पद से उन्हें बर्ख़ास्त किया जाये या फिर वह ख़ुद इस्तीफ़ा दें। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने श्रीवास्तव का पुतला जलाया और उनके उस बयान की निंदा की, जिसमें उन्होंने जो कुछ कहा था, वह दरअस्ल गंगा-जमुनी तहज़ीब की परंपरा के ख़िलाफ़ जाता है। छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय के लॉन में एकत्रित होकर ‘एयू वीसी शर्म करो, शर्म नहीं, तो डूब मरो’ जैसे नारे लगाये। कल की घटना के बाद क़ानून और व्यवस्था बनाये रखने के लिहाज़ से विश्वविद्यालय के गेट के पास बड़ी तादाद में पुलिसकर्मी और आरएएफ़ की टुकड़ी की तैनाती की गयी थी।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में क़ानून के स्नातकोत्तर छात्र और बुधवार को विरोध के एक प्रमुख आयोक-अजय यादव सम्राट ने न्यूज़क्लिक को बताया कि "स्टूडेंट यूनियन, जिन पर 2018 से प्रतिबंध लगा हुआ है, उनकी बहाली को लेकर पिछले 240 दिनों से विश्वविद्यालय परिसर में छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं;  परिसर में पुस्तकालयों को फिर से खोले जाने को लेकर भी प्रदर्शन किया जा रहा है, ताकि हम अपने शोध कार्य और शोध प्रबंध को समय पर पूरा कर सकें। हमारी मांगे माने जाने की समय सीमा नज़दीक आ रही है, लेकिन अब तक न तो हमारी कुलपति ने छात्रों की शिकायतों पर ध्यान दिया है और न ही विश्वविद्यालय के किसी प्रतिनिधि ने हमसे मुलाक़ात की है।” सम्राट ने कहा कि हालांकि, अज़ान पर टिप्पणी करने की उन्हें बहुत जल्दी थी, क्योंकि यहउसकी राजनीति के अनुरूप है। उन्होंने आगे बताया, "वीसी के पति,न्यायमूर्ति  विक्रम नाथ, गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हैं और वीसी ने जो कुछ कहा है, असल में उसका मक़सद अपने ‘सरदार’ को ख़ुश करना था"  

यादव ने वीसी पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में “नियुक्ति घोटाले” में भागीदार होने का आरोप लगाते हुए कहा कि आख़िर हर विभाग में उनके नाम के आख़िरी हिस्से यानी, ‘श्रीवास्तव’ वाले शिक्षकों की नियुक्ति ही कैसे हो गयी, “जब कभी वीसी इलाहाबाद के बाहर जाता है, तो कार्यकारी वीसी, विश्वविद्यालय के सबसे वरिष्ठ व्यक्ति को नियुक्त किया जाता है। हालांकि, वह जिस किसी को लेकर पक्षपात करती हैं, उसके नाम का आख़िरी शब्द, श्रीवास्तव ही होता है।”  छात्र नेता ने उनकी तरफ़ से की गयी नियुक्ति की जांच की मांग की। यादव सवाल करते हैं, "वह (संगीता श्रीवास्तव) तो पहले इलाहाबाद विश्वविद्यालय में गेस्ट फैकल्टी थीं। सवाल है कि किसने उन्हें वीसी बना दिया?”

छात्रों का दावा है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय पुलिस शिविर में बदल गया है, कैंपस में न कोई छात्र दिखता है और न कोई कक्षायें ही चल रही हैं।

यादव की बातों से सहमति जताते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ के अध्यक्ष,आदिल हमज़ा ने कहा, “किसी संवैधानिक पद पर बैठे हुए अधिकारी की इस अजीब-ओ-ग़रीब प्रतिक्रिया को देखकर हमें (छात्रों को) बहुत पीड़ा होती है।” उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक सद्भाव भारत के मूल में रहा है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि धर्मों के ख़िलाफ़ बोलना "इन दिनों फ़ैशन बन गया है"। उन्होंने "धार्मिक उन्माद" पैदा करने के लिए श्रीवास्तव के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

वीसी पर "इलाहाबाद के लेटरहेड" का अपने निजी पक्ष में “दुरुपयोग” करने का आरोप लगाते हुए हमज़ा ने कहा, “अगर वीसी को नमाज़ के चलते परेशानी हो रही थी, तो उन्हें दबाव बनाने के लिए विश्वविद्यालय के नाम का इस्तेमाल करने के बजाय निजी तौर पर ज़िला मजिस्ट्रेट प्रशासन के दफ़्तर का दौरा करना चाहिए था।"  

छात्रों ने कुछ नेताओं के साथ डीएम कार्यालय तक मार्च किया और भारत के राष्ट्रपति-राम नाथ कोविंद को संबोधित करते हुए एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें श्रीवास्तव को तत्काल बर्ख़ास्त करने की मांग की गयी।

न्यूज़क्लिक वीसी का पक्ष जानने के लिए उनके पास पहुंचा। लेकिन, उनके जनसंपर्क अधिकारी ने कहा कि वह एक "पारिवारिक समारोह" में व्यस्त हैं और टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हैं।

प्रयागराज के डीएम-भानु चंद्र गोस्वामी ने न्यूज़क्लिक से बताया कि उन्हें "इस मामले को लेकर शिकायत मिली है और नियमों के तहत ज़रूरी कार्रवाई की गयी है।"

मस्जिद समिति ने आवाज़ घटा दी  

इलाहाबाद परिसर के पास स्थित लाल मस्जिद की प्रबंधन समिति ने बुधवार को अपने दो लाउडस्पीकरों में से एक की दिशा बदल दी और श्रीवास्तव की चिट्ठी के तत्काल बाद आवाज़ को आधा कर दिया।

मस्जिद की प्रबंधन समिति के सदस्य-कलीमुर्रहमान ने न्यूज़क्लिक को बताया कि स्पीकर की आवाज़ पहले से ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय की तरफ़ से तय मानदंडों से कम,यानी एक डेसिबल निर्धारित की हुई है, “फिर भी आवाज़ को उससे भी आधी कर दी गयी है और दो लाउडस्पीकरों में से एक की दिशा भी बदल दी गयी है, ताकि वीसी के आवास तक यह आवाज़ बहुत कम पहुंचे।” रहमान ने न्यूज़क्लिक को बताया कि अगर इस मामले का राजनीतिकरण करने के बजाय वह समिति से संपर्क की होतीं, तो यह मामला सुलझ सकता था।

उन्होंने आगे कहा कि प्रबंधन समिति ने यह सुनिश्चित किया था कि अज़ान के चलते मस्जिद के आस-पास रहने वालों को कोई असुविधा न हो।

यह कहते हुए कि उसकी नींद में खलल पड़ रही है, श्रीवास्तव ने लिखा था कि अज़ान की वजह से उन्हें दिन भर सिरदर्द बना रहता है और काम को भी नुकसान पहुंचता है। वीसी ने दावा किया कि वह किसी भी धर्म या जाति के ख़िलाफ़ नहीं है और सुझाव दिया कि अज़ान बिना माइक्रोफोन के जारी किया जाये, ताकि दूसरे लोगों को परेशानी नहीं हो।

उन्होंने सेहरी (सुबह से पहले का वह भोजन, जिसे मुसलमान रमज़ान के उपवास या रोज़ा शुरू होने से पहले खाते हैं) की घोषणा को लेकर भी शिकायत की। उनका कहना है, "इस चलन के चलते भी दूसरे लोगों के बीच खलल पैदा होती है।"

श्रीवास्तव ने इसके लिए 2020 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फ़ैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि अज़ान या नमाज़ का आह्वान इस्लामिक परंपरा का अटूट हिस्सा तो है, लेकिन लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल एक "ग़ैर-ज़रूरी" परंपरा है। इस फ़ैसले से रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच किसी भी तरह के आवाज़ बढ़ाने वाले उपकरणों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा हुआ है। उन्होंने ज़िलाधिकारी से दरख़्वास्त किया है कि अज़ान के चलते परेशान हो रहे लोगों के मन में "कुछ चैन और शांति की बहाली करें।"

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Azaan Furore: Students Demand AU VC’s Resignation, Mosque Turns Down Volume by Half

Allahabad University
Sangita Srivastava
Allahabad University VC
Azaan Controversy
students protest
AUSU

Related Stories

तिरछी नज़र: हम सहनशील तो हैं, पर इतने भी नहीं

बनारस को धार्मिक उन्माद की आग में झोंकने का घातक खेल है "अज़ान बनाम हनुमान चालीसा" पॉलिटिक्स

बीएचयू: लाइब्रेरी के लिए छात्राओं का संघर्ष तेज़, ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ हटाने की मांग

बीएचयू: 21 घंटे खुलेगी साइबर लाइब्रेरी, छात्र आंदोलन की बड़ी लेकिन अधूरी जीत

नई शिक्षा नीति के ख़िलाफ़ AISA का 'रोल बैक NEP' अभियान

जाति देखकर नंबर देने के आरोप में प्रोफेसर विक्रम हरिजन से इलाहाबाद विवि ने 2 साल बाद मांगे साक्ष्य

इलाहाबाद विश्वविद्यालय: लाइब्रेरी खुलवाने के लिए धरने पर बैठे छात्रों को बल प्रयोग कर हटाया

तमिलनाडु : मेडिकल छात्रों का प्रदर्शन 50 दिन के पार; प्रशासन ने विश्वविद्यालय बंद कर छात्रों का खाना-पानी रोका

सुपवा: फीस को लेकर छात्रों का विरोध, कहा- प्रोजेक्ट्स-प्रैक्टिकल्स के बिना नहीं होती सिनेमा की पढ़ाई

इलाहाबाद विश्वविद्यालय : अब नहीं बदलेगा नाम, छात्र आंदोलन की बड़ी जीत


बाकी खबरें

  • प्रियंका शंकर
    रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच, नॉर्वे में नाटो का सैन्य अभ्यास कितना महत्वपूर्ण?
    19 Mar 2022
    हालांकि यूक्रेन में युद्ध जारी है, और नाटो ने नॉर्वे में बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है, जो अभ्यास ठंडे इलाके में नाटो सैनिकों के युद्ध कौशल और नॉर्वे के सैन्य सुदृढीकरण के प्रबंधन की जांच करने के…
  • हर्षवर्धन
    क्रांतिदूत अज़ीमुल्ला जिन्होंने 'मादरे वतन भारत की जय' का नारा बुलंद किया था
    19 Mar 2022
    अज़ीमुल्ला ख़ान की 1857 के विद्रोह में भूमिका मात्र सैन्य और राजनीतिक मामलों तक ही सिमित नहीं थी, वो उस विद्रोह के एक महत्वपूर्ण विचारक भी थे।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: महंगाई-बेरोजगारी पर भारी पड़ी ‘नमक पॉलिटिक्स’
    19 Mar 2022
    तारा को महंगाई परेशान कर रही है तो बेरोजगारी का दर्द भी सता रहा है। वह कहती हैं, "सिर्फ मुफ्त में मिलने वाले सरकारी नमक का हक अदा करने के लिए हमने भाजपा को वोट दिया है। सरकार हमें मुफ्त में चावल-दाल…
  • इंदिरा जयसिंह
    नारीवादी वकालत: स्वतंत्रता आंदोलन का दूसरा पहलू
    19 Mar 2022
    हो सकता है कि भारत में वकालत का पेशा एक ऐसी पितृसत्तात्मक संस्कृति में डूबा हुआ हो, जिसमें महिलाओं को बाहर रखा जाता है, लेकिन संवैधानिक अदालतें एक ऐसी जगह होने की गुंज़ाइश बनाती हैं, जहां क़ानून को…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्यप्रदेश विधानसभा निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित, उठे सवाल!
    19 Mar 2022
    मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित कर दिया गया। माकपा ने इसके लिए शिवराज सरकार के साथ ही नेता प्रतिपक्ष को भी जिम्मेदार ठहराया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License