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बैलाडीला: अपनी आस्था बचाने के लिए आदिवासी धरने पर
दंतेवाड़ा ज़िले के आदिवासी शुक्रवार सुबह से किरंदुल थाना क्षेत्र के अंतर्गत राष्ट्रीय खनिज विकास निगम के खदान के सामने धरने पर बैठे हुए हैं। आदिवासियों ने दावा किया है कि राष्ट्रीय खनिज विकास निगम ने ‘डिपाज़िट 13’ को अडानी समूह को सौंप दिया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
08 Jun 2019
Mukund

छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा ज़िले के बैलाडीला क्षेत्र में एक पहाड़ी का खनन किए जाने पर क्षेत्र के आदिवासी विरोध कर रहे हैं। इलाक़े के आदिवासियों की मान्यता है कि इस पहाड़ी में उनके इष्ट देवता की पत्नी विराजमान हैं।

दरअसल, इस पहाड़ी में लौह अयस्क का भंडार है। इसे अब इसे निजी हाथों में सौंपा जा रहा है इसको लेकर भी वहाँ के स्थानीय आदिवासियों का विरोध है। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि छलपूर्वक फ़र्जी ग्रामसभा से अनुमोदन करवा लिया गया है, ताकि खदान निजी हाथों में सौंपी जा सके। डिपॉज़िट 13 में खनन के लिए जिन सैकड़ों के एकड़ जंगलों को काटने की तैयारी की गई है, उसमें आदिवासियों के देवी देवताओं का निवास है, आदिवासी किसी भी क़ीमत पर इसे उजड़ने नहीं देंगे।
 
माओवादियों ने भी आदिवासियों के विरोध और आंदोलन का समर्थन किया है तथा इस संबंध में बैनर पोस्टर भी लगाए हैं।

दंतेवाड़ा ज़िले के आदिवासी शुक्रवार सुबह से किरंदुल थाना क्षेत्र के अंतर्गत राष्ट्रीय खनिज विकास निगम के खदान के सामने धरने पर बैठे हुए हैं। आदिवासियों ने दावा किया है कि राष्ट्रीय खनिज विकास निगम ने ‘डिपाज़िट 13’ को अडानी समूह को सौंप दिया है। जबकि इस पहाड़ में उनके ईष्ट देवता प्राकृतिक गुरू नन्द राज की धर्मपत्नी पितोड़ रानी विराजमान हैं।

यह आंदोलन संयुक्त पंचायत समिति के बैनर तले किया जा रहा है। लगभग 2000 की संख्या में बैलाडीला क्षेत्र में विरोध कर रहे आदिवासियों के प्रमुख मंगल कुंजाम ने कहा "13 नंबर की पहाड़ी अडानी समूह को दे दी गई है। वह पहाड़ी पूर्ण रूप से आदिवासियों के लिए आस्था का केंद्र है। इसमें प्राकृतिक शक्ति विराजमान है। यहाँ खनन नहीं करने दिया जाएगा।"
 
वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के स्थानीय नेता नंदा राम सोरी ने कहा, "हम इसका विरोध कर रहे हैं। इस पहाड़ी से आदिवासियों की आस्था जुड़ी हुई है। आदिवासियों के आंदोलन को देखते हुए क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है तथा एनएमडीसी की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। 
दंतेवाड़ा ज़िले के पुलिस अधीक्षक अभिषेक पल्लव ने कहा कि इस विरोध प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं ली गई है। हालांकि, लोकतंत्र में हर किसी को विरोध करने का अधिकार है। अगर प्रदर्शनकारी क़ानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करेंगे, तब उनके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

दंतेवाड़ा ज़िले के किरंदुल क्षेत्र के अंतर्गत बैलाडीला के डिपोज़िट 13 में लौह अयस्क का भंडार है। इसे एक संयुक्त उद्यम कंपनी एनसीएल के तहत विकसित किया जा रहा है। एनसीएल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी वीएस प्रभाकर ने कहा है, "खनन गतिविधियों से आदिवासियों के पवित्र स्थान को कोई नुकसान नहीं पहुँचेगा।"

इस आंदोलन को कई दलों और समाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन 

इस आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी भी शामिल होंगी। इसके अलावा बताया जा रहा है कि जनता कांग्रेस के सुप्रीमो अजीत जोगी भी इस में शामिल हो सकते हैं। इस आंदोलन को भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ने भी अपना समर्थन दिया है। इस आंदोलन में शामिल होने के लिए दंतेवाड़ा के अलावा कई अन्य ज़िलों के आदिवासी भी बड़ी संख्या में बैलाडीला के लिए पहुँचे हैं।

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अडानी को अवैध रूप से ज़मीन देने का विरोध 

बैलाडीला के डिपॉज़िट 13 में 315.813 हेक्टेयर रकबे में लौह अयस्क खनन के लिए वन विभाग ने वर्ष 2015 में पर्यावरण क्लियरेंस दिया है। इस पर एनएमडीसी और राज्य सरकार की सीएमडीसी को संयुक्त रूप से खनन कार्य करना था। इसके लिए राज्य व केंद्र सरकार के बीच क़रार भी हुआ था। संयुक्त उपक्रम एनसीएल का गठन किया गया था, लेकिन बाद में इसे निजी कंपनी अडानी एंटरप्राइजेस लिमिटेड को 25 साल के लिए लीज़ पर दे दिया गया। डिपाज़िट 13 के 315.813 हेक्टेयर रकबे में 250 मिलियन टन लौह अयस्क होने का दावा किया जा रहा है। इसमें अयस्क में 65 से 70 फ़ीसदी आयरन की मात्रा पायी जाती है।

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