NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बैंकों का निजीकरण राष्ट्र के निजीकरण की प्रक्रिया की आख़िरी कड़ी होगी..हो सके ऐसा मत होने दीजिए
इमरजेंसी के कारण खलनायिका समझी जाने वाली इंदिरा गाँधी के दो काम ऐसे थे जिनके चलते वे भारत की एक महान स्टेट्समैन के रूप में हमेशा याद की जाएंगी। एक बांग्लादेश की मुक्ति और दूसरा बैंकों का राष्ट्रीयकरण I
आशुतोष कुमार
22 Feb 2018
PNB

इमरजेंसी के कारण खलनायिका समझी जाने वाली इंदिरा गाँधी के दो काम ऐसे थे, जिनके चलते वे भारत की एक महान स्टेट्समैन के रूप में हमेशा याद की जाएंगी।

एक बांग्लादेश की मुक्ति और दूसरा बैंकों का राष्ट्रीयकरण। इनमें दूसरा ज़्यादा बड़ा और मुश्किल काम था।

बैंको का राष्ट्रीयकरण सदियों से भारतीय किसान का खून चूस रही महाजनी सभ्यता पर एक मारक चोट थी। महाजनी पंजे से देहाती भारत की मुक्ति थी।

1969 में हुए 14 बड़े बैंकों के राष्ट्रीयकरण ने ग़रीब को सहारा दिया। दुर्गम अंचलों में बैंकों की शाखाएं खुलीं। किसान को जरूरी छोटे कर्ज लेने का भरोसेमंद और सुरक्षित उपाय मिला। ग़रीब बच्चों को पढ़ने के लिए सहारा मिला। कुटीर उद्योगों को पनपने का रास्ता मिला। ये न हुआ होता तो नब्बे के बाद शुरू हुआ किसान आत्महत्याओं का सिलसिला सत्तर से भी शुरू हो सकता था।

सरकारी बैंको से कहा गया कि वे ग़रीब जरूरतमंदों की आर्थिक सहायता में उदार बनें और धन्नासेठों के लिए सख़्त। ट्रैक्टर और जानवर और बढ़ईगीरी का सामान ख़रीदने के लिए दिया कर्ज़ एक बार डूब जाए तो चिंता न करें। बेहतर देखरेख के साथ दुबारा मदद करें। अपनी कमाई मोटे असामियों से करें।

नब्बे के बाद धीरे धीरे इस नीति को पलट दिया गया। बैंक गरीबों पर सख़्त होने लगे और धन्नासेठों के लिए परम उदार। महासेठों ने बेहिसाब कर्ज़ लिया और पी गए। पिछले कुछ वर्षों में यह प्रक्रिया तेजतर होती चली गई। माल्या, ललित, नीरव इसी प्रक्रिया की देन हैं।

जाहिर है इस तरीक़ेकार को पलट कर फिर पटरी पर लाने की जरूरत है। लेकिन लगता ऐसा है कि घोटालों का नाम लेकर बैंको के पूर्ण निजीकरण की योजना बनाई जा रही है।

अब तक का हर अनुभव बताता है कि निजीकरण से घोटाले नहीं रुकते। बस कागज़ी रूप से वैध हो जाते हैं क्योंकि विधि विधान ही निजी हाथों में चला जाता है। असलियत में घोटालों का आकार विकराल हो जाता है। निजी अस्पताल और स्कूल इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। वे खुले हाथों पब्लिक को लूट रहे हैं लेकिन उनकी लूट कानूनी समझी जाती है, इसलिए घोटाले की श्रेणी में आती ही नहीं।

बैंकों के निजीकरण के बाद भी यही होगा। घोटाले पकड़े नहीं जाएंगे क्योंकि उन्हें वैध रूप दे दिया जाएगा। लूट विकराल रूप से और बढ़ जाएगी जो आखिर आपके खून पसीने की कमाई की ही होगी। किसान के पास डूबते को जो तिनके का एक सहारा है, वह भी छिन जाएगा। बैंको का निजीकरण राष्ट्र के निजीकरण की प्रक्रिया की आख़िरी कड़ी होगी। देश की गर्दन पर एक प्रतिशत थैलीशाहों का शिकंजा पूरी तरह कस जाएगा।

हो सके तो बचिए। ऐसा मत होने दीजिए।

(आशुतोष कुमार, लेखक दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। )

Courtesy: Hastakshep,
Original published date:
20 Feb 2018
Punjab National Bank
Privatization of banks
Nationalization of banks

Related Stories

गुजरात : एबीजी शिपयार्ड ने 28 बैंकों को लगाया 22,842 करोड़ का चूना, एसबीआई बोला - शिकायत में नहीं की देरी

बैंक निजीकरण से धन्नासेठों को फायदा

बैंक निजीकरण रोकना क्यों जरुरी?

बैंकों के राष्ट्रीयकरण के 50 साल, लेकिन...

माल्या और मोदी के अलावा और भी है…

बैंक धोखाधड़ी: मोदी सरकार अपने उत्तरदायित्व से भागने की फ़िराक में


बाकी खबरें

  • CDSCO
    भाषा
    CDSCO ने कोवोवैक्स, कोर्बेवैक्स और मोलनुपिराविर के आपात इस्तेमाल को स्वीकृति दी
    28 Dec 2021
    सीडीएससीओ की कोविड-19 संबंधी विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने ‘कोवोवैक्स’ और ‘कोर्बेवैक्स’ को कुछ शर्तों के साथ आपात स्थिति में उपयोग की अनुमति देने की सिफारिश की है। कोविड-19 रोधी दवा ‘मोलनुपिराविर’ (…
  • sunil
    भाषा
    पेले से आगे निकले छेत्री, भारत ने आठवां सैफ ख़िताब जीता, महिला टीम भी चमकी
    28 Dec 2021
    भारतीय फुटबॉल को वर्ष 2021 में कोई बड़ी सफलता नहीं मिली । पचास और साठ के दशक का अपना खोया गौरव लौटाने की कोशिश में जुटी टीम उस पल का इंतजार ही करती रही जो देश में इस खेल की दशा और दिशा बदल सके।
  • UP Elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव: किसानों की आय दोगुनी होने का टूटता वादा, आत्महत्या का सिलसिला जारी
    28 Dec 2021
    बुंदेलखंड के बाँदा ज़िले में युवा किसान राम रुचि और प्रमोद पटेल ने इसी साल क़र्ज़ के दबाव में आत्महत्या कर ली। न्यूज़क्लिक ने दोनों परिवारों से मिल कर बात की और जानने की कोशिश की कि सरकार का किसानों…
  • officers of Edu dept eating MDM with students
    राजेश डोबरियाल
    उत्तराखंड: 'अपने हक़ की' लड़ाई अंजाम तक पहुंचाने को तैयार हैं दलित भोजन माता सुनीता देवी
    28 Dec 2021
    “...चूंकि क्रिसमस की बैठक में सभी पक्ष अभी क्षेत्र का माहौल सौहार्दपूर्ण बनाए रखने पर सहमत हुए हैं इसलिए वे जांच कमेटी की रिपोर्ट आने का इंतज़ार कर रहे हैं। नियमानुसार तो सुनीता देवी की ही भोजनमाता…
  • UP Election 2022
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव 2022: बेरोज़गार युवा इस चुनाव में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं
    28 Dec 2021
    मोदी-योगी से नाउम्मीद युवाओं को विपक्ष से चाहिए रोजगार का भरोसा
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License