NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बांधों के कुप्रबंधन से बाढ़ के हालात बिगड़े : गाडगिल
पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल का नेतृत्व कर रहे गाडगिल ने पत्रकारों से कहा कि महाराष्ट्र जल संसाधन विभाग कोयना, वरना और राधानगरी बांध में जल संचय प्रबंधन करने में नाकाम रहा। इसलिए कोल्हापुर और सांगली को बाढ़ का सामना करना पड़ा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
14 Aug 2019
महाराष्ट्र में बाढ़
Image Courtesy: The Hindu

मुंबई : पर्यावरणविद माधव गाडगिल का कहना है कि पश्चिम महाराष्ट्र के कोल्हापुर और सांगली जिलों में पिछले हफ्ते आई भयावह बाढ़ का कारण अहम बांधों का कुप्रबंधन है।

पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल का नेतृत्व कर रहे गाडगिल ने पत्रकारों से कहा कि महाराष्ट्र जल संसाधन विभाग कोयना, वरना और राधानगरी बांध में जल संचय प्रबंधन करने में नाकाम रहा। इसलिए कोल्हापुर और सांगली को बाढ़ का सामना करना पड़ा।

उन्होंने गैर लाभकारी समूह ‘साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपुल’ (एसएएनडीआरपी) की राय का समर्थन किया जिसके मुताबिक महाराष्ट्र और कर्नाटक सरकार के अधिकारियों ने जलाशयों का सही तरीके से प्रबंधन नहीं किया।

गाडगिल ने मंगलवार को कहा कि कोयना, वरना और राधानगरी और यहां तक की कर्नाटक स्थित अलमाटी बांध से रक्षात्मक उपाय के तहत पानी छोड़ा जाना चाहिए था।

एसएएनडीआरपी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि कृष्णा नदी पर बने अलमाटी बांध की कोल्हापुर और सांगली में आई बाढ़ में अहम भूमिका थी।

रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई के अंत में 99.5 फीसदी जलाशय भर चुका था, जबकि मानसून के दो महीने बाकी थे। जलाशय की क्षमता 119.26 टीएमसी है, जबकि 3,045 फुट प्रति सेकेंड (क्यूसेक) की दर से पानी छोड़ा गया। रिपोर्ट में कहा गया कि यह जलाशय प्रबंधन के लिए निर्धारित नियमों का घोर उल्लंघन है।

आपको बता दें कि इस बार पश्चिमी महाराष्ट्र के पांच जिले बाढ़ से बहुत ज़्यादा प्रभावित रहे। बाढ़ की वजह से अब तक 40 से ज़्यादा लोगों की मौत की भी ख़बर है। यहां बाढ़ के मद्देनजर चार लाख से अधिक लोगों को अपने घर-बार छोड़ने कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। इनमें सांगली और कोल्हापुर जिले बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं।

इसके अलावा भी देश के कई हिस्से बाढ़ की चपेट में हैं। वहां भी विकास के मॉडल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

floods
Maharashtra
maharashtra flood
sangli
kolahapur
Devendra Fednavis
big dam
Madhav Gadgil

Related Stories

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

महाराष्ट्र : एएसआई ने औरंगज़ेब के मक़बरे को पांच दिन के लिए बंद किया

महाराष्ट्र में गन्ने की बम्पर फसल, बावजूद किसान ने कुप्रबंधन के चलते खुदकुशी की

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं

अब राज ठाकरे के जरिये ‘लाउडस्पीकर’ की राजनीति

महाराष्ट्र सरकार का एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम को लेकर नया प्रस्ताव : असमंजस में ज़मीनी कार्यकर्ता

कोविड-19 टीकाकरण : एक साल बाद भी भ्रांतियां और भय क्यों?

महाराष्ट्र सरकार पर ख़तरे के बादल? क्यों बाग़ी मूड में नज़र आ रहे हैं कांग्रेस के 25 विधायक


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!
    27 Mar 2022
    पुनर्प्रकाशन : यही तो दिन थे, जब दो बरस पहले 2020 में पूरे देश पर अनियोजित लॉकडाउन थोप दिया गया था। ‘इतवार की कविता’ में पढ़ते हैं लॉकडाउन की कहानी कहती कवि-पत्रकार मुकुल सरल की कविता- ‘लॉकडाउन—2020’।
  • डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    लीजिए विकास फिर से शुरू हो गया है, अब ख़ुश!
    27 Mar 2022
    ये एक सौ तीस-चालीस दिन बहुत ही बेचैनी में गुजरे। पहले तो अच्छा लगा कि पेट्रोल डीज़ल की कीमत बढ़ नहीं रही हैं। पर फिर हुई बेचैनी शुरू। लगा जैसे कि हम अनाथ ही हो गये हैं। जैसे कि देश में सरकार ही नहीं…
  • सुबोध वर्मा
    28-29 मार्च को आम हड़ताल क्यों करने जा रहा है पूरा भारत ?
    27 Mar 2022
    मज़दूर और किसान आर्थिक संकट से राहत के साथ-साथ मोदी सरकार की आर्थिक नीति में संपूर्ण बदलाव की भी मांग कर रहे हैं।
  • अजय कुमार
    महंगाई मार गई...: चावल, आटा, दाल, सरसों के तेल से लेकर सर्फ़ साबुन सब महंगा
    27 Mar 2022
    सरकारी महंगाई के आंकड़ों के साथ किराना दुकान के महंगाई आकड़ें देखिये तो पता चलेगा कि महंगाई की मार से आम जनता कितनी बेहाल होगी ?
  • जॉन पी. रुएहल
    क्या यूक्रेन मामले में CSTO की एंट्री कराएगा रूस? क्या हैं संभावनाएँ?
    27 Mar 2022
    अपने सैन्य गठबंधन, सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (सीएसटीओ) के जरिये संभावित हस्तक्षेप से रूस को एक राजनयिक जीत प्राप्त हो सकती है और अपने अभियान को आगे बढ़ाने के लिए उसके पास एक स्वीकार्य मार्ग प्रशस्त…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License