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बारिश से भारी तबाही के बावजूद केरल की मांग को केंद्र ने किया नज़रअंदाज़
साल 1924 के बाद से केरल में इस साल बाढ़ से भारी तबाही। इस साल मौतों की संख्या अब तक 186 तक पहुंच गई।

न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
14 Aug 2018
Kerala floods

केरल में भारी बारिश की वजह से बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है जिसके चलते यहां जनजीवन अस्त व्यस्त है। यहां भूस्खलन के कई मामले सामने आए हैं। हज़ारों की संख्या में लोग बेघर हैं। बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने तत्काल राहत के रूप में राज्य को पहले की घोषित सहायता राशि 160.50 करोड़ रुपए में से महज़ 100 करोड़ रुपए देने को मंज़ूरी दी है। तत्काल राहत के रूप में यह अनुदान राज्य की 1,220 करोड़ रुपए की मांग को नज़रअंदाज़ करता है।

तीव्र दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के चलते हुई इस आपदा से राज्य में 39 लोगों की मौत हो गई है। इसके अलावा हजारों लोग बेघर हो गए हैं। भूमि सहित किसानों की सभी संपत्तियां इस बाढ़ से तबाह हो गई हैं। कई जगहों पर सड़कें बह गई और इमारतें गिर गई। इन सभी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने 8,316 करोड़ रुपए का अनुमान लगाया था और मुख्यमंत्री पिनाराय विजयन ने तत्काल राहत के लिए राष्ट्रीय आपदा राहत निधि से 1,220 करोड़ रुपए का अनुरोध किया था। हालांकि, बीजेपी की अगुआई वाली केंद्र सरकार ने रविवार को 100 करोड़ के अनुदान की घोषणा की जो राज्य द्वारा अनुरोध की गई कुल राशि का केवल 8प्रतिशत है।

पहले चरण में हुए मानसून से नुकसान के लिए 1,220 करोड़ रुपए में से 820 करोड़ रुपए की मुआवज़े के रूप में मांग की गई थी। एनडीआरएफ दिशानिर्देशों के तहत केंद्रीय टीम द्वारा ये सिफारिश की गई थी। इस टीम ने राज्य का दौरा किया था। केरल में दूसरे चरण के दौरान होने वाले नुकसान का आकलन करने के लिए मुख्यमंत्री ने केंद्रीय टीम को फिर से भेजने का अनुरोध किया है। पिनाराय विजयन ने एक फेसबुक पोस्ट में ये अनुरोध किया है।

ज्ञात हो कि केरल में साल 1924 के बाद इस मॉनसून में सबसे ज़्यादा बाढ़ की स्थिति पैदा हुई है। इसके कुल चौदह ज़़िलों में से दस ज़िले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। बाढ़ की स्थिति ख़तरनाक होने के चलते 27 बांध को खोलना पड़ा। 9 से 12 अगस्त के बीच क़रीब 39 लोगों की मौत हो गई है, और इस साल में अब तक कुल मौतों की संख्या 186 हो गई है। राज्य भर में क़रीब 60,000 से ज़्यादा लोग विभिन्न राहत शिविरों में रह रहे हैं। वहीं 211 स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई है। लगभग 20,000 घर बर्बाद हो गए हैं, वहीं क़रीब 10,000 किमी सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई है। मुख्यमंत्री ने कहा, "केरल को इस आपदा के प्रभाव को लंबे समय तक झेलना पड़ेगा।"

हालांकि आपदा के वास्तविक नुकसान को अभी आकना बाकी है। कृषि क्षेत्र को आने वाले मौसम में उत्पादन में बड़े नुकसान की संभावना है। चाय के क्षेत्र में अकेले मन्नार में 50 प्रतिशत उत्पादन कम होने की उम्मीद है। मन्नार चाय बागानों का केंद्र है जो इडुक्की ज़िले में है जहां काफी नुकसान हुआ है। इससे पहले एसोसिएशन ऑफ प्लांटर्स ऑफ केरल ने कहा था कि अनियमित मौसम की स्थिति के कारण इस क्षेत्र में प्रति हेक्टेयर 100-125 किलोग्राम चाय का नुकसान हुआ था।

राज्य में लगातार बारिश के चलते प्रमुख नकदी फसलों में से एक रबड़ के पेड़ को भी पत्ते गिरने वाली बीमारी का सामना करना पड़ रहा है जिससे आने वाले महीनों में उत्पादन प्रभावित होने की संभावना है। लगातार बारिश के कारण न केवल रबड़ और चाय बल्कि और भी फसलें प्रभावित हुई हैं जिसका परिणाम उत्पादन और बाज़ारों में दिखाई देगा।

हालांकि सत्ताधारी गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के अधीन राज्य की पूरी मशीनरी और विपक्षी दल प्रभावित क्षेत्रों से सभी लोगों की ज़िंदगी बचाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, जबकि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार प्रभावित राज्य के लिए कोई ज़्यादा उदार नहीं दिखाई दे रही है।

इस मामले में राज्य वित्त मंत्री थॉमस इस्साक ने अपने ट्विटर वॉल पर प्रतिक्रिया दिया, "केरल में बाढ़ से क़रीब 8000 करोड़ रूपए के आसपास का कुल नुकसान है। तत्काल राहत के लिए 3000 करोड़ रूपए के क़रीब ख़र्च है। और केंद्र का 100 करोड़ रूपए अनुदान बहुमूल्य है।"

इससे पहले दिसंबर 2017 में ओखी चक्रवात के वक़्त भी केंद्र ने तमिलनाडु के साथ केरल को नज़रअंदाज़ कर दिया था। इन राज्यों में भारी तबाही हुई थी और गुजरात की तुलना में इन्हें अनुदान कम दिए गए। उस समय केंद्र ने केरल के लिए एनडीआरएफ से 133 करोड़ रुपए जारी करने के लिए अग्रिम मंज़ूरी दिया था हालांकि राज्य ने 422 करोड़ रुपए की सहायता राशि की मांग की थी। इसके अलावा राज्य ने पुनर्वास पैकेज के लिए 7,340 करोड़ रुपए का अनुरोध किया था जिसे नकार दिया गया था।

https://www.thehindu.com/news/national/kerala/centre-releases-133-crore…

हालांकि, एमईटी सेंटर के निदेशक जयंत सरकार के अनुसार गुजरात तट पर पहुंचने से पहले ये चक्रवात पर समुद्र में ही कमज़ोर पर गया था, फिर भी राज्य को राहत राशि मिली थी। बाढ़ राहत निधि के रूप में इसे 1,055 करोड़ रुपए मिला।

https://www.business-standard.com/article/current-affairs/cyclone-ockhi-spared-poll-bound-gujarat-and-top-other-developments-117120700599_1.html

अब सवाल उठता है कि केंद्र ऐसे राज्य के लिए धन उपलब्ध कराने के लिए इतना अनिच्छुक क्यों है जो केंद्र के साथ अपने करों को साझा करता है?

इस साल की शुरुआत में यानी अप्रैल महीने में दक्षिण भारतीय वित्त मंत्रियों के कॉन्क्लेव (तमिलनाडु और तेलंगाना को छोड़कर) में 15 वीं वित्त आयोग के बिंदुओं पर चर्चा की गई। सम्मेलन मे इन मंत्रियों ने पाया कि बीजेपी के नेतृत्व वाले केंद्र ने इन राज्यों को आवंटित किए जाने वाले फंडों में केंद्र के हिस्से में कटौती करने का एक सचेत प्रयास कर मनमाने ढंग से इन बिंदुओं को तैयार किया है।

https://www.thehindu.com/news/national/15th-finance-commission-terms-of…

उस समय केरल के वित्त मंत्री डॉ इस्साक ने बताया था कि केंद्र अपनी योजनाओं को फंड करने के लिए इन राज्यों के हिस्से को कम करने का प्रयास कर रहा था। उन्होंने यह भी पाया था कि आयोग का कार्य राज्यों के प्रदर्शन को आंकना नहीं बल्कि करों को बांटना करना था।

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