NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बाबरी विध्वंस: आतंक और आघात के किस्से
विवादित स्थल से कुछ ही दूरी पर जहां एक समय बाबरी मस्जिद खड़ी हुआ करती थी वहाँ से कटरा इलाका जहां लगभग 17 मुस्लिम परिवारों का घर है वे अभी भी दंगों में मारे गए अपने प्रियजनों की मृत्यु पर शोक मनाते हैं।
सौरभ शर्मा
12 Nov 2019
Translated by महेश कुमार
babri masjid
Image Courtesy: The Hindu

अयोध्या-बाबरी टाइटल सूट जो भारत की सबसे पुरानी विवादास्पद कानूनी लड़ाई थी शनिवार को समाप्त हो गई, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया, और केंद्र सरकार को इसके लिए एक ट्रस्ट बनाने का आदेश दे दिया है।

हालांकि शीर्ष अदालत के आदेश ने इस तथ्य को भी स्वीकार किया है कि 1992 में बाबरी मस्जिद का विध्वंस एक अपराध था, लेकिन यह फैसला उस दंगे में बचे लोगों को कोई भी राहत देने में विफल रहा है जो विध्वंस के बाद अयोध्या में बरपा हुए थे।

मीडिया अभिलेखागार और सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, अयोध्या में बाबरी विध्वंस के बाद 12 मुसलमान मारे गए थे और चार लापता हैं जिनकी आज तक कोई खोज़ ख़बर नहीं है। इनमें से अधिकांश केस कटरा इलाके से दर्ज किए गए थे, जहां अभी भी मुस्लिम आबादी रहती है।

न्यूजक्लिक टीम ने कटरा क्षेत्र का दौरा किया, जहां स्वतंत्र भारत में सबसे घातक नरसंहार में से एक को देखा गया था। इलाके की तरफ ले जाने वाले मार्ग को निवासियों ने ‘शहीद गली’ या शहीदों की गली का नाम दिया गया है, ये वे लोग हैं जिन्होंने सांप्रदायिक दंगों के दौरान अपने पूर्वजों को मरते हुए देखा था।

विवादित स्थल से कुछ ही दूरी पर जहां एक समय बाबरी मस्जिद खड़ी हुआ करती थी वहाँ से कटरा इलाका जो लगभग 17 मुस्लिम परिवारों का घर है  वे अभी भी दंगों में मारे गए अपने प्रियजनों की मृत्यु पर शोक मनाते हैं।
 
‘न्याय’ की आस में

शहीद गली से गुजरते हुए, हम मोहम्मद वज़ीर से मिले जो 40 से ऊपर की उम्र के हैं और  इलाके में सब्जी बेचते हैं। वज़ीर ने न्यूज़क्लिक को बताया कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश हैं।
Capture_10.JPG
वज़ीर ने कहा कि "मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले से और मंदिर के निर्माण के आदेश से बहुत खुश हूं, मुझे उम्मीद है कि इससे कस्बे में शांति बहाल होगी और हिंदू और मुस्लिम समुदायों को अलग करने वाली दशकों पुरानी बेचैनी खत्म होगी, वे ईद-उल-मिलाद-नबी को मनाने के लिए नए कपड़े पहने हुए थे।

उन्होंने कहा, "जब कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद को गिराया गया था, तब मैं लगभग 12 साल का था। मैंने वह मंज़र अपनी आंखों से नहीं देखा था। मुझे जो याद है वह उस वक़्त का हंगामा था और कैसे मेरे पिता हमारी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे। मैंने अपने पिता को उस दंगे में खो दिया।”

“मेरे पिता ने मेरी माँ को बच्चों को पुलिस चौकी ले जाने के लिए कहा, और कहा था कि वे उन्हे वहीं मिलेंगे। लेकिन हमें क्या पता था कि हम अपने पिता को आखिरी बार देख रहे हैं। हमें बाद में पता चला कि उन्हे एक भीड़ ने मार डाला,' ये बताते हुए वज़ीर की आंखों से से आँसू बह रहे थे।

उन्होने आगे कहा कि “हमें न्याय नहीं मिला है। वैसे भी न्याय है कहां? हमने इस व्यवस्था से सारी उम्मीदें खो दी हैं।

अयोध्या में पैदा हुए सब्जी वाले वज़ीर का कहना है कि परिवार को मुआवजे के रूप में 2 लाख रुपये मिले थे, लेकिन परिवारों के पुनर्वास के लिए कुछ भी नहीं किया गया। उन्होंने कहा, ‘मुझसे चार लाख ले लो लेकिन मेरे पिता को वापस कर दो’

50 से ऊपर की उम्र के एक अन्य व्यक्ति अब्दुल अजीज, जो सब्जी बेचते हैं, ने न्यूज़क्लिक को बताया कि उसके पिता को भी दंगाइयों ने मार डाला था।
Capture2.JPG
उन्होंने कहा, “कस्बे में स्थिति इतनी तनावपूर्ण थी कि प्रशासन भी इस पर पार नहीं पा पाया। हम अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे और इस सब में मेरे पिता मारे गए।”

अजीज ने उस भायनक हालात का वर्णन करते हुए कहा कि “मेरे पिता मस्जिद से सटी एक गली में थे, जबकि अन्य लोग सुरक्षित स्थानों पर छिपे हुए थे। मेरे पिता पर उस गली में दंगाइयों ने हमला कर दिया और मैंने अपनी आंखों से देखा कि दंगाई उन्हे जिंदा जला दिया था, लेकिन हम इतने असहाय थे कि हम अपने पिता को नहीं बचा सके।”

उन्होंने कहा, “ये यादें मेरे साथ ही चली जाएंगी। मैं हर दिन उन घटनाओं को याद करता हूं।”

अजीज ने कहा, "मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार करता हूं, लेकिन मैं इससे खुश नहीं हूं।"

केबल ऑपरेटर और कटरा इलाके के निवासी मोहम्मद ज़हीर ने कहा कि उनके पिता के बड़े भाई दंगों के समय से ही लापता है।
Mohammad Zaheer.JPG
उन्होंने बताया, “सबसे पहले तो उन्होंने मस्जिद को ढहाया और फिर उन्होंने घोषणा की कि अयोध्या में एक भी मुसलमान को नहीं छोड़ा जाएगा। हमने देखा कि अयोध्या में एक बड़ी भीड़ दंगाईयों के रूप में सामने से रही थी और हर मुस्लिम परिवार उनसे छिपने की कोशिश कर रहा था। मेरे पिता के बड़े भाई ने हम सभी को फ़ैज़ाबाद भेज दिया, क्योंकि उन्हें लगा कि हम वहाँ सुरक्षित रहेंगे।”

वो आगे कहते हैं, “हमने 6 दिसंबर को अयोध्या छोड़ दिया और तब से हम अपने बड़े अब्बू का इंतज़ार कर रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वे अभी भी लापता है और उन्हे मृत घोषित नहीं किया गया है। लेकिन उस समय जो कुछ बुजुर्ग अयोध्या में थे, कहते हैं कि उन्हें मार दिया गया था और जिंदा जला दिया गया था। उनके अवशेष सरयू नदी में फेंक दिए गए थे।”

उस समय अयोध्या में रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार सुमन गुप्ता ने कहा कि 25 नवंबर, 1992 को ही अयोध्या में भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी [6 दिसंबर, 1992 के विध्वंस से काफी पहले]। गुप्ता ने कहा, "हालांकि, मुसलमानों को आश्वासन दिया गया था कि उन्हें कुछ नहीं होगा क्योंकि अयोध्या में पहले से ही पर्याप्त अर्धसैनिक बल तैनात थे, लेकिन बावजूद इसके दंगों में 16 लोग (12 लोग मारे गए, चार लापता) मारे गए थे।"

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आपने नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Babri Demolition: Tales of Terror and Trauma

Babri Mosque Demolition
Ayodhya Land Dispute
Ayodhya riots
Katra locality
Supreme Court
Uttar pradesh
Communal riots post Babri demolition
Saryu river
Karsevak
BJP
L K Advani
Vishwa Hindu Parishad

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट


बाकी खबरें

  • musahar
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित
    02 Mar 2022
    दलित आम तौर पर ऐसे मूक मतदाता माने जाते हैं, जो अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं का आसानी से इज़हार नहीं करते। हालांकि, इस चुनाव को नज़दीक से देखने पर इस बात के साफ़ संकेत मिल जाते हैं कि उनका झुकाव बसपा…
  • कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 7,554 नए मामले, 223 मरीज़ों की मौत
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 7,554 नए मामले, 223 मरीज़ों की मौत
    02 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.20 फ़ीसदी यानी 85 हज़ार 680 हो गयी है।
  • एम. के. भद्रकुमार
    यूक्रेन युद्ध ने यूरोपियन यूनियन और अमेरिका को ईरान सौदे पर सोचने को मजबूर किया
    02 Mar 2022
    क्या नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) के विस्तार पर अमेरिका-रूस टकराव और यूक्रेन के आसपास बने हालात वियना में चल रही ईरान परमाणु वार्ता को पटरी से उतार देगी?
  • ukraine
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन युद्ध अपडेट: कीव के मुख्य टीवी टावर पर बमबारी; सोवियत संघ का हिस्सा रहे राष्ट्रों से दूर रहे पश्चिम, रूस की चेतावनी
    02 Mar 2022
    रूसी बलों ने मंगलवार को यूक्रेन के घनी आबादी वाले शहरी इलाकों पर हमले तेज करते हुए यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर के मध्य स्थित एक मुख्य चौराहे और कीव के मुख्य टीवी टावर पर बमबारी की। वहीं भारत ने…
  • बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन
    02 Mar 2022
    पालीगंज विधानसभा क्षेत्र से सीपीआई माले विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि वह सीटेट और बीटेटट उत्तीर्ण सभी अभ्यर्तियों के लिए सातवें चरण की बहाली के लिए 2014-21 तक सभी रिक्तियों को जोड़कर मार्च महीने में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License