NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बड़े प्राइवेट अस्पतालों ने 1,737% तक मुनाफ़ा कमायाः रिपोर्ट
नेशनल फार्मास्युटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी के अनुसार बड़े प्राइवेट अस्पतालों में दवाईयों, मेडिकल उपकरणों, दस्तानों, सिरिंज और जांच की बढ़ी हुई क़ीमत मरीज़ के बिल का आधा होता है।

न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
24 Feb 2018
hospital

दिल्ली-एनसीआर के चार प्राइवेट अस्पतालों ने दवाइयों, मेडिकल उपकरणों और जांच समेत सर्जिकल मास्क, दस्ताने आदि पर 1,737% तक मुनाफ़ा कमाया। इसका खुलासा नेशनल फार्मास्युटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) के नए सर्वे में हुआ है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एनपीपीए ने इन अस्पतालों के बिल का विश्लेषण करने के बाद ये रिपोर्ट जारी किया है।वास्तव में, इन चीजों की बढ़ी हुई क़ीमत मरीज़ों के इलाज के बिल का लगभग 46% होता है।

ये सर्वे 20 फरवरी को जारी किया गया। बता दें कि पिछले कुछ दिनों में प्राइवेट अस्पतालों द्वारा इलाज के नाम पर मरीज़ों से लिए गए ज़रूरत से ज़्यादा पैसे की ख़बर सुर्खियों में थी। कई परिजनों ने निजी अस्पतालों पर ज़्यादा पैसे लेने का आरोप लगया था जिसके बाद ये अध्ययन सामने आया। ज्ञात हो कि 7 साल के आद्या सिंह के इलाज के लिए परिजनों का लाखों का बिल थमाया था। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल सितंबर महीने में डेंगू से पीड़ित आद्या को गुड़गांव के फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट भर्ती कराया गया था। 15 दिनों के इलाज़ के बाद आद्या की मौत हो गई थी। अस्पताल ने इलाज़ के लिए आद्या के परिजन को 16 लाख रुपए का बिल दिया था, जिसमें 2,700 दस्ताने और 660 सीरिंज के शामिल थे।

हालांकि सर्वे के बाद जारी किए गए रिपोर्ट में चार प्राइवेट अस्पतालों के नाम नहीं बताए गए, लेकिन फोर्टिस अस्पताल का नाम इस अध्ययन में शामिल है।

एनपीपीए ने सर्वे में पाया है कि ज़्यादा फ़ायदा हासिल करने के लिए प्राइवेट अस्पताल "गैर-अनुसूचित ब्रांडेड दवाओं" को लिख रहे हैं। ये दवाईयां नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिंस (एनएलईएम) में सूचीबद्ध नहीं है। ऐसे मूल्य नियंत्रण की बात ही नहीं है। इसके बजाय ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (डीपीसीओ) 2013 के तहतएनएलईएम में सूचीबद्ध दवाईयां मूल्य नियंत्रण के अधीन होते हैं। ज्ञात हो कि एनएलईएम में सभी आवश्यक दवाईयां सूचीबद्ध है।

इस अध्ययन के अनुसार "इलाज़ में इस्तेमाल की गई सूचीबद्ध दवाओं पर कुल लागत केवल 4.10% है, जबकि गैर सूचीबद्ध दवाइयों पर 25.67% है।"

एनपीपीए ने कहा कि वर्ष 2017 में गैर-एनएलईएम दवाओं की वृद्धि एनएलईएम दवाओं से दोगुनी थी, और "इस मुद्दे को नीतिगत हस्तक्षेप के माध्यम से निपटाए जाने की ज़रूरत है।"

एनपीपीए के अध्ययन के निष्कर्षों पर 22 फरवरी को ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क (एआईडीएएन) द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया गया। एआईडीएएन के सह-संयोजक डॉ मीरा शिवा ने कहा, "एनपीपीए का निष्कर्ष है कि गैर-सूचीबद्ध दवाईयां संयुक्त बिल लागत का 25% है जो शायद ही चौंकाने वाला है क्योंकि फार्मास्युटिकल बाजार का लगभग 90% मूल्य नियंत्रण के बाहर है। इस तरह अस्पताल अपने मुताबिक अधिक महंगी दवाइयां लिखने में सक्षम हैं। इस रिपोर्ट में एनपीपीए ने स्वीकार किया है कि मूल्य निर्धारण करने के लिए बाजार-आधारित सूत्र बड़े व्यापार लाभ के लिए रास्ता तैयार करते हैं।"

शिवा ने आगे कहा कि "डीपीसीओ 2013 का मुख्य दोष, दोषपूर्ण बाजार आधारित मूल्य निर्धारण तंत्र है जो मुनाफाखोरी और उच्च मूल्यों को वैधता देता है। एआईडीएएन ने डीपीसीओ के दायरे में सभी आवश्यक और जीवनरक्षक दवाओं को कवर करने और कंपनियों को उचित मुनाफा प्रदान करने वाली लागत आधारित मूल्य निर्धारण की एक विधि को पुनर्स्थापित करने के लिए लगातार समर्थन किया है।"

एनपीपीए के अध्ययन से यह भी उजागर हुआ है कि निजी अस्पतालों से थोक आपूर्ति का ऑर्डर प्राप्त करने के क्रम में दवाओं और उपकरणों के निर्माता को 'बाजार की आवश्यकताओं' के अनुसार ज़्यादा एमआरपी के प्रिंट के लिए 'मजबूर' किया जाता है।''

सर्वे के अनुसार "निजी अस्पतालों, जिनके ज्यादातर खुद की फार्मेसी है, द्वारा संस्थागत थोक खरीद से उन्हें बहुत अधिक मुनाफा कमाना आसान बना देता है और एमआरपी का उल्लंघन करने की आवश्यकता के बिना भी दवाओं और उपकरणों पर लाभ कमाना आसान बनाता है जो कि पहले से पर्याप्त रूप से बढ़ाए हुए हैं।

जैसा कि अध्ययन में कहा गया है वास्तव में बढ़ाए हुए एमआरपी के इन मामलों में मुनाफ़े के मुख्य लाभार्थी अस्पताल हैं न कि दवा और उपकरण निर्माता।

एनपीपीए के अनुसार ग़ैर-सूचीबद्ध दवाओं के अलावा, मेडिकल उपकरणों पर शुल्क कुल बिल का दसवां हिस्सा है और सूचीबद्ध (अनिवार्य) दवाओं पर ख़र्च का दो गुना से ज़्यादा है।

लेकिन इसमें कहा गया है कि ये मेडिकल सामग्रियां "एमआरपी की निगरानी या किसी भी प्रकार के मूल्य नियंत्रण के अधीन नहीं है क्योंकि ये ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत 'ड्रग्स' के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है। एनपीपीए एमआरपी की न तो निगरानी कर सकता है और न ही सार्वजनिक हित में असाधारण परिस्थितियों में इन डिस्पोजिबल्स को मूल्य नियंत्रण के अधीन ला सकता है।"

जांच में कुल लागत का 15% से अधिक का होता हैा

एनपीपीए के अनुसार "एनपीपीए द्वारा औचाक जांच में पाया गया है कि इस तरह के शुल्क अन्य निजी तौर पर संचालित निजी केंद्रों द्वारा किए जा रहे जांच की तुलना में निश्चित रूप से अधिक है।"

हालांकि फिर यह भी कहा कि "अस्पतालों द्वारा अन्य सभी शुल्कों सहित जांच सेवाएं एनपीपीए और केंद्र सरकार के दायरे से बाहर हैं और केवल राज्य विशिष्ट कानूनों के माध्यम से विनियमित किया जा सकता है। ऐसा केंद्रीय मॉडल क्लिनिकल एस्टैबलिशमेंट एक्ट 2010 और संबंधित नियमों का पालन कर या राज्य सरकारों के खुद के विशिष्ट कानूनों के जरिए जो प्रत्येक राज्यों में मौजूद हैं।”

इसके अलावा, सिरिंज, कैनुला और कैथेटर्स के मामले में इस्तेमाल किए जाने वाले गैर-अनुसूचित उपकरणों में लाभ की सीमा "हद से ज़्यादा पाई गई और स्पष्ट रूप से एक असफल बाजार प्रणाली में अनैतिक मुनाफाखोरी का एक बड़ा मामला" है।

एनपीपीए के अनुसार "दवाओं और उपकरणों और जांच पर कुल ख़र्च असल में अधिक (46%) है और "प्रक्रियाओं" (11.42%), कमरे का किराया (11.61%) आदि की तुलना में अस्पतालों द्वारा बताए गए 'पैकेज' (प्रत्यारोपण के मामले में) का हिस्सा नहीं है, जो कि अधिक स्पष्ट घटक हैं।

प्राधिकरण ने कहा कि मरीज़ों ने शिकायत की थी कि ख़र्च का प्रारंभिक अनुमान 3-4 गुना तक ज़्यादा पाई गई।

इसके अलावा दवाओं, उपकरणों और डिस्पोज़ेबलल्स अस्पतालों द्वारा अपने खुद के फार्मेसियों से इस्तेमाल किया जाता है और बेचा जाता है। इस अध्ययन में पाया गया कि मरीज़ों को इन चीजों को बाहर से ख़रीदने के लिए कोई विकल्प नहीं दिया जाता है जहां माना जाता है कि इन चीजों की क़ीमतें कम होती है।

All India Drug action network
DPCO
National list of Essential Medicines

Related Stories


बाकी खबरें

  • corona
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के मामलों में क़रीब 25 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई
    04 May 2022
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 3,205 नए मामले सामने आए हैं। जबकि कल 3 मई को कुल 2,568 मामले सामने आए थे।
  • mp
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    सिवनी : 2 आदिवासियों के हत्या में 9 गिरफ़्तार, विपक्ष ने कहा—राजनीतिक दबाव में मुख्य आरोपी अभी तक हैं बाहर
    04 May 2022
    माकपा और कांग्रेस ने इस घटना पर शोक और रोष जाहिर किया है। माकपा ने कहा है कि बजरंग दल के इस आतंक और हत्यारी मुहिम के खिलाफ आदिवासी समुदाय एकजुट होकर विरोध कर रहा है, मगर इसके बाद भी पुलिस मुख्य…
  • hasdev arnay
    सत्यम श्रीवास्तव
    कोर्पोरेट्स द्वारा अपहृत लोकतन्त्र में उम्मीद की किरण बनीं हसदेव अरण्य की ग्राम सभाएं
    04 May 2022
    हसदेव अरण्य की ग्राम सभाएं, लोहिया के शब्दों में ‘निराशा के अंतिम कर्तव्य’ निभा रही हैं। इन्हें ज़रूरत है देशव्यापी समर्थन की और उन तमाम नागरिकों के साथ की जिनका भरोसा अभी भी संविधान और उसमें लिखी…
  • CPI(M) expresses concern over Jodhpur incident, demands strict action from Gehlot government
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जोधपुर की घटना पर माकपा ने जताई चिंता, गहलोत सरकार से सख़्त कार्रवाई की मांग
    04 May 2022
    माकपा के राज्य सचिव अमराराम ने इसे भाजपा-आरएसएस द्वारा साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश करार देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं अनायास नहीं होती बल्कि इनके पीछे धार्मिक कट्टरपंथी क्षुद्र शरारती तत्वों की…
  • एम. के. भद्रकुमार
    यूक्रेन की स्थिति पर भारत, जर्मनी ने बनाया तालमेल
    04 May 2022
    भारत का विवेक उतना ही स्पष्ट है जितना कि रूस की निंदा करने के प्रति जर्मनी का उत्साह।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License