NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
बढ़ेगी रासायनिक खाद की कीमत
साल के शुरुआत में सलफ्युरिक एसिड की कीमत 4000 रुपये प्रति टन थी अब इसकी कीमत बढ़कर 9000 रुपये प्रति टन हो गयी है। इस वजह से डाई अमोनिया फॉस्फेट, पोटाश और एनपीके जैसी रासायनिक खाद की कीमत में इजाफा तय है।
अजय कुमार
27 Oct 2018
fertilizers.
Image Courtesy: Livemint

एक ज़माना होता होगा जब जमीनों को रासायनिक खाद की जरूरत नहीं होती होगी। ज़मीन और प्रकृति का आपसी जुड़ाव ही ज़मीन की उर्वरता बचाए रखता होगा, लेकिन अब एक ज़माना है कि ज़मीन और प्रकृति के आपसी जुड़ाव को तोड़ दिया गया है, जिससे ज़मीनों की उर्वरता कम हो गयी है। अब रासायनिक खाद के सहारे जमीनों की उपज बढाने की कोशिश की जाती है। यह सहारा कामचलाऊ है लेकिन इस सहारे में जमीन बेसहारा हो जाती है और जब जमीन बेसहारा हो जाती है तो किसान बेसहारा हो जाता है।

हुआ यह है कि किसानों की बदहाली और बढ़ने वाली है। रासायनिक खाद के सहारे उपज बढ़ाना महंगा होने वाला है।

भारत सरकार रासायनिक खाद पर साल 2015 से तकरीबन 70 हजार करोड़ सब्सिडी देती आ रही है, इस सब्सिडी के दो भाग होते हैं। पहला भाग यूरिया और दूसरा जमीन के पोषक तत्व को बढ़ाने वाले रसायनों से जुड़ा होता है। यूरिया को दी जाने वाली सब्सिडी यूरिया के लागत में उतार-चढ़ाव पर बदलती रहती है। यानी अगर यूरिया की कीमत 200 रुपये प्रति किलोग्राम से 500 रुपये प्रति किलोग्राम हो गयी तो सरकार द्वारा दी जाने वाली 100 रुपये की सब्सिडी भी उसी अनुपात में बढ़ जाती है ताकि किसानों को यूरिया के लिए पहले की लागत के हिसाब से ही भुगतान करना पड़े। ठीक यही स्थिति पोषक तत्वों से जुड़े रासायनिक खाद यानी गैर यूरिया अथवा नाइट्रोजन, फोस्फोरस और पोटैशियम के लिए दी जाने वाली सब्सिडी के लिए नहीं होती है। अगर इनकी लागत 200 रुपये से बढ़कर 400 रुपये हो जाती है तो सब्सिडी में कोई बढ़ोतरी नहीं होती है। यानी पहले अगर 100 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है तो लागत बढ़ने के बाद भी 100 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। इसकी वजह से कीमत 100 रुपये से बढ़कर 300 हो जाएगी और किसानों को इन खादों को हासिल करने के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।   

साल के शुरुआत में सलफ्युरिक एसिड की कीमत 4000 रुपये प्रति टन थी अब इसकी कीमत दो गुना से भी ज़्यादा बढ़कर 9000 रुपये प्रति टन हो गयी है। इस वजह से डाई अमोनिया फॉस्फेट, पोटाश और एनपीके जैसे रासायनिक खाद की कीमत में इजाफा तय है। इस वजह से इस सीजन में डीएपी की लागत में तकरीबन 30 फीसदी और एनपीके और पोटाश की कीमत में तकरीबन रसायनों के मिलावट के आधार पर तकरीबन 15-60 फीसदी बढ़ोतरी हो सकती है। कीमत में 15 से 60 की रेंज इसलिए है क्योंकि जमीन बदलने पर जमीन के पोषक तत्वों की गुणवत्ता भी बदलती है और इस आधार पर पोषक तत्वों से जुड़े रासायनिक खाद की कीमत भी बदलती है।

इसके साथ गैर यूरिया खाद उत्पादन के लिए जरूरी सल्फ्यूरिक एसिड और फोस्फोरिक एसिड की मौजूदगी भारत से लेकर पूरे विश्व में बहुत कम है। इसलिए भारत इन रसायनों का आयात भी करेगा यह भी तय है। इस समय रुपये की कीमत में गिरवाट भी जारी है, यानि इनके आयात में बहुत अधिक खर्च करना पड़ेगा, जिसका सबसे अधिक असर यह हो सकता है कि इस साल की किसानी उपज कम हो सकती है और किसानों की किसानी लागत बढ़ सकती है। इस तरह के कीमतों में होने वाली इस बढ़ोतरी को फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में शामिल नहीं किया जाता है। यानी सरकार की अभी तक की मौजूदा नीति किसानों की इस परेशानी का हल कर पाए, ऐसा नहीं लगता।

अभी हाल-फिलहाल इस परेशानी का हल यह दिख रहा है कि सरकार पोषक तत्व आधारित रासायनिक खाद की सब्सिडी में भी कच्चे माल की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी के आधार पर बढ़ोतरी करे। आने वाले समय में पूरी तरह से किसानों पर इसका भार डालना कहीं से भी सही नहीं लगता है। हमारे समय में ऐसी परेशानी के मूल में जमीनों की कम होती उर्वरता है, यह उर्वरता इसलिए कम हुई है क्योंकि हमने हरित क्रांति के बाद उत्पादकता बढाने के लिए जमकर रासायनिक खाद का इस्तेमाल किया है और जमीनों की उर्वरक क्षमता को बहुत कम कर दिया। यह सरकारी नीति की असफलता है। इसलिए इस असफलता की जिम्मेदारी किसानों के बजाय सरकार ले यही सही है।

fertilizers
farmer crises
price rise fertilizers
non urea
fertilizer subsidy
sulphuric acid
phosporic acid
npk
potash

Related Stories

डीएपी और एनपीके खाद महंगी हुई, माकपा ने बताया मोदी सरकार का एक और किसान विरोधी फ़ैसला

यूपी चुनाव: छुट्टा पशुओं की बड़ी समस्या, किसानों के साथ-साथ अब भाजपा भी हैरान-परेशान

किसानों और सरकारी बैंकों की लूट के लिए नया सौदा तैयार

पीएम के 'मन की बात' में शामिल जैविक ग्राम में खाद की कमी से गेहूं की बुआई न के बराबर

बिहारः खाद न मिलने से परेशान एक किसान ने की आत्मदाह की कोशिश

ग्राउंड रिपोर्ट: पूर्वांचल में खाद के लिए हाहाकार, योगी सरकार ने किसानों को फिर सड़कों पर ला दिया

लखीमपुर हत्याकांड: जब तक मंत्री की बर्ख़ास्तगी नहीं तब तक आंदोलन चलता रहेगा

खाद-बीज की नकली किल्लत पैदा कर सरकारी संरक्षण में किसानों को लूटने की साजिश: माकपा

पड़ताल: कृषि क्षेत्र में निजीकरण से क्यों गहरा सकता है खेती का संकट?

यह पूरी तरह से कमज़ोर तर्क है कि MSP की लीगल गारंटी से अंतरराष्ट्रीय व्यापार गड़बड़ा जाएगा!


बाकी खबरें

  • Modi in Varanasi
    सुबोध वर्मा
    यूपी चुनाव : पीएम मोदी की 1 लाख करोड़ की घोषणा कितनी प्रभावी?
    24 Dec 2021
    इसमें से क़रीब 70,000 करोड़ रुपये एक्सप्रेसवे और हवाई अड्डों के लिए हैं।
  • otting massacre
    सुकुमार मुरलीधरन
    नागालैंड ओटिंग नरसंहार और लोकतंत्र में अपवाद की स्थिति
    24 Dec 2021
    सुकुमार मुरलीधरन लिखते हैं कि नागालैंड में हुई यह हालिया त्रासदी अंदरूनी संघर्ष की स्थितियों में ज़्यादा से ज़्यादा ताक़त के इस्तेमाल को लेकर सज़ा से छूट दिये जाने के ख़तरों और विरोधाभास को सामने…
  • parliament
    रवि शंकर दुबे
    टाइमलाइन : संसद के शीतकालीन सत्र में क्या कुछ हुआ, विपक्षी सांसदों को क्यों रहना पड़ा संसद से बाहर?
    23 Dec 2021
    संसद के दोनों सदनों का शीतकालीन सत्र 22 दिसंबर को ख़त्म हो गया। इस सत्र में भी विपक्ष का विरोध और सरकार की नज़रअंदाज़ी जारी रही।
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    अयोध्या ज़मीन घोटाला, 'धर्म संसद' में नफ़रत का खेल और अन्य ख़बरें
    23 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी अयोध्या का ज़मीन मामला, हरिद्वार के धर्म संसद में फैली नफ़रत और अन्य ख़बरों पर।
  • Afghanistan
    न्यूज़क्लिक टीम
    2.2 करोड़ अफ़ग़ानियों को भीषण भुखमरी में धकेला अमेरिका ने, चिले में वाम की ऐतिहासिक जीत
    23 Dec 2021
    पड़ताल दुनिया भर की में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने अमेरिकी sanctions की वजह से भुखमरी के भीषण संकट को झेल रहे अफ़गानिस्तान पर न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से बातचीत की। साथ ही चर्चा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License