NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बढ़ती आर्थिक असमानता: भारत में 2027 तक अरबपतियों की तादाद तीन गुना बढ़ जाएगी
भारत दुनिया का तीसरा सबसे अमीर देश बन सकते है और इसी दौरान देश में लगातार आर्थिक असमानता भी बढ़ती जा रही है I
वासुदेव चक्रवर्ती
30 May 2018
Translated by ऋतांश आज़ाद
economic inequality

AfrAsia बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में फिलहाल 119 अरबपति हैं और 2027 तक ये आँकड़ा तीन गुना होकर 357 हो जायेगा I दिलचस्प बात ये है कि ये उस देश के लिए की जा रही भविष्यवाणी हैं जहाँ 2017 में प्रति व्यक्ति आय सिर्फ $1983 (यानि 1,33,842 रुपये ) थी I

इसी रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि 2017 में भारत में लोगों के पास कुल निजी संपत्ति में 8230 अरब डॉलर (यानि 55,55,66,15,00,00,000 रुपये ) थी , इससे भारत दुनिया में छठा सबसे अमीर देश बन जाता है I रिपोर्ट के अनुसार 2016 से इन आँकड़ों में 25% की वृद्धि हुई है जो कि सभी देशों में सबसे ज़्यादा है I 2027 तक इस आँकड़े में 200% तक की बढ़ोतरी होगी  ये आँकड़ा 2027 तक 24691 अरब डॉलर(1,66,60,86,95,25,00,000 रुपये ) हो जायेगा , जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे अमीर देश बन जायेगा I

इस रिपोर्ट में देश की गरीबी की हालत पर भी रौशनी डाली है I रिपोर्ट में दर्ज़ है कि भारत में 48% दौलत कुछ चुनिन्दा धन्ना सेठों और अरबपतियों के पास है I रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में भारत में 330,400 लोग करोड़पति थे I इसका अर्थ ये है कि 1.3 अरब से ज़्यादा लोगों के देश में सिर्फ 3.3 लाख लोग यानि सिर्फ 0.025% लोग लगभग आधी दौलत के मालिक हैं I

ये रिपोर्ट भारत में असमानता की सिर्फ एक झलक दिखाती है I इस साल की शुरुवात में ही एक रिपोर्ट सामने आयी थी जिसमें ये बताया गया था कि 2017 में भारत में सिर्फ 1% लोगों के पास 73% संपत्ति है I ये आँकड़ा और भी चौंकाने वाला तब लगता है जब हमें ये मालूम होता है कि 2016 में 1% लोगों के पास 58% संपत्ति थी I इसका अर्थ साफ़ है असमानता बढ़ रही है I

ये बढ़ती असमानता सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है I ये बताया जा चुका है कि पिछले साल तक दुनिया भर में अरबपतियों की दौलत 762 अरब डॉलर (5,13,93,09,00,00,000 रुपये )  तक बढ़ी है, ऑक्सफैम के मुताबिक इतनी दौलत से दुनिया की ग़रीबी सात बार ख़तम हो सकती है I जहाँ एक तरह दुनिया के गरीब हिस्से की आय बढ़ नहीं रही है वहीँ दूसरी तरह दुनिया के 1% अमीर लोगों ने अपने पास पैदा की हुई दौलत का 82% हिस्सा अपने पास रखा है I

ये गौर करने वाली बात ये है कि भारत में 1% अमीरों के पास जितनी संपत्ति है वह दुनिया के औसत से कम I लेकिन भारत में फिर भी दुनिया के औसत से ज़्यादा असमानता है जहाँ दुनिया में 1% लोगों के पास 50% संपत्ति है वहीँ भारत में 1% लोग 58% संपत्ति के मालिक हैं I

ये तब हो रहा है जब भारत के ग्रामीण क्षेत्रों की और किसानों की आय पिछले 3 सालों से बढ़ी नहीं है I इस साल जनवरी तक ग्रामीण आय 3% तक कम हो गयी थी , जो कि 2014 (जब मोदी सरकार सत्ता में आयी थी ) से सबसे कम है I 2018 के इकनोमिक सर्वे ने भी ये बताया है कि ख़राब मौसम की वजह से किसानों को “15 से 18% का औसतन नुकसान हो सकता है जो कि असिंचित इलाकों में 20% से 25% तक बढ़ सकता है I”

ये याद रखना होगा कि ये प्रवृत्ति न तो नयी है और न ही इस सरकार तक सीमित है , ये देखा जा सकता है कि नवउदारवाद से पहले ये प्रवृति उलटी थी I 1951 और 1980 के बीच में ऊपरी 0.1% लोगों की आय में गिरावट हुई थी वहीँ दूसरी तरह निचले 50% लोग कुल आय में 28% बढौतरी करने में कामयाब हुए थे I वहीँ 1980 से 2014 के बीच ऊपरी 0.1% लोगों की आय में 12% की बढौतरी हुई और बाकि 50% जनता की आय 11% बढ़ी I ये साफ़ है कि नवउदारवादी नीतियों के दौर में असमानता बहुत ज़्यादा बढ़ गयी I

इन रिपोर्टों और आंकड़ों को देखकर ये साफ़ हो जाता है कि आज के नवउदारवादी दौर में जिस तरह की नीतियां बनायीं जा रही हैं, उससे असमानता और बढती जाएगी I अगर इसी तरह के हालात बने रहेंगे तो गरीबों द्वारा किये जा रहे प्रतिरोध में और तेज़ी आना लाज़मी है और पिछले साल महाराष्ट्र के किसान लॉन्ग मार्च (जिसमें 50,000 लोग शामिल हुए थे ) जैसे दृश्य और देखने को मिलने वाले हैं I

आर्थिक असमानता
असमानता
ग़रीबी
गैरबराबरी
नवउदारवादी
पूँजीवाद

Related Stories

मीडिया पर खरी खरी भाषा सिंह के साथ: दक्षिणपंथी साम्राज्य में लोकतंत्र की दुर्गति

अदानी समूह का झारखंड पावर प्लांट बांग्लादेश को मदद नहीं पहुंचाएगा, बल्कि ऑस्ट्रेलियाई कोयला परियोजना के दावे को मज़बूत करेगा, सिडनी एनजीओ का दावा

अब भी जल रहा है बवाना

भाजपा सभी मजदूरों को ठेका मजदूर बनाना चाहती है

जनसा: साहित्य के सामाजिक सरोकारों का पर्व

कितनी प्रासंगिक है युवाओं के लिए अक्टूबर क्रांति ?

बढ़ते दाम परिवारों के मुँह से छीन रहे हैं खाना

भूमिअधिग्रहण अध्यादेश पर इनकी भी सुनो


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,067 नए मामले, 40 मरीज़ों की मौत
    20 Apr 2022
    देश की राजधानी दिल्ली में आज फिर कोरोना के नए मामले में बढ़ोतरी हुई है | दिल्ली में 24 घंटों में कोरोना के 632 नए मामले सामने आए हैं। साथ ही देश के अन्य राज्यों में कोरोना के मामलों में धीरे-धीरे बढ़ने…
  • जेनिफ़र हॉलेस
    यूक्रेन युद्ध: क्या गेहूं का संकट मध्य पूर्व के देशों को अधिक खाद्य स्वतंत्र बनाएगा?
    20 Apr 2022
    मध्य पूर्वी देश आने वाले गेहूं की कमी का मुकाबला करने के लिए अपनी खाद्य क्षमता को बढ़ा रहे हैं। लेकिन कुछ उत्साहजनक पहलों के बावजूद, मौजूदा चुनौतियां खाद्य संप्रभुता को लगभग असंभव बना रही हैं – ख़ास…
  • शारिब अहमद खान
    तालिबान को सत्ता संभाले 200 से ज़्यादा दिन लेकिन लड़कियों को नहीं मिल पा रही शिक्षा
    20 Apr 2022
    अफ़ग़ानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा हासिल करने पर तालिबानी सरकार द्वारा रोक लगाए हुए 200 दिनों से ज़्यादा बीत चुके हैं। यह रोक अभी भी बदस्तूर जारी है।
  • जितेन्द्र कुमार
    मुसलमानों के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा पर अखिलेश व मायावती क्यों चुप हैं?
    20 Apr 2022
    समाजवादी पार्टी या बहुजन समाज पार्टी के नेताओं की सबसे बड़ी परेशानी यही है कि वे संस्कृति के सवाल को ठीक से समझ ही नहीं पा रहे हैं। सामाजिक न्याय व हिन्दुत्व एक दूसरे का विरोधी है फिर भी मुसलमानों के…
  • jahangirpuri
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बर : VHP की दिल्ली पुलिस को धमकी, गृह मंत्री रहे चुप, प्रतिरोध में हुईं आवाज़ें तेज़
    19 Apr 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने नफ़रती राजनीति के बेशर्म राजनीतिक कनेक्शन को कुछ तस्वीरों-घटनाओं के साथ सामने रखा। साथ ही इसके विरोध में उठे विपक्षी दलों के स्वरों को लोकतंत्र को जिंदा रखने…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License