NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बेहद शर्मनाकः शहीद जवानों के शव की बेहुरमती, गत्ता में लपेटकर शव भेजा गया
देश के लिए दुश्मनों से मुकाबला कर शहीद होने वाले जवानों को कभी ये ख्याल नहीं होता होगा कि उनके शव के साथ इस तरह बेहुरमती की जाएगी कि महज गत्ता में लपेट कर भेज दिया जाएगा।
सबरंग इंडिया
11 Oct 2017
शहीद जवान

देश के लिए दुश्मनों से मुकाबला कर शहीद होने वाले जवानों को कभी ये ख्याल नहीं होता होगा कि उनके शव के साथ इस तरह बेहुरमती की जाएगी कि महज गत्ता में लपेट कर भेज दिया जाएगा। इस घटना के सामने आने के बाद लोगों का गुस्सा सोशल मीडिया पर फुट पड़ा।

शहीद जवान

लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की है जिसमें लिखा गया है कि सात युवा अपने मातृभूमि की रक्षा करने के लिए घर छोड़कर गए और वे इस तरह घर लौटे।

शहीद जवान के शव की विदाई बहुत ही सम्मान के साथ की जाती है। शहीद होने के बाद पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज में लपेट कर घर भेजा जाता है और अंतिम विदाई में उन्हें सलामी दी जाती है।

शहीद जवान की तस्वीरों को शेयर करने के बाद लोगों का गुस्सा सरकार फुट पड़ा। एनडीटीवी पत्रकार निधि राजदान ने लिखा शर्मनाक, इस तरह हम अपने सैनिकों के शवों के साथ व्यवहार करते हैं। हम किस प्रकार के राष्ट्रवादी हैं? राजदान ने ये ट्वीट अंग्रेजी (Shameful. This is how we treat the bodies of our soldiers. What kind of nationalists are we?) में लिखा।

शहीद जवान

सोशल मीडिया यूजर हुस्ना शेख ने लिखा है कि शहीदों का सम्मान न करने वाला देश किस तरह गर्व के साथ जी सकता है।
 

Courtesy: सबरंग इंडिया,
Original published date:
09 Oct 2017
नेवी के जवान
शहीद जवान

Related Stories


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!
    27 Mar 2022
    पुनर्प्रकाशन : यही तो दिन थे, जब दो बरस पहले 2020 में पूरे देश पर अनियोजित लॉकडाउन थोप दिया गया था। ‘इतवार की कविता’ में पढ़ते हैं लॉकडाउन की कहानी कहती कवि-पत्रकार मुकुल सरल की कविता- ‘लॉकडाउन—2020’।
  • डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    लीजिए विकास फिर से शुरू हो गया है, अब ख़ुश!
    27 Mar 2022
    ये एक सौ तीस-चालीस दिन बहुत ही बेचैनी में गुजरे। पहले तो अच्छा लगा कि पेट्रोल डीज़ल की कीमत बढ़ नहीं रही हैं। पर फिर हुई बेचैनी शुरू। लगा जैसे कि हम अनाथ ही हो गये हैं। जैसे कि देश में सरकार ही नहीं…
  • सुबोध वर्मा
    28-29 मार्च को आम हड़ताल क्यों करने जा रहा है पूरा भारत ?
    27 Mar 2022
    मज़दूर और किसान आर्थिक संकट से राहत के साथ-साथ मोदी सरकार की आर्थिक नीति में संपूर्ण बदलाव की भी मांग कर रहे हैं।
  • अजय कुमार
    महंगाई मार गई...: चावल, आटा, दाल, सरसों के तेल से लेकर सर्फ़ साबुन सब महंगा
    27 Mar 2022
    सरकारी महंगाई के आंकड़ों के साथ किराना दुकान के महंगाई आकड़ें देखिये तो पता चलेगा कि महंगाई की मार से आम जनता कितनी बेहाल होगी ?
  • जॉन पी. रुएहल
    क्या यूक्रेन मामले में CSTO की एंट्री कराएगा रूस? क्या हैं संभावनाएँ?
    27 Mar 2022
    अपने सैन्य गठबंधन, सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (सीएसटीओ) के जरिये संभावित हस्तक्षेप से रूस को एक राजनयिक जीत प्राप्त हो सकती है और अपने अभियान को आगे बढ़ाने के लिए उसके पास एक स्वीकार्य मार्ग प्रशस्त…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License