NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
बेटियों को सुरक्षित माहौल देने में विफल हो रही यूपी सरकार
अलीगढ़ के टप्पल कस्बे में ढाई साल की मासूम की नृशंस हत्या, कुशीनगर में किशोरी से गैंगरेप, कानपुर मदरसे में छात्रा से दुष्कर्म, हमीरपुर और जालौन में मासूम लड़कियों की रेप के बाद हत्या जैसे संगीन अपराधों से राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सरोजिनी बिष्ट
12 Jul 2019
फाइल फोटो
(फोटो साभार: The Economic Times)


उत्तर प्रदेश में यह क्या हो रहा है, इससे ज्यादा बड़ा सवाल यह है कि यह क्यों हो रहा है, अपराधियों, बलात्कारियों के हौसले बुलंद हैं। महिलाओं, नाबालिगों के खिलाफ़ यौन हिंसा की घटनाएं चरम पर हैं, कहीं पुलिस अत्याचार पर उतारू है तो कहीं सरेआम महिलाओं को यौन हिंसा का शिकार बनाया जा रहा है। 

पिछले दिनों बदायूं से एक ऐसी घटना सामने आई जिसने यह जता दिया कि यूपी में किस कदर दबंगों के हौसले बुलंद हैं। खेत में काम कर रही 16 वर्षीय लड़की को एक दबंग सबके सामने उठाकर ले गया उसने ना केवल विरोध कर रही लड़की की जमकर पिटाई की बल्कि उसके कपड़े भी फाड़ डाले। 

अपराधी ने लोगों को खुलेआम चेतावनी भी दे डाली कि यदि कोई इस मामले में पुलिस के पास गया तो उसे भी वह देख लेगा। दरअसल यूपी की कानून व्यवस्था पर भी एक बड़ा सा प्रश्न चिन्ह लग चुका है। 

हालांकि हद तो तब हो जाती है जब कोई यूपी में बढ़ते अपराध और कानून व्यवस्था पर सवाल करता है तो यूपी पुलिस के ट्विटर एकाउंट से अपनी सफलताओं का पोथा खोलकर रख दिया जाता है पर पिछली सफलताओं से आगे होने वाले अपराधों पर पर्दा तो नहीं डाला जा सकता।

अलीगढ़ के टप्पल कस्बे में ढाई साल की मासूम की नृशंस हत्या, कुशीनगर में किशोरी से गैंगरेप, कानपुर मदरसे में छात्रा से दुष्कर्म, हमीरपुर और जालौन में मासूम लड़कियों की रेप के बाद हत्या जैसे संगीन अपराधों से राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।  

लूट, हत्या और डकैती जैसे अपराधों में आई बढ़ोत्तरी से मुख्यमंत्री के उन दावों की भी पोल खुल गई है कि 'अपराधी डर कर या तो राज्य से बाहर चले गए हैं या फिर जमानत रद्द कराकर जेल में बंद हैं।'

राज्य सरकार भले ही उत्तर प्रदेश में सब कुछ ठीक-ठाक होने और कानून व्यवस्था दुरुस्त होने का दावा कर ले लेकिन मुख्यमंत्री की पुलिस अफसरों के साथ हो रहीं बैठकें और बड़े पैमाने पर पुलिस कप्तानों के हुए ट्रांसफर इतना बताने के लिए काफी है कि उत्तर प्रदेश में सब कुछ ठीक नहीं है। 

इसमें दो राय नहीं कि जब से योगी सरकार ने यूपी की कमान संभाली तब से ही एनकाउंटर के मामले ने तेजी पकड़ी बावजूद इसके अपराध भी अपनी पकड़ बनाए हुए है और खासकर पिछले कुछ समय से महिलाओं के खिलाफ़ होने वाले अपराधों में ज्यादा तेजी आई है। 

अपनी सफलताओं को गिनाने वाली योगी सरकार भी काफी नानुकुर के बाद आखिरकार मान ही गई कि राज्य में महिलाओं, नाबालिगों के खिलाफ़ अपराध बढ़ रहे है तभी तो महिला सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री को अंततः उच्च स्तरीय बैठक बुलानी पड़ी साथ ही बढ़ते अपराध की रोकथाम और मॉनिटरिंग के लिए प्रदेश की चार वरिष्ठ महिला आईपीएस अफसरों को जिम्मेदारी भी सौंपी गई। 

महिला सुरक्षा के नाम पर बैकफुट पर खड़ी योगी सरकार अब यह भी मान चुकी है कि उसके द्वारा गठित एंटी रोमियो स्क्वाड भी बेअसर हो चला है। सीएम योगी ने पुलिसिंग, डायल-100 तथा एंटी रोमियो स्क्वाड को और अधिक सक्रिय किये जाने पर जोर देते हुए कहा कि महिलाओं और बालिकाओं से छेड़खानी करने और उन्हें परेशान करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करें।

दरअसल राज्य में सरकार बनाते समय जिस पार्टी और मुख्यमंत्री ने सबसे पहले महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एंटी रोमियो स्क्वायड का गठन यह कहते हुए किया कि महिलाओं, स्कूली और कॉलेज छात्राओं को छेड़ने वाले शोहदों की अब खैर नहीं, एंटी रोमियो स्क्वाड ऐसे शोहदों को सबक सिखाने के लिए काफी है अब वही सरकार और वही मुख्यमंत्री यह मान रहे हैं कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं और एंटी रोमियो स्क्वाड निष्क्रिय हो चला है। 

हालांकि अपनी कार्यशैली और ज्यादतियों के चलते खुद एंटी रोमियो स्क्वाड कई बार सवालों के घेरे में आ चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर से इस महिला रक्षक दल को मजबूत अभियान चलाने का निर्देश दिया है साथ ही भीड़-भाड़ और संवेदनशील जगहों पर सक्रियता बढ़ाने पर बल दिया है। 

मुख्यमंत्री जी को यह लगता है कि राज्य में बढ़ते महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने में एंटी रोमियो स्क्वाड एक मजबूत भूमिका निभा सकता है। तो मुख्यमंत्री जी से एक सवाल यह बनता है कि राज्य में सरकार बनते ही सबसे पहले इस दल का गठन इसी आधार पर किया गया था कि मां बहन बेटियों को एक सुरक्षित माहौल दिया जा सके और उनके खिलाफ होने वाले अपराधों से उन्हें बचाया जा सके, पर ठीक इसके उलट ही हो रहा है। 

रक्षा के नाम पर लड़के लड़कियों को परेशान करने का आरोप एंटी रोमियो स्क्वाड पर लगते रहे इतना ही नहीं कहीं-कहीं तो उनकी ज्यादतियों की हद तक हो गई पर अब बात और गंभीर हो चली है अपराधी, बलात्कारियों के हौसले बुलंद हैं, महिला रक्षक दल कहीं सोए हुए हैं और कानून शिथिल होता जा रहा है।

अलीगढ़ की घटना के बाद वाराणसी में लोगों ने अपने घरों के बाहर पोस्टर लगाकर सरकार से बेटियों को बचाने की अपील तक कर डाली पोस्टर पर लिखा था 'सरकार सुरक्षा दे क्योंकि.....घरों में बेटियां हैं... '  इससे बड़ा जनाक्रोश का उदाहरण और क्या हो सकता है। 

तो यह मान लेने में कोई हर्ज नहीं कि यूपी में सब कुछ ठीक नहीं। हम अपनी बेटियों को एक सुरक्षित माहौल देने में विफल हो रहे हैं। ऐसे बिगड़ते माहौल को संभालने की जवाबदेही आख़िर किसी की तो बनती है। ठीक है उसे संभालने की ओर कदम बढ़ाने का दावा भी किया जा रहा है पर यह देखना होगा कि निर्णायक कदम कहीं दावों की ही भेंट न चढ़ कर रह जाएं क्योंकि मसले बहुत गंभीर मोड़ पर आ पहुंचे हैं।

violence against women
crimes against women
UttarPradesh
Yogi Adityanath
Yogi govt

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

चंदौली पहुंचे अखिलेश, बोले- निशा यादव का क़त्ल करने वाले ख़ाकी वालों पर कब चलेगा बुलडोज़र?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

चंदौली: कोतवाल पर युवती का क़त्ल कर सुसाइड केस बनाने का आरोप

प्रयागराज में फिर एक ही परिवार के पांच लोगों की नृशंस हत्या, दो साल की बच्ची को भी मौत के घाट उतारा

प्रयागराज: घर में सोते समय माता-पिता के साथ तीन बेटियों की निर्मम हत्या!

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप


बाकी खबरें

  • Mehsi oyster button industry
    शशि शेखर
    बिहार: मेहसी सीप बटन उद्योग बेहाल, जर्मन मशीनों पर मकड़ी के जाल 
    26 Oct 2021
    बिहार के पूर्वी चंपारण के मेहसी स्थित विश्व प्रसिद्ध सीप-बटन उद्योग की मशीनों पर मकड़ी के जाले लग चुके हैं। बिजली की सप्लाई नहीं है। उद्योग यूनिट दर यूनिट बंद हो रहे हैं। इस उद्योग के कारीगर पंजाब-…
  • coal crisis
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोयला संकट से होगा कुछ निजी कंपनियों को फायदा, जनता का नुकसान
    26 Oct 2021
    कोयले के संकट से देश में बिजली की किल्लत हो रही है। इस किल्लत की वजह क्या है? इस संकट से किसको फायदा और किसको नुकसान होगा? जानने के लिए न्यूज़क्लिक ने बात की पूर्व कोयला सचिव अनिल स्वरुप से
  • Biden’s Taiwan Gaffe Meant no Harm
    एम. के. भद्रकुमार
    ताइवान पर दिया बाइडेन का बयान, एक चूक या कूटनीतिक चाल? 
    26 Oct 2021
    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पिछले गुरुवार को सीएनएन टाउन हॉल में यह कहा है कि अगर चीन ने ताइवान पर हमला किया तो वाशिंगटन उसकी रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • workers
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: डीबीसी कर्मचारियों का स्थायी नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शन, हड़ताल की चेतावनी दी
    26 Oct 2021
    लगभग 3500 से अधिक कर्मचारी दिल्ली के तीनों नगर निगम में अनुबंध के आधार पर काम कर रहे हैं। राजधानी में डेंगू और अन्य ऐसी महामारी की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका के बावजूद ये ठेके प्रथा के तहत कार्यरत…
  • instant loan
    शाश्वत सहाय
    तत्काल क़र्ज़ मुहैया कराने वाले ऐप्स के जाल में फ़ंसते नौजवान, छोटे शहर और गाँव बने टार्गेट
    26 Oct 2021
    इन ऐप्स के क़र्ज़ वसूली एजेंटों की ओर से किये जा रहे उत्पीड़न के चलते 2020 और 2021 के बीच पूरे भारत में कम से कम 21आत्महत्याएं हुई हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License