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राजनीति
बीएचयू : प्रोफ़ेसर चौबे को समय से पहले किया जाएगा रिटायर, लेकिन फ़ैसले से संतुष्ट नहीं छात्राएं
बीएचयू कार्यकारिणी परिषद ने यौन शोषण के आरोपी प्रोफ़ेसर शैल कुमार चौबे को समय-पूर्व सेवानिवृत्त करने का फ़ैसला किया है। हालांकि छात्राएं प्रशासन से प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की मांग कर रही हैं।
सोनिया यादव
28 Sep 2019
BHU

बनारस हिंदू विश्‍वविद्यालय (बीएचयू) में यौन शोषण के आरोपी जंतु विज्ञान विभाग के प्रोफ़ेसर शैल कुमार चौबे की बहाली के विरोध में बीते 14 सितंबर को हुए छात्राओं के आंदोलन का असर देखने को मिला है। 27 सिंतबर शुक्रवार को दिल्‍ली में हुई बीएचयू की कार्यकारिणी परिषद की बैठक में आरोपी प्रोफ़ेसर शैल कुमार चौबे को समय से पहले सेवानिवृत्त किए जाना का फ़ैसला लिया गया है। हालांकि छात्राएं इस फ़ैसले से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि ये जीत अधूरी है।

बता दें कि बीएचयू प्रशासन का ये निर्णय ऐसे समय में सामने आया है जब बीएचयू के कई छात्र जीएसकैश, छात्रसंघ समेत कई मांगों को लेकर लगातार पांच दिनों से अनिश्चितकालिन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लेकिन अभी तक प्रशासन द्वारा इन छात्रों की कोई सुध नहीं ली गई है।

इस संबंध में न्यूज़क्लिक से बातचीत में छात्राओं ने प्रोफ़ेसर चौबे के रिटायरमेंट के निर्णय का स्वागत तो किया लेकिन उनका कहना है कि प्रशासन द्वारा जब तक कोई क़ानूनी कार्रवाई नहीं की जाती उनका न्याय अधूरा है।

इसे पढ़े: बीएचयू में फिर आंदोलन : छात्रसंघ बहाली समेत कई मांगों को लेकर छात्रों की भूख हड़ताल

भूख हड़ताल पर बैठी छात्रा आकांक्षा ने न्यूज़क्लिक से कहा, "प्रशासन का रवैया उदासीन है। प्रोफ़ेसर के संबंध में जो निर्णय लिया गया है उससे छात्राएं संतुष्ट नहीं हैं। हमारी मांग प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई और जीएसकैश को लागू करने की है। छात्राओं के साथ परिसर में हो रहे भेदभाव को ख़त्म करने की है। जिस पर प्रशासन अभी तक मौन है।"

एक छात्रा कहती हैं, "बीएचयू प्रशासन से हमारी मांग थी कि प्रोफ़ेसर को बर्खास्त कर उस पर प्रशासन द्वारा एफ़आईआर दर्ज कराई जाए, जीएसकैश लागू किया जाए, आतंरिक शिकायत समिति में छात्राओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो। लेकिन प्रशासन ने केवल प्रोफ़ेसर को सेवानिवृत्त किया है। अभी उस पर कोई क़ानूनी कार्रवाई नहीं की गई है। हमें केवल 30 प्रतिशत न्याय मिला है, 70 प्रतिशत अभी भी बाक़ी है।"

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एक अन्य छात्रा ने बताया, "हम ख़ुश हैं कि प्रोफ़ेसर को समय से पूर्व रिटायर किया जा रहा है। लेकिन अभी हमारी जंग जारी रहेगी। प्रोफ़ेसर चौबे पर जब तक एफ़आईआर नहीं हो जाती, हम प्रशासन के निर्णय से संतुष्ट नहीं होंगे।"

इस बैठक के संबंध में न्यूज़क्लिक को बीएचयू के जनसंपर्क अधिकारी रा़जेश सिंह ने बताया, "कार्यकारिणी परिषद की बैठक में जो फ़ैसले लिए गए हैं, उसकी अभी तक मेरे पास कोई अधिकृत सूचना नहीं है। इसलिए मैं फ़िलहाल इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं कर सकता।"

बता दें कि इस प्रकरण पर आरोपी प्रोफ़ेसर शैल कुमार चौबे ने किसी प्रतिक्रिया या टिप्पणी से साफ़ इनकार करते हुए कहा, "मैं निर्दोष हूं और मुझे कार्यकारिणी परिषद की बैठक के निर्णय की अभी कोई जानकारी नहीं मिली है।"

ग़ौरतलब है कि बीते साल अक्टूबर में शैक्षणिक टूर के दौरान प्रोफ़ेसर चौबे पर छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें और अभद्र टिप्पणियां करने का आरोप लगा था। जिसके बाद आंतरिक शिकायत समिति द्वारा मामले की जांच में चौबे को दोषी पाया गया। लेकिन इसके बावजूद उसे इस साल अगस्त से फिर से बहाल कर दिया गया। जिसके विरोध में बीते 14 सितंबर से दो दिनों तक छात्राओं ने विश्‍वविद्यालय का मुख्‍य द्वार जाम करके धरना प्रर्दशन किया था। जिसके चलते बाद में प्रशासन द्वारा प्रोफ़ेसर एसके चौबे को लंबी छुट्टी पर भेजने का निर्णय लेने के साथ ही कार्यकारिणी परिषद में इस मुद्दे पर चर्चा का फ़ैसला किया था।

इसे पढ़े: बीएचयू : छात्राओं का प्रदर्शन रंग लाया, आरोपी प्रोफ़ेसर को छुट्टी पर भेजा

BHU protstests
BHU
MHRD
student union
Banaras Hindu University
Professor Shail Kumar Choubey
UttarPradesh
sexual harassment at workplace

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