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भारत
राजनीति
बिहार बंद: जनसामान्य का समर्थन
बंद बुलाने का एक मुख्य कारण हाल ही में हुई मुज़फ्फरपुर की घटना और लगातार बढ़ता दलित उत्पीड़न हैI
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
02 Aug 2018
bihar band

बिहार के  मुज़फ्फरपुर स्थित बालिका सुधारगृह में  34 लड़कियों के साथ हुए यौन शोषण और दलित समुदाए पर लगातार बढ़ते अपराधों के विरोध में वाम दलों सहित पूरे विपक्ष ने आज बिहार बंद का आह्वन किया। बंद की मुख्य माँग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का इस्तीफ़ा है।

यह भी पढ़ें: बिहार: मुज़फ्फरपुर बालिका सुधारगृह या बालिका शोषणगृह

बंद का आह्वन सीपीआई, सीपीआई(एम), सीपीआई(एमएल), एसयूसीआई(सी) और आरएसपी सहित कई वामपंथी दलों ने संयुक्त रूप से किया है। बंद को बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, लोकतांत्रिक जनता दल ने भी अपना समर्थन दियाI

बंद का असर राज्य भर में देखने को मिल रहा है। खबरों के मुताबिक सिवान और नवादा जिलों में वामदलों के कार्यकर्त्ताओं ने सरकार व प्रशासन के खिलाफ जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। वहीं राजधानी पटना के बाज़ार भी सूने नज़र आए व ज़्यादातर दुकानों के शटर गिरे रहे। राज्य  सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था नियंत्रण के नाम पर अतिरिक्त बलों की तैनाती भी की है।

बंद का असर रेल सेवाओं पर भी देखने को मिला है। जहानाबाद में पटना-रांची जनशताब्दी एक्सप्रेस और दरभंगा में बिहार संपर्क क्रांति जैसी तकरीबन दर्जन भर ट्रेनों को रोक कर प्रर्दशन किया। रिपोर्टों के अनुसार दरभंगा, मधुबनी, जहानाबाद, गया, मुज़फ्फरपुर, पटना और भोजपुर जिलों में ट्रेन सेवा प्रभावित रहीं। ट्रेनों के अतिरिक्त  प्रदर्शनकारियों ने सिवाए भोजपुर, नवादा, पटना, अरवाल, जगबाद जिलों में कई सड़कों को भी बंद कर प्रदर्शन किया।

हालांकि बंद से पहले आपातकालीन सेवाएँ जैसे एंबुलेंस, फायरब्रिगेड को इससे मुक्त रखे जाने की घोषणा की गई थी ताकि जन समान्य को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।

प्रदर्शन कर रहें लोगों ने किशनगंज में बस स्टैंड के समीप एनएच 31 को जाम कर प्रदर्शन किया व मधेपुरा जिले के मुरलीगंज में एनएच 107 मुख्य मार्ग पर बेंगापुल को जामकर प्रदर्शन किया। दरभंगा में जयनगर राष्ट्रीय राजमार्ग 527 बी को दड़िमा चौक पर जाम कर दिया गया व राष्ट्रीय राजमार्ग 57 को भी सिमरी थाना चौक पर बंद समर्थकों ने  प्रदर्शन किया।

यह भी पढ़ें: बिहार के 'बालिका सुधार गृह' की सच्चाई

बंद बुलाने का एक मुख्य कारण हाल ही में हुई मुजफ्फरपुर की घटना भी है। गौरतलब है कि हाल ही में मुजफ्फरपुर में एक बालिका सुधारगृह की बालिकाओं  ने ऑडिट के दौरान टाटा इंसटीट्यूट ऑफ सोशल साइंस  ने पता लगाया कि लड़कियों के आश्रय और सुधारगृह में प्रबंधकों और वहाँ आने वाले अन्य लोगों द्वारा लंबे समय तक यौन उत्पीड़न होता रहा। कई रिपोर्टों के मुताबिक मुज़फ्फरपुर के बालिका गृह में रहने वाली 44 लड़कियों में से कुल 34 लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न हुआ है।

सी.पी.एम के राज्य सचिव अवधेश कुमार ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए बताया कि “यह बंद ऐतिहासिक रहा क्योंकि जिन मुद्दों को लेकर हमने यह बंद बुलाया था उससे जनसामान्य अपने को जुड़ा पाता है। लोगों में इस बात को लेकर भारी रोष देखने को मिला कि इतने लम्बे समय तक बालिकाओं से लगातार बलात्कार की घटना होती रही और सरकार के कान पर जूँ तक नहीं रेंगी।“

मुज़फ्फरपुर घटना पर अवधेश ने कहा कि “सरकार सिर्फ सी.बी.आई को जाँच सौंपकर अपनी ज़िम्मेदारियों से भाग रही है। सरकार ने अभी तक अपनी मंत्री मंजु शर्मा तक को निष्कासित नहीं किया है जिनकी नाँक के  नीचे यह पूरी घटना घटी। नीतीश कुमार को नैतिक ज़िम्मेदारी लेकर अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए, उन्हें कोई हक नहीं बनता अपने पद पर बनें रहने का।“

अवधेश ने यह भी कहा कि “हमें बिहार के तमाम विपक्षी दलों के साथ दलित संगठनों का भी भारी समर्थन मिला है।“

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Nitish Kumar

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