NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार में सबसे अधिक वोटरों ने नोटा का बटन दबाया
राजस्थान में 3.27 लाख मतदाताओं ने नोटा (इनमें से कोई नहीं) का विकल्प चुना।
भाषा
25 May 2019
सांकेतिक तस्वीर

लोकसभा चुनावों में देश में सबसे ज्यादा बिहार की जनता ने नोटा का बटन दबाकर अपने उम्मीदवारों को खारिज किया। बिहार के 8.17 लाख मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया। इसी तरह, राजस्थान में 3.27 लाख मतदाताओं ने नोटा (इनमें से कोई नहीं) का विकल्प चुना।
 
राजस्थान में नोटा में डाले गए मत भाकपा, माकपा, और बसपा के उम्मीदवारों को मिले वोटों से ज्यादा रहे हैं। पिछले लोकसभा चुनावों में भी लगभग इतने ही यानी 3,27,902 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया था। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में राज्य के 3 लाख 27 हजार 559 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया। यह राज्य की 25 लोकसभा सीटों में डाले गए कुल मतों के 1.01 प्रतिशत के बराबर है। 

चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार, बिहार में 40 लोकसभा सीटों पर हुए कुल मतदान में दो फीसदी लोगों ने नोटा का चयन किया। दमन और दीव में 1.7 फीसदी, आंध्र प्रदेश में 1.49 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 1.44 फीसदी मतदाताओं ने नोटा को चुना।

पंजाब के 1.54 लाख से अधिक मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया। राज्य में कांग्रेस ने आम चुनाव में 13 लोकसभा सीटों में से आठ जीतकर शानदार जीत दर्ज की है। निर्वाचन कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, 1,54,423 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना। यह कुल पड़े मतों का 1.12 प्रतिशत है।

आंकड़ों के मुताबिक, 13 लोकसभा सीटों में से फरीदकोट सीट पर सबसे ज्यादा मतदाताओं ने उम्मीदवारों को खारिज किया। फरीदकोट में कुल 19,246 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया।उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में लगभग सभी सीटों पर नोटा पांचवें स्थान पर रहा।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आम चुनावों में 45,000 से अधिक मतदाताओं ने नोटा विकल्प को चुना जो 2014 के आम चुनाव में इस श्रेणी में डाले गए मतों से 6,200 अधिक है। नोटा के तहत डाले गए वोट कुल वोटों का 0.53 फीसदी है। 

चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार, उत्तरी पश्चिम (आरक्षित) सीट पर सबसे अधिक 10,210 नोटा वोट डाले गए। इस सीट पर सबसे कम उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे जबकि यहां सबसे अधिक मतदाता हैं।

हरियाणा में लोकसभा चुनाव में 41,000 से अधिक लोगों ने नोटा का विकल्प चुना, जहां भाजपा ने सभी 10 सीटों पर जीत दर्ज की है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा में हुए कुल मतदान में से 0.68 प्रतिशत लोगों ने नोटा चुना।

सबसे अधिक अंबाला में 7,943 और सबसे कम भिवानी-महेन्दरगढ़ में 2041 लोगों ने नोटा पर बटन दबाया। हिमाचल प्रदेश में लोकसभा की चारों सीटें यूं तो भाजपा की झोली में गईं हैं लेकिन दिलचस्प तथ्य है कि 33 हजार से अधिक मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना।

चुनाव अधिकारी ने बताया कि राज्य में कम से कम 33,008 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना। इस लिहाज से राज्य में कुल पड़े 38,01,793 मतों का 0.87 प्रतिशत नोटा के हिस्से में गया है। उन्होंने बताया कि कांगड़ा में 11,327 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया, वहीं शिमला में 8,357 मतदाताओं, हमीरपुर में 8,026 मतदाताओं तथा मंडी में 5,298 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना। 

जम्मू-कश्मीर की बारामूला लोकसभा सीट पर लगभग आठ हजार मतदताओं ने नोटा का विकल्प चुना। इस सीट से नेशनल कॉन्फ्रेंस के मोहम्मद अकबर लोन विजयी हुए हैं। निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि उत्तर कश्मीर की बारामूला संसदीय सीट पर कुल 7999 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना। इस सीट पर कुल मतदान के 1.79 फीसदी मत नोटा को मिले हैं। उन्होंने बताया कि चुनाव लड़ने वाले नौ में से चार उम्मीदवारों को नोटा से कम वोट मिले हैं। 

जम्मू की उधमपुर सीट पर 7472 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना वहीं जम्मू संसदीय सीट पर 2545 मतदाताओं ने नोटा पर बटन दबाया। लोकसभा चुनाव 2019 में मध्य प्रदेश में 3,40,984 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया।

मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की वेवसाइट पर जारी चुनाव परिणाम के मुताबिक, राज्य में 3,40,984 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना था, जो कुल मतदान का 0.92 प्रतिशत है। साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में 3,91,837 मतदाताओं ने नोटा का उपयोग किया था, जो कुल मतदाताओं को 1.32 प्रतिशत था।

मध्य प्रदेश में नोटा चौथे नंबर पर रहा। इससे अधिक प्रतिशत मत केवल तीन दलों भाजपा (58 प्रतिशत), कांग्रेस (34.50 प्रतिशत) एवं बसपा (2.38 प्रतिशत) को मिले। समाजवादी पार्टी एवं अन्य छोटे-छोटे दलों को नोटा से भी कम वोट प्रतिशत हासिल हुए। समाजवादी पार्टी को प्रदेश में कुल 82,662 मत मिले यानी 0.22 प्रतिशत, जो नोटा से 0.70 प्रतिशत कम है।

छत्तीसगढ़ में लगभग दो लाख मतदाताओं ने किसी भी पार्टी के उम्मीदवारों पर भरोसा न जताते हुए नोटा को वोट दिया है। राज्य में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित बस्तर लोकसभा क्षेत्र में सबसे अधिक मतदाताओं ने नोटा को वोट दिया है। 

छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य में 1.96 लाख से अधिक मतदाताओं ने नोटा पर मतदान किया है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य के 1,36,22,725 मतदाताओं ने इस लोकसभा चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। इनमें से 1,96,265 मतदाताओं ने किसी भी प्रत्याशी को न चुनते हुए नोटा पर मत दिया है।

महाराष्ट्र में 2014 के लोकसभा चुनावों की तुलना में 2019 में ज्यादा वोटरों ने नोटा का विकल्प चुना। चुनाव आयोग के आंकड़ों से यह पता चला है। राज्य में 4,86,902 वोटरों ने नोटा का विकल्प चुना जबकि 2014 के चुनावों में 4,83,459 वोटरों ने नोटा का बटन दबाया था।

महाराष्ट्र में पालघर लोकसभा सीट पर सबसे ज्यादा 29,479 लोगों ने नोटा का बटन दबाया जबकि नक्सल प्रभावित गढ़चिरोली-चिमूर सीट पर 24,599 वोटरों ने नोटा का विकल्प चुना। असम में लोकसभा चुनावों में 1,78,353 वोटरों ने नोटा का बटन दबाया जो पिछले चुनावों में नोटा के आंकड़ों से 31,296 ज्यादा हैं।

राज्य में 0.99 फीसदी लोगों ने नोटा का बटन दबाया। राज्य में डिब्रूगढ़ सीट पर सबसे ज्यादा वोटरों ने नोटा का विकल्प चुना। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश में एक साथ हुए लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों में 13,000 से ज्यादा वोटरों ने नोटा का विकल्प चुना। 

राज्य में करीब 13,283 वोटरों ने नोटा का विकल्प चुना। भारत में उम्मीदवारों की सूची में नोटा को 2013 में उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद शामिल किया गया था। इससे मतदाताओं को एक ऐसा विकल्प मिला कि अगर वह अपने क्षेत्र के किसी उम्मीदवार को पसंद नहीं करते हैं तो वह अपना मतदान नोटा पर कर सकते हैं। 

16वीं लोकसभा के चुनाव में 2014 में पहली बार संसदीय चुनाव में नोटा की शुरुआत हुई। इसमें करीब 60 लाख मतदाताओं ने नोटा के विकल्प को चुना। यह लोकसभा चुनाव में हुए कुल मतदान का 1.1 फीसदी था।
    

lok sabha election
lok sabha
NOTA
BJP
Congress
Bihar
Rajasthan

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल


बाकी खबरें

  • Yeti Narasimhanand
    न्यूज़क्लिक टीम
    यति नरसिंहानंद : सुप्रीम कोर्ट और संविधान को गाली देने वाला 'महंत'
    23 Apr 2022
    यति नरसिंहानंद और अ(संतों) का गैंग हिंदुत्व नेता यति नरसिंहानंद गिरी ने दूसरी बार अपने ज़मानत आदेश का उल्लंघन करते हुए ऊना धर्म संसद में मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रती बयान दिए हैं। क्या है यति नरसिंहानंद…
  • विजय विनीत
    BHU : बनारस का शिवकुमार अब नहीं लौट पाएगा, लंका पुलिस ने कबूला कि वह तलाब में डूबकर मर गया
    22 Apr 2022
    आरोप है कि उनके बेटे की मौत तालाब में डूबने से नहीं, बल्कि थाने में बेरहमी से की गई मारपीट और शोषण से हुई थी। हत्या के बाद लंका थाना पुलिस शव ठिकाने लगा दिया। कहानी गढ़ दी कि वह थाने से भाग गया और…
  • कारलिन वान हाउवेलिंगन
    कांच की खिड़कियों से हर साल मरते हैं अरबों पक्षी, वैज्ञानिक इस समस्या से निजात पाने के लिए कर रहे हैं काम
    22 Apr 2022
    पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करने वाले लोग, सरकारों और इमारतों के मालिकों को इमारतों में उन बदलावों को करने के लिए राजी करने की कोशिश कर रहे हैं, जिनके ज़रिए पक्षियों को इन इमारतों में टकराने से…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    छत्तीसगढ़ :दो सूत्रीय मांगों को लेकर 17 दिनों से हड़ताल पर मनरेगा कर्मी
    22 Apr 2022
    मनरेगा महासंघ के बैनर तले वे 4 अप्रैल से हड़ताल कर रहे हैं। पूरे छत्तीसगढ़ के 15 हज़ार कर्मचारी हड़ताल पर हैं फिर भी सरकार कोई सुध नहीं ले रही है।
  • ईशिता मुखोपाध्याय
    भारत में छात्र और युवा गंभीर राजकीय दमन का सामना कर रहे हैं 
    22 Apr 2022
    राज्य के पास छात्रों और युवाओं के लिए शिक्षा और नौकरियों के संबंध में देने के लिए कुछ भी नहीं हैं। ऊपर से, अगर छात्र इसका विरोध करने के लिए लामबंद होते हैं, तो उन्हें आक्रामक राजनीतिक बदले की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License