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बिहार : प्रशासन और भूमाफिया के गठजोड़ ने ले ली महादलित बिन्दा की जान?
सीतामढ़ी के रुन्नीसैदपुर में भूमिहीनों के अनशन स्थल पर हमले में घायल बिन्दा साहनी की मौत हो गई है। सीपीएम ने 22 जनवरी को रुन्नीसैदपुर में शोक एवं संकल्प सभा करने का निर्णय किया है।
मुकुंद झा
21 Jan 2019
हमले के घायल बिन्दा साहनी की मौत

बिहार के रुन्नीसैदपुर (सीतामढ़ी) में भूमिहीनों के अनशन स्थल पर भूमाफिया के हमले में घायल बिन्दा साहनी की मौत हो गई है। उनका PMCH में इलाज चल रहा था। जहां उन्होंने रविवार अंतिम सांस ली। इसी हमले में घायल एक अन्य आंदोलनकारी महिला अनारी देवी की हालत भी गंभीर बनी हुई है।

बिन्दा साहनी की मौत से आहत आंदोलनकारियों ने कहा कि ये भूमाफिया ने ये हमला प्रशासन की शह पर किया है। उन्होंने कहा कि वे हत्यारों को सज़ा दिलाकर रहेंगे और न्याय होने तक ये संघर्ष जारी रहेगा। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने भी बिन्दा साहनी की मौत पर दु:ख और रोष जताया और भूमिहीनों के आंदोलन को अपने मकाम तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया। सीपीएम राज्य सचिव अवधेश कुमार, पटना जिला सचिव मनोज कुमार चंद्रवंशी, अशोक कुमार मिश्रा, मुकुल राज सहित सैकड़ों कि संख्या में कार्यकर्ताओं ने उनके पार्थिव शरीर पर फूल माला चढ़ाई और उनकी अंत्येष्टि में शामिल हुए। इस सर्द मौसम में भी रविवार शाम को उनकी अंतिम यात्रा के दौरान भारी संख्या में लोग शामिल हुए। अंतिम यात्रा में ‘कामरेड बिन्दा की शहादत को लाल सलाम’, ‘बिन्दा तेरा मिशन अधूरा-हम सब मिलकर करेंगे पूरा’ का नारे लगातार गूंजते रहे।

सीपीएम ने 22 जनवरी को रुन्नीसैदपुर में शोक एवं संकल्प सभा करने का निर्णय किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर मोर्चे पर फेल नीतीश सरकार हताश है। बिहार में आज केवल लुटेरे ही सुरक्षित हैं और गरीब उजाड़े जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा की बेकार नहीं जायेगी भूमिहीन साथी बिन्दा साहनी की शहादत, उठेगा तूफान और इस निर्दयी सरकार को उड़ा ले जायेगा सात समुन्दर पार।

इन भूमिहीन महादलितों का संघर्ष अब एक जन आंदोलन बनता दिख रहा है। रविवार को हजारों कि संख्या में बिहार के लोग रुन्नासैदपुर पहुँच रहे हैं। इस संकल्प सभा में एआईकेएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक धावले और सीपीएम के राज्य सचिव अवधेश सिंह के साथ ही राज्य के अन्य विपक्षी दलों के नेता भी शमिल हो रहे हैं।

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कौन थे बिन्दा साहनी?

बिन्दा साहनी लगभग 65 वर्षीय भूमिहीन खेतिहर दिहाड़ी मजदूर थे। वे 90 के दशक की शुरुआत में ही वाम आंदोलन के करीब आये थे। 1993 से सीपीएम के सदस्य थे। वर्तमान में पार्टी के अंचल कमेटी के सदस्य थे। बिंदा के सात बच्चे थे जिसमें चार लड़के हैं। चारों ही मजदूर हैं। तीन लड़कियां हैं जिसमें से अभी केवल एक का विवाह हुआ है। दो बेटियां कुंवारी हैं, वे घर चलाने के लिए गाँव के अन्य घरों और खेतों में काम करती हैं।

इनके परिवार के पास कोई निश्चित आय का स्रोत नहीं है।  रहने के लिए भी घर और ज़मीन नहीं है। 2003 से सैकड़ों महादलित परिवार के साथ यह भी सीलिंग से अतिरिक्त जमीन पर अपनी कच्ची झोपड़ी बनाकर रह रहे थे। परन्तु 10 जनवरी को बी०डी०ओ० द्वारा इन्हें उजाड़ने का प्रयास हुआ, तो उसके खिलाफ हो रही प्रतिरोध सभा में हिस्सा ले रहे थे, लेकिन 18 जनवरी को भूमाफिया द्वारा किये गए बम हमले का वे शिकार हो गए। तकरीबन दो दिनों तक मौत से संघर्ष करते हुए कल रविवार को उनका देहांत हो गया।

क्या पूरा मामला?

ज्ञात हो कि रुन्नीसैदपुर में वर्ष 2003 से सैकड़ों दलित परिवार से सीलिंग से बची ज़मीन पर अपनी झोपड़ी बनाकर रह रहे थे। सीपीएम के नेतृत्व मे वे लगातार आवासीय पर्चा की मांग कर रहे थे। स्थानीय सीओ ने जांच करने के उपरांत परिवारों को चिह्नित करने का निर्णय लिया था। लेकिन सीओ पर्चा वितरण तिथि से पहले बीमारी के चलते छुट्टी पर चले गए। इस बीच पिछली 10 जनवरी को सीओ के प्रभारी के रूप में रुन्नीसैदपुर प्रखंड के बी०डी०ओ०, पुलिस बल लेकर बस्ती में गए। आरोप है कि उनके साथ स्थानीय भूमाफिया भी थे। बस्ती में बी०डी०ओ० ने नये सिरे से जांच होने के बाद पर्चा वितरित किये जाने कि बात कही, ग्रामीण द्वारा प्रतिरोध किये जाने के बाद उनके साथ मारपीट गाली-गलौज और महिलाओं के साथ अभद्रता की गई।

इस घटना के विरोध में 11 जनवरी को सीपीएम नेता देवेंद्र यादव के नेतृत्व में  51 पीड़ित ब्लॉक मुख्यालय के सामने अनशन पर बैठ गए। चार दिनों तक कोई बात नहीं की गई। 16 जनवरी को देवेंद्र यादव को वार्ता के लिए बुलाया गया। इस वार्ता में देवेंद्र नहीं गए, उनकी जगह दूसरे नेता गए, लेकिन कोई हल नहीं निकला। इसी दिन सभा को जब देवेंद्र यादव संबोधित कर रहे थे तो उनकी ओर पेट्रोल बम फेंका गया। इस हमले में अनशन पर बैठे बिन्दा साहनी और एक विधवा अनारी देवी बुरी तरह झुलस गए। कल 20 जनवरी को बिन्दा साहनी ने पीएमसीएच पटना में दम तोड़ दिया, जबकि अनारी देवी जिंदगी और मौत के बीच झूल रही हैं।

“बिहार में भाजपा-जदयू-गुंडा गठजोड़ की सरकार है”

स्थानीय सीपीएम नेता देवेंद्र यादव ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा की नीतीश सरकार का कुरूप चेहरा दिखता है, जब सच में भूमिहीन दलित जो हदबंदी से फालतू ज़मीन पर वर्षों से बसे हुए थे, उन्हें उजाड़ने की कोशिश की जाती है। इसी साजिश के खिलाफ जब हम अनशन पर बैठे थे तो बी०डी०ओ० के इशारे पर गुण्डों ने हमारी सभा पर बम से हमला किया और पुलिस प्रशासन मूक दर्शक बना रहा। ये साफ दिखा रहा है कि प्रशासन और भूमाफिया का आपराधिक गठजोड़ है। उन्होंने आगे कहा कि बिहार में अभी भाजपा-जदयू-गुंडा गठजोड़  कि सरकार चल रही है। सरकार इतनी डरी हुई है कि आंदोलन तो दूर अनशनकारियों पर भी बम मारा जा रहा है।

इस मामले में प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को आश्वास्त किया है कि वो धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज करेंगे। इसके साथ ही बिंदा साहनी के परिवार को 4 लाख की अर्थिक मदद के साथ ही उनके एक लड़के को नौकरी की बात कही है।

 सीपीएम के जिला सचिव मनोज कुमार चन्द्रवंशी ने कहा कि उनका और उनकी पार्टी का मानना है कि इस हत्याकांड में सीधे तौर पर स्थानीय बी०डी०ओ० और भूमाफिया जिम्मेदार है। सीपीएम मांग करती है कि तुरंत धारा 302 के अंतर्गत बी०डी०ओ० एवं उसके साथियों पर मुकदमा चलाया जाए और जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। साथ ही पीड़ित परिवारों कों कम से कम 10 लाख रुपये के मुआवजे के साथ उनके आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जाए। इसके अलावा तत्काल 316 महादलित परिवारों को आवासीय पर्चा दिया जाए।

इसे भी पढ़ें : ‘रुन्नीसैदपुर चलो’ : महादलितों को ज़मीन से बेदख़ल करने के ख़िलाफ़ सीपीएम का आह्वान

 

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