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भारत
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बिहार सांप्रदायिक हिंसाः राज्य के बाहर से मंगवायी गयीं थीं तलवार
न्यूज़क्लिक की जांच से पता चला है कि तलवारें बिहार के बाहर से मंगाई गई थी और भड़काऊ गीत बजाए गए जिससे हिंसा हुई।
तारिक़ अनवर
05 Apr 2018
BIHAR

बिहार के नौ जिलों में 25 से 28 मार्च के बीच हुई सांप्रदायिक हिंसा योजना के तहत कराई गई थी। इन दंगों में एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि क़रीब 65 लोग घायल हो गए।

न्यूज़क्लिक ने पहले एक रिपोर्ट प्रकाशित किया था जिसमें तलवार, सीडी और पेन ड्राइव जिसमें इस्लाम से संबंधित गीत थे उसे लोगों के बीच वितरित किया गया था। इसे रामनवमी के मौक़े पर लाउडस्पीकर से बजाने के लिए बांटा गया था। इस गीत के बोल इतने भड़काऊ थें कि हिंसा होने की संभावना बनी हुई थी।

इसी तरह के एक गीत के बोल पर ध्यान दीजिए जिसे कथित तौर पर मुस्लिम बहुल इलाके से गुज़रते हुए रामनवमी जुलूस के दौरान बजाया गया थाः

'पाकिस्तान में भेजो या क़त्लेआम कर डालो, आस्तिन के सांपों को ना दुग्ध पिलाकर पालो'

'जिस दिन जाग उठा हिंदुत्व तो ये अंजाम बोलेगा, टॉपी वाला भी सर झुका कर जय श्री राम बोलेगा'

'दूर हटो अल्लाह वालों, क्यूं जन्मभूमि को घेरा है, मस्जिद कहीं और बनाओ तुम, ये राम लला का डेरा है'

'सुन लो मुल्लों पाकिस्तानी, गुस्से में हैं बाबा बरफानी'

इनमें से ज़्यादातर गीत एक साल पहले यूट्यूब पर अपलोड किए गए हैं और इसे लाखों लोगों ने देखा है। इन गीतों को पेन ड्राइव और सीडी के ज़रिए शेयर किया जा रहा था। ज़ाहिर तौर पर इस गीत को उन इलाक़ों में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने के उद्देश्य से फैलाया जा रहा था जो वर्षों से शांत रहे हैं।

बिहार की राजधानी पटना से क़रीब 130 किलोमीटर दूर औरंगाबाद ज़िले के नवादी रोड स्थित पुराने क़ाज़ी मुहल्ले के लोगों ने न्यूज़क्लिक से बताया कि रामनवमी के मौक़े पर यहां किसी तरह के जुलूस की कोई परंपरा नहीं थी।

हिरा लाल गुप्ता ने कहा कि "उन्होंने 4-5 साल पहले इस जुलूस का आयोजन शुरू किया है, लेकिन इस बार कुछ नया देखा गया था। पहला ये कि बड़ी संख्या में नए लोग शामिल थे जिन्होंने जुलूस में हिस्सा लिया। इनमें से ज़्यादातर बाइक पर थें। प्रत्येक बाइक पर दो-तीन लोग सवार थें। दूसरा ये कि भीड़ आक्रामक था। तीसरा ये कि इसमें शामिल हुए ज़्यादातर लोग तलवार लहरा रहे थें।"

निशात अहमद नाम के एक अन्य स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि नवादी रोड को इसलिए निशाना बनाया गया था क्योंकि "इस इलाक़े में मिलीजुली आबादी है और दोनों समुदायों के लोग दशकों से शांतिपूर्ण तरीके से रहते आ रहे हैं।"

उन्होंने आगे कहा कि "भगवा रंग की पट्टी सिर पर बांधे हुए कुछ नए लोग इस इलाके में त्योहार से सप्ताह भर पहले से घूम रहे थें। शायद वे इलाक़े की जासूसी कर रहे थें।"

नवादी रोड संकरी गली है और इसके दोनों तरफ दो-तीन मंज़िली इमारत है। कई घरों की छतों पर उनके धार्मिक पहचान वाले झंडे लगे हुए हैं(हिंदुओं के लिए भगवा और मुसलमानों के लिए हरा रंग का झंडा)। हालांकि यहां कोई साफ तौर पर किसी तरह की दुश्मनी का कोई संकेत नहीं देख सकता है। यहां घनी शहरी आबादी है लेकिन निश्चित रूप से कोई अलग बस्ती नहीं है। यहां हिंदू और मुस्लिम इलाकों का कोई स्पष्ट विभाजन नहीं है।
विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ स्थानीय लोगों ने रामनवमी जुलूस में शामिल होने वाले बाइक सवारों को 25 जून की शाम से शुरू हुए जुलूस को जबरन घुसने का विरोध किया। इन्हें महाराणा प्रताप चौक के आसपास और मुख्य बाज़ार से गुज़रने से रोका गया।

मोहम्मद फहिमुद्दीन नदवी नाम के एक प्रत्यक्षदर्शी ने न्यूज़क्लिक को बताया कि "जब जुलूस बाजार से गुज़र रहा था तब भड़काऊ गीत जो़र-ज़ोर से बजाए जा रहे थे और भड़काऊ नारे लगाए जा रहे थे। जुलूस में शामिल लोग तलवार लहरा रहे थें। इस जुलूस में शामिल कुछ लोग अचानक वापस हुए और नवादी रोड में घुसने की कोशिश की। मौक़े पर मौजूद कुछ मुस्लिम युवकों ने उनका विरोध किया और हिंसा भड़क गई। दोनों तरफ से एक-दूसरे पर पत्थर फेंके जाने लगे। कुछ ही समय में रमेश चौक के पास कुछ दुकानों में आग लगा दी गई। काफी वक़्त गुज़रने के बाद वे [पुलिस] घटनास्थल पर पहुंचे और भीड़ को तितर बितर किया।"

ये भीड़ अगले दिन (26 मार्च) और अधिक आक्रामकता से आई और फिर से जुलूस निकाला। इस बार औरंगाबाद से भारतीय जनता पार्टी के सांसद सुशील कुमार सिंह ने आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि "क्रिया की प्रतिक्रिया है" जिससे हिंसा भड़क गई।

नरेंद्र राम, एक स्थानीय व्यक्ति जिसकी दुकान सम्राट बैंड को आग के हवाले कर दिया गया, ने कहा कि "26 मार्च को जुलूस में भाग लेने वाली भीड़ काफी ज्यादा आक्रामक थी। परेशानी का अनुभव करते हुए हमने उस दिन हमने दुकान नहीं खोला था। दुकानों में आग लगाकर वे जो कर सकते थे उन्होंने कर दिया। हमारी दुकान समेत कुछ दुकानें जो हिंदू समाज की थी जल कर ख़ाक हो गई। इसका मतलब है कि वे बाहरी थें क्योंकि स्थानीय लोग जानते थें कि कौन सी दुकान किस समाज के लोगों की है।"

बिहार के बाहर से तलवार लाए गए

एक आरोप जो दोनों पक्षों के बयान में सामान्य है वह यह कि भीड़ में शामिल लोग तलवार लिए हुए थें। अगर सूत्रों पर विश्वास किया जाए तो ये तलवार बिहार के बाहर से मंगवाए गए थे और जिले भर में मुफ्त बांटा गया था। पटना के एक व्यापारी ने अकेले उत्तर प्रदेश के मेरठ के एक सप्लायर से 50,000 तलवारों के लिए ऑर्डर दिया था।

राज्य के वरिष्ठ अधिकारी ने न्यूज़क्लिक को बताया कि क़रीब दो लाख धरादार हथियार राज्य के बाहर से प्रभावित ज़िले में भेजे गए थे। मेले का उद्घाटन होने के दो दिन बाद ही सोनेपुर मेले में तलवार बेचने वाले व्यापारी का स्टॉक ख़त्म हो गया था जिससे ज़ाहिर होता है कि इन हिंसा का तैयारी लंबे समय से चल रही थी।

न्यूज़़क्लिक की जांच पाया गया कि तलवार का ऑर्डर ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल के माध्यम से किया गया था। जैसे कोई इस वेबसाइट पर अपने ऑर्डर के लिए रजिस्टर करता है तो उसे मार्केंटिंग अधिकारी से उसकी ज़रूरत के बारे में जानकारी लेने के लिए कॉल आता है। इस दौरान वस्तु की क़ीमत, मात्रा और वितरित करने वाले स्थान के बारे में सवाल किया जाता है जबकि इसके पीछे के उद्देश्य के बारे में सवाल नहीं किया जाता है।

मार्केटिंक अधिकारी ख़रीदार को सूचित करता है कि उन्हें आपूर्तिकर्ता से एक कॉल जाएगा। चूंकि एक व्यक्ति जो ग्राहक के रूप में खुद को प्रस्तुत करता है उसे मेरठ आधारित सप्लायर से एक कॉल आता है। वह मात्रा का विवरण, ग्राहक के अनुसार कीमत वाली वस्तु, वस्तु का प्रकार (स्टेनलेस स्टील या अन्य बेहतर गुणवत्ता), दो धार वाले या एक धार वाले और वितरित किए जाने वाले स्थान के बारे में पूछता है। वह बताता है कि दिए गए पते पर खेप रवाना कर दिया जाएगा। कूरियर एजेंसी के बारे में बार-बार पूछे जाने पर भी आपूर्तिकर्ता इसका नाम नहीं बताता है। बातचीत के दौरान, आपूर्तिकर्ता ने खुलासा किया कि उसे बिहार से बड़ी संख्या में तलवारों का ऑर्डर मिला है। ग्राहक की तरह खुद को प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति से आपूर्तिकर्ता कहता है कि "पटना स्थित एक व्यापारी ने हाल ही में50,000 तलवारों के लिए एक ऑर्डर दिया था जिसे हमने भेज दिया है।"

इस मामले में 'ग्राहक' ने आपूर्तिकर्ता से उसकी पुष्टि के लिए इंतजार करने को कहा और फोन रख दिया।

इस पूरी बातचीत से पता चलता है कि भारी संख्या में तलवार बिहार के बाहर से लाई गई थी। घटनाओं पर बारीकियों से नज़र रखने वाले लोगों ने न्यूज़़क्लिक को बताया कि तलवारें नई थीं और सभी एक ही ब्रांड के थें। इसे जनता दल (यू) के वरिष्ठ नेता और बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी द्वारा भी इसकी पुष्टि की गई थी।

चौधरी ने न्यूज़क्लिक को बताया कि "यह बीजेपी (बिहार सरकार के गठबंधन का सहयोगी है) और आरएसएस (बीजेपी का वैचारिक संरक्षक) का एक पूर्व-योजनाबद्ध हमला था। रामनवमी के दौरान परेशानी पैदा करने की योजना बनाने के लिए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत यहां 14 दिनों तक रहे (इसी तरह के आरोप पहले बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव द्वारा लगाए गए थे)।

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