NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बीजेपी और टीएमसी की ‘पोस्टकार्ड जंग’ में सब्सिडी के 3.5 करोड़ रुपये का नुक़सान
हर पोस्टकार्ड पर केंद्र सरकार 11.75 पैसे की सब्सिडी देती है। दोनों दल राजनीतिक लड़ाई के लिए पोस्टकार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। 
अमित सिंह
06 Jun 2019
फाइल फोटो
Image Courtesy: indiatoday.in

लोकसभा चुनाव के समय से ही पश्चिम बंगाल में बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता जहाँ तृणमूल प्रमुख व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 'जयश्री राम' लिखे 10 लाख पोस्टकार्ड भेज रहे हैं तो वहीं तृणमूल कांग्रेस, बीजेपी के नेताओं को 'जय बांग्ला, जय काली' लिखे बीस लाख पोस्टकार्ड भेज रही है। इस पूरी सियासी कवायद में लगभग 30 लाख पोस्टकार्ड दोनों दल एक दूसरे को भेज रहे हैं। 

अमर उजाला में छपी एक ख़बर के अनुसार दोनों दलों की इस राजनीतिक लड़ाई में केंद्र सरकार को 3.53 करोड़ रुपये का नुक़सान हो रहा है। आपको बता दें कि यह पैसा देश की टैक्सपेयर जनता का है। दोनों दल जनता के पैसे से अपना सियासी हित साध रहे हैं। 

आपको बता दें कि 2017 में डाक विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ एक पोस्टकार्ड पर सरकार की लागत 12.15 रुपये आती है लेकिन सरकार जनता के हित के लिए इसे सिर्फ़ 50 पैसे में भेजती है। यानी हर पोस्टकार्ड पर सरकार को 11.75 पैसे का घाटा उठाना पड़ता है। यह घाटा सरकार जनता को सुविधा देने के लिए उठाती है। अब अगर दोनों दल अपनी राजनीतिक लड़ाई पोस्टकार्ड के ज़रिये लड़ेंगे तो इससे केंद्र सरकार को 3.53 करोड़ रुपये का घाटा होगा। 

ग़ौरतलब है कि इसी साल अप्रैल महीने में ख़बर आई थी कि डाक विभाग भारी घाटे में है। बताया गया था कि सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों में भारतीय डाक का घाटा सबसे अधिक हो गया है। फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ 1854 से चल रहे भारतीय डाक में घाटे के कारणों में से एक पोस्टकार्ड, पार्सल, बुक पोस्ट, स्पीड पोस्ट और दूसरी सेवाओं में दी जानी वाली सब्सिडी भी है।

क्या है लड़ाई?

बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा जय श्रीराम के नारे लगाए जाने पर ममता बनर्जी कई बार नाराज़ होकर उन्हें फटकार लगा चुकी हैं। इसीलिए बीजेपी कार्यकर्ता इस नारे को लेकर ममता के ख़िलाफ़ माहौल बना रहे हैं। वे पोस्टकार्ड के ज़रिये जनसमर्थन हासिल करना चाह रहे हैं। दूसरी ओर तृणमल कांग्रेस ने बीजेपी की इस मुहिम के ख़िलाफ़ अभियान शुरू किया है। 

मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक़ बीजेपी ‘जय श्रीराम’ लिखे 10 लाख पोस्टकार्ड तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सुप्रीमो ममता बनर्जी को भेज रही है। वहीं, टीएमसी ‘जय बांग्ला-जय काली’ लिखे 20 लाख पोस्टकार्ड बीजेपी नेताओं को भेज रही है। इन नेताओं में नरेंद्र मोदी, अमित शाह, बाबुल सुप्रियो, मुकुल रॉय और दिलीप घोष शामिल हैं। 

कितना जायज़?

भारत में सब्सिडी को लेकर एक बड़ी बहस हो चुकी है। ऐसा देश जहाँ की बड़ी आबादी ग़रीबी रेखा के नीचे रहती है, वहाँ पर इसे देने को लेकर किसी को ऐतराज़ नहीं हो सकता है। मोटे तौर पर सरकार दैनिक इस्तेमाल की वस्तुओं पर सब्सिडी देकर ग़रीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों को बेहतर जीवन यापन करने का मौक़ा देती है। 

हालांकि अपने पिछले कार्यकाल में 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एलपीजी सब्सिडी को लेकर एक अभियान छेड़ा था। उनका कहना था कि जो लोग बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर ख़रीद सकते हैं उन्हें सब्सिडी छोड़ देनी चाहिए। इसके बाद से सत्ताधारी दल यानी बीजेपी और एक बड़े वर्ग ने सब्सिडी को लेकर अभियान छेड़ दिया है। 

इस अपील के बाद ऐसा संदेश देने की कोशिश की जाती है कि लोगों का सब्सिडी लेना ग़लत है जबकि सरकार का सब्सिडी देना उसकी उदारता है। बड़ी संख्या में लोगों को सब्सिडी को लेकर भावनात्मक रूप से उन्हें ब्लैकमेल किया गया। हालांकि, दूसरी ओर संसद भवन की कैंटीन में सस्ते दरों पर भोजन की व्यवस्था उपलब्ध रही। 

अब नैतिकता के लिहाज़ से तृणमूल और बीजेपी के इस अभियान पर चर्चा की जाए; क्या ग़रीबों के लिए दी जाने वाली सब्सिडी का इस्तेमाल दोनों दलों द्वारा सियासी हित के लिए जायज़ है? आपका जवाब निसंदेह ना होगा, भले ही यह राशि बहुत छोटी ही क्यों नहीं है।
 

West Bengal
mamata banerjee
Jai Shri Ram
postcards
BJP
TMC
BJP-TMC Clashes

Related Stories

राज्यपाल की जगह ममता होंगी राज्य संचालित विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति, पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने पारित किया प्रस्ताव

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • राज वाल्मीकि
    कैसे ख़त्म हो दलित-आदिवासी छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षण संस्थानों में होने वाला भेदभाव
    25 Mar 2022
    दलित-आदिवासी छात्र-छात्राओं के साथ होने वाले भेदभाव को ख़त्म करने के विषय पर नई दिल्ली में एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन  किया गया।
  • इरिका शेल्बी
    पुतिन को ‘दुष्ट' ठहराने के पश्चिमी दुराग्रह से किसी का भला नहीं होगा
    25 Mar 2022
    रूस की ओर उंगलियों उठाने से कुछ नहीं बदलेगा–दुनिया में स्थायी शांति के लिए यह रवैया बदलने की ज़रूरत है। 
  • ज़ो एलेक्जेंड्रा
    गिउलिअनो ब्रुनेटी: “नाटो के ख़िलाफ़ हमारा संघर्ष साम्राज्यवादी ताकतों के ख़िलाफ़ संघर्ष है”
    25 Mar 2022
    आक्रामक सैन्य गठबंधन हमेशा से ही यूक्रेन में चल रहे संघर्ष का केंद्र रहा है, जिसके चलते कई लोगों ने गठबंधन पर सवालिया निशान लगाकर पूछना शुरू कर दिया है कि इसका हिस्सा बने रहने का क्या मतलब है। पोटेरे…
  • भाषा
    दिल्ली के तीन नगर निगमों का एकीकरण संबंधी विधेयक लोकसभा में पेश
    25 Mar 2022
    सरकार ने दिल्ली के तीन नगर निगमों का एकीकरण करने संबंधी दिल्ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2022 को शुक्रवार को विपक्षी दलों के सदस्यों के विरोध के बीच लोकसभा में पेश किया। विपक्षी दलों ने इसका विरोध…
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    गणेश शंकर विद्यार्थी : वह क़लम अब खो गया है… छिन गया, गिरवी पड़ा है
    25 Mar 2022
    गोदी मीडिया के दौर में गणेश शंकर विद्यार्थी को याद करना एक अलग अनुभव, एक अलग चुनौती और एक अलग दायित्व है। आज़ादी के मतवाले क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत के दो दिन बाद 25 मार्च,…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License