NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बीजेपी सरकार ने तेल कंपनियों को अनुबंधित क्षेत्र के बाहर काम करने की इजाज़त दी
पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल एवं गैस कंपनियों को दिए गए ब्लॉक के अलावा निकटवर्ती क्षेत्रों में भंडार की खोज की अनुमति दी है। वेदांता और रिलायंस इसके प्रमुख लाभार्थी हो सकते हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
29 Jun 2018
oli exploration

बीजेपी की अगवायी वाली एनडीए सरकार तेल की खोज और उत्पादन (ई एंड पी) में लगी कंपनियों को बोनान्ज़ा ऑफर दे रही है, जो उन्हें मूल रूप से ठेके पर दिए गए तेल तथा गैस ब्लॉक के अलावा निकटवर्ती जलाशय क्षेत्रों तक गतिविधि बढ़ाने की इजाज़त दे रही है।

बिजनेस स्टैंडर्ड (बीएस) की रिपोर्ट के मुताबिक़ पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) ने 25 जून को इस निर्णय के बारे में सूचित करते हुए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हाइड्रोकार्बन (डीजीएच) को एक अधिसूचना भेजी है।

'ब्लॉक' (तेल एवं गैस अन्वेषण ब्लॉक) भौगोलिक दृष्टि से सीमांकित क्षेत्र हैं जिसे ई एंड पी कंपनियों को तेल तथा गैस की खोज करने के लिए दिया जाता है। 'रिजर्वोइयर' का अर्थ भूमिगत छेददार, भेदी जा सकने वाली या खंडित चट्टानों की संरचनाओं से होता है जिसमें तेल तथा गैस मौजूद होते है।

खोज का चरण पूरा होने के बाद तेल तथा गैस के वास्तविक निष्कर्षण के विकास करने का चरण आता है। खोज के चरण में संभावित क्षेत्रों की पहचान के लिए भूकंपीय सर्वेक्षण शामिल हैं जहाँ हाइड्रोकार्बन जैसे तेल और गैस हो सकते हैं और यहाँ जाँच के लिए कूँए  खोदे जाते हैं जो हाइड्रोकार्बन की क्षमता की जाँच करते हैं। ब्लॉक में तेल तथा गैस होने की जाँच पूरी होने के बाद अगले चरण में तेल उत्पादन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

खोज के लिए लाइसेंस के मौजूदा नियमों और शर्तों के तहत ये अनुबंधित कंपनी केवल अपने ब्लॉक की सीमाओं के अंदर स्थित कूँए ही खोद सकती है या इस ब्लॉक की सीमा के भीतर के ही अन्य खोजी गतिविधियाँ कर सकती हैI भले ही उस ब्लॉक के नीचे का खनिज भंडार उसकी सीमा से बाहर क्यों न हो। 'ब्लॉक' (भूमि या समुद्र के नीचे निर्दिष्ट क्षेत्र) के आधार पर सरकार द्वारा तेल तथा गैस कंपनियों को ठेके दिए जाते हैं न कि भंडार (रिजर्वायर) के आधार पर। वास्तव में भंडार की अवधारणा अपने आप में ठेके का हिस्सा नहीं है। इस तरह किसी कंपनी को केवल ब्लॉक के भीतर खोज करने या तेल कुओं को विकसित करने का अधिकार है।

 

25 जून की अधिसूचना ने भंडार की अवधारणा को बदलकर ई एंड पी अनुबंध को बदल दिया है। ज़ाहिर है किसी भंडार की सीमा किसी ब्लॉक के साथ सह-सीमवर्ती नहीं है। खोज के बाद ही हम किसी ब्लॉक के भीतर भंडार के अस्तित्व के बारे में जानते हैं।

इस अधिसूचना में कहा गया है "अब यह तय किया गया है कि ठेकेदार को पुनर्विलोकन गतिविधियों को करने की अनुमति दी गई है और वाणिज्यिक खोज और उसके क्षेत्र की सीमा के विस्तार का पता लगाने के लिए अनुबंध क्षेत्र (...) के बाहर के आस-पास के क्षेत्र में पेट्रोलियम एक्सप्लोरेशन लाइसेंस (पीईएल) के लिए मंज़ूरी दी गई है।" इसके लिए एकमात्र शर्त यह है कि भंडार क्षेत्र को किसी अन्य कंपनी को नहीं दिया जाना चाहिए या सरकार द्वारा ऑफर नहीं किया जाना चाहिए और" रणनीतिक महत्व" नहीं होना चाहिए।

इससे सवाल पैदा होता है कि सरकार उन कंपनियों को दिए गए क्षेत्रों को बढ़ाने के लिए ई एंड पी अनुबंध को संशोधित कर सकती है जो मूल अनुबंध का हिस्सा नहीं था? लोगों के संरक्षक के रूप में क्या सरकार अतिरिक्त क्षेत्रों को सौंपने के लिए मूल अनुबंध को पूर्वव्यापी रूप से संशोधित करती है? और क्या यह केवल अधिसूचना जारी करके किया जा सकता है?

जैसा कि बीएस की रिपोर्ट का उल्लेख है कि इस परिवर्तन के निकटतम और प्रमुख लाभार्थी वेदांत केयर्न ऑयल एंड गैस होगा क्योंकि राजस्थान के बाड़मेर ज़िले के ब्लॉक में अनुबंध क्षेत्र के अलावा महत्वपूर्ण हाइड्रोकार्बन क्षमता के साथ निकटवर्ती भंडार हैं। इस कदम से रिलायंस और सार्वजनिक क्षेत्र की ओएनजीसी तथा ऑयल इंडिया तेल तथा गैस के प्रमुख उत्पादकों को भी फायदा हो सकता है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) और ओएनजीसी के बीच अपने-अपने ब्लॉक में भंडार को ओवरलैप करने के कारण कृष्णा गोदावरी बेसिन में विवाद चल रहा है। हालांकि बीएस रिपोर्ट में कहा गया है कि विस्तारित अन्वेषण के मानदंडों को आसान बनाना इस नीति को प्रभावित नहीं करेगा क्योंकि नई नीति के अन्य दस्तावेज हैं।"

नियम में छूट देने के उद्देश्य से इस अधिसूचना में अन्य निर्णय भी हैं और जो लगता है कि निजी कंपनियों की मदद करने के लिए तैयार किए गए हैं। ऐसा ही एक निर्णय उन शर्तों में छूट देना है जिन पर कंपनी तेल एवं गैस अन्वेषण के अगले चरण में प्रवेश कर सकती है, भले ही कंपनी ने उस कार्य की राशि पूरी जमा नहीं की हो जो वह निश्चित समय सीमा में करने के लिए सहमत थी।

न्यूज़क्लिक द्वारा विशेषज्ञों से बात करने पर उन्होंने बताया कि अनुबंध के नियमों और शर्तों को ढीला करने का मतलब है निजी कंपनियों के मौजूदा भंडार में अतिरिक्त तेल भंडार जोड़ा जा सकता है। इसलिए यह उन कंपनियों के लिए एक बोनान्ज़ा ऑफर है। पूर्व पेट्रोलियम सचिव टीएनआर राव ने बताया कि ये उपाय कागजी कामों में तेजी लाने और कार्यों को आसान बनाने के उद्देश्य से है।

 

Oil Exploration
ONGC
BJP
Narendra modi
Anil Ambani

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • Victims of Tripura
    मसीहुज़्ज़मा अंसारी
    त्रिपुरा हिंसा के पीड़ितों ने आगज़नी में हुए नुकसान के लिए मिले मुआवज़े को बताया अपर्याप्त
    25 Jan 2022
    प्रशासन ने पहले तो किसी भी हिंसा से इंकार कर दिया था, लेकिन ग्राउंड से ख़बरें आने के बाद त्रिपुरा सरकार ने पीड़ितों को मुआवज़ा देने की घोषणा की थी। हालांकि, घटना के तीन महीने से अधिक का समय बीत जाने के…
  • genocide
    अजय सिंह
    मुसलमानों के जनसंहार का ख़तरा और भारत गणराज्य
    25 Jan 2022
    देश में मुसलमानों के जनसंहार या क़त्ल-ए-आम का ख़तरा वाक़ई गंभीर है, और इसे लेकर देश-विदेश में चेतावनियां दी जाने लगी हैं। इन चेतावनियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
  • Custodial Deaths
    सत्यम् तिवारी
    यूपी: पुलिस हिरासत में कथित पिटाई से एक आदिवासी की मौत, सरकारी अपराध पर लगाम कब?
    25 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश की आदित्यनाथ सरकार दावा करती है कि उसने गुंडाराज ख़त्म कर दिया है, मगर पुलिसिया दमन को देख कर लगता है कि अब गुंडाराज 'सरकारी' हो गया है।
  • nurse
    भाषा
    दिल्ली में अनुग्रह राशि नहीं मिलने पर सरकारी अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ ने विरोध जताया
    25 Jan 2022
    दिल्ली नर्स संघ के महासचिव लालाधर रामचंदानी ने कहा, ‘‘लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल, जीटीबी हस्पताल और डीडीयू समेत दिल्ली सरकार के अन्य अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ ने इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग…
  • student
    भाषा
    विश्वविद्यालयों का भविष्य खतरे में, नयी हकीकत को स्वीकार करना होगा: रिपोर्ट
    25 Jan 2022
    रिपोर्ट के अनुसार महामारी के कारण उन्नत अर्थव्यवस्था वाले देशों में विश्वविद्यालयों के सामने अनेक विषय आ रहे हैं और ऐसे में विश्वविद्यालयों का भविष्य खतरे में है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License