NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बीपीएल को घर उपलब्ध कराने में अपने ही लक्ष्य से पिछड़ गई मोदी सरकार
2019-2020 का लक्ष्य पहले चरण के लक्ष्य को जोड़कर 1.5 करोड़ किया गया है, लेकिन सवाल यही है कि जो सरकार तीन साल में एक करोड़ घर नहीं बना पाई वह महज़ एक साल में 1.5 करोड़ घर का लक्ष्य कैसे प्राप्त करेगी?
पुलकित कुमार शर्मा
19 Jul 2019
बीपीएल
Image Courtesy: The Hindu

ग्रामीण विकास मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार मोदी सरकार बीपीएल यानी ग़रीबी रेखा से नीचे रहने वाली जनसंख्या के बड़े हिस्से को घर उपलब्ध कराने में अपने लक्ष्य से कहीं पीछे नज़र आ रही है। 2016 -17  से 2018 -19 तक का लक्ष्य 1करोड़ घर बनाने का था जिसका 82% ही प्राप्त किया जा सका है और अब 2019 में दूसरा चरण भी शुरू कर दिया गया है। 2019-2020 का लक्ष्य पहले चरण के लक्ष्य को जोड़कर 1.5 करोड़ किया गया है, लेकिन सवाल यही है कि जो सरकार तीन साल में एक करोड़ घर नहीं बना पाई वह महज़ एक साल में 1.5 करोड़ घर का लक्ष्य कैसे प्राप्त करेगी? इसी के साथ दूसरा अहम सवाल यह है कि सरकार ने जो 2.9 करोड़ घर देने का लक्ष्य रखा है वो ‘सबको घर’ की वास्तविकता के कितना करीब है।

नवीनतम आंकड़ों के अनुसार सरकार 2019-20 के निर्धारित लक्ष्य के करीब 55% घर ही उपलब्ध करा पाई है।
बीजेपी सरकार ने 2016 में प्रधानमंत्री आवास योजना लागू करते समय कहा था कि 2022 तक सभी परिवारों को घर उपलब्ध कराए जायेंगे जिसके पहले चरण में यानी अगले तीन वर्षों में 2016-17 से 2018-19 तक 1 करोड़ तथा द्वितीय चरण2019-20 से 2022 तक 1.9 करोड़ परिवारों को घर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसका मतलब है कि 2022 तक दोनों चरणों को मिला कर 2.9 करोड़ परिवारों को घर उपलब्ध करने का लक्ष्य रखा गया है।

सभी के लिए घर के वादे केंद्र सरकार हर स्तर पर करती रही है परन्तु आंकड़े स्थिति साफ़ बयां करते हुए नज़र आते हैं कि बीजेपी सरकार तीन साल में एक करोड़ घर मुहैया कराने में असमर्थ रही है। पहले चरण का 82% लक्ष्य ही प्राप्त किया जा सका है तथा 2019 में दूसरा चरण भी शुरू कर दिया गया है।

2019-2020 का लक्ष्य पहले चरण के लक्ष्य को जोड़कर 1.5 करोड़ किया गया है लेकिन जो लाभार्थी पंजीकृत किये गए हैं वह 1.3 करोड़ ही हैं जोकि कुल लक्ष्य के 86% हैं तथा जिन परिवारों को घर की स्वीकृति मिली है वह 1.1 करोड़ हैं जोकि कुल लक्ष्य का 70% हैं और जिन परिवारों को घर मिले हैं, वह केवल 82 लाख हैं जोकि कुल लक्ष्य का 54.67% हैं।

pulkit 1.JPG

स्रोत: http://ruraldiksha.nic.in/RuralDashboard/PMAYG_New.aspx

प्रधानमंत्री आवास योजना 

देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने 1985 में देश की ग़रीब जनता को घर उपलब्ध कराने के लिए इंदिरा आवास योजना को लागू किया था जिसको 2016 में मोदी पार्ट वन की सरकार ने बदल कर प्रधानमंत्री आवास योजना कर दिया तथा योजना के अंतर्गत देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे, टूटे-फूटे व बिना घर के रहने वाले लोगों को न्यूनतम सुविधाओं के साथ घर उपलब्ध कराने का उद्देश्य रखा।

प्रधानमंत्री आवास योजना केन्द्रीय प्रायोजित योजना है। (केन्द्रीय प्रायोजित योजना वह योजनाएँ होती हैं जिनके  कार्यान्वयन में आने वाली लागत में केंद्र के साथ राज्य सरकार का भी योगदान होता है) इस योजना में केंद्र और राज्य सरकार की लागत, मैदानी राज्यों में 60:40 तथा पूर्वोत्तर व हिमालय राज्यों के लिए 90:10 के आधार पर तय की गयी है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 1,88,696 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गयी है, जिसमें से कुल 1,17,470करोड़ रुपये ही जारी की गयी है जोकि आवंटित धनराशि की 62% है तथा जो धनराशि उपयोग की गयी है वह केवल1,09,078 करोड़ है जोकि आवंटित धनराशि की 58% है। यानी 48 प्रतिशत लाभार्थियों की पहुँच से दूर है।

pulkit2.JPG
स्रोत: http://ruraldiksha.nic.in/RuralDashboard/PMAYG_New.aspx

प्रधानमंत्री आवास योजना में लक्ष्य प्राप्त करने वाले टॉप पाँच राज्य जिनमे पंजाब, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड तथा छत्तीसगढ़ शामिल हैं इन राज्यों में क्रमशः 95%, 87%, 79%, 77% तथा 74% तय लक्ष्य के आवास निर्मित हुए हैं।
pulkit3_0.JPG
स्रोत: http://ruraldiksha.nic.in/RuralDashboard/PMAYG_New.aspx

प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत अधिक जनसंख्या वाले राज्य जो लक्ष्य प्राप्त करने में निचले पायदान पर हैं वो क्रमश: तमि‍लनाडु, कर्नाटक, बिहार, आंध्र प्रदेश व जम्मू और कश्मीर हैं जिन्होंने क्रमश: 34%, 33%, 30%, 27% तथा 17 % लक्ष्य ही प्राप्त किया है। इसके साथ ही चार ऐसे राज्य भी आते हैं जहाँ एक भी घर नहीं बनाया गया है, वह क्रमश: अरुणाचल प्रदेश, अण्डमान और निकोबार, लक्षद्वीप और नागालैंड हैं।

pulkit4.JPG

स्रोत: http://ruraldiksha.nic.in/RuralDashboard/PMAYG_New.aspx

इन सब आकड़ों और परिस्थियों का अध्ययन करने पर कुछ बातें निकल कर सामने आती हैं-

       1.  जहाँ भारत दुनिया की टॉप 10 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है वहीं दूसरी ओर आज़ादी के 70 साल बाद भी देश की सरकारें ग़रीबी रेखा के नीचे की जनता को घर तक उपलब्ध करने में असमर्थ रही हैं और साथ ही जो क़दम उठाये गए हैं उन्हें भी गंभीरता से नहीं लिया गया है।
       
       2
. प्रधानमंत्री आवास योजना में सरकार द्वारा जो आंकड़े  इस्तेमाल किये गए वो 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना के हैं जो की 2019 की वास्तविकता को बयां नहीं करते क्योंकि ग्रामीण विकास मंत्रालय की मोबाइल एप्लीकेशन द्वारा 3.54 करोड़ लोगो ने घर की मांग के लिए आवेदन किये हैं जोकि सरकार के आंकड़ों से बहुत अधिक हैं जिससे पता चलता है कि जो आंकड़े सरकार इस्तेमाल कर रही है वह वर्तमान वास्तविकता बया नहीं करते हैं।
       
       3
. जनता को मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध करना सरकार का उत्तरदायित्व बनता है और राजनीतिक पार्टियाँ इन्हीं वादों के साथ सत्ता में आती हैं इसलिए मूलभूत सुविधाओं के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना लागू होनी चाहिए (केंद्रीय क्षेत्र योजना वे योजनाएँ होती हैं जिसमें 100 प्रतिशत शेयर केंद्र सरकार का होता है) क्योंकि केंद्र सरकार केंद्रीय प्रायोजित योजना लागू करती है जिसमें नाम केवल केंद्र सरकार का ही होता हैं जबकि शेयर राज्य सरकारें भी देती हैं इसलिए राज्य सरकारें अपना शेयर नहीं देना चाहती, जिसके कारण उस राज्य की बहुत सी जनता इन योजनाओं का लाभ नहीं ले पाती जैसा कि तेलंगाना में देखने को मिला है।

pradhanmantri awas yojna
Narendra modi
BPL households
BPL
indian givt
moid sarkar
rural areas

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

वृद्धावस्था पेंशन: राशि में ठहराव की स्थिति एवं लैंगिक आधार पर भेद

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़


बाकी खबरें

  • Ukraine
    स्टुअर्ट ब्राउन
    यूक्रेन: एक परमाणु संपन्न राज्य में युद्ध के खतरे
    03 Mar 2022
    यूक्रेन के ऊपर रूस के आक्रमण से परमाणु युद्ध का खतरा वास्तविक बन गया है। लेकिन क्या होगा यदि देश के 15 परमाणु उर्जा रिएक्टरों में से एक भी यदि गोलीबारी की चपेट में आ जाए?
  • banaras
    विजय विनीत
    यूपी का रणः मोदी के खिलाफ बगावत पर उतरे बनारस के अधिवक्ता, किसानों ने भी खोल दिया मोर्चा
    03 Mar 2022
    बनारस में ऐन चुनाव के वक्त पर मोदी के खिलाफ आंदोलन खड़ा होना भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं है। इसके तात्कालिक और दीर्घकालिक नतीजे देखने को मिल सकते हैं। तात्कालिक तो यह कि भाजपा के खिलाफ मतदान को बल…
  • Varanasi District
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव : बनारस की मशहूर और अनोखी पीतल पिचकारी का कारोबार पड़ रहा है फीका
    03 Mar 2022
    बढ़ती लागत और कारीगरों की घटती संख्या के कारण पिचकारी बनाने की पारंपरिक कला मर रही है, जिसके चलते यह छोटा उद्योग ज़िंदा रहने के लिए संघर्ष रहा है।
  • migrants
    एपी
    एक सप्ताह में 10 लाख लोगों ने किया यूक्रेन से पलायन: संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी
    03 Mar 2022
    संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (यूएनएचसीआर) के आंकड़ों के अनुसार, पलायन करने वाले लोगों की संख्या यूक्रेन की आबादी के दो प्रतिशत से अधिक है। विश्व बैंक के अनुसार 2020 के अंत में यूक्रेन की आबादी…
  • medical student
    एम.ओबैद
    सीटों की कमी और मोटी फीस के कारण मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं छात्र !
    03 Mar 2022
    विशेषज्ञों की मानें तो विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए जाने की दो मुख्य वजहें हैं। पहली वजह है यहां के सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में सीटों की संख्या में कमी और दूसरी वजह है प्राइवेट कॉलेजों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License